जब उसने अपनी गुलाबी पैंटी को नीचे उतारा

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Jab usne apni gulabi panty ko niche utara कॉलेज का पहला दिन मेरे लिए बहुत ही अच्छा रहा क्योंकि पहले दिन ही मेरी मुलाकात रचना के साथ हुई रचना से मेरा मिलना बहुत ही अच्छा रहा। हम दोनों की पहले दिन से ही दोस्ती होने लगी थी और धीरे धीरे हम दोनों की दोस्ती और गहरी होने लगी। समय के साथ साथ हम दोनों को ही पता नहीं चला कि कब हम दोनों एक दूसरे के इतना करीब आते चले गए की हम दोनों एक दूसरे को प्यार भी करने लगे थे। पहले मैने हीं रचना से अपने दिल की बात कही थी, जब मैंने रचना को अपने दिल की बात कही तो वह मुझे मना ना कर सकी और वह अब मेरे साथ रिलेशन में है। हम दोनों का कॉलेज पूरा हो चुका है कॉलेज पूरा हो जाने के बाद मैं और रचना एक दूसरे को हमेशा ही मिला करते हैं। मेरी जॉब भी मुंबई में लग चुकी है और रचना भी मुंबई में ही नौकरी करती है। रचना एक अच्छे घर से ताल्लुक रखती है उसके पिताजी बैंक में मैनेजर है और मम्मी डॉक्टर हैं।

मैं और रचना एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और जिस दिन भी हम दोनों की मुलाकात नहीं होती या फिर हम दोनों की बात नहीं होती तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। रचना मुझसे बहुत ही ज्यादा प्यार करती है और कहीं ना कहीं रचना और मेरे बीच का प्यार दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। हम दोनों चाहते थे कि हम दोनों अपने परिवार वालों से बात करें। मुझे रचना के साथ हमेशा ही अच्छा लगता और जब मैंने उस दिन रचना से इस बारे में कहा कि हम लोगों को अपने परिवार से हम दोनों के रिश्ते को लेकर बात करनी चाहिए तो रचना मुझे कहने लगी कि मुझे लगता है कि हमें थोड़ा और समय एक दूसरे को देना चाहिए। रचना अभी शादी के बंधन में नहीं बंधना चाहती थी रचना बड़ी बिंदास किस्म की है और जब भी वह मेरे साथ होती है तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता है।

एक दिन मैं और रचना साथ में बैठे हुए थे उस दिन हम दोनों अपने ऑफिस खत्म हो जाने के बाद एक दूसरे को मिले थे। एक दूसरे के साथ बैठकर हम लोग बातें कर रहे थे तो रचना ने मुझे कहा कि दीदी अब अमेरिका जॉब करने के लिए जा रही है। मैंने रचना से कहा यह तो बहुत ही अच्छी बात है। रचना की बड़ी बहन जो की उम्र में उससे दो वर्ष बड़ी है मैं उनसे भी पहले मिल चुका हूं उन्हें हम दोनों के बारे में मालूम है। मैंने रचना से कहा कि रचना दीदी की जॉब क्या अमेरिका में लग चुकी है तो वह मुझे कहने लगी की हां उनकी जॉब अमेरिका में लग चुकी है। मैं जब उन्हें मिला तो मुझे काफी अच्छा लगा रचना ने मुझे उनसे मिलवाया था। मैं चाहता था कि अमेरिका जाने से पहले मैं कंचन दीदी से एक बार मिल लूँ और फिर मैंने उनसे मुलाकात की। रचना और मैं एक दूसरे के साथ खुश हैं और अब हम दोनों एक दूसरे कि बिना बिल्कुल भी रह नहीं पाते हैं।

मैंने रचना से एक दिन कहा कि क्या आज हम लोग मूवी देखने के लिए चलें तो रचना मुझे कहने लगी कि ठीक है आज हम लोग मूवी देखने के लिए चलते हैं। हम लोग उस दिन मूवी देखने के लिए चले गए। जब रचना और मैं मूवी देखने के लिए गए तो हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगा और जिस तरीके से रचना और मैं एक दूसरे के साथ थे उससे हम दोनों बहुत ही खुश थे। मैं रचना के साथ बहुत ही ज्यादा खुश हूं  उस दिन रचना और मैं साथ में मूवी देखने के लिए गए। जब हम लोग मूवी देखने के लिए गए तो मैंने और रचना ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया और मुझे बहुत अच्छा भी लगा। उस दिन हम लोगों को घर लौटने में काफी देर हो गई थी जब हम लोग कर लौटे तो उस दिन बहुत देर हो गई थी। मैंने रचना से कहा कि चलो यह तो अच्छा हुआ कि आज हम दोनों एक दूसरे के साथ अच्छा समय बिता पाए।

रचना को मैंने उसके घर छोड़ा और फिर मैं वापस अपने घर लौट आया था। जब मैं घर लौटा तो उस दिन मां की तबीयत कुछ ठीक नहीं थी मैंने मां से पूछा मां आपकी तबीयत ठीक नहीं थी तो आपने मुझे फोन क्यों नहीं किया। मां ने कहा मैंने दवाई ले ली थी अब मैं पहले से बेहतर महसूस कर रही हूं। मां की तबीयत अक्सर खराब रहा करती है। पापा भी इस बात से बहुत ज्यादा परेशान रहते हैं पापा स्कूल में टीचर हैं और वह अगले दिन घर पर ही रहने वाले थे क्योंकि मां की तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए पापा ने छुट्टी ले ली थी। मैंने मां से कहा मैं भी ऑफिस से छुट्टी ले लूं। मां ने कहा नहीं बेटा तुम रहने दो तुम्हारे पापा घर पर ही हैं और वैसे भी मैं पहले से बेहतर महसूस कर रही हूं। मैं अपने ऑफिस चला गया था। मैं अपने ऑफिस पहुंच चुका था जब मैं अपने ऑफिस पहुंचे तो मुझे रचना का फोन आया।

वह मुझे कहने लगी क्या तुम ऑफिस पहुंच चुकी हो? मैंने रचना से कहा हां मैं ऑफिस पहुंच चुका हूं। रचना मुझे कहने लगी कल रात को मैं तुमसे बात नहीं कर पाई मैंने रचना को कहा कोई बात नहीं। मैंने रचना को बताया मम्मी की तबीयत ठीक नहीं थी तो रचना मुझे कहने लगी आंटी को क्या हुआ? मैंने रचना से कहा मम्मी को काफी तेज बुखार था जिस वजह से पापा ने आज ने आज छुट्टी ले ली है लेकिन मां अब पहले से बेहतर महसूस कर रही है। रचना मुझे कहने लगी चलो मैं भी आंटी को मिलने के लिए आती हूं। रचना एक दो बार हमारे घर पर आई थी उस दिन भी रचना ने मुझसे कहा वह मम्मी को मिलना चाहती है। मैंने रचना से कहा ठीक है मैं तुम्हें शाम के वक्त मिलता हूं। जब शाम को मैं अपने ऑफिस से फ्री हुआ तो मैंने रचना को फोन किया। रचना अभी भी ऑफिस में ही थी उसने मुझे कहा बस थोड़ी देर बाद में ऑफिस से फ्री हो जाऊंगी। थोड़ी देर के बाद रचना ऑफिस से फ्री हुई और मैं रचना को लेकर घर पर आया।

जब मैं रचना को लेकर घर पर आया तो उस दिन वह मां से मिली और हमारे घर पर वह करीब एक घंटे तक रही फिर उसके बाद वह चली गई। मैंने रचना को फोन किया तो वह मुझे कहने लगी मैं घर पहुंच चुकी हूं। रचना और मेरा मिलना तो होता ही रहता था। एक दिन रचना के पापा मम्मी फंक्शन के लिए बाहर गए हुए थे। उसमें दिन रचना और मैं साथ में ही बैठे हुए थे। रचना ने मुझे कहा चलो तुम मुझे घर छोड़ दो। मैं रचना को छोड़ने के लिए उसके घर पर गया तो रचना ने मुझे अंदर आने के लिए कहा क्योंकि उसके घर पर कोई भी नहीं था। जब रचना के पापा मम्मी घर पर नहीं होते थे तो ही वह मुझे अपने घर पर बुलाया करती थी। उस दिन भी उसने मुझे अपने घर पर बुलाया। मैं रचना के घर पर चला गया जब हम दोनों साथ में थे तो मैं रचना को देखे जा रहा था। वह मेरे बगल मे बैठी हुई थी मैं उसकी जांघों को सहलाने लगा। जब मैं उसकी जांघों को सहलाने लगा तो वह तड़पने लगी और उसकी तडप पूरी तरीके से बढ़ने लगी थी।

रचना की तडप बढने लगी थी। वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और ना ही मैं अपने आपको रोक पा रहा था। हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बढाए जा रहे थे। जब हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे तो हम दोनों से बिल्कुल भी रहा नहीं गया। मैंने भी रचना के सामने अपने लंड को किया तो रचना ने मेरे लंड को हाथ मे ले लिया था। वह मेरी गर्मी को झेल नहीं पा रही थी। मैंने रचना की चूत मारने का फैसला कर लिया था। यह पहली बार था जब हम दोनों इस तरीके से एक दूसरे की गर्मी को बढाए जा रहे थे। मैंने रचना से कहा तुम मेरे लंड को चूसती रहो। वह बड़े ही अच्छे से मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर लिए जा रही थी और मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने रचना को सोफे पर लेटा दिया और रचना ने कपड़े उतारे। जब उसने कपड़े उतारे तो उसका नंगा बदन देखकर मैं बिल्कुल भी रह नहीं पाया। मैंने रचना से कहा मुझे तुम्हारी चूत को चाटना है।

रचना ने अपनी गुलाबी पैंटी को नीचे उतारा तो उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। उसकी नंगी चूत देखकर मैं तड़प रहा था मैंने उसकी चूत को बड़े अच्छे से चाटा। जब मैं उसकी चूत को चाट रहा था तो मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था और उसे भी मजा आने लगा था। मैं जिस तरीके से उसकी योनि को चाट कर उसकी गर्मी को बढा रहा था तो मैंने रचना की गर्मी को बाहर निकाल दिया था। अब वह तड़पने लगी थी उसकी गीली हो चुकी चूत पर मैंने अपने लंड को लगाया और अंदर को धकेलना शुरू किया। रचना की चूत के अंदर मेरा मोटा लंड जा चुका था। जब रचना की चूत मे लंड घुसा तो वह बहुत जोर से चिल्लाने लगी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। रचना को मज़ा आने लगा था और मुझे भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था जिस तरीके से मैं रचना की ऍत के अंदर बाहर लंड को कर रहा था। मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था जब मैं और रचना एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे की गर्मी को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया था। मेरे धक्को मे तेजी आती जा रही थी। रचना की चूत से निकलती हुई गर्मी को मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पाया और मेरा वीर्य रचना की चूत में गिर गया था। मैंने अपने लंड को रचना की चूत से बाहर निकाला तो हम दोनों के चेहरे पर खुशी थी।


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