जुगाड़ मिल गई और मेरी हो गई

Antarvasna, kamukta:

Jugaad mil gayi aur meri ho gayi मां ने मुझे कहा कि आकाश बेटा तुम अपने मामा के घर चले जाओ मैंने मां से कहा मां लेकिन क्या कोई जरूरी काम था। मां ने मुझे कहा आकाश बेटा तुम्हारे मामा जी कि तबीयत आज कुछ ठीक नहीं है इसलिए तुम उनके घर पर चले जाओ और तुम्हारी मामी भी अपने मायके गई हुई हैं उनके घर पर कोई भी नहीं है, मां ने मुझे कहा कि तुम अपने मामा के लिए खाना लेकर जाना। मां ने मामा जी के लिए टिफिन पैक किया और मैं टिफिन लेकर मामा जी के घर पर चला गया। मैं मामाजी के घर पर पहुंचा जब उन्होंने दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि उनका चेहरा उतरा हुआ था क्योंकि उनकी तबीयत खराब थी। मैंने मामा जी से पूछा कि आपकी तबीयत ठीक नहीं है तो वह मुझे कहने लगे कि नहीं आकाश बेटा मेरी तबीयत ठीक नहीं है मुझे आज काफी ज्यादा कमजोरी सी महसूस हो रही है और मुझे बुखार भी आ रहा था। मैंने मामा जी से कहा कि आप फिर घर पर क्यों नहीं आ गए तो वह मुझे कहने लगे कि मैं शाम के वक्त घर पर आ जाऊंगा। मैंने मामा जी से कहा की ठीक है अब मैं चलता हूं तो उन्होंने मुझे कहा कि आकाश बेटा थोड़ी देर बैठ जाओ फिर चले जाना। मैं थोड़ी देर मामा के साथ बैठा और फिर मैं घर चला आया वह भी आराम कर रहे थे और मैं घर लौट आया था।

जब मैं घर लौटा तो मां ने मुझसे कहा कि क्या तुम्हारे मामा ने खाना खा लिया था मैंने मां से कहा हां मां मामा जी ने खाना खा लिया था। मामा जी हमारी ही कॉलनी में रहते हैं इसलिए हम लोग मामा जी के घर पर चले जाया करते हैं। मेरा भी यह कॉलेज का आखिरी वर्ष है मैं अपने करियर को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित रहता हूं। शाम को जब मामा जी घर पर आए तो मामा जी की तबीयत अब ठीक थी वह कहने लगे कि अब मेरी तबीयत पहले से बेहतर है मामा जी ने हमारे घर पर डिनर किया और फिर वह चले गए। मामी अगले दिन घर आ गई थी अगले दिन मैं भी अपने कॉलेज से लौटते वक्त मामा जी के घर पर गया था और जब मैं उनके घर पर गया तो मामा जी घर पर नहीं थे मामी ही घर पर थी। मैंने मामी से कहा कि मामा जी क्या अपने ऑफिस गए हुए हैं तो मामी ने मुझे कहा कि हां तुम्हारे मामा जी ऑफिस गए हुए हैं उसके बाद मैं भी अपने घर लौट आया था मामा जी की तबीयत अब ठीक थी। मेरे कॉलेज के एग्जाम भी अब नजदीक आने वाले थे जब मेरे कॉलेज के एग्जाम खत्म हो गए तो उसके बाद मैं अपने करियर को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित रहने लगा मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था और अभी तक हम लोगों का रिजल्ट भी नहीं आया था।

जिस दिन हमारा रिजल्ट आया उस दिन मैं अपने नंबरों से संतुष्ट नहीं था क्योंकि मुझे लगा था कि मेरे अच्छे नंबर आएंगे परंतु मेरे अच्छे नंबर नहीं आ पाए थे। जल्द ही हमारे कॉलेज में कैंपस प्लेसमेंट आने वाला था जब मुझे इसकी जानकारी मिली तो मैं इस बात से काफी खुश था और मैं सोच रहा था कि अगर मेरा कैंपस प्लेसमेंट में सिलेक्शन हो जाएगा तो मेरी चिंता दूर हो जाएगी और ऐसा ही हुआ। मेरा कैंपस प्लेसमेंट में सिलेक्शन हो गया और मेरी नौकरी मुंबई की एक मल्टीनेशनल कंपनी में लग गई। हालांकि पापा और मम्मी इस बात से खुश नहीं थे क्योंकि वह लोग चाहते थे कि मैं उन लोगों के साथ ही जयपुर में रहूं लेकिन मेरा सिलेक्शन मुंबई की एक कंपनी में हो चुका था और मुझे मुंबई जाना था। पापा के ही एक परिचित मुंबई में रहते हैं पापा ने जब उनसे मेरे लिए घर देखने की बात कही तो उन्होंने मेरे लिए एक फ्लैट देख लिया था। हालांकि वह फ्लैट काफी ज्यादा छोटा था लेकिन फिर भी मैं वहां पर एडजेस्ट कर रहा था। मुझे मुंबई में जॉब करते हुए एक महीना हो चुका था और जब मुझे महीने की पहली तनख्वाह मिली तो मैं काफी ज्यादा खुश हुआ। मैंने पापा और मम्मी को फोन करके बताया कि आज मुझे सैलरी मिली है वह लोग भी मेरी पहली सैलरी से काफी खुश थे। समय बीता जा रहा था और मुझे मुंबई में एक साल हो चुका था इस एक साल में मेरी मुंबई में काफी अच्छी दोस्ती भी हो चुकी थी।

मेरे ऑफिस में काम करने वाले रोहन के साथ मेरी सबसे ज्यादा गहरी दोस्ती हो गई थी इसलिए रोहन मुझसे मिलने के लिए अक्सर आया करता था और हम लोग घूमने का प्लान बना लिया करते थे। जब भी हम लोगों की छुट्टी होती तो हम लोग कहीं ना कहीं घूमने के लिए चले जाया करते थे मुझे बहुत ही ज्यादा खुशी होती थी जब मैं और रोहन साथ में घूमने के लिए जाते। मुंबई में एक साल होने के दौरान मैं अपने घर सिर्फ एक बार ही आ पाया था लेकिन मैं सोच रहा था कि मैं कुछ दिनों के लिए घर चला जाऊं। मैंने अपने ऑफिस में छुट्टी के लिए अप्लाई कर दिया और जब मुझे छुट्टी मिली तो मैं अपने घर चला आया जब मैं अपने घर पर पहुंचा तो पापा और मम्मी बहुत ही ज्यादा खुश थे वह लोग मुझे कहने लगे कि बेटा तुमने बहुत ही अच्छा किया जो घर आ गए। मैं भी इस बात से काफी खुश था कि कुछ दिनों के लिए ही सही लेकिन मैं घर तो चला आया और थोड़े दिन तक घर पर रहने के दौरान मुझे काफी ज्यादा अच्छा लगा और मैं काफी खुश भी था। मुझे मालूम ही नहीं पड़ा कि कब मेरी छुट्टी खत्म हो गई और मुझे अब वापस मुंबई लौटना था मैंने अपनी ट्रेन की रिजर्वेशन करवा ली थी और मैं ट्रेन से ही मुंबई जाने वाला था। मैं जब रेलवे स्टेशन पर पहुंचा तो वहां पर ट्रेन आ चुकी थी और मैं ट्रेन में बैठ गया, पापा मुझे छोड़ने के लिए आए हुए थे और फिर थोड़ी देर बाद पापा भी चले गए। पापा के चले जाने के बाद मैं पापा और मम्मी दोनों को ही मिस कर रहा था। मेरे सामने वाली सीट मे एक लड़की बैठी हुई थी। मैंने उसे देख रहा था मुझे उसका चरित्र कुछ ठीक नहीं लग रहा था। वह बार-बार मेरी तरफ ही देखे जा रही थी मैं भी उसे देख रहा था। मैंने उसे आंखों ही आंखों में इशारा किया तो वह भी मेरे पीछे बाथरूम की तरफ चली आई। हम लोग बाथरूम के पास ही खड़े होकर एक दूसरे से बातें करने लगे। जब हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो मैंने उस लड़की का नाम पूछा उसने मुझे बताया उसका नाम मनीषा है। मैंने मनीषा से कहा तुम कहां रहती हो? उसने मुझे बताया मैं मुंबई में ही रहती हूं। मैंने भी मनीषा को कहा मैं भी मुंबई में रहता हूं। मैंने मनीषा के हाथ को पकड़ा तो उसे कोई आपत्ति नहीं थी।

मैंने मनीषा को अपने साथ बाथरूम में चलने के लिए कहा वह मेरे साथ बाथरूम में चलने के लिए तैयार हो गई। जब वह मेरे साथ बाथरूम मे आई तो मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया। मैं उसके होंठों को चूमकर उसे पूरी तरीके से गर्म कर रहा था और वह बहुत ज्यादा मजे में आने लगी थी। मेरे अंदर की गर्मी बढ़ने लगी थी मैं बिल्कुल भी रह नही पा रहा था। मैंने उसे कहा मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी है तुम्हे मेरे लंड को मुंह में लेना होगा। मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो और उसने मेरी पैंट की चैन को खोलते हुए जब मेरे लंड को बाहर निकाला तो वह उसे अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। उसने मेरे लंड को तब तक चूसा जब तक उसने मेरे माल को बाहर नहीं निकाल दिया। उसने मुझे कहा मुझे तुम्हारे लंड को अपनी चूत में लेना है। मैंने उसकी टाइट जींस को नीचे किया और उसकी चूत को कुछ देर तक चाटा, उसकी चूत पर हल्के भूरे रंग के बाल थे। वह मुझे अपनी और खींच रही थी मैंने धीरे से उसकी चूत के अंदर उंगली डाली तो वह उछल पडी। वह मुझे कहने लगी अब तुम मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दो मुझे इतना ना तड़पाओ। मैंने उसे कहा बस अभी तुम्हारी चूत में अपने लंड को घुसा देता हूं। मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाते हुए धीरे-धीरे अपने लंड को मनीषा की चूत के अंदर प्रवेश करवाना शुरू किया। मनीषा की चूतडे मेरी तरफ थी मेरा आधा लंड मनीषा की चूत में जा चुका था। मैंने एक जोरदार झटका मारा जिससे कि मेरा लंड मनीषा की चूत की गहराइयों में उतर चुका था मेरा लंड उसकी चूत की गहराई में कहीं खो गया था। मैंने मनीषा की कमर को कसकर पकड़ा हुआ था और बड़ी तेज गति से मै उसे धक्के देना शुरु कर चुका था। मैं उसे चोद रहा था तो उसे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था वह मुझे कहने लगी तुम मुझे ऐसे ही चोदते जाओ। वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाए जा रही थी जब वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाती तो मेरे और उसकी चूतड़ों की टक्कर से जो आवाज पैदा होती वह मुझे और भी ज्यादा गर्म कर रही थी।

वह मेरी आग को बढा रही थी मैं उसे तेजी से धक्के मारे जा रहा था। मैंने उसे बहुत तेज गति से धक्के मारे जब तक कि मेरा वीर्य नहीं गिर गया। जैसे ही मेरा माल गिरा तो मैंने मनीषा को कहा मजा आ गया। मनीषा ने बोला तुम मेरे चूत से अपने लंड को बाहर निकाल दो। मैंने मनीषा को कहा मैं तुम्हारी चूत से अभी अपने लंड को बाहर निकाल देता हूं। मैंने मनीषा की चूत से अपने लंड को बाहर निकाला तो उसकी योनि से मेरा वीर्य बाहर निकलने लगा। मैंने मनीषा को कहा तुम एक बार मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। मनीषा ने मेरे लंड को तुरंत ही अपने मुंह के अंदर ले लिया। वह मेरे लंड को चूसने लगी जब वह मेरी लंड को चूस रही थी तो मुझे अच्छा लग रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि वह बस वह मेरे लंड को चूसती ही जाए। उसने मेरा लंड को बहुत देर तक चूसा जब तक उसने मेरे लंड से पानी को बाहर नहीं निकाल दिया। मेरे लंड से मेरा वीर्य निकल चुका था मैंने मनीषा को कहा तुम मुझे अपना नंबर दे दो। मनीषा ने मुझे अपना नंबर दे दिया। अब हम दोनों अपनी सीट पर आकर बैठे उसके बाद हम लोग मुंबई पहुंच गए। मेरा जब भी मन होता तो मैं मनीषा को बुला लिया करता हूं। वह मेरे पास चली आती है और जब भी वह मेरे पास आती तो मैं उसे जमकर चोदा करता हूं और उसकी चूत के मजे लेने में मुझे बड़ा ही आनंद आता है।


Comments are closed.