जब उसकी सिसकियाँ उठती हैं

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Jab uski siskiyan uthti hain सुदीप और मैं कॉलेज में साथ में पढ़ते थे सुदीप से मिलने के लिए मैं उसके घर पर गया था। हम दोनों ही अपने भविष्य को लेकर काफी ज्यादा परेशान थे क्योंकि अभी भी हम दोनों की नौकरी नहीं लगी थी। मैं और सुदीप इंदौर के रहने वाले हैं और हम दोनों बचपन से एक दूसरे को जानते हैं लेकिन उस दिन हम दोनों इस बात को लेकर बहुत ज्यादा परेशान थे। मैंने सुदीप को कहा की हमारी नौकरी कहीं ना कहीं जल्द ही लग जाएगी परन्तु अभी तक हम दोनों की नौकरी नहीं लगी थी। हम दोनों के कॉलेज को पूरा हुए अभी कुछ महीने ही हुए थे लेकिन अभी तक हमारी नौकरी नहीं लगी थी। जब एक दिन मैं इंटरव्यू देने के लिए गया तो मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उस कंपनी में मेरा सिलेक्शन हो जाएगा। मेरा उस कंपनी में सिलेक्शन हो चुका था और मैं बहुत ही ज्यादा खुश था। सुदीप की नौकरी अभी तक भी नहीं लगी थी लेकिन मैंने सुदीप से कहा कि तुम्हारी जॉब जल्द ही कहीं ना कहीं लग जायेगी। कुछ ही महीनों में सुदीप की नौकरी भी एक अच्छी कंपनी में लग गयी और वह दिल्ली चला गया था।

दिल्ली की एक बड़ी कंपनी में उसकी नौकरी लग गई थी उसके बाद हम दोनों की सिर्फ फोन पर ही बातें होती थी। हम दोनों बहुत खुश है जिस तरीके से हमारी फोन पर बातें होती है। जब भी हम दोनों एक दूसरे को मिलते हैं तो हमें बहुत अच्छा लगता है। सुदीप और मैं आज भी अपने कॉलेज के दिनों को याद किया करते हैं और जब भी हम लोग अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हैं तो हमें बहुत अच्छा लगता है। हमारे पड़ोस में नई फैमिली रहने के लिए आई, पहले वहां पर जो लोग रहते थे उनसे तो मेरा परिचय था लेकिन अब जो फैमिली वहां आई थी उन लोगों से हमारा परिचय नहीं था। उस वक्त तक पापा मम्मी से भी उनका कोई परिचय नही था लेकिन धीरे धीरे उन लोगों से हमारी बातचीत होने लगी।

उनकी लड़की रोशनी से जब मेरी बात होती है तो मुझे अच्छा लगता रोशनी भी बहुत समझदार और अच्छी लड़की है। वह दिखने में भी बहुत ज्यादा सुंदर है और मेरे दिल में रोशनी को लेकर कुछ तो चल रहा था लेकिन मैं इस बात को समझ नहीं पाया था कि आखिर रोशनी को लेकर मेरे दिल में चल क्या रहा है। मुझे समझ नही आ रहा था कि मैं रोशनी को पसंद करता हूं या उसकी अच्छाइयां मुझे अपनी ओर खींच रही है। मैं इसी कशमकश में था लेकिन मुझे यह समझ नहीं आ रहा था कि आखिर कार रोशनी और मैं एक दूसरे को पसंद करते हैं। हम दोनों एक दूसरे से बात करते थे और एक दूसरे से जब भी हम लोग मिलते तो हम लोग बहुत खुश होते। मैं जब भी परेशान होता तो मैं रोशनी से बात कर लिया करता तो मुझे अच्छा लगता लेकिन अब मुझे लगा कि क्यों ना मैं रोशनी से अपने दिल की बात कह दूं। मुझे भी लगने लगा था कि मैं रोशनी को प्यार करने लगा हूं। मैंने जब उसे अपने दिल की बात कही तो वह बहुत ज्यादा खुश थी और मैं भी बहुत खुश था। रोशनी को बहुत ज्यादा अच्छा लगता जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते और एक दूसरे से बातें किया करते।

हम दोनों की जिंदगी अच्छे से चल रही है रोशनी और मैं एक दूसरे को बहुत ज्यादा प्यार करते हैं। एक दिन रोशनी का मुझे फोन आया उस समय मैं अपने ऑफिस में था। मैंने रोशनी को कहा  रोशनी तुम्हें कुछ काम था। वह कहने लगी नहीं बस यह पूछ रही थी कि तुम ऑफिस से कब वापस लौट रहे हो? मैंने उसे कहा मैं बस थोड़ी देर बाद ही ऑफिस से घर आ रहा हूं। रोशनी ने कहा मुझे तुमसे मिलना था मैंने रोशनी को कहा ठीक है हम लोग घर के बाहर ही मिलते हैं। हम लोग उस दिन घर के बाहर मिले। मैंने रोशनी से कहा चलो हम लोग पार्क में चलता है। हम लोग कॉलोनी के पार्क में चले गए वहां पर हम दोनों बैठे हुए बातें कर रहे थे। रोशनी मुझसे कहने लगी आज तुमसे मिलने का मन बहुत ज्यादा था इसलिए मैंने तुम्हें फोन किया। मैंने रोशनी को कहा तुमने बहुत ही अच्छा किया जो मुझे आज फोन किया। हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे जिस तरीके से हम दोनों का रिलेशन चल रहा था उससे हम दोनों बहुत ज्यादा खुश थे। रोशनी और मैं वहां पर करीब एक घंटे तक बैठे रहे फिर हम दोनों घर चले आए। अगले दिन मैं घर पर ही था और मुझे रोशनी का फोन 11:00 बजे आया।

जब उसका फोन मुझे आया तो मैंने रोशनी से कहा चलो आज कहीं चले। वह मुझे कहने लगी हां मैं भी तुमसे यह बात कहना चाह रही थी। हम दोनों ने उस दिन साथ में चलने का फैसला किया  और हम लोग पहले तो शॉपिंग करने के लिए गए उसके बाद हम लोगों ने मूवी देखी। हम लोगों ने उस दिन साथ में डिनर किया मुझे काफी अच्छा लगा जब उस दिन रोशनी और मैंने साथ में समय बिताया। अब हम लोग घर वापस लौट आए थे। जब हम लोग घर वापस लौटे तो मैं और रोशनी उस रात फोन पर देर तक बातें करते रहे और हम लोगों की उस दिन फोन पर बहुत देर तक बातें हुई। मुझे काफी अच्छा लगा लेकिन अब मुझे नींद आ रही थी इसलिए मैंने रोशनी से कहा मैं सो रहा हूं। वह मुझे कहने लगी हां मुझे भी काफी नींद आ रही है। अगले दिन मैं रोशनी को मिला मै जब भी रोशनी को मिलता तो मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लगता और उसे भी काफी खुशी होती। हम दोनों एक दूसरे के साथ जिस तरीके से अपने रिलेशन को आगे बढ़ा रहे हैं वह बहुत ही अच्छा है।

हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश हैं और मुझे बहुत अच्छा लगता है जब भी मैं और रोशनी एक दूसरे के साथ होते हैं। रोशनी का घर पर आना हो ही जाता था। वह एक दिन मुझसे मिलने के लिए घर पर आई हुई थी उस दिन पापा अपने ऑफिस गए हुए थे और मैं घर पर ही था। मां अपनी सहेली से मिलने के लिए गई हुई थी घर पर सिर्फ मैं और रोशनी थे। हम दोनों एक दूसरे के साथ बैठे हुए थे तभी मेरा हाथ रोशनी की जांघ पर पड़ा। वह मुझसे चिपकने की कोशिश करने लगी थी और जब वह मुझसे चिपकने लगी तो मेरे अंदर एक अलग ही आग पैदा हो रही थी और मेरा लंड भी कठोर होता जा रहा था। मैंने रोशनी को अपनी ओर खींचा और उसके होंठों को चूम लिया। मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू किया तो उसके होंठों का रसपान में बड़े अच्छे से कर रहा था। मेरे हाथ रोशनी के स्तनों की ओर बढ़ रहे थे। जिस तरीके से मैं और रोशनी एक दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे वह हम दोनों के लिए ही अच्छा था मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था।

उसने मेरी चैन को खोला और मेरे लंड को बाहर निकाल दिया। जब उसने मेरे लंड को बाहर निकाला तो वह मुझे कहने लगी तुम्हारा लंड बहुत ही ज्यादा मोटा है। जब वह मेरे लंड को चूसती तो मैंने उसे कहा मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा है। मैं उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को तेजी से किए जा रहा था। मेरा लंड बहुत कठोर हो चुका था और जिस तरीके से मैं उसे चोद रहा था उससे मुझे मज़ा आ रहा था। हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ही ज्यादा खुश थे। मेरा लंड तेजी से उसकी चूत के अंदर बाहर होता। मैंने रोशनी के दोनों पैरों को ऊपर उठा लिया था। जब मैंने देखा उसकी चूत से खून निकल रहा है तो मेरे अंदर की आग और भी ज्यादा बढने लगी थी और मेरे धक्के और भी ज्यादा तेज होने लगे। मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था वह भी रह नहीं पा रही थी। मैंने रोशनी से कहा मुझे तुम्हें चोदने में मजा आ रहा है मैं उसे बड़ी तेजी से चोदता जा रहा था। हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बडे अच्छे से बढ़ा रहे थे और रोशनी की चूत से निकलता हुआ खून मेरे अंदर की आग को और भी बढ़ा रहा था।

अब मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के दिए जा रहा था वह जोर से सिसकारियां ले रही थी। वह जिस तरीके से सिसकारियां ले रही थी उससे मेरी गर्मी बढ रही थी। जब मेरा माल बाहर की तरफ गिरा तो उसने मुझे कहा तुमने मेरी चूत मे अपने माल को गिरा दिया है कहीं कुछ होगा तो नहीं, इस बात से वह बहुत ज्यादा घबरा रही थी। मैंने रोशनी को कहा तुम्हें घबराने की जरूरत नहीं है कुछ भी नहीं होगा। हम दोनों ने उस दिन साथ में बहुत अच्छा समय बिताया और फिर रोशनी घर चली गई थी। जब वह घर गई तो उस रात वह मुझसे फोन पर सिर्फ यही बात कर रही थी कि मुझे बहुत डर लग रहा है। मैंने उसे समझाया और कहा तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है तब जाकर उसने मेरी बात मानी। हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ही ज्यादा खुश हैं और जब भी हम लोगों को सेक्स करने की इच्छा होती है तो मैं रोशनी को घर पर बुला लिया करता हूं और हम दोनो एक दूसरे के साथ सेक्स के मजे ले लिया करते है।


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