घर पर नहाने के लिए आते रहना

Antarvasna, kamukta:

Ghar par nahane ke liye aate rahna मैं अपनी क्लास में बैठा हुआ था कॉलेज का मेरा आखरी वर्ष था, मैं अपने ग्रेजुएशन की पढ़ाई कानपुर के कॉलेज से कर रहा था उस वक्त मेरा दोस्त रोहित मेरे पास आया। रोहित उस दिन कॉलेज देर से आया था तो मैंने उससे पूछा कि आज तुम कॉलेज देर से आ रहे हो उसने मुझे कहा कि हां मुझे आज घर से निकलने में ही देर हो गई थी जिस वजह से कॉलेज पहुंचने में मुझे देर हो गई। रोहित और मेरी मुलाकात कॉलेज के पहले दिन ही हुई थी मैं जिस स्कूल में पढ़ता था उसी स्कूल में रोहित का भाई भी पढ़ता था इसलिए हम दोनों की अच्छी बातचीत हो गई रोहित और मैं अच्छे दोस्त बन गए। रोहित ने मुझे बताया कि वह कुछ दिनों के लिए घूमने के लिए कोलकाता जा रहा है मैंने रोहित से कहा लेकिन तुम कोलकाता किसके साथ जा रहे हो उसने मुझे बताया कि हमारा पूरा परिवार कोलकाता जा रहा है। मैंने रोहित को कहा चलो यह तो बहुत ही अच्छी बात है कि तुम कॉलेज की छुट्टियों के दौरान अपनी छुट्टियों का पूरा एंजॉय कर पाओगे।

रोहित मुझे कहने लगा की हां सुधीर तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो मैं कम से कम कोलकाता तो घूम ही आऊंगा मैंने उससे पूछा कि कोलकाता वह लोग किसके पास जा रहे हैं तो रोहित ने मुझे बताया कि कोलकाता में उसकी मौसी रहती हैं। मैंने रोहित को कहा चलो यह तो बहुत अच्छी बात है, हम लोग बात कर ही रहे थे उसके कुछ देर बाद ही हमारे प्रोफेसर भी आ गए और हमारी क्लास शुरु हो गई। जब हमारी क्लास खत्म हुई तो उसके बाद रोहित और मैं हमारे कॉलेज की कैंटीन में साथ में बैठे हुए थे रोहित मुझे कहने लगा कि सुधीर तुमने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई के बाद क्या सोचा है। मैंने सुधीर को कहा फिलहाल तो मैंने ऐसा कुछ भी नहीं सोचा है लेकिन पिताजी चाहते हैं कि मैं उनके ही बिजनेस को संभालू रोहित मुझे कहने लगा कि सुधीर तुम्हारे लिए तो बहुत ही अच्छा मौका है कि तुम्हारे पिताजी चाहते हैं कि तुम उनके बिजनेस को आगे संभालो।

मैंने रोहित को कहा कि मैं पिताजी के बिजनेस को फिलहाल तो नहीं संभालना चाहता मैं कुछ समय तक नौकरी करना चाहता हूं या फिर अपनी आगे की पढ़ाई करना चाहता हूं। उस दिन हम लोगों की बात काफी देर तक हुई और उसके बाद हम लोग अपनी क्लास में चले गए और उस दिन हमारा कॉलेज खत्म होने के बाद हम लोग घर चले आए। थोड़े ही समय बाद रोहित भी कोलकाता चला गया और जब वह कोलकाता से वापस लौटा तो कोलकाता के बारे में ही कुछ दिनों तक रोहित बात करता रहा। अब हमारे ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी पूरी होने वाली थी और ग्रेजुएशन की पढ़ाई खत्म होने के बाद मैं अपने पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी कानपुर से ही करना चाहता था लेकिन जब मुझे रोहित ने कहा कि हम लोगों को अपने आगे की पढ़ाई कोलकाता से करनी चाहिए तो मैंने भी सोचा कि क्यों ना कोलकाता से ही मैं अपने पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई करूं। इस बारे में मैंने अपने पिताजी से बात की तो वह मुझे कहने लगे कि बेटा तुम यहीं कानपुर में रहकर क्यों पढ़ाई नहीं कर लेते मैंने उन्हें कहा कि पिताजी मुझे कोलकाता में पढ़ाई करनी है और फिर वह भी इस बात के लिए तैयार हो गए। कोलकाता में हम लोगों ने ऐडमिशन के लिए दाखिला ले लिया और उसके बाद जिस कॉलेज में हम लोगों ने दाखिला लिया था उसी हॉस्टल में हम लोग रहने लगे। कुछ दिनों तक तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा क्योंकि मुझे अपने परिवार के साथ रहने की आदत थी इसलिए कुछ दिनों तक मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा लेकिन बाद में धीरे धीरे मुझे अच्छा लगने लगा था कॉलेज में भी नए दोस्त बनने लगे थे और अब हमारे काफी अच्छे दोस्त भी बन चुके थे। रोहित और मैं एक ही रूम में रहते थे एक दिन रोहित ने मुझे कहा कि सुधीर आज हम लोग मेरी मौसी के घर चलते हैं मैंने उससे कहा ठीक है हम लोग तुम्हारी मौसी के घर चलते हैं और अब हम लोग रोहित की मौसी के घर चले गए। हम लोग जब उनके घर पहुंचे तो वह लोग घर पर ही थे उस दिन उनका पूरा परिवार घर पर ही था क्योंकि रविवार का दिन था और जब रोहित ने मुझे अपनी मौसी से मिलवाया तो मुझे उनसे मिलकर काफी अच्छा लगा वह बहुत ही अच्छी है।

जब रोहित ने मुझे यह बताया कि उसकी मौसी स्कूल में टीचर भी है तो मैंने उसकी मौसी से कहा कि रोहित आपकी बड़ी तारीफ करता है। वह बहुत ही ज्यादा खुश थी और उनके पति भी उस दिन घर पर ही थे उनसे भी मिल कर हमें काफी अच्छा लगा हम लोगों ने उस दिन साथ में ही लंच किया और काफी देर तक उनके घर पर रुकने के बाद हम लोग अपने हॉस्टल में वापस लौट आए थे। हम लोग अपने हॉस्टल में वापस लौट आए थे और अगले दिन से हम लोग अपने कॉलेज जाने लगे सब कुछ बिल्कुल सामान्य तरीके से चल रहा था और कोलकाता में हम लोग अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे रहे थे। समय का पता ही नहीं चला कि कब इतनी तेजी से समय बीतता चला गया और हम लोगों को कोलकाता में करीब 6 महीने हो चुके थे इसी बीच हमारे कॉलेज की छुट्टियाँ पढ़ चुकी थी तो मैंने और रोहित ने अपने घर जाने का फैसला किया। हम लोग छुट्टियों में कानपुर चले गए काफी समय बाद कानपुर में मुझे बहुत अच्छा लगा मैं अपने परिवार के साथ समय बिताकर बहुत ही खुश था। हमारी ज्यादा दिन की छुट्टियां नहीं थी इसलिए हम लोग वापस कोलकाता लौटने की तैयारी कर रहे थे और कुछ ही दिन में हम लोग कोलकाता लौट आए।

एक दिन हॉस्टल मैं पानी नहीं आ रहा था उस दिन रोहित ने अपनी मौसी को फोन किया और हम लोग उनके घर चले गए क्योंकि उस दिन हॉस्टल में पानी की कोई समस्या हो गई थी जिस वजह से हम लोगों को रोहित की मौसी के घर जाना पड़ा। रोहित की मौसी का नाम संजना है हम लोग उनके घर चले गए जब हम लोग उनके घर पर गए तो रोहित नहाने के लिए बाथरूम में चला गया। मैं और संजना मौसी साथ में ही बैठे हुए थे हम लोग एक दूसरे से बात कर रहे थे तो उन्होंने मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा। मैंने उन्हें मना कर दिया मैंने उन्हें कहा मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है वह मेरी तरफ देखकर कहने लगी कि तुम तो बड़े अच्छे दिखते हो। उन्होंने यह कहते हुए मेरे कंधे पर हाथ रख लिया जब उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा तो मैंने उनके हाथ को पकड़ लिया उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ते हुए अपनी जयंघ पर लगा दिया और मैं उनकी जांघ को दबाने लगा। मैं जब उनकी जांघों को दबा रहा था तो उन्होंने गरम सिसकिया लेनी शुरू कर दी मैंने अपने हाथ से उनकी चूत को दबा दिया। मैंने उनकी सलवार के नाडे को खोलते हुए उनकी चूत के अंदर डाल दिया। वह कहने लगी तुम तो बड़े ही रोमांटिक किस्म के हो और यह कहते ही उन्होंने मेरे लंड को दबा दिया और मेरे लंड को मेरी पैंट से बाहर निकलते ही अपने हाथों में उन्होंने ले लिया और उसे हिलाना शुरू किया। जब वह मेरे लंड को हिला रही थी तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और उन्हे भी बहुत मजा आ रहा था। उन्होंने काफी देर तक ऐसे ही किया और मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बड़ा कर रख दिया। मेरी गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी मैं उनकी चूत के अंदर अपने लंड को डालना चाहता था। वह मेरी गोद में आकर बैठ गई मैंने उनके सलवार को खोलते हुए उनकी पैंटी को उतार दिया मेरा लंड खड़ा हो चुका था। जैसे ही उन्होंने मेरे मोटे लंड को अपनी चूत पर लगाया मुझे बहुत ही मजा आया और वह अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे करने लगी।

वह जब अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे कर रही थी उससे मुझे बहुत ही मजा आ रहा था वह मेरे अंदर की गर्मी में लगातार बढ़ती जा रही थी। मेरी गर्मी को उन्होंने इस कदर बढ़ा दिया था कि मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गया था और उसके बाद तो जैसे उन्होंने मेरे लंड को पूरी तरीके से छिल कर रख दिया था। वह मेरे लंड के ऊपर नीचे अपनी चूतड़ों को बड़ी तेजी से कर रही थी वह बहुत ही तेज आवाज मे सिसकिया ले रही थी। मैंने उन्हें कहा मौसी कहीं रोहित ने हमें देख लिया तो वह कहने लगी चलो अंदर रूम में चलते हैं और हम लोग रूम में चले आए। उन्होंने अब अपनी चूतडो को मेरी तरफ किया और मैंने उन्हें घोड़ी बनाकर चोदना शुरू कर दिया। वह अपनी चूतडो मुझसे मिलाए जा रही थी उनका पूरा बदन मैंने हिला कर रख दिया था। वह मुझे कहने लगी मैं बिल्कुल भी नहीं रह पा रही हूं मैंने उन्हें कहा रहा तो मुझसे भी नहीं जा रहा है। उन्होंने मेरा साथ बखूबी निभाया उनकी चूतडो का रंग लाल होने लगा था मैं भी समझ गया कि वह झडने वाली है।

वह पूरी तरीके से संतुष्ट हो चुकी थी और हम लोगों ने करीब 10 मिनट तक चूत चुदाई का आनंद लिया और उसके बाद उन्होंने मेरे लंड को मुंह के अंदर समा लिया और जैसे ही उन्होंने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर समाया तो वह मेरे लंड को बडे अच्छे तरीके से चूसने लगी और मेरे अंदर की गर्मी को उन्होंने पूरी तरीके से बड़ा कर दिया था। मेरी गर्मी बढ़ चुकी थी वह मुझे कहने लगी तुम्हारा वीर्य बाहर आने वाला है और उन्होंने भी तेजी से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर किया और मेरे वीर्य को उन्होंने अपने अंदर ही ले लिया। मुझे बहुत ही खुशी हुई कि उन्होंने मेरे वीर्य को अंदर तक समा लिया था। मेरी खुशी का बिल्कुल भी ठिकाना नहीं रहा मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गया था मेरे अंदर से जिस प्रकार की गर्मी निकल रही थी उससे उन्होंने पूरी तरीके से शांत कर दिया था। मौसी बहुत ही ज्यादा खुश थी और अपनी सलवार के नाड़े को उन्होंने बांधते हुए कहा सुधीरा तुम घर पर नहाने के लिए आते रहना। उसके बाद मैं नहाने के लिए चला गया और मुझे जब भी मौका मिलता तो मैं संजना मौसी से मिलने के लिए चला जाया करता।


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