जवान लंड से जवानी आई

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Jawan lund se jawani aayi घर के दरवाजे को कोई बड़ी तेजी से खटखटा रहा था नींद से उठ कर मैं जब बाहर गई तो मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था क्योंकि मैं गहरी नींद में थी। दोपहर के करीब 2:00 बज रहे थे मैंने जब दरवाजा खोला तो बाहर एक 22 वर्ष का युवक खड़ा था जो कि कुछ दिनों पहले ही हमारे पड़ोस में रहने के लिए आया था। वह मुझे कहने लगा दीदी क्या कुछ देर के लिए आपके घर पर बैठ सकता हूं मैं पहले तो उसके तरफ देखती रही काफी देर तक मैंने उसकी तरफ देखा फिर मुझे एहसास हुआ कि वह लड़का काफी थका हारा था। मैंने उसे अंदर आने के लिए कहा और उसे पूछा आज तुम्हारे मकान मालिक कहां चले गए हैं। वह कहने लगा मेरे पास में चाबी नहीं थी और भाभी कहीं गई हुई हैं उन्हें आने में करीब एक घंटा लगेगा आसपास मैं किसी को भी नहीं पहचानता हूं तो सोचा आपके दरवाजे को खटखटा दूँ उसके लिए मैं आपसे माफी मांगना चाहता हूं बाहर बहुत ज्यादा धूप हो रही है और बाहर बैठ पाना बहुत मुश्किल है।

मैंने उससे कहा कोई बात नहीं मैंने उसे एकदम ठंडा सा पानी निकाल कर दिया और कहा यदि तुम्हे आराम करना है तो तुम आराम कर लो। वह कहने लगा नहीं मैं तो बस उनका इंतजार कर रहा हूं कि वह कब आएंगे, मैं उस नौजवान युवक के साथ बैठ गई और उससे बातें करने लगी मैंने उससे पूछा तुम क्या करते हो। वह मेरी तरफ देखकर कहने लगा यह मेरे बी फार्मा का आखिरी वर्ष है मैंने उसे कहा अच्छा तो तुम बी फार्मा कर रहे हो। मैंने उससे कहा लेकिन मैं तुम्हारा नाम तो पूछना ही भूल गई तो उसने मुझे बताया की मेरा नाम गौरव है। मैंने उससे पूछा क्या तुम और पानी लोगे वह कहने लगा नहीं तेरी रहने दीजिए। मैं उससे पूछने लगी तुम कहां के रहने वाले हो वह कहने लगा रोहतक के पास ही हमारा गांव है मैं वहीं का रहने वाला हूं। मैंने उसे बताया कि रोहतक में तो मेरी मौसी भी रहती हैं वह कहने लगा अच्छा तो आप आएगा रोहतक। मैंने गौरव को जवाब देते हुए कहा हां मैं भी बचपन में एक दो बार रोहतक गयी हूँ लेकिन अब शादी के बाद कहां जाना होता है। गौरव कहने लगा कभी आप रोहतक आएगा तो आप मेरे घर पर भी जरूर आइयेगा मैंने उसे कहा क्यों नहीं।

गौरव और मैं बातों बातों में जैसे खो गए थे मेरी आंखों से अब नींद ओझल हो चुकी थी और मैंने गौरव से कहा मैं तुम्हारे लिए चाय बना देती हूं। गौरव कहने लगा नहीं रहने दीजिए आप बेमतलब कष्ट ले रही हैं एक तो मैंने आपको दिन में परेशान किया और ऊपर से आपकी नींद भी खराब कर दी। मैंने गौरव से कहा ऐसा कुछ नहीं है मैं तुम्हारे लिए चाय बना कर ले आती हूं, मैं रसोई में चली गई और चाय बनाने लगी गौरव बाहर बैठकर अपने मोबाइल  को टटोल रहा था मैं यह सब अपनी रसोई से देख पा रही थी। कुछ देर बाद मैं चाय लेकर आई तो गौरव ने चाय पीते हुए कहा आप बड़ी अच्छी चाय बनाती हैं मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरी मां ने चाय बनाई हो। वह बिल्कुल आप की तरह चाय बनाते हैं मैं गौरव के साथ बैठ कर बात कर ही रही थी कि तभी मेरी 2 वर्षीय छोटी बच्ची उठ गई और वह बड़ी  जोर से रोने लगी। मैं उठ कर अपने रूम में गई तो वह रो रही थी मैंने उसे अपनी गोद में उठा लिया और उसके बाद मैं उसे कुछ देर तक इधर से उधर टहलाती रही फिर जाकर वह थोड़ा चुप हुई और दोबारा से वह सो गई। मैं बाहर आई तो गौरव मुझे कहने लगा दीदी अभी मैं चलता हूं मैंने गौरव से कहा क्या भाभी आ गई होंगी वह कहने लगा देख कर आता हूं शायद आ गई हो। उसके बाद गौरव चला गया वह आया नहीं था इसका मतलब भाभी आ चुकी थी गौरव के साथ बैठकर पता नहीं कब समय बीत गया कुछ पता ही नहीं चला। अब 4:00 बज चुके थे और 4:00 बजे मेरा पसंदीदा सीरियल आने वाला था मेरा पसंदीदा सीरियल जब आया तो मैंने टीवी ऑन की और टीवी देखने लगी। मैं टीवी में इतना ज्यादा खो गई थी कि मुझे पता ही नहीं चला कि कब शाम होने आई है। मेरे पति मोहन घर लौट आए वह दरवाजे के पास ही खड़े थे मैं टीवी की तरफ देख रही थी जैसे ही मैंने पीछे मुड़कर देखा तो मोहन खड़े थे मैंने मोहन से कहा आप कब आए। मोहन ने मुस्कुराते हुए मुझे जवाब दिया मैं तो कब का आ गया था लेकिन तुम अपने टीवी सीरियल में इतना घुसी हुई थी कि मैंने तुम्हें कुछ कहना उचित नहीं समझा।

मैंने उनसे कहा आप बैठिये मैं आपके लिए पानी ले आती हूं, मैं आदर्शवादी पत्नी की भांति रसोई में गई और वहां से पानी ले आई मोहन उस दिन कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रहे थे। मैंने मोहन को पानी देते हुए कहा आज आप काफी खुश नजर आ रहे हैं तो मोहन मुझे कहने लगे खुशी की तो बात है ही क्योंकि मेरा प्रमोशन जो हुआ है। मैंने मोहन से कहा अच्छा आप का प्रमोशन हो गया है आपको क्या अब तनख्वाह भी ज्यादा मिलेगी मोहन कहने लगे हां क्यों नहीं मिलेगी। मोहन उस दिन बड़े खुश थे तो मैंने सोचा आज मोहन से कुछ मांग ही लेती हूं मैंने मोहन से कहा आज आप मुझे क्या मेरी पसंदीदा अंगूठी दिलवाएंगे जो हमने कुछ दिनों पहले देखी थी। मोहन उस दिन बहुत खुश थे तो वह मेरी बात को मना ना कर सके और कहने लगे चलो ठीक है हम लोग अभी चलते हैं। मोहन ने अपनी मोटरसाइकिल स्टार्ट की और हम दोनों ही ज्वेलरी शॉप में चले गए। जब हम लोग वहां गए तो वहां पर मोहन ने मेरे लिए गिफ्ट खरीदे मैं बहुत ही खुश हो गई मेरी खुशी का कारण सिर्फ और सिर्फ मोहन का दिया हुआ गिफ्ट था मैंने मोहन से कहा आप मेरा कितना ध्यान रखते हैं। मोहन कहने लगे चलो आज हम बाहर से ही खाना खा कर चलते हैं, हम दोनों एक रेस्टोरेंट में चले गए और वहां बैठकर हम लोगों ने रात का डिनर किया।

काफी समय बाद उनके चेहरे पर खुशी देख कर बहुत अच्छा लग रहा था नहीं तो मोहन हमेशा थके हारे ऑफिस से आते और वह मुझसे ज्यादा बात भी नहीं किया करते थे। हम दोनों ने डिनर कर लिया था और अब हम दोनों वापस अपने घर लौट आए, जब हम लोग घर लौटे तो मोहन मुझे कहने लगे मुझे बड़ी तेज नींद आ रही है। मैंने मोहन से कहा ठीक है आप सो जाइए और फिर मोहन सो गए मैं भी सोने की कोशिश कर रही थी लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। कुछ देर बाद मैं सो गई जब सुबह 5:00 बजे मेरी आंख खुली तो मैंने मोहन के लिए नाश्ता बनाना शुरू कर दिया था। घर की साफ सफाई में पता ही नहीं चलता कि कब 8:00 बज गए और 8:00 बजे मोहन नाश्ता कर के अपने ऑफिस के लिए निकल चुके थे। मोहन के ऑफिस जाने के कुछ देर बाद ही गौरव घर पर चले आया और कहने लगा दीदी मैं आपको मिलने के लिए आया हूं। मैंने गौरव से कहा किस खुशी में तुम मुझे मिठाई खिला रहे हो। वह कहने लगा मेरी दीदी की सगाई हो गई है तो सोचा आपका मुंह मीठा करवा दूं मैंने गौरव को बधाई देते हुए कहा आओ बैठो। वह जब बैठा तो मुझे बड़े ध्यान से देख रहा था लेकिन उसकी नजरों में कुछ शर्म थी। मैं कुछ समझ नहीं पाई मैंने जब गौरव को कहा तुम बेठो मैं अभी आती हूं तो गौरव कहने लगा ठीक है। गौरव सोफे पर बैठा हुआ हुआ था मैं बाथरूम में चली गई। मै जब बाथरूम में गई तो बाथरूम में मैं अपनी चूत में वाइब्रेटर को डालने लगी मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था क्योंकि काफी समय बाद में वाइब्रेटर को अपनी चूत मे ले रही थी शायद मेरी आवाज गौरव के किनों में जाने लगी थी और गौरव अंदर चला आया। जब वह अंदर आया तो मैंने वाइब्रेटर को अपनी चूत मे लिया हुआ था गौरव ने मुझ देख लिया।

मै वाइब्रेटर को छुपाने की कोशिश करने लगी लेकिन उसने देख लिया था वह कहने लगा आप यह क्या कर रहे हैं। मैंने गौरव को अंदर ही बुला लिया और उसकी पैंट को खोलते हुए उसके लंड को बाहर निकाला तो वह कोई आपत्ति ना जता पाया। उसका 9 इंच मोटा लंड जब मैंने अपने मुंह के अंदर लिया तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था जब मे उसके मोटे लंड को चूस रही थी उससे मेरे अंदर के उत्तेजना और भी बढ़ने लगी थी मैं काफी उत्तेजित होने लगी थी। मैंने गौरव को कहा तुम मेरी चूत की खुजली को मिटा दो। गौरव पूरे तरीके से उत्तेजित हो चुका था जैसे ही गौरव ने मेरी गिली चूत के अंदर अपने मोटे लंड को प्रवेश करवाया तो मैं मचलने लगी और मुझे बहुत मजा आने लगा। मैं इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि गौरव के लंड से मै बड़े मजे ले रही थी जिस प्रकार से गौरव में मुझे बड़े जोरदार तरीके से चोदा उससे मेरे अंदर की खुजली पूरी तरीके से मिट चुकी थी।

गौरव तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था मैंने गौरव से कहा तुम्हारे अंदर तो बड़ा जोश भरा पडा है। वह कहने लगा पहली बार ही तो मैं किसी को चोद रहूं तो भला मैं कैसे इतनी जल्दी छोड़ सकता हूं। जब मैं गौरव के लंड से अपनु चूतडो को टकराने लगी तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। जिस प्रकार से मैं गौरव से अपनी चूतडो को टकराती उससे वह भी पूरे जोश में आ जाता म गौरव से कहती कसम से तुमने आज तो आपने मेरी इच्छा पूरी कर दी। गौरव कहने लगा मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे ऐसा कुछ मिल सकता है लेकिन आज आपने मेरी इच्छा पूरी कर दी। मैंने गौरव से कहा कोई बात नहीं यह कहते ही गौरव ने अपने वीर्य को मेरी योनि के अंदर गिरा दिया। मैंने उसे कहा तुम चलो मैं आती हूं मैंने अपनी योनि को साफ किया और मैं गौरव के साथ बैठ गई लेकिन मुझे कहां पता था कि गौरव और मेरे बीच अब हमेशा ही सेक्स संबंध बनते रहेंगे। हम दोनों एक दूसरे के बिना अब रह नहीं पाएंगे गौरव के लंड की मुझे आदत होने लगी थी और उसके साथ सेक्स संबंध बनाना मेरे लिए बड़ा ही मजेदार रहता मैं खुश हो जाया करती थी।


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