जो चोदे नशा हो जाए

Jo chode nasha ho jaye:

Antarvasna, hindi sex stories मैं जब अपने पुराने दिनों को याद करता हूं तो मुझे ऐसा लगता है जैसे कि मैंने अपने जीवन में कितनी तकलीफ है देखी और कितने कष्ट उठाए हैं लेकिन शायद उन्ही की बदौलत आज मैं अपने जीवन में कुछ कर पाया हूं। मुझे आज भी वह दिन याद है जब हमारे घर पर खाने तक के लिए कुछ नहीं था, मैं झारखंड का रहने वाला हूं। गरीबी में हम लोगों ने बहुत दिन बिताए मैं मेहनत मजदूरी कर के अपना गुजारा किया करता था लेकिन उस वक्त कुछ भी काम नहीं हुआ। हमारे गांव में बहुत बाढ़ आ चुकी थी जिससे की फसल भी पूरी खराब हो गई थी और काम करने के लिए भी कुछ नहीं था। मेरे बच्चे बहुत भूखे थे और मेरी पत्नी भी मुझे कहने लगी कि हम तो भूखे रह लेंगे लेकिन बच्चों को कैसे भूखे रखें।

उसके लिए मैंने दुकान से भी चोरी की मुझे दुकान से राशन चोरी करके लाना पड़ा कुछ दिन तक तो वह राशन चल गया लेकिन मेरी जिंदगी में कुछ भी सामान्य नहीं हो पाया था। मैं उसके बाद भी मेहनत मजदूरी कर के ही अपना जीवन यापन कर रहा था मैं जब भी घर आता तो मैं बहुत थका होता था। मैं सोचने लगा कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो कहीं मेरा परिवार पूरी तरीके से बर्बाद ना हो जाए इसलिए मुझे ही अब कोई कदम उठाना था लेकिन मेरे पास कोई भी रास्ता नहीं था। बड़ी मुश्किल से तो मैं काम करके दो वक्त की रोटी का बंदोबस्त कर पाता था लेकिन फिर भी मैंने हिम्मत करते हुए कोलकाता जाने के बारे में सोच लिया। मेरी पत्नी ने मुझे कहा हम लोग कोलकाता जाकर क्या करेंगे और जो थोड़े बहुत पैसे भी हमारे पास है वह भी खत्म हो जाएंगे। मैंने उसे कहा तुम मुझ पर भरोसा रखो और सब कुछ ठीक हो जाएगा। मेरी पत्नी कहने लगी आप सोच लीजिए क्योंकि मुझे अपनी कोई चिंता नहीं है लेकिन बच्चों कि मुझे काफी चिंता है मैंने उसे कहा मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा। मेरे पास थोड़े बहुत पैसे थे और हम लोग कोलकाता चले गए जब मैं कोलकाता गया तो हमारे पास रहने के लिए छत नहीं थी इसलिए हमने फुटपाथ के किनारे ही छोटा सा झोपड़ा बना लिया और वहीं पर हम लोग रहने लगे। मैं छोटे-मोटे काम करके ही अपना गुजारा चला रहा था लेकिन मुझे गांव से ज्यादा मजदूरी कोलकाता में मिल जाया करती थी और जब मैं शाम को अपनी पत्नी को पैसे देता तो वह खुश हो जाया करती।

कोलकाता में मुझे थोड़ा बहुत अच्छा लगने लगा था क्योंकि थोड़े बहुत पैसे भी मुझे मिलने लगे थे। एक दिन मेरी पत्नी ने मुझे कहा कि मैं भी आपके साथ काम करने के लिए आना चाहती हूं मैंने उसे कहा तो फिर बच्चों का ध्यान कौन रखेगा। वह मुझे कहने लगी बच्चों को हम स्कूल में पढ़ने के लिए भेज दिया करेंगे मैंने उसे कहा ठीक है वैसे भी बच्चों की उम्र अब ज्यादा हो चुकी है उन्हें भी स्कूल में पढ़ने के लिए जाना चाहिए। हम लोगों ने उनका दाखिला सरकारी स्कूल में करवा दिया क्योंकि बच्चों की उम्र भी पढ़ने की हो चुकी थी इसलिए मैंने अपने दोनों बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजना शुरू कर दिया। वह लोग वहां पर जाने लगे मेरे साथ मेरी पत्नी भी काम पर आया करती थी अब थोड़े बहुत पैसे हमें मिल जाए करते थे। मेरी पत्नी को मैं हर शाम को कुछ पैसे दिया करता था वह भी बचत करने लगी थी और धीरे धीरे हमारे पास पैसे जमा होने लगे थे। मैंने एक दिन अपनी पत्नी से कहा कि क्यों ना हम लोग कहीं पर एक छोटा सा खाने का ठेला लगा ले मेरी पत्नी कहने लगी ठीक है आप देख लीजिए। अब हमारे पास थोड़े बहुत पैसे तो हो ही चुके थे इसलिए हम दोनों ने मिलकर एक कंपनी के बाहर पर अपना छोटा सा ठेला शुरू कर लिया। वहां पर हम लोग सुबह का नाश्ता बनाया करते और दोपहर में भी हम लोग खाना बनाते थे धीरे-धीरे मेरा काम इतना अच्छा चलने लगा कि अब हम लोगों के पास अच्छे पैसे जमा होने लगे। मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि सब कुछ अब ठीक होने लगेगा मेरी जिंदगी में खुशियां आने लगी थी। मेरी पत्नी ने मेरा हमेशा साथ दिया और हमारे बच्चे भी धीरे-धीरे बड़े होने लगे और समय बीतता चला गया। मैंने एक दिन अपनी पत्नी से कहा अब हम लोगों को अपना एक घर खरीद लेना चाहिए मेरी पत्नी कहने लगी हां क्यों नहीं। वह भी इस बात से खुश थी कि हम लोग अपना घर खरीद लेंगे और फिर मैंने एक छोटा सा घर खरीद लिया।

मेरे बच्चे और मेरी पत्नी सब लोग खुश थे मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि मेरे काम की वजह से मेरी किस्मत बिल्कुल बदल जाएगी। हमेशा मैं ठेला लगाया करता था वहीं पर मैंने एक दुकान खरीद ली और उस छोटी सी दुकान पर मैंने काम करने के लिए अब लड़के भी रख लिए थे। मैं आशा को कहने लगा तुम बच्चों की परवरिश पर ध्यान दो और उन्हें तुम पढ़ाई करवाओ लेकिन आशा मुझे कहती कि नहीं मैं आपके साथ ही काम करूंगी। वह मेरे साथ आया करती थी लेकिन उसे मैं फिर भी मना किया करता और उसे कहता कि तुम अब बच्चों की देखभाल करो क्योंकि उन्हें भी तुम्हारी जरूरत है। सब कुछ बड़ी जल्दी हुआ और मैंने दूसरी जगह भी एक छोटा सा रेस्टोरेंट खोल दिया अब मेरे पास पैसे आने लगे थे तो मेरे सपने भी अब बड़े होते जा रहे थे। मैंने अपने लिए कार खरीदने की सोची और जब मैंने कार खरीदी तो उस वक्त मैं बहुत खुश हुआ क्योंकि जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था वह सब मुझे मिलने लगा था। एक शाम आशा और मैं अपने घर पर बैठे हुए थे आशा मुझे कहने लगी आपको याद है हम लोगों ने कितनी मुसीबत और तकलीफ देखी हैं लेकिन उसके बाद हमारी मेहनत आज रंग लाई। आपने बिल्कुल सही सोचा था कि हमें कोलकाता आ जाना चाहिए और कोलकाता में हमारे जीवन में बहुत बदलाव आया है। मुझे इस बात की खुशी है कि बच्चे भी अब अच्छे स्कूल में पढ़ने लगे हैं और हमारा जीवन भी अब अच्छा हो चुका है।

मैंने कभी भी सोचा नहीं था कि इतना सब कुछ हमारे जीवन में बदल जाएगा लेकिन यह सब आपकी वजह से ही हुआ है। मैंने आशा से कहा यह सब अकेले मेरी वजह से ही नहीं हुआ इसमें तुमने भी मेरा बहुत साथ दिया है और शायद इसी वजह से सब कुछ ठीक हो पाया। आशा मुझे कहती जब मैं हमारे पुराने दिनों को याद करती हूँ तो हमेशा सोचती हूं कि वैसी समस्या और तकलीफ कभी दोबारा ना आए। मैं भी कभी नहीं चाहता था कि दोबारा से हम वैसी जिंदगी जिये समय के साथ साथ मेरे पास पैसा भी आने लगा था तो मैंने ट्रांसपोर्ट का काम खोलने की भी सोच ली। उसमें मेरी मदद मेरे एक दोस्त ने की मेरे दोस्त का नाम राजेश है राजेश भी ट्रांसपोर्ट का काम करता है। उसने मुझे कहा कि यदि तुम्हें भी ट्रांसपोर्ट का काम खोलना है तो तुम खोल सकते हो। मैंने भी दो ट्रक खरीद लिए जिससे कि मैंने अपना खुद का ट्रांसपोर्ट का काम कर लिया और उसके बाद काम अच्छा चलने लगा। राजेश मुझे हमेशा कहता कि सोनू तुमने बहुत मेहनत की है और तुम्हारी मेहनत रंग ला रही है। मैंने कभी भी काम से मुंह नहीं मोड़ा मैं पूरी मेहनत के साथ काम किया करता और इसका फल मुझे आब मिल रहा था। अब मेरा काम भी अच्छे से चलने लगा था मेरे जीवन में पैसे की बिल्कुल भी कमी नहीं थी। मेरे पास पैसा भी आ चुका था इसलिए मेरे शौक भी अब बड़े होने लगे थे। एक दिन मुझे राजेश ने कहा मैंने कल ही एक आइटम को चोदा है मैंने उसे कहा लेकिन तुम जरा उस आइटम की तस्वीर मुझे दिखाओ जब उसने मुझे उस आइटम की तस्वीर दिखाई और कहा इसका नाम ललिता है यह सबसे टॉप का माल है।

उसे देखकर मेरा भी लंड खड़ा होने लगा मैंने पहली बार ही किसी अन्य महिला के साथ सेक्स करने के बारे में सोचा था। मैंने राजेश से कहा तुम क्या ललिता को मेरे लिए बुला सकते हो वह कहने लगा क्यों नहीं मैं उसे कल ही तुम्हारे लिए बुला लेता हूं। उसने अगले दिन ललिता को बुला लिया जब वह मेरे पास आई तो उसके बड़े बड़े स्तन और उसका शरीर देखकर मैं उसकी तरफ फिदा हो गया। मैंने जब उसके होठों को किस करना शुरू किया तो मुझे बड़ा मजा आने लगा उसने मुझे कहा मुझे आपके लंड को अपने मुंह में लेना है। उसने मेरे लंड को पैंट से बाहर निकाला तो वह उसे अच्छे से चूसने लगी उसे मेरे लंड को चूसने में बड़ा मजा आ रहा था और वह मेरा साथ बड़े ही अच्छे तरीके से दे रही थी उसने मेरे लंड से पानी बाहर निकाल कर रख दिया। मैंने उसके पूरे कपड़े उतार कर उसके बड़े स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो उसकी योनि से गरम पानी बाहर निकालने लगा। जब मैंने उसकी योनि पर अपने लंड को लगाकर अंदर की तरह धक्का देना शुरू किया तो मुझे बड़ा आनंद आने लगा उसने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के दिए जा रहा था।

मुझे उसे धक्के मारने में बहुत मजा आता मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के दिए जाता जिससे कि उसकी योनि से लगातार गर्मी निकल रही थी। जब उसने मुझे कहा कि आप मेरी गांड में अपने लंड को डाल दीजिए तो मैंने भी अपने लंड को उसकी गांड में प्रवेश करवा दिया। जब उसकी गांड के अंदर मेरा लंड प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के दिए जा रहा था। मुझे उसे धक्के मारने में बहुत आनंद आता वह मेरा साथ बड़े अच्छे से दे रही थी मैं उसे बहुत तेज गति से धक्के मारता जिससे कि उसके मुंह से चीख निकल जाती। उसकी बड़ी चूतडो को पकड़कर मुझे बड़ा आनंद आ रहा था और उसकी चूतड़ों का रंग लाल होने लगा था उसकी गांड का साइज 40 था। उसकी गांड का छेद बहुत ज्यादा टाइट था जिससे कि उसकी गांड से गर्मी बाहर की तरफ निकलने लगी मैं उसे बर्दाश्त ना कर सका जैसे ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो मुझे बहुत अच्छा लगा। उसके बाद मुझे ललिता का नशा हो चुका था।


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