जल्दी से चूत मारो

Jaldi se chut maaro:

kamukta, antarvasna मेरी कुछ समय पहले ही बैंक में जॉब लगी, जब मेरी बैंक में जॉब लगी तो मेरे पिताजी उस वक्त बहुत खुश थे क्योंकि मेरे पिताजी भी बैंक से ही रिटायर हुए थे और वह हमेशा से ही यही चाहते थे कि मैं भी बैंक में नौकरी करूं। जैसे मैंने उन्हें यह बात बताई कि मेरा सिलेक्शन हो चुका है तो वह बहुत ज्यादा खुश हुए। मुझे बैंक में नौकरी करते हुए कुछ महीने ही हुए थे हमारे सामने के घर में एक परिवार रहता था कुछ दिनों पहले ही उन्होंने वहां घर खाली कर दिया उन लोगों से हमारी बातचीत ठीक-ठाक थी मैंने जब अपनी मम्मी से पूछा कि आज कल सिन्हा अंकल दिखाई नहीं दे रहे है तो वह कहने लगे कि उन्होंने तो घर छोड़ दिया है घर के जो मालिक है अब वह लोग वहां रहने के लिए आ रहे हैं, मैंने उनसे पूछा लेकिन मैंने तो उन्हें कभी देखा ही नहीं, मम्मी कहने लगी हां वह विदेश में प्रोफेसर थे और अब वह रिटायर हो चुके हैं इसलिए अब वह लोग यहीं रहने वाले हैं।

मैंने अपनी मम्मी से कहा चलिए यह तो अच्छी बात है कि कम से कम उनसे मुलाकात हो पाएगी, मम्मी कहने लगी कि मैं भी उनसे काफी वर्षों पहले ही मिली थी, मैंने मम्मी से कहा हां मुझे यह तो पता है कि वह लोग विदेश में रहते हैं लेकिन मुझे यह बात नहीं पता थी कि वह प्रोफेसर हैं, मम्मी कहने लगी हां बेटा वह वहां प्रोफेसर थे। मेरे पापा कहने लगे कि बेटा तुम जब ऑफिस से लौटो तो मेरे लिए दवाई ले आना, मैंने पापा से कहा कि पापा आपको कौन सी दवाई लानी है वह कहने लगे बेटा मैं कल ही डॉक्टर के पास गया था डॉक्टर ने मुझे दवाई लिख कर दे दी तुम आते वक्त दवाई ले आना, मैंने पिता जी से कहा ठीक है आते वक्त दवाई ले आऊंगा आप मुझे दवाई का नाम बता दीजिए, उन्होंने मुझे कहा तुम डॉक्टर के दिए पर्चे पर देख लो उन्होंने क्या लिखा है। मैंने देखा तो उस पर दवाई का नाम लिखा हुआ था और मैंने दवाई का नाम अपने पास रख लिया मैं जब अपने ऑफिस पहुंचा तो उस दिन कुछ ज्यादा ही काम था उस दिन मेरे बैंक मैनेजर कहने लगे कि सूरज आज बहुत सारा काम है, मैंने उनसे कहा सर आप फिक्र ना करें मेरे मैनेजर मुझ पर बहुत ज्यादा भरोसा करते हैं और उनका भरोसा मुझ पर इतना ज्यादा है कि वह हर काम के लिए सबसे पहले मुझे ही कहते।

मेरे दिमाग से मेरे पिताजी की दवाई की बात तो निकल ही चुकी थी लेकिन उन्होंने बिल्कुल सही वक्त पर मुझे फोन कर दिया और जब उन्होंने मुझे फोन किया तो मैंने उन्हें कहा पिताजी आपने बिल्कुल सही वक्त पर मुझे फोन किया मेरे दिमाग से तो आपकी दवाई का ध्यान ही निकल गया था, मेरे पापा कहने लगे हां बेटा तुम हमारी बातों का तो ध्यान ही नहीं रखते, मैंने अपने पापा से कहा पापा आप अभी मेरी टांग खींचना बंद कीजिए बस मैं कुछ ही समय बाद घर आ रहा हूं और आते हुए आपकी दवाई ले आऊंगा। मैंने रास्ते से पापा की दवाई ले ली और मैं घर चला गया जब मैं घर गया तो मैंने पड़ोस में देखा तो वहां पर कुछ लोग सामान शिफ्ट कर रहे थे मैंने मम्मी से कहा मम्मी कहने लगी कि यही वह प्रोफेसर साहब है जिनकी मैं बात कर रही थी, मैंने मम्मी से कहा क्या वह लोग आज ही आए हैं? मम्मी कहने लगी हां बेटा उन लोगों ने आज ही यहां शिफ्ट किया है और अभी भी वह लोग सामान शिफ्ट कर ही रहे हैं। मैंने मम्मी से कहा मम्मी मुझे बहुत तेज भूख लग रही है आप मेरे लिए कुछ हल्का फुल्का खाने के लिए बना देंगे, मम्मी कहने लगी बेटा तुम फ्रेश हो लो उसके बाद मैं तुम्हारे लिए कुछ बना देती हूं।  मम्मी ने मेरे लिए मूंग का हलवा बना दिया मुझे मूंग का हलवा बड़ा ही पसंद है और मैं हलवा खा कर मम्मी को कहने लगा तुम्हारे हाथ का तो जवाब ही नहीं तुम बहुत ही स्वादिष्ट हलवा बनाते हो, मम्मी कहने लगी बेटा यह तुम्हारी नानी का कमाल है तुम्हारी नानी ने हीं मुझे बनाना सिखाया था तब तक पापा भी बीच में बोल पड़े और कहने लगे कि अरे अब तुम अपने मायके वालों की तारीफ करना छोड़ दो, मम्मी कहने लगी देखा तुम्हारे पिताजी मुझसे कितना ज्यादा जलते हैं, मैंने मम्मी से कहा मम्मी हम लोग आपस में मजाक कर रहे थे तभी डोर बेल बजी और वहां पर एक बुजुर्ग व्यक्ति खड़े थे मम्मी ने उन्हें कहा हां सर कहिए, वह कहने लगे मैं आपका पड़ोसी हूं उन्होंने जब अपना परिचय दिया तो मम्मी ने उन्हें पहचान लिया और मम्मी ने उन्हें अंदर आने के लिए कहा मैं सोफे पर ही बैठा हुआ था मैंने भी उन्हें पहचान लिया था वह मुझे कहने लगे बेटा आप क्या करते हो?

मैंने उन्हें बताया सर मैं बैंक में जॉब करता हूं। वह कहने लगे चलो यह तो अच्छी बात है तुमसे तो काम पड़ता ही रहेगा, मम्मी कहने लगी सर आपको कुछ काम था, वह कहने लगे मुझे पीने के लिए पानी चाहिए था मम्मी ने उन्हें पानी दिया मम्मी कहने लगी यदि आपको और कुछ भी चाहिए तो आप हमें कह दीजिएगा, वह कहने लगे नहीं बस मुझे फिलहाल तो पीने के लिए पानी ही चाहिए था क्योंकि अभी घर की साफ सफाई करनी बाकी है। मम्मी ने पूछा कि आपके साथ और कौन है तो वह कहने लगे कि मेरी पत्नी और मैं ही है बाकी तो मेरी लड़की की शादी हो चुकी है और हमारा लड़का तो विदेश में ही सेटल है। वह कुछ देर हमारे घर पर बैठे मम्मी ने उन्हें कहा कि हम आपके लिए खाना बना देते है, वह कहने लगे कि नहीं आप लोग इतना कष्ट ना करें और वह यह कहते हुए चले गए उनका व्यवहार बड़ा ही अच्छा था जब वह चले गए तो मैंने मम्मी से कहा प्रोफेसर साहब तो बड़े ही अच्छे हैं, मम्मी कहने लगी हां मैं उनसे पहले भी एक बार मिली थी, मैंने उन्हें कहा चलो अब आपके पड़ोसी भी आ चुके हैं कम से कम आपका टाइम पास हो जाया करेगा, मम्मी कहने लगी तुम्हें तो पता है बेटा मैं तो कहीं भी घूमने के लिए नहीं जाती और ना हीं मैं कही घर से बाहर निकलती हूं।

कुछ दिनों बाद मैंने प्रोफेसर साहब के घर पर देखा तो वहां पर काफी भीड़ थी मैं उस वक्त छत पर ही था और उस दिन मेरी छुट्टी थी, मैं छत से सब कुछ देख रहा था मैंने देखा उनके घर पर काफी लोग आए हुए थे,  कुछ दिनों बाद वह मुझसे मिलने के लिए बैंक में आ गए मैंने उनसे कहा सर आपको बैंक में कुछ काम था तो वह कहने लगे बेटा मुझे तुम यह अकाउंट खुलवा कर दे दो, मैंने उन्हें कहा हां मैं आपका अकाउंट यहां खुलवा देता हूं। मैंने उनका अकाउंट खुलवा दिया और मैंने उनसे उस दिन पूछा आजकल आपके घर में काफी भीड़ है तो वह कहने लगे कि हां मेरी बेटी और दामाद यहां आए हुए हैं। वह मेरे साथ काफी देर तक रुके रहे मैंने उन्हें कहा क्या मैं आपको घर छोड़ दूं? वह कहने लगे नहीं मैं घर चला जाऊंगा। मैं जब शाम को घर लौटा तो मैंने मम्मी को बताया कि आज प्रोफेसर साहब बैंक में आए हुए थे और मैंने उनका अकाउंट ओपन करवा दिया, मैंने मम्मी को बताया कि उनकी बेटी और दामाद भी आजकल उनके घर पर आए हुए हैं, मम्मी कहने लगी हां इसीलिए आजकल उनके घर पर काफी शोर हो रहा है, मैंने मम्मी से कहा छोटे बच्चे तो शोर शराबा करते ही हैं। मुझे नहीं पता था कि उनकी बेटी एक नंबर की जुगाड है वह विदेश में पढ़ी लिखी है। एक दिन मैं छत पर खड़ा था वह भी छत पर आ गई वह छत पर अपनी पैंटी ब्रा सुखाने लगी मैं उसे बड़े ध्यान से देखे जा रहा था उसने भी मेरी तरफ नजर फेरी तो मैंने उसे जैसे आंखों ही आंखों में बात कर ली थी। मैं एक दिन मिलने के लिए  प्रोफेसर साहब से उनके घर पर चला गया उनकी लड़की का नाम शिखा है शिखा को मैंने अपनी बातों से पूरी तरह से इंप्रेस कर दिया था मैंने उसका नंबर भी ले लिया। एक दिन मैंने उसे मिलने के लिए बुला लिया मैंने उस दिन छुट्टी भी ले ली मैं उसे लेकर एक पार्क में चला गया हम लोग काफी देर तक वहां बैठे रहे उसके बाद हम लोगों ने मूवी भी देखी लेकिन मुझे तो उसके साथ सेक्स करना था। मैं उसे लेकर एक होटल में चला गया जहां पर मैंने उसके साथ उस दिन सेक्स के भरपूर मजे लिए उसकी टाइट चूत में लंड डालकर मुझे बड़ा ही अच्छा महसूस हुआ हम दोनों कमरे में जैसे ही गए तो मैंने उसके होठों को चूमना शुरू किया और उसकी गांड को दबाना शुरू किया।

मैं उसकी गांड को बड़े अच्छे से दबाता और उसके स्तनों को भी दबा रहा था मैंने उसके होंठों को बहुत देर तक चुमा। मैंने उसके कपडे खोले तो वह मुझे कहने लगी तुम जल्दी से मेरी चूत में लंड डालो मुझसे बिल्कुल भी नहीं रहा जा रहा है मैंने जल्दी से उसकी चूत के अंदर लंड प्रवेश करवा दिया जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत के अंदर घुसा तो वह कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा है मैंने इतना मोटा लंड कभी चूत मे नहीं लिया। मैंने उसे कहा तुम्हारे पति क्या तुम्हें चोदते नहीं है वह कहने लगी नहीं उनका तो खड़ा भी नहीं होता मुझे तो किसी और से ही अपनी इच्छा पूरी करवानी पड़ती है। मैंने उसे पूछा तो फिर बच्चे किसके हैं वह कहने लगी वह तो मेरे बॉयफ्रेंड के बच्चे हैं। मैंने यह बात सुनते ही उसे जोर जोर से धक्के देने शुरू कर दिए उसके दोनों पैरों को मैंने चौड़ा कर लिया और बड़ी तेजी से उसे धक्के दिए जा रहा था। वह मुझे कहने लगी यार तुम्हारे साथ तो सेक्स करने मे आज मजा ही आ गया उसने भी मेरा पूरा साथ दिया। हम दोनों ने सेक्स का भरपूर एंजॉय किया जब हम दोनों की इच्छा भर गई तो हम दोनो वहां से घर के लिए चले आए। शिखा विदेश जा चुकी है लेकिन अब भी मुझसे उसकी फेसबुक के माध्यम से कभी-कभार चैट पर बात हो जाती है या फिर वह मेरे नंबर पर मैसेज कर दिया करती है। मेरे लिए मेरी मम्मी अब लड़की देखने लगी है।


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