गिर गया माल चूत मे तुम्हारी

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Gir gaya maal chut me tumhari मैं जब ऑफिस से घर लौटी तो मैंने देखा रोशन घर पर ही थे रोशन अपने दोस्तों के साथ टीवी देख रहे थे और मुझे यह देखकर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। मैंने रोशन को उस वक्त तो कुछ नहीं कहा क्योंकि रोशन के दोस्त उनके साथ थे इसलिए मैंने उस वक्त उन्हें कुछ भी कहना ठीक नहीं समझा मैं अपने रूम में चली गई। वह लोग काफी देर बाद घर गए उनके जाने के बाद रोशन रूम में आए तो वह मुझे कहने लगे कि दीपिका आज तुम्हारा मूड ठीक नहीं लग रहा है। मैंने रोशन को कहा देखो रोशन मैंने तुम्हें कितनी बार कहा है कि तुम अपने दोस्तों को ऐसे ही घर पर मत बुलाया करो मुझे यह सब बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता है। रोशन बस इसी बात पर मुझ पर बिखर पड़े और कहने लगे कि इसमें मैंने क्या गलत किया है।

मैंने उन्हें कहा आपने कुछ भी गलत नहीं किया है लेकिन आपको मालूम है ना कि आपके दोस्तों ने आपका हमेशा ही फायदा उठाया है और काफी समय से आप घर पर ही खाली बैठे हुए हैं लेकिन आपके दोस्तों ने अभी तक आपकी मदद नहीं की है और मुझे यह सब बिल्कुल भी पसंद नहीं है। रोशन को यह बात बुरी लगी और वह रूम से चले जाए लेकिन मैं अपनी जगह कहीं भी गलत नहीं थी रोशन को अपनी जॉब छोड़े हुए काफी समय हो चुका है लेकिन उनके दोस्तों ने उनकी अभी तक मदद नहीं की। मैं ही घर का खर्चा चला रही हूं मुझे इस बात की कोई भी परेशानी नहीं थी कि मैं घर का खर्चा चला रही हूं लेकिन मुझे सबसे बड़ी दिक्कत इस बात से थी कि अभी तक उन्होंने कुछ किया नहीं है। रोशन चाहते थे कि वह अपना एक स्टार्टअप शुरू करें लेकिन अभी तक मुझे तो ऐसी कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही कि वह अपना स्टार्टअप शुरू करने वाले हैं इस बात से मेरे और रोशन के बीच बहुत झगड़े भी होने लगे हम दोनों के बीच वह प्यार था ही नहीं जो पहले था। रोशन पहले मेरा बहुत ध्यान रखते थे और जब भी मुझे कोई परेशानी होती तो रोशन हमेशा मेरे साथ खड़े नजर आते लेकिन अब रोशन पूरी तरीके से बदल चुके थे। रोशन अपनी ही समस्या में उलझे हुए थे और उन्हें खुद ही समझ नहीं आ रहा था कि उन्हें ऐसे मौके पर क्या करना चाहिए।

मैं भी चाहती थी कि रोशन को सब कुछ जल्द से जल्द मिल जाए जो वह चाहते हैं उनके भी अपने सपने हैं मैं चाहती थी कि उनके सपने पूरे हो जाए लेकिन फिलहाल तो ऐसा कुछ होता हुआ मुझे दिख नहीं रहा था और ना ही मुझे कोई उम्मीद नजर आ रही थी। रोशन और मेरे बीच एक दीवार सी बनती नजर आ रही थी रोशन और मैं साथ में ही कॉलेज पढ़ा करते थे और कॉलेज में ही हम दोनों का प्यार परवान चढ़ा। रोशन ने जब मुझे एक दिन लाइब्रेरी में मिलने के लिए बुलाया तो मैं रोशन को मिलने के लिए चली गई उससे पहले हम दोनों दोस्त ही थे। पहली बार जब मैं रोशन को अकेले में लाइब्रेरी में मिली तो रोशन ने मेरा हाथ पकड़ते हुए मुझे प्रपोज किया मुझे ऐसा लगा कि दुनिया में शायद मुझसे खुशनसीब कोई नहीं है मैं भी रोशन से प्यार करती थी और रोशन के साथ मैं जीवन बिताना चाहती थी। रोशन के प्रपोजल को मैंने स्वीकार कर लिया और हम दोनों ने कुछ समय बाद ही शादी करने का फैसला किया। कॉलेज खत्म होने के बाद ही रोशन भी जॉब करने लगे थे और मैं भी जॉब करने लगी सब कुछ इतना जल्दी में हुआ कि ना तो मुझे कुछ समझने का मौका मिल पाया और ना ही रोशन को कुछ समझने का मौका मिल पाया। जैसा मैं चाहती थी कि रोशन और मैं एक दूसरे को प्यार करें बिल्कुल वैसा ही हुआ और उसके बाद हम दोनों की शादी भी हो गई शादी के बाद हम दोनों साथ में रहने लगे और हम दोनों बहुत खुश थे। हम दोनों ने कभी सोचा भी नहीं था कि हम दोनों के सपने इतनी जल्दी पूरे हो जाएंगे लेकिन धीरे-धीरे शादी को भी समय होने लगा तो रोशन भी पूरी तरीके से बदलने लगे थे और मैं भी शायद बदल चुकी थी। मैं ज्यादा ही अपने बारे में सोचने लगी थी और मुझे लगता था कि रोशन के बदलने के पीछे शायद उनका वह सपना है जिसे वह पूरा करना चाहते हैं। मैंने रोशन को समझाने की कोशिश की यादी आप अपने सपने को पूरा नहीं कर पा रहे हैं तो आपको भी जॉब करनी चाहिए लेकिन रोशन को लगता था कि उन्हें उनके सपनों को पूरा करना है इसलिए तो रोशन अपने सपनों के पीछे दौड़ रहे थे परंतु ना तो रोशन को कोई रास्ता नजर आ रहा था और ना ही मुझे ऐसा कुछ होता हुआ नजर आ रहा था।

रोशन से जब भी मेरी इस बारे में बात हुआ करती तो रोशन हमेशा ही मुझे कहते कि दीपिका हम लोगों ने जब शादी की थी तो उस वक्त तुम्हें यह बात तो मालूम थी ना कि हम दोनों ने एक दूसरे से क्या वादा किया था। मैंने रोशन को कहा मुझे सब कुछ याद है कि मैंने तुम्हें क्या वादा किया था लेकिन उसका मतलब यह नहीं है कि तुम अपनी जिम्मेदारियों से भागने लगो तुम्हे भी तो इस बात का अहसास होना चाहिए कि अब हम लोगों को अपनी आगे की जिंदगी बितानी है और ऐसे कब तक चलता रहेगा। पिछले 6 महीनों से मैं ही घर का खर्चा उठा रही हूँ और मैं जब ऑफिस से थक कर आती हूं तो आप मुझसे बात करना तक ठीक नहीं समझते हैं मुझे इस बात की शिकायत है और यदि आपसे इस बारे में मैं कुछ बात करती हूं तो आपको बुरा लगता है आपने अपने बंद कमरे को ही अपना घर बना लिया है और आपके पास मेरे लिए बिल्कुल समय नहीं होता मुझे इस बात की बहुत ज्यादा शिकायत है और मुझे नहीं लगता कि यह शिकायत इतनी जल्दी दूर होने वाली है अब आप ही बताइए की इस समय मुझे क्या करना चाहिए।

रोशन को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था क्योंकि रोशन के पास कोई जवाब ही नहीं था इसलिए मुझे ही इसका कोई रास्ता निकालना था लेकिन फिलहाल ना तो मेरे पास कोई जवाब था और ना ही रोशन के पास। रोशन को सिर्फ पैसों की जरूरत थी और मैं फिलहाल उनकी यह जरूरत तो पूरा नहीं कर सकती थी क्योंकि मेरे ऊपर घर की सारी जिम्मेदारियां आ गई थी मैं घर का सारा खर्चा उठा रही थी। मैं सोचती कि इससे पहले रोशन कैसे थे और अब वह बहुत ज्यादा बदल चुके है मुझे उम्मीद नजर नहीं आ रही थी कि रोशन पहले की तरह मुझसे कभी बात भी कर पाएंगे। मैं अपने जीवन में संघर्ष कर रही थी मुझे अब रोशन से प्यार की उम्मीद नहीं थी हमारे ऑफिस में एक नया लड़का कुछ दिनों पहले ही आया था। वह अक्सर मेरी तरफ देखता रहता था एक दिन उसने मेरा हाथ पकड़ लिया तो मैंने उसे डांट दिया लेकिन जब मैं घर आई तो मुझे भी लगा कि मुझे भी किसी के साथ की जरूरत है और नीरज ने मेरा बहुत साथ दिया। नीरज के साथ में हर वह सुख का आनंद लेना चाहती थी जो मैं रोशन के साथ नहीं ले पा रही थी रोशन तो अपने कमरे में ही रहते थे वह कभी बाहर ही नहीं आते। मैंने नीरज को घर पर बुला लिया जब नीरज घर पर आया तो मैने नीरज को गले लगाया जब नीरज को मैंने गले लगाया तो मेरे स्तन नीरज से टकराने लगे थे और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। नीरज मेरी तरफ देख रहा था जैसे ही नीरज ने मेरे बदन से कपड़ों को उतारना शुरू किया तो मैं उत्तेजित होने लगी नीरज ने मेरी ब्रा को खोलते हुए अपने मुंह से मेरे होठों को बहुत देर तक चूसना शुरू किया। उसके बाद जब नीरज ने मेरे स्तनों का रसपान करना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और नीरज को भी बड़ा मजा आ रहा था काफी देर तक नीरज ने मेरे स्तनों का रसपान किया मेरे निप्पल से दूध भी बाहर निकलने लगा था।

मैंने नीरज को कहा मेरी चूत के अंदर उंगली को डाल दो? नीरज ने मेरी चूत के अंदर अपनी उंगली को घुसाया नीरज की उंगली मेरी चूत के अंदर तक जा चुकी थी और मैंने अपने दोनों पैरों को खोला मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी निकल रहा था। नीरज ने अपनी जीभ को मेरी चूत पर लगाकर पानी को चाटना शुरू किया और मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से वह मेरे चूत के पानी को चाट रहा था। मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी और ना ही नीरज अपने आपको रोक पा रहा था जैसे ही नीरज ने अपने लंड को मेरी चूत पर रगड़ना शुरू किया तो नीरज के लंड से पानी बाहर निकलने लगा। नीरज ने धीरे-धीरे अपने लंड को चूत के अंदर प्रवेश करवाया और जैसे ही नीरज का लंड मेरी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो मैं चिल्ला उठी। नीरज बहुत तेजी से मुझे धक्के मारने लगा और जिस प्रकार से मुझे धक्के मार रहा था मुझे बहुत आनंद आता मैं अपने दोनों पैरों को खोल लेती ताकि नीरज का लंड आसानी से मेरी चूत के अंदर बाहर प्रवेश हो रहा था।

जिस प्रकार से उसका लंड मेरी चूत के अंदर बाहर होता तो मैं भी अपने आपको रोक नहीं पा रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं नीरज के लंड को अपनी चूत में लेते ही रहूं लेकिन जैसे ही नीरज ने अपने वीर्य को मेरी चूत के अंदर गिराया तो मुझे अच्छा लगा। मैंने अपनी चूत को साफ करते हुए नीरज को कहा तुम मेरी चूत के अंदर दोबारा से अपने लंड को डाल दो? नीरज ने दोबारा से मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया था नीरज ने मुझे घोड़ी बनाया हुआ था वह मेरी चूतड़ों को कसकर पकड़े हुआ था। जिस प्रकार से उसने मुझे धक्के दिए उससे मैं खुश हो गई और मुझे बहुत मजा आने लगा। नीरज को भी बहुत अच्छा लग रहा था वह मुझे कहने लगा आज मुझे बहुत मजा आ रहा है और नीरज लगातार तेजी से मेरी चूत मारे जा रहा था मेरी चूत को उसने अपना बना लिया था। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और बहुत आनंद आ रहा था जिस प्रकार से उसने मेरी चूतडो पर वार किया थोड़ी देर बाद उसने अपने माल को मेरी चूत के अंदर गिराया तो मुझे बहुत ही मजा आ गया।


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