हैंडसम लड़के को देखकर दिल फिसल गया

Handsome ladke ko dekhkar dil fisal gaya:

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दोस्तों, कैसे हैं आप लोग? मेरा नाम राधिका है और मैं दिल्ली की रहने वाली हूं। मेरी उम्र 23 वर्ष है और मैं दिल्ली से कॉलेज कर रही हूं। मेरा यह कॉलेज का आखरी वर्ष है। मैं बड़ी ही बिंदास लड़की हूं और मुझे फैशन का बहुत शौक है। मैं अपने कपड़ों पर बडा ध्यान देती हूं। एक दिन मैं घर पर थी उस दिन मेरी मम्मी कहने लगी बेटा तुम मेरे साथ आज मार्केट चलो। मैंने मम्मी से कहा कि मम्मी आप ही चली जाओ मैं आपके साथ नहीं आ सकती लेकिन मेरी मम्मी कहने लगी कि तुम मेरे साथ चलो मैं अकेली किसके साथ जाऊंगी। मैंने सोचा चलो मम्मी अब जिद कर रही है तो चली ही जाती हूं। मैं अपनी मम्मी को अपने साथ अपनी स्कूटी में ले कर चली गई। हमारे घर के पास ही मार्केट है हम लोग वहां चले गए। मैंने अपनी मम्मी से कहा कि आपको क्या सामान लेना है? मम्मी कहने लगे कि मुझे अपने कपड़े सिलवाने के लिए देना है। मेरे मम्मी ने टेलर को कपड़े दये और उसके बाद मेरी मम्मी के और भी छोटे-मोटे काम थे। जब हम लोग घर लौट रहे थे तो मम्मी कहने लगी मैं सब्जी भी ले लेती हूं।

हम लोग सब्जी लेने लगे और उसके बाद हम लोग जैसे ही घर पहुँचे तो उस वक्त मेरे मौसा जी घर आ चुके थे। मैंने अपने मौसा जी को देखा तो मैंने उन्हें कहा मौसा जी आप आज हमारे घर कैसे आ गए। मौसा जी कहने लगे कि बस बेटा सोचा तुम लोगों से मिल लूँ। मौसा जी के हाथ में मिठाई का डब्बा था उन्होंने मिठाई मेरी मम्मी को दी और कहा कि रोशनी का रिश्ता तय हो चुका है। मेरी मम्मी तो बड़ी ही शॉक्ड हुई और कहने लगी कि मुझे तो इसके बारे में कुछ पता ही नहीं था। मुझे तो किसी ने भी इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी। वह कहने लगे बस आपको क्या बताऊं रोशनी ने हीं लड़का पसंद कर लिया था और जब हम लड़के से मिले तो हमें भी वह अच्छा लगा और हम लोगों ने दोनों का रिश्ता पक्का करवा दिया। बस अब जल्द ही उसकी शादी भी करवा देंगे। मैं भी यह सुनकर बड़ी हैरान हो गई और मैंने अपने मौसा जी से कहा कि मौसी तो हमसे मिलने भी नहीं आती। पता नहीं उन्हें अब हमारे घर में आना अच्छा क्यों नहीं लगता। वह कहने लगे बेटा ऐसी कोई बात नहीं है उसकी तबीयत ठीक नहीं रहती इसलिए वह नहीं आ पाती।

यह कहते हुए मौसा जी कहने लगे बेटा मैं अब चलता हूं। मुझे देर हो रही है। मुझे कहीं और भी जाना है। मैंने उन्हें कहा कि आप कुछ देर रुक जाइए थोड़ी देर बाद आप चले जाना। मेरी मम्मी ने भी उन्हें रुकने के लिए कहा और कहा कम से कम चाय तो पी कर चले जाइए लेकिन वह रुके नहीं और कहने लगे मुझे देर हो रही है मैं फिर कभी आपके घर आता हूं। यह कहते हुए वह चले गए। मैं और मेरी मम्मी आपस में बात करने लगे। मैंने मम्मी से कहा मुझे तो रोशनी ने इस बारे में बिल्कुल भी नहीं बताया। मेरी मम्मी कहने लगी तुम्हें तो रोशनी ने नहीं बताया लेकिन मुझे तो मेरी बहन ने हीं कुछ भी नहीं बताया और बड़े ही चुपके से उन्होंने उसकी सगाई भी कर दी। मेरी मम्मी ने तुरंत मेरी मौसी को फोन किया और कहा कि लगता है तुम्हें अब मुझसे बात ही नहीं करनी। मेरी मौसी भी उस दिन बहुत शर्मिंदा थी वह कहने लगी नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। मेरी मम्मी भी फोन स्पीकर पर डाल दिया था। मेरी मम्मी कहने लगी चलो कोई बात नहीं तुमने हमें नहीं बताया मैं तुमसे बहुत नाराज हूं। मेरी मौसी और मेरी मम्मी कुछ देर तक बात करते रहे और उसके बाद मेरी मम्मी ने फोन रख दिया। अब धीरे-धीरे समय बीतता गया और जब मेरी मौसी का एक दिन फोन आया तो वह कहने लगी रोशनी की शादी का दिन हम लोगों ने तय कर दिया है। उस दिन मेरी मौसी ने ज्यादा बात नहीं की। जब उसके अगले दिन वह हमारे घर आए तो उन्होंने सारी बात बताई और कहा कि बस दीदी यह सब जल्दी बाजी में हुआ और हम लोग तो बिल्कुल भी समझ नहीं पाए कि हमें क्या करना चाहिए। मेरी मम्मी ने कहा लड़के वाले तो जयपुर में रहते हैं तो क्या वह लोग यहां बरात लेकर आएंगे या फिर आप लोग एक साथ ही प्रोग्राम करवाने वाले हो? मेरी मौसी कहने लगी कि नहीं उन लोगों ने जयपुर में सारी व्यवस्था की है। हम लोग जयपुर में ही शादी करवा रहे हैं। मेरी मम्मी कहने लगी चलो ठीक है रोशनी का घर बस रहा है और उसकी शादी अच्छे घर में हो रही है। मुझे बहुत खुशी है।

जब रोशनी की शादी होने वाली थी तो उस वक्त मैं जयपुर चली गई। मेरे साथ मेरे परिवार के लोग भी थे। वह लोग होटल में ही रुके थे और मैंने सोचा मैं मार्केट घूम लेती हूं। मुझे अपने लिए कुछ खरीदना था इसलिए मैं मार्केट घूमने के लिए निकल पड़ी। मैं जब सामान देख रही थी तो मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था लेकिन जब मैं एक दुकान में गई तो वहां पर बढ़िया सा एक गाउन था। मैंने उन्हें कहा कि भैया यह गाउन मुझे निकाल कर दिखाना। उन्होंने वह डमी से गांव निकाल कर मुझे दिखाया। मैंने वह गांव खरीद लिया और उसके बाद मैं वहां से चली गई लेकिन जब मैं घर पहुंची तो मेरा पर्स वहीं छूट चुका था। मेरे पर्स में उस दिन काफी पैसे थे। मैं बहुत टेंशन में हो गई और मुझे समझ नहीं आया कि मैंने वह पर्स कहां छोड़ा। तब तक रात भी काफी हो चुकी थी और यदि मैं इस बारे में अपनी मम्मी पापा को बताती तो वह लोग भी गुस्सा हो जाते इसलिए मैंने इस बारे में किसी को भी नहीं बताया। रात के वक्त मेरे फोन में एक फोन आया। वह कहने लगा क्या आप राधिका बोल रही हैं? मैंने उन्हें कहा हां मै राधिका बोल रही हो। वह कहने लगे मैडम आपका पर्स आज हमारी दुकान मे छूट था मैं उस दुकान का ओनर बोल रहा हूं। मैंने उन्हें कहा हां उसमें काफी पैसे भी हैं।

वह कहने लगे मैं आपको घर आकर आपका पर्स वापस कर देता हूं। मैंने उन्हें अपना एड्रेस दिया वह जब मए बताए पते पर आए। मैंने देखा वह एक स्मार्ट सा लड़का है। मैंने उसे कहा आप तो सुबह के वक्त दुकान में नहीं थे। वह कहने लगा हां मैं सुबह दुकान में नहीं था लेकिन वह शॉप मेरी है। उसने अपना नाम बताया उसका नाम संजय था। उसे देखकर मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी। उसकी हाइट 6 फुट से ऊपर रही होगी। मैं उस पर फिदा हो गई। मैं उसे इतना घूर कर देख रही थी कि वह मुझे कहने लगा आप मुझे इतनी घूर कर क्यो देख रहे हो। मेरी नजरे उस पर से हट ही नहीं रही थी। उसने मुझे अपनी कार में बैठाया तो हम दोनो कार से थोडा आगे चले गए। वह मुझे एक फ्लैट में लेकर चला गया। जब मैं फ्लैट में गई तो मै डर रही थी उसने मुझे अपनी बाहों में लिया तो मैं उसकी बाहों में अपने आपको बहुत अच्छा महसूस करने लगी। जैसे ही संजय ने मेरे होठों का रसपान किया तो मुझे बहुत अच्छा लगा मैं भी उसका पूरा साथ देने लगी। मैंने उसके होंठो को बहुत देर तक चूसा। हम दोनो ही उत्तेजित हो गए। मैंने अपने कपड़े उतार दिए उस दिन मैंने लाल रंग की पहनी थी। मै पूरे मूड में हो गई मै उसका लंड अपनी योनि में लेने के लिए उतावली हो गई। जैसे ही संजय का 9 इंच मोटा लंड मेरी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो मै चिल्लाने लगी। मेरी योनि से खून निकलने लगा था मैंने पहली बार किसी से अपनी चूत मरवाई थी लेकिन उसे देखकर मैं अपने आपको बिल्कुल भी ना रोक सकी और मैं अपनी चूत मरवाने के लिए उतावली हो गई। जैसे जैसे मुझे संजय धक्के मारता तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैं अपने पैरों को चौड़ा कर रही थी वह मुझे जोश मे चोद रहा था। वह कहने लगा मुझे तुम्हारी चूत मारने में बहुत मजा आ रहा है। मुझे नहीं पता था कि तुम मुझे देखकर इतनी पागल हो जाओगी। मैंने उसे कहा तुम्हें देख कर मेरी दिल की धड़कन बढ़ने लगी और ना जाने मुझे ऐसा क्या हुआ कि मैं तुमसे अपनी चूत मरवाने के लिए उतावली हो गई। यह कहते हुए उसने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया और मेरी चूत पर बड़ी तेज गति से प्रहार करना शुरू कर दिया। उसने मेरी चूतडो का रंग लाल कर दिया। मुझे बहुत मजा आने लगा। जब मैं झड़ने वाली थी तो मेरी चूत ने गर्म पानी बाहर की तरफ छोड़ना शुरू किया और उसके कुछ क्षणों बाद संजय का वीर्य मेरी योनि में गिर गया।


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