घोड़ी बना के दोबारा चुदाई

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Ghodi bana ke dobara chudai मैं बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रहा था लेकिन अभी तक बस आई नहीं थी मुझे काफी देर हो चुकी थी और मुझे ऑफिस के लिए देर भी हो गई थी लेकिन मेरे पास और कोई रास्ता भी नहीं था सिवाए बस के इंतजार करने के। वहां पर कोई भी ऑटो या टैक्सी मुझे नजर नहीं आ रही थी इसलिए मैं बस का इंतजार कर रहा था मुझे वहां पर करीब आधे घंटे से ऊपर हो चुका था। मुझे बहुत डर सता रहा था कि कहीं मुझे ऑफिस जाने में देरी हो गई तो मेरे बॉस मुझे कुछ कह ना दें इसलिए मैं बहुत ज्यादा टेंशन में था। मेरी नौकरी लगे हुए सिर्फ एक महीना ही हुआ था मेरे मन में ना जाने कितने ही प्रकार के सवाल दौड़ने लगे थे लेकिन तभी बस आ गई। जैसे ही बस आई तो सब लोग बस में बड़ी तेजी से चढ़ने लगे और वहां पर धक्का मुक्की होने लगी। मैं किसी प्रकार से बस में चढ़ गया था लेकिन मुझे बैठने के लिए सीट नहीं मिल पाई थी मैं बस में खड़ा ही था। मैं बस में खड़ा ही था और मेरा मूड बहुत ही ज्यादा खराब हो रहा था कंडक्टर मेरे पास आकर बोला कि भैया टिकट कटवा लीजिए।

मैंने उसे टिकट के पैसे दे दिए, मैंने जब उसे टिकट के पैसे दिए तो उसने मुझे टिकट दिया। मैं अपने मोबाइल को अपनी जेब से निकालकर उसमें टाइम देख रहा था बार बार मैं अपने मोबाइल को अपनी जेब से निकालकर समय देख रहा था मैं काफी ज्यादा टेंशन में था कि मुझे ऑफिस जाने के लिए देर हो रही है। उस दिन किसी प्रकार से मैं ऑफिस तो पहुंच गया था लेकिन मुझे अपने बॉस की डांट सुननी पड़ी और मैं बहुत परेशान हो चुका था। मुझे यह भी डर था कि कहीं कभी मेरी जॉब चली गई तो मेरे घर का क्या होगा क्योंकि मेरे घर की सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर ही है। पापा की तबीयत खराब हो जाने के बाद मेरे ऊपर ही घर की सारी जिम्मेदारी आन पड़ी थी और मेरी बहन की शादी की रिस्पांसिबिलिटी भी मेरे ऊपर ही थी मैं कई बार इस बात को लेकर सोचा करता था। मेरे बहुत ही कम दोस्त है जो कि मुझे समझते थे मेरी जिंदगी में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था मैं बहुत ही ज्यादा परेशान रहता था। एक दिन मेरे दोस्त ने मुझे कहा कि चलो आज हम लोग कहीं चलते हैं उस दिन हम दोनों ने बाहर जाने का फैसला किया। मैं कभी बाहर किसी के साथ जाता तो नहीं था लेकिन उस दिन मैं अपने दोस्त मोहित के साथ चला गया। जब मैं मोहित के साथ गया तो मुझे भी उस दिन काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था।

मेरे दोस्त मोहित ने अपने कुछ दोस्तों को भी इनवाइट किया हुआ था वह लोग शराब पी रहे थे और मैं एक कोने में बैठा हुआ था। तभी मेरे पास एक लड़की आई और उसने मुझे बड़े प्यार से बोला क्या आप ड्रिंक नहीं करते हैं। मैंने उसे कहा नहीं मैं ड्रिंक नहीं करता हूं लेकिन उस दिन उस लड़की के कहने पर मैंने शराब पी ली और मुझे काफी ज्यादा नशा भी हो गया था मैं नशे में हो चुका था मेरे दोस्त को ही मुझे घर छोड़ना पड़ा। मैं घर पहुंचा तो मैं उस दिन घर पहुंचने के बाद सो चुका था अगले दिन जब मैं उठा तो मेरे सर में काफी ज्यादा दर्द हो रहा था। उस दिन मैंने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी मैं बहुत ज्यादा परेशान रहने लगा था लेकिन अब समय के साथ सब कुछ ठीक होने लगा था मेरी दोस्ती अब अंकिता साथ हो चुकी थी। अंकिता के साथ मेरी दोस्ती हो जाने के बाद हम दोनों साथ में काफी अच्छा टाइम बिताने लगे थे। अंकिता के साथ मुझे अच्छा लगता है एक अंकिता ही थी जिससे मैं अपने दिल की बात कह पाता था और उससे बात करके मुझे हमेशा ही अच्छा लगता। जब भी मैं अंकिता के साथ बातें किया करता तो मैं बहुत ही खुश रहता था और वह भी खुश रहती।

हम दोनों एक दूसरे से अपने दिल की बातों को शेयर कर लिया करते थे क्योंकि अंकिता की जिंदगी भी लगभग मेरे जैसी ही थी। उसकी फैमिली में भी सिर्फ वही कमाने वाली थी और मेरे साथ भी बिल्कुल ऐसा ही था इसलिए मैं अंकिता पर बहुत ज्यादा भरोसा करने लगा था और कहीं ना कहीं उससे मैं प्यार भी करने लगा था। अंकिता और मेरे बीच में प्यार होने लगा था और हम दोनों एक दूसरे को बहुत ज्यादा प्यार करने लगे थे लेकिन अभी तक हमने अपने प्यार का इजहार नहीं किया था। मैं चाहता था कि मैं थोड़ा समय लूँ और जब वह समय नजदीक आया तो मैंने अंकिता को अपने दिल की बात बता दी थी। अंकिता को मैं अपने दिल की बात शेयर कर चुका था और हम दोनों बड़े ही खुश थे कि हम दोनों साथ में हैं और हम दोनों का रिलेशन अच्छे से चलने लगा था। हम दोनों एक दूसरे को ज्यादा से ज्यादा समय देने की कोशिश किया करते और जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ में होते तो हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता था। अंकिता कुछ दिनों के लिए अपने मामा जी के घर जाने वाली थी इसलिए उसने मुझे कहा था कि मैं तुमसे मुलाकात नहीं कर पाऊंगी और हमारी शायद फोन पर भी बात नहीं हो पाएगी। मैंने अंकिता को कहा था कि कोई बात नहीं और अंकिता से मेरी काफी दिनों तक कोई बात नहीं हो पाई थी।

मैं अंकिता से बात करने के लिए तड़प रहा था लेकिन उससे मेरी बात नहीं हो पाई थी। काफी दिन हो चुके थे उससे ना तो मैं मिला था और ना ही मेरी उससे कोई बात हो पाई थी इसलिए मैं अंकिता के बारे में सोचने लगा। मेरे पास शायद अब और कोई भी रास्ता नहीं था सिवाय इंतजार करने के। मै अभी तक इंतजार कर रहा था और जब अंकिता मुझे मिली तो मैं बहुत ज्यादा खुश था। उसे दिन हम दोनो ने एक दूसरे को गले लगा लिया। मैंने अंकिता को गले लगाते हुए कहा मैं तुम्हें कितना मिस कर रहा था। वह मुझे कहने लगी मैं भी तुम्हें बहुत ज्यादा मिस कर रही थी। उस दिन जब मैंने अंकिता से कहा आज मैं तुम्हारे साथ समय बिताना चाहता हूं। अंकिता ने मुझे कहा हां क्यों नहीं। अंकिता  मेरी बात मान गई हम दोनों ने साथ में रुकने का फैसला कर लिया था। मैं अंकिता के साथ अपने दोस्त के घर चला गया। मै जब अपने दोस्त के घर गया तो वहां पर हम दोनों कुछ देर तक तक एक दूसरे से बातें करते रहे फिर मैं अंकिता की झील सी आंखों में देखने लगा और उसकी आंखों में जैसे मैं खोने लगा था।

मैंने उसके होठों पर अपनी उंगली का स्पर्श किया तो वह भी गर्म होने लगी थी और उसकी गर्मी बहुत ज्यादा बढने लगी थी वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी। मेरे अंदर की आग भी बढने लगी थी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैंने अंकिता के होंठो से अपने होठों को टकराना शुरू कर दिया था। जब मैंने उसके होठों से अपने होठों को टकराना शुरू किया तो मेरे अंदर की गर्मी बढने लगी थी वह पूरी तरीके से गर्म होने लगी थी। कुछ देर तक अंकिता के स्तनों का रसपान करने के बाद जैसे ही मैंने अंकिता की योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा। मैंने अंकिता की चूत मे अपने लंड को घुसा दिया था उसकी योनि में मेरा लंड जा चुका था। उसकी चूत से खून की पिचकारी निकल चुकी थी वह मेरी बाहों में थी। मैं अंकिता को तेज गति से धक्के दिए जा रहा था अंकिता बहुत ज्यादा खुश थी।

हम दोनों एक दूसरे के साथ बड़े ही खुश थे। हम दोनों को बहुत ज्यादा मजा आ रहा था जिस तरीके से हम दोनों ने एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध बनाए। मैंने अपने माल को अंकिता की चूत मे गिरा दिया था। मैंने उसे घोडी बनाने के बाद दोबारा से चोदना शुरू किया। जब मैं उसे चोदने लगा तो मुझे मजा आने लगा और उसे भी मजा आ रहा था। हम दोनों एक दूसरे के साथ बड़े ही खुश थे। जिस तरीके से हम लोगों ने शारीरिक संबंध बनाए थे उससे हम दोनों का बड़ा ही अच्छा लगा था। हम दोनों जब भी एक दूसरे से मिलते तो एक दूसरे की गर्मी को शांत कर दिया करते। हम दोनों एक दूसरे के साथ बैठे खुश थे हम दोनों के बीच ना जाने कितनी ही बार शारीरिक संबंध बनते रहते है।


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