हार मानती चूत

Antarvasna, hindi sex story:

Haar maanti chut मैं चाहता था कि कुछ दिनों के लिए मैं पापा मम्मी के पास जाऊं पापा और मम्मी अहमदाबाद में रहते हैं पापा का अपना कपड़ों का कारोबार है और मां घर का काम संभालती हैं। मैं मुंबई में नौकरी कर रहा था और काफी वर्षों से मैं मुंबई में ही नौकरी कर रहा था मैं चाहता था कि कुछ दिनों के लिए मैं छुट्टी लेकर घर जाऊं तो मैं कुछ दिनों के लिए घर चला आया। जब मैं घर आया तो पापा और मम्मी काफी खुश थे। उस दिन मैं देर रात से घर पहुंचा था इसलिए घर आकर रात का डिनर करने के बाद मैं सो चुका था। अगले दिन पापा जल्दी उठ चुके थे मैं भी 7:00 बजे उठ गया था पापा उस वक्त अखबार पढ़ रहे थे मैं पापा के साथ बैठा हुआ था। पापा और मैं एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो मैंने पापा को कहा कि पापा क्या आज आप काम पर नहीं जा रहे हैं तो पापा कहने लगे कि नहीं गौरव बेटा आज मैं घर पर ही हूं। पापा चाहते थे कि वह मेरे साथ में कुछ समय बिताए। पापा ने मुझसे बात की और कहा कि गौरव तुम मेरे बिजनेस को क्यों नहीं संभाल लेते तुम्हें नौकरी करने की क्या जरूरत है। मैंने पापा से कहा कि पापा मैं आपके बिजनेस को संभालना तो चाहता हूं लेकिन मुझे कुछ समय और नौकरी करने दीजिए उसके बाद मैं आपके बिजनेस को संभाल लूंगा।

मैं पापा को सीधे तौर पर तो मना नहीं कर सकता था लेकिन मैं अपनी नौकरी से खुश था कुछ दिनों तक मैं घर पर ही रहा और पापा के साथ मैं दुकान पर भी जाने लगा। मैं पापा के साथ दुकान पर जाता तो मुझे अच्छा लगता और थोड़े दिनों बाद मैं मुंबई वापस लौट गया था। जब मैं मुंबई वापस लौटा तो उसके कुछ दिनों के बाद ही पापा की तबीयत खराब हो गई और मुझे घर आना पड़ा। जब मैं घर आया तो पापा ने मुझे बताया कि मैं चाहता हूं कि बेटा तुम मेरे काम को सम्भालो। मैंने पापा की बात मान ली और मैंने मुंबई में अपने ऑफिस से रिजाइन दे दिया था उसके बाद मैं पापा का कारोबार संभालने लगा। मैं काफी खुश था जिस प्रकार से मैं पापा के कारोबार में हाथ बटा रहा था पापा और मैं अब एक साथ काम संभालने लगे थे। दुकान पर पापा के काफी पुराने कस्टमर भी आया करते थे जब भी वह दुकान पर आते तो पापा उनसे मेरा परिचय करवा देते क्योंकि अधिकांश लोग मुझे नहीं जानते थे लेकिन अब काफी लोगों से मेरी पहचान होने लगी थी। एक दिन पापा के एक परिचित दुकान में आए हुए थे उनकी बेटी भी उनके साथ आई हुई थी उनकी बेटी मुझे बार बार देख रही थी और उसे देख कर मुझे अच्छा भी लग रहा था। मैं भी बार बार ना चाहते हुए उसकी तरफ देख रहा था मुझे उसका नाम भी पता चल चुका था। उसके बाद वह दुकान पर अक्सर आने लगी मैं और महिमा एक दूसरे से बातें करते तो हम दोनों को अच्छा लगता मैं चाहता था कि मैं महिमा को डेट करूं और मैंने महिमा को डेट करना शुरू कर दिया। हम दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे थे मैं महिमा के साथ में समय बिता कर काफी खुश रहता और महिमा को भी मेरा साथ बहुत ही अच्छा लगने लगा।

हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे और यह बात मेरे पापा और मम्मी को भी पता चल चुकी थी। पापा पहले से ही महिमा के परिवार वालों को जानते थे इसलिए उन्होंने मुझे कहा कि बेटा महिमा बहुत ही अच्छी लड़की है। पापा भी चाहते थे कि मेरी और महिमा की शादी हो जाए उन्हें हम दोनों के रिश्ते से कोई एतराज नहीं था और अब मैं भी चाहता था कि मैं महिमा से शादी कर लूं लेकिन महिमा को कुछ समय चाहिए था। मैंने भी महिमा की इस बात को मान लिया और हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी अच्छा समय बिताया करते। महिमा हमारे घर पर भी आने लगी थी महिमा जब घर पर आती तो उसे बहुत ही अच्छा लगता और मुझे भी बहुत अच्छा लगता। एक दिन महिमा ने मुझसे कहा कि गौरव मैं कुछ दिनों के लिए अपने किसी रिश्तेदार के घर जा रही हूं। मैंने महिमा को कहा क्या तुम्हारे साथ कोई और भी जा रहा है तो महिमा कहने लगी कि हां हमारे एक दूर के रिश्तेदार हैं उनकी बेटी की शादी है इसलिए मैं और मम्मी वहां जा रहे हैं। मैंने महिमा को कहा ठीक है और महिमा कुछ दिनों के लिए जयपुर चली गई। महिमा जब जयपुर गई तो मैं महिमा को बहुत ज्यादा मिस कर रहा था हम दोनों की मैसेज पर ही बातें हो रही थी मैं महिमा से मैसेज पर बातें करता तो मुझे अच्छा लगता और महिमा को भी काफी ज्यादा अच्छा लगता। हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ही खुश हैं और मैं महिमा के साथ जब भी होता हूं तो मुझे बहुत अच्छा लगता लेकिन काफी दिन हो गए थे महिमा लौटी नहीं थी। मैंने महिमा को फोन किया तो महिमा मुझे कहने लगी कि गौरव मैं जल्द ही लौट आऊंगी और जब महिमा आई तो उस दिन मैंने महिमा को कहा कि आज मैं तुम्हारे साथ में समय बिताना चाहता हूं। महिमा को भी इस बात से कोई एतराज नहीं था और उस दिन हम दोनों ने साथ में डिनर किया।

मैं और महिमा साथ में डिनर पर गए और महिमा के साथ मैंने एक अच्छा टाइम स्पेंड किया। महिमा के साथ मैं जब भी होता तो मुझे बहुत ही खुशी महसूस होती। मेरे और महिमा के बीच दिन-ब-दिन प्यार बढ़ता जा रहा था हम दोनों एक दूसरे को बहुत ज्यादा प्यार करते हैं। हम दोनों चाहते थे अब हम दोनों एक दूसरे के साथ अकेले में समय बिताए क्योंकि महिमा और मेरे बीच गरमा गरम बातें तो होती ही थी लेकिन मैं महिमा के साथ में सेक्स नहीं कर पाया था परंतु एक दिन हम दोनों ने फैसला किया और उस दिन हम दोनों लॉन्ग ड्राइव पर निकल पड़े। उस दिन मैं महिमा के साथ में था और मैं महिमा की जांघों को सहलाने लगा। महिमा मुझे कहने लगी गौरव मुझे बहुत डर लग रहा है। मैने महिमा को कहा देखो महिमा तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है और वैसे भी मैं तुम्हारे साथ शादी करने के लिए तैयार हूं। मैं और महिमा एक दूसरे के साथ बहुत ही ज्यादा खुश थे। मैंने जब महिमा के सामने अपने लंड को किया तो वह मेरे लंड को देखकर कहने लगी तुम्हारा लंड कितना ज्यादा मोटा है। वह मेरे लंड को हिला रही थी मुझे मज़ा आ रहा था। महिमा को बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। मैं और महिमा एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश थे। मैंने महिमा को कहा मैं तुम्हारी चूत में लंड डालना चाहता हूं। महिमा कहने लगी क्या हम लोग कार में ही सेक्स करेंगे? मैंने महिमा को कहा मैं कहीं पर होटल ले लेता हूं। मैंने एक जगह पर कार रोकी तो वहां पर एक गेस्टहाउस था मैंने वहां पर रूम ले लिया। मैं और महिमा वहां पर चले गए जब हम दोनों वहां पर गए तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और महिमा को भी काफी अच्छा लग रहा था। मैं महिमा की जांघों को सहला रहा था और महिमा के नरम होठों को मैं किस कर रहा था।

जब मैं ऐसा करता तो महिमा को बहुत अच्छा लगता और मुझे भी काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था जिस तरह से मैं महिमा के होठों को किस कर रहा था। मेरे हाथ उसके स्तनों की तरफ बढ़ने लगे थे उससे हम दोनों ही पूरी तरीके से गर्म होने लगे थे। हम दोनों की उत्तेजना इस तरह से बढ़ने लगी मै और महिमा अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहे थे। मैंने उसकी पैंटी को नीचे उतार दिया। मैं महिमा की चूत को चाटने लगा मैं महिमा की चूत को चाट रहा था तो वह उत्तेजित होने लगी और मेरे बालों को वह खींचने लगी। जब वह मेरे बालों को खीच रही तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता और मैं महिमा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करने लगा था। मेरा लंड महिमा की चूत में घुस चुका था क्योंकि मैं रह नहीं पा रहा था इसलिए मैंने महिमा की योनि में अपने लंड को प्रवेश करवा दिया और महिमा की चूत के अंदर मेरा लंड जाते ही वह बहुत जोर से चिल्ला कर बोली मेरी चूत में बहुत ज्यादा दर्द होने लगा है। मैं महिमा को तेजी से चोद रहा था। मैं महिमा के साथ बडे अच्छी तरीके से सेक्स कर रहा था महिमा और मैं एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा ले रहे थे। मैंने महिमा की चूत में अपने माल को गिराकर महिमा की इच्छा को पूरा कर दिया। महिमा बोली तुमने मेरी इच्छा को पूरा कर दिया है मैं बहुत ज्यादा खुश हूं। मैंने महिमा से कहा आज तुम्हारे साथ सेक्स कर के मुझे बड़ा ही अच्छा लगा कुछ देर तक हम दोनों साथ में बैठे हुए थे अब हम दोनों ही एक दूसरे से बातें कर रहे थे। हम दोनों को ही अच्छा लग रहा था लेकिन मै महिमा के साथ दोबारा शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार था।

मैंने महिमा की चूत में अपने लंड को घुसा दिया मेरा लंड महिमा की योनि में जा चुका था। मेरा लंड महिमा की योनि के अंदर घुसा तो मैंने महिमा से कहा मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। महिमा मुझे कहने लगी मैं अपने पैरों को चौड़ा कर रही हूं ताकि तुम अपने लंड को मेरी चूत में घुसा सको। मैं महिमा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को किए जा रहा था और मुझे बड़ा मजा आ रहा था जिस तरीके से मैं महिमा की चूत में लंड को डाल रहा था और मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी। मैं इतना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था मैंने महिमा से कहा मुझे तुम्हारी चूत मार कर आज मजा आ गया। महिमा कहने लगी मुझे भी आज बहुत ही अच्छा लग रहा है। महिमा की चूत मेरे लंड से माल को बाहर की तरफ को खींचने लगी थी और मैंने महिमा की योनि में अपने माल को गिराकर महिमा की इच्छा को पूरा किया और अपनी इच्छा को भी पूरा कर चुका था।


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