गलत सफर सही होने की खुशी

Galat safar sahi hone ki khushi:

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मेरा नाम आकाश है मैं फरीदाबाद का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 28 वर्ष है। मैं जिस कंपनी में नौकरी करता हूं उस कंपनी का हेड ऑफिस जयपुर में है इसीलिए मेरा अक्सर जयपुर आना जाना लगा रहता है। फरीदाबाद का जितना भी काम है वह सब मैं संभालता हूं। एक बार मेरे साथ बहुत ही बड़ा हास्यात्मक किस्सा हो गया। मैं फरीदाबाद से जयपुर बस में जा रहा था। मैं जिस बस से फरीदाबाद से निकला वह बस बीच में एक स्टॉप पर रुकी। मुझे नींद की बहुत गंदी आदत है मैं जहां भी थोड़ी देर बैठ जाता हूं मुझे नींद आने लगती है। मेरे अंदर का यह हाल कई बार मेरे लिए घातक भी सिद्ध हुआ है और मैं अपने काम में इसकी वजह से ध्यान नहीं दे पाता।

उस दिन जब बस रुकी तो मैं बस से नीचे कुछ खाने के लिए उतरा। मैं वहीं पर खड़ा होकर कॉफी पी रहा था और बस भी काफी देर तक खड़ी थी। मैं जब बस के अंदर बैठा तो मुझे गहरी नींद आ गई और सुबह जब मेरी आंख खुली तो मैं जोधपुर पहुंच चुका था। मैं जब स्टेशन से नीचे उतरा तो मुझे थोड़ा अजीब सा महसूस हो रहा था और ऐसा लगा कि शायद मैं किसी दूसरी जगह पर पहुंच चुका हूं। जब मैंने वहां लोगों से पूछा तो मुझे पता चला मैं जोधपुर पहुंच चुका हूं। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि अब मुझे क्या करना चाहिए। मुझे बहुत नींद भी आ रही थी इसलिए मैंने वहीं एक होटल में रूम ले लिया। मैंने सोचा अब कल ही वापस जयपुर जाऊंगा। मैं होटल में आराम से सो गया। मैंने ब्रेकफास्ट का ऑर्डर दिया। थोड़ी देर बाद ब्रेकफास्ट मेरे रूम में आया। मैंने ब्रेकफास्ट किया और उसके बाद मैं कुछ देर बाहर टहलने के लिए निकल गया। मैं बाहर चाय की दुकान में चाय पी रहा था। जब मैंने चायवाले से अपने इस किस्से को शेयर किया तो वह बड़े जोर से हंसने लगा और कहने लगा की आप भी बड़े अजीब व्यक्ति हैं। मैंने उन्हें कहा कि भाई साहब यह किसी के साथ भी हो सकता है। वह मुझसे कहने लगा कि आप जयपुर कब जाएंगे। मैंने उन्हें कहा कि आज तो मैं यहीं रुकने वाला हूं और कल मैं जयपुर निकल जाऊंगा।

वहां पर दो चार लोग और भी बैठे हुए थे वह मेरी बातें बड़े चटखारे लगाकर सुन रहे थे और बहुत हंस भी रहे थे। मुझे भी अपने ऊपर हंसी आ रही थी लेकिन अब मेरे साथ वह घटना घटित हो चुकी थी तो मैंने इस बारे में अब ज्यादा नहीं सोचा और मैं वहीं पैदल टहलने लगा। मैं पैदल पैदल घूमने के लिए निकल पड़ा। मैं जब घूमने के लिए निकला तो मुझे एक कुर्ता बहुत पसंद आया। मैं उस दुकान में कुर्ता लेने के लिए चला गया। उस दुकान में एक भी पुरुष नहीं था। वहां पर सब महिलाएं काम कर रही थी। मुझे पहले थोड़ा हिचकिचाहट सी हुई लेकिन मैं दुकान के अंदर चला ही गया। वह मुझसे पूछने लगे कि सर आपको क्या चाहिए। मैंने उन्हें कहा कि मुझे यह कुर्ता लेना है इसका कितना रेट है। वह कहने लगे कि आप पहले पहन कर देख लीजिए। आपको उसके बाद रेट सही लग जाएगा। मैंने उसे ट्रायल रूम में जब ट्राई किया तो वह मेरे ही साइज का था और मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा था। मैंने उसे पहन लिया और मैं उसे पहन कर ही उनके बिल काउंटर पर चला गया। वहां पर जो लड़की बैठी हुई थी मैंने उससे कुर्ते का रेट पूछा तो मुझे उसका रेट थोड़ा ज्यादा लग रहा था और वह लोग कम करने को तैयार नहीं थे। मुझे वह चीज बहुत पसंद भी आ गई थी इसलिए मैं किसी भी हाल में उसे लेना ही चाहता था। वह कुर्ता मुझे बहुत पसंद आ गया था। मैंने उसको लेने की पूरी तरीके से ठान ली थी लेकिन वह लड़की बिलकुल भी दाम कम नहीं कर रही थी। मैंने बड़ी शालीनता से उसका नाम पूछा उसका नाम दीपिका है। मैंने दीपिका से कहा कि दरअसल मेरे साथ एक घटना घटित हो गई है मैं गलती से यहां पहुंच चुका हूं। जब मैंने उससे अपनी सारी बात बताई तो वह भी बड़े जोर से हंसने लगी और हंसते हुए उन्होने अपने पेट को पकड़ लिया। वहां पर जितनी भी लड़कियां थी वह सब हंस हंस कर लोटपोट हो गई। मैंने उन्हें कहा कि कम से कम अब तो आप पैसे कम कर दीजिए। वह कहने लगे कि चलिए आपने हमें इतना मजेदार किस्सा बताया तो अब हमें पैसे कम करने ही पड़ेंगे। मैंने भी उनसे पैसे कम करवा ही लिया। जब मैंने उनसे पैसे कम करवाए तो वह कहने लगे कि सर आप बैठिए हम आपको कॉफी पिलाते हैं।

उन्होंने मेरे लिए कॉफी का ऑर्डर दिया और वह मेरे लिए कॉफी ले आई। मैं उनके साथ ही बैठा हुआ था। मुझे दीपिका बात करने में बहुत अच्छी लग रही थी इसलिए मैं उसके साथ ही बात कर रहा था और वह भी मेरे साथ बहुत ही अच्छे तरीके से बात कर रही थी। मैं काफी देर तक उसके साथ बैठा रहा। जब मैं जाने लगा तो मैंने उनसे दुकान का कार्ड ले लिया और उसके बाद मैं वहां से अपने होटल लौट आया। मैं होटल में ही बैठा हुआ था लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं अपना टाइम पास कैसे करूं इसलिए मैंने टीवी ऑन कर दी और टीवी देखने लगा। कुछ देर तक तो मैं टीवी देखता रहा पर फिर भी मेरा टाइम पास नहीं हो रहा था इसलिए मैंने सोचा कि कुछ कर लिया जाए। मैंने ऐसे ही टाइम पास के लिए दीपिका को फोन कर दिया। वह मुझे कहने लगी आपने मुझे कैसे फोन कर दिया सर? मैंने उसे कहा क्यों आपको फोन नहीं कर सकता। मैंने उससे अपनी बातों में इतना कन्वेंस कर लिया कि वह मेरी बातों से बहुत प्रभावित हो गई। मैंने जब उसे अपने होटल के रूम में बुलाया तो वह भी अपने आपको आने से नहीं रोक पाई। वह जब मेरे रूम में आई तो उसने लाल रंग की लिपस्टिक लगाई हुई थी। उसका बदन बहुत ज्यादा सेक्सी लग रहा था। उसकी टांगे इतनी लंबी थी कि उस पर जींस बड़ी ही सेक्सी लग रही थी और उसका बदन बहुत हॉट लग रहा था।

मैंने दीपिका से कहा तुम्हारा बदन तो बहुत ही सेक्सी है और तुम बहुत ही हॉट हो। वह मुझे कहने लगी तो फिर आप मेरे इस हॉट बदन को अपना बना लीजिए। वह मेरे पास बैठे हुई थी। उसने मुझसे पैसों की डिमांड की मेरे सामने उसका सेक्सी फिगर था। मै अपने आपको रोक नहीं पाया मैंने उसे पैसे दे दिए। मैंने उसे पैसे दे दिए थे वह मेरी हो चुकी थी। मैंने जब उसकी टी-शर्ट को ऊपर किया तो उसने पिंक कलर की ब्रा पहनी हुई थी उसमें वह बहुत सेक्सी लग रही थी मैंने उसकी ब्रा को खोलते हुए उसके स्तनों को दबाना शुरू किया। जब मेरे होठों से उसके नर्म होठ टकराए तो हम दोनों के अंदर से गर्मी पैदा होने लगी। मैं दीपिका को अपना बनाना चाहता था मैंने उसकी जींस को उतार दिया। जब मैंने उसकी चिकनी चूत को देखा तो मेरे अंदर और भी ज्यादा उत्तेजना जाग उठी। मैंने अपने लंड को उसकी योनि पर सटा दिया। मैंने अपने लंड को धीरे धीरे उसकी योनि के अंदर डाला तो वह चिल्लाने लगी। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हो चुका था। मैंने उसकी लंबी टांगों को पकड़ कर रखा था और उसे बड़ी तेज गति से चोद रहा था। मुझे उसे चोदने मे आनंद आ रहा था वह आनंद मुझे आज तक कभी नहीं मिला। हम दोनों एक दूसरे के शरीर की गर्मी को सिर्फ 3 मिनट तक झेल पाए जब मेरा वीर्य पतन हो गया तो दीपिका ने अपनी योनि को साफ किया। मैंने उसे घोड़ी बना दिया जब मैंने उसे घोड़ी बनाया तो उसकी टांगे मुझसे भी लंबी थी। मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर घुसा तो मुझे बहुत मजा आ गया। मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा लंड किसी गहरी गुफा में चला गया हो। वह मुझे कहने लगे सर आप ऐसे ही तेज तेज धक्के देते रहिए मुझे बहुत मजा आ रहा है। मैंने उसे इतनी तेजी से धक्के दिए उसकी चूतडो से जो आवाज निकलती वह मेरे कानों में जाकर मुझे और ज्यादा उत्तेजित करती। मैंने उसे तेज तेज धक्के देने शुरू कर दिए लेकिन जब उसकी चूत से तरल पदार्थ बाहर निकलने लगा तो मैं उसकी गर्मी को ज्यादा समय तक नहीं झेल पाया और मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर चला गया। मुझे उसे चोदकर ऐसा लगा जैसे मेरे पैसे वसूल हो गए हो और कभी कभी गलत सफर भी सही हो जाता है।


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