काम करने वाली लड़की को अपने ऑफिस में बजाया

Kaam karne wali ladki ko apne office me bajaya:

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मेरा नाम आदर्श है और मैं एक एनजीओ चलाता हूं, मेरी उम्र 40 वर्ष है और मुझे यह एनजीओ चलाते हुए काफी समय हो चुका है। जितने भी गरीब लोग हैं मैं उनकी बहुत मदद करता हूं और मैं उन्हें आर्थिक रूप से भी मदद करता हूं। जितना मुझसे हो सके उतनी मैं उनकी मदद करने की कोशिश करता हूं। मुझे बहुत ही अच्छा लगता है जब मैं किसी की भी मदद करता हूं। यह भावना मेरे अंदर पहले से ही थी इसीलिए मैंने एनजीओ खोलने का फैसला किया और जब मैंने एनजीओ खोला तो उसके बाद मुझे बहुत सारे लोगों ने सपोर्ट किया। मेरे दोस्तों ने भी मुझे बहुत सपोर्ट किया, उन्होंने मुझे शुरुआत में कुछ पैसे भी दिए थे जिससे कि मैंने अपना ऑफिस खोल लिया और उसके बाद मैं पूरी तरीके से यही काम करता हूं क्योंकि मैं घर से बहुत संपन्न हूं इसलिए मैं यही काम करता हूं और मेरी पत्नी भी मेरे साथ मेरे एनजीओ में काम करती है।

वह भी बहुत खुश होती है और कहती है कि तुम बहुत ही अच्छा काम करते हो। अब मुझसे कई लोग जुड़ चुके हैं और मैंने कई लोगों की बहुत मदद की है। जितने भी गरीब लोग होते हैं मैं उन्हें अपनी तरफ से खाना खिलाता हूं और जहां तक हो सकता है मैं वहां जाता हूं। मेरी पत्नी का नाम रेखा है वह भी एक बहुत अच्छे परिवार से है। मेरी और उसकी मुलाकात भी कॉलेज के दौरान ही हुई थी, जब हम दोनों कॉलेज में मिले तो मुझे रेखा बहुत ही पसंद आई और उसके बाद मैंने जब अपने घर में रेखा के बारे में बताया तो वह कहने लगे कि यदि तुमने लड़की पसंद कर ही ली है तो तुम हमें उस लड़की से भी मिलवा दो। जब मैंने रेखा को अपने घर पर अपने माता पिता से मिलवाया तो वह बहुत खुश हुए और उसके कुछ समय बाद ही उन्होंने मेरी शादी रेखा से करवादी। हमारा एक लड़का भी है, जिसकी उम्र 12 वर्ष है। हम दोनों अपने लड़के को बहुत प्यार करते हैं और हमारे पास जितना समय हो सकता है हम दोनों उसे ही देते हैं। मैंने कई लोगों की नौकरी भी लगवाई है क्योंकि मेरे जितने भी दोस्त हैं वह सब बहुत संपन्न है और बहुत ही अच्छे परिवार से है इसलिए उनके बहुत बड़े कारोबार हैं।

एक बार मुझे एक लड़की भीख मांगती हुई दिखाई दी,  मैंने उससे उसका नाम पूछा तो वह पहले मुझे अपना नाम नहीं बता रही थी परंतु उसने जब अपना नाम बताया तो मैंने उससे पूछा कि तुम भीक क्यों मांग रही हो, तो वह कहने लगी कि हमारे घर की स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं है, मैं जब उसके साथ उसके घर पर गया तो उसकी स्थिति वाकई में ठीक नहीं थी इसलिए वह भीख मांग रही थी। उसकी उम्र बहुत ही कम थी। उसकी उम्र 20 वर्ष रही होगी। उसका नाम मीना है। मैंने उसे कहा कि तुम मेरे घर पर काम कर लो मैं तुम्हें उसके बदले कुछ पैसे दे दिया करूंगा और तुम्हारे घर का खर्चा भी मैं उठा लिया करूंगा। वह कहने लगी ठीक है यदि मैं आपके घर पर काम करती हूं तो मुझे बहुत ही अच्छा लगेगा। अब वह हमारे घर पर काम करने लगी और वह मेरे साथ मेरे एनजीओ में भी काम करती थी। वह सुबह मेरा ऑफिस भी साफ कर दिया करती थी और हमारे घर पर भी वह काम करती थी। मैंने मीना से पूछा कि तुमने कितनी पढ़ाई की है तो वो कहने लगी कि मैंने तो सिर्फ आठवीं तक पढ़ाई की है। मैंने उससे कहा कि तुमने कभी पढ़ने के बारे में नहीं सोचा,  वह कहने लगी कि हमारे घर की स्थिति बिल्कुल बदतर हो चुकी थी इसलिए मैंने कभी भी पढ़ने के बारे में नहीं सोचा। मैंने उससे कहा कि जब तुम्हारे पास समय हो तो तुम उस समय पढ़ लिया करो। मैं उसे खाली समय में पढ़ा दिया करता था और वह बहुत ही अच्छे से ध्यान देती थी। अब वह अच्छे से पढ़ती थी और वह पढ़ने में भी अच्छी हो गई। धीरे-धीरे वह बहुत ज्यादा पढ़ाई में ध्यान देने लगी और अब वह मेरे ऑफिस का भी काम संभालने लगी। मेरे एनजीओ के जितने भी काम थे वह उन्हें संभाल लेती थी। वह हमारे घर के सदस्य की तरह बन चुकी थी इसलिए वह हमारे घर पर ही रहती थी और मैं उसे समय पर पैसे दे दिया करता था।

वह मेरे घर की साफ सफाई का काम भी देखती थी। मैंने उसे कई बार मना किया लेकिन वह मुझे कहने लगी कि अब मैं आपके घर को अपना ही घर मानती हूं इसीलिए मुझे यह काम बिल्कुल भी बुरा नहीं लगता। मेरी पत्नी ने उसे कई बार मना करती लेकिन वह बिल्कुल भी नहीं मानी और मेरे घर का सफाई का काम भी कर दिया करती थी और मेरे साथ ऑफिस में भी वह काम करती थी। मैंने अपने ऑफिस में और भी लोग रखे थे लेकिन जिस ईमानदारी और जुझारू रूप से मीना काम कर रही थी उस तरीके से कोई भी काम नहीं करता था और सब लोग किसी ना किसी प्रकार से ऑफिस में ताल बराई करते थे लेकिन वह पूरे दिल से काम कर रही थी इसलिए मुझे उसके काम करने का तरीका बहुत ही अच्छा लगता था। मैं चाहता था कि वह अच्छे से काम करते रहे क्योंकि उसने भी गरीबी देखी थी इसलिए वह पूरे दिल से काम करती थी। मीना मेरी गरीबो की मदत में मेरा साथ देती थी। मैंने उसे अपने घर के गेस्ट रूम में ही रहने के लिए रूम दिया हुआ था क्योंकि वह सुबह घर की सफाई करती थी और उसके बाद मेरे साथ ऑफिस आती थी इसीलिए मैंने उसे अपने साथ ही रख लिया था। मेरी पत्नी भी मीना से बहुत खुश थी और वह उसके लिए नये कपड़े लाती रहती थी। उसे मीना के लिए शॉपिंग करना बहुत ही अच्छा लगता था और वह हमेशा ही उसके लिए कुछ ना कुछ नया लेकर आती थी और उसे वह कपड़े देती थी।एक दिन मीना मेरे साथ ऑफिस में आ रही थी वह मेरे साथ कार में ही आती थी हम दोनो जब ऑफिस पहुंचे तो वह साफ सफाई करने लगी।

वह टेबल को साफ कर रही थी तो वह झुकी हुई थी उसके स्तन उसके सूट से बाहर की तरफ झाक रहे थे मैं काफी देर से देखे जा रहा था। मैंने जब उसके  स्तनों पर हाथ लगाया तो वह मचल उठी और मुझे भी बहुत अच्छा महसूस हुआ। मीना को मैंने अपनी गोद में बैठा लिया और मेरा लंड पूरी तरीके से खड़ा हो चुका था। उसने मेरे लंड को मेरी पेंट से बाहर निकालते हुए अपने मुंह में समा लिया और बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को चूसने लगी। वह मेरे लंड को अपने मुंह के पूरे अंदर तक समा रही थी और उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मुझे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब वह मेरे लंड को अपने मुंह में ले रही थी काफी देर ऐसा करने के बाद मैंने उसके कपड़ों को खोल दिया। जब उसका नंगा बदन मेरे सामने था तो मुझसे बिल्कुल भी नहीं रहा गया और मैंने उसको घोड़ी बना दिया। जब मैंने उसे घोडी बनाया तो मैंने उसकी योनि को काफी देर तक चाटा उसकी चूत गीली हो चुकी थी और वह भी पूरे मूड में थी। मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाला तो वह उछल पडी लेकिन उसे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैंने उसे बड़ी तेज गति से झटके देने शुरू कर दिया वह भी अपनी चूतडे मुझसे मिलाए जा रही थी। जब मैंने उसकी योनि पर देखा तो उससे खून बाहर की तरफ निकल रहा था और मैंने उसे बड़ी तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिया। वह भी अपनी चूतडो को मुझसे मिलाया जा रही थी और मैं भी उसे बड़ी तेज गति से धक्के मारता जाता। मैंने उसे इतनी देर तक झटके मारे मुझे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा। वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाए जा रही थी जब उसकी चूतडे मुझसे मिलती तो बहुत तेज आवाज आती। मैंने उसे इतनी तेज तेज चोदना शुरू कर दिया कि उसका पूरा शरीर गर्म होने लगा था और मेरा शरीर भी पूरा पसीना पसीना हो गया। उसके शरीर से इतनी ज्यादा गर्मी बाहर आने लगी तो मैं उसको झेल नहीं पाया मेरा माल उन्ही झटको के बीच गिर गया। मैंने अपने रुमाल से मीना की योनि को साफ किया और अपने लंड को साफ करते हुए आराम से अपनी कुर्सी पर बैठ गया। उसके बाद मीना मेरी इच्छा पूरी करती रहती है और मै भी उसे खुश कर देता हू वह मरे साथ बहुत खुश है।


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