गैर पुरुष संग सेक्स का लुफ्त

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Gair purush sang sex ka luft मैं घर का सारा काम करने के बाद हॉल में बैठी हुई थी मैंने अपने फोन को अपने हाथों में लिया और अपनी सहेली मृदुला को फोन किया। मृदुला ने मेरा फोन उठाया और मुझसे मेरे हाल चाल पूछने लगी मैंने मृदुला से कहा मैं तो ठीक हूं लेकिन सोचा आज तुम्हें फोन कर लूं। हम दोनों की बातें काफी देर तक होती रही मृदुला मुझे कहने लगी कि तुम मेरे घर पर क्यों नहीं आ जाती मैंने मृदुला से कहा वैसे तो मैं घर में अकेली ही थी लेकिन तुम्हारे घर आने में मुझे थोड़ा समय लग जाएगा। मृदुला कहने लगी कोई बात नहीं मैं भी घर में अकेली ही हूं तुम आ जाओ मैं तुम्हारा इंतजार कर रही हूं। काफी समय बाद मैं मृदुला से मिलने के लिए उसके घर पर गई मैं ऑटो से मृदुला के घर गई और जब मृदुला से मेरी बात हुई तो वह मुझे कहने लगी कि तुमसे मिलकर काफी अच्छा लग रहा है। हम लोगों की मुलाकात करीब 6 महीने बाद हो रही थी 6 महीने पहले मुझे मृदुला मिली थी और मृदुला मुझसे मेरे हाल चाल पूछने लगी।

वह मुझसे पूछ रही थी कि तुम्हारे पति कैसे हैं मैंने मृदुला को बताया मेरे पति तो अच्छे हैं मृदुला मुझे कहने लगी मेरे पति का ट्रांसफर कोलकाता हो चुका है और वह कोलकाता में ही रहते हैं। मैंने मृदुला से कहा लेकिन तुमने मुझे यह बात नहीं बताई तो वह कहने लगी कि वह पिछले महीने ही तो कोलकाता गए थे। मैंने मृदुला से कहा लेकिन तुम घर पर अकेले कैसे रह लेती हो तो वह मुझे कहने लगी कि अब मुझे आदत सी होने लगी है। मृदुला के सास ससुर का देहांत भी पिछले वर्ष कार एक्सीडेंट में हो गया था और अब वह घर पर अकेली ही रहती है उसके ऊपर ही घर की सारी जिम्मेदारी है। मैंने मृदुला से कहा तुम अपने पति के साथ कोलकाता क्यो नहीं चली जाती तो वह कहने लगी कि अब यहां घर की जिम्मेदारी भी तो है भला मैं घर किसके भरोसे छोड़ कर जा सकती हूं। मैंने मृदुला से कहा हां तुम ठीक कह रही हो मृदुला की शादी को 3 वर्ष हो चुके हैं और मेरी शादी को अभी एक वर्ष ही हुआ है हम दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती है। मेरी मुलाकात मृदुला से कॉलेज के प्रथम वर्ष में हुई थी पहले मृदुला के साथ मेरी इतनी बातचीत तो नहीं थी लेकिन जैसे जैसे समय बढ़ता गया तो मृदुला से मेरी अच्छी बातचीत होने लगी और उससे मेरी अच्छी दोस्ती हो गई थी।

हम दोनों ही पढ़ने में बहुत अच्छे थे इसलिए मृदुला मेरे साथ ही ज्यादा रहती थी। मैंने मृदुला से कहा लेकिन तुम घर पर अकेली क्या करती हो तो वह मुझे कहने लगी कि मैं घर में अकेली बोर तो हो जाती हूं लेकिन मुझे लगता है कि अब मुझे आदत सी हो गई है। मैंने मृदुला को कहा चलो हम लोग कहीं घूम आते हैं मृदुला कहने लगी काजल मेरा घूमने का मन तो नहीं है लेकिन मैं तुम्हारे साथ चल जरूर सकती हूं। मैंने मृदुला को कहा लेकिन हम लोग कहां जाएंगे तो वह मुझे कहने लगी कि यदि तुम कहो तो हम लोग सुपर मार्केट चल लेते हैं क्योंकि मुझे घर का भी काफी सामान लेना है घर में राशन भी खत्म हो चुकी है और मैं सोच ही रही थी कि मैं सुपर मार्केट जाकर कुछ शॉपिंग कर आती हूं। मैंने मृदुला से कहा हां यह ठीक रहेगा मुझे भी वैसे घर के लिए कुछ जरूरी सामान लेना था यदि हम लोग सुपर मार्केट जाएंगे तो मैं वहां से सामान ले सकती हूं। मैंने मृदुला से कहा तो फिर हम लोग सुपर मार्केट ही चलते हैं, मृदुला मुझे कहने लगी कि तुम मुझे थोड़ा टाइम दो मैं तैयार हो जाती हूं मैंने मृदुला को कहा ठीक है तुम तैयार हो जाओ। मैं हॉल में ही बैठी हुई थी और मृदुला कपड़े चेंज करने के लिए रूम में चली गई थी थोड़ी देर बाद वह तैयार होकर आई और कहने लगी कि चलो काजल हम लोग चलते हैं। मैंने मृदुला से कहा ठीक है तो हम लोग चलते हैं और हम लोग वहां से ऑटो में सुपर मार्केट चले गए। मृदुला के घर से कुछ दूरी पर ही सुपरमार्केट है हम लोग जब वहां पर गए तो मृदुला ने अपने बैग से सामान की लिस्ट निकाल ली और वह सामान देखने लगी। हम दोनों ही अब सामान लेने लगे थे और जब हम लोग सामान ले चुके थे तो हम लोग बिल काउंटर पर गए और वहां पर हम लोगों ने बिल कटाते हुए सोचा कि हम लोगों को कुछ खा लेना चाहिए।

हम लोग अब वहीं बाहर पर एक छोटा सा काउंटर था वहीं पर हम लोगों ने स्नेक्स ऑर्डर कर लिया और हम लोग आपस में बात करते हुए स्नैक्स खाने लगे। जब हम लोग घर के लिए निकले तो मैंने मृदुला से कहा मृदुला कभी तुम घर पर भी आ जाया करो वह कहने लगी की भला मैं तुम्हारे घर पर आ कर क्या करूंगी। मैंने मृदुला से कहा लेकिन तुम्हारा जब भी मन हो तो तुम आ जाया करो तो वह कहने लगी ठीक है मैं कोशिश करूंगी। हम लोग मृदुला के घर पर पहुंच चुके थे और कुछ देर मैं मृदुला के साथ ही बैठी रही उसके बाद में अपने घर के लिए निकल चुकी थी रितेश घर लौट चुके थे और जब रितेश घर आए तो वह मुझे कहने लगे कि तुम कहां चली गई थी। मैंने रितेश को बताया कि मैं मृदुला के साथ थी वह मुझे कहने लगे कि तुमने मुझे बताया भी नहीं कि तुम मृदुला के साथ हो। मैंने रितेश को कहा हां मैं मृदुला के साथ ही थी हम दोनों आपस में बात करने लगे लेकिन रितेश कुछ परेशान नजर आ रहे थे शायद उनके ऑफिस की परेशानी की वजह से वह परेशान लग रहे थे। मैंने उनसे उनकी परेशानी का कारण पूछा भी लेकिन उन्होंने मुझे कुछ नहीं बताया। काफी दिनों बाद में मृदुला से मिलने के लिए उसके घर पर गई, मैंने उसे कुछ भी नहीं बताया था मैं उससे मिलने के लिए आ रही हूं शायद वह भी इस बात से अनजान ही थी मैं उससे मिलने के लिए अचानक चली आऊंगी।

जब मैं उसके घर में गई तो उस दिन मैं उसके घर का नजारा देखकर चौक गई वह एक व्यक्ति की बाहों में थी और उसकी बाहों मे मृदुला का मदमस्त हुस्ना था मैं यह सब देखकर चौक गई मैं वापस अपने घर लौट आई। मृदुला को इस बात की कुछ भी खबर नहीं थी और ना ही मैंने उसे कभी इस बारे में बताया लेकिन यह सब देखकर मेरा भी मन किसी गैर पुरुष के साथ शारीरिक संबंध का बनाने का होने लगा। मेरे और मेरे पति के बीच में सब कुछ ठीक था लेकिन उसके बावजूद भी मुझे लगा कि मुझे किसी गैर मर्द के साथ सेक्स का लुफ्त उठाना चाहिए और मैंने वही किया। मैंने अपने पुराने परिचित के साथ बात करनी शुरू की वह भी मेरी बातों में पूरी तरीके से पागल हो चुके थे। मैं उन्हें अपने पास बुलाने लगी वह मेरे पास आ गए वह जब मेरे पास आए तो मैंने अपने बदन की गर्मी को उन्हें सौंप दिया और उनके बदन को भी मैंने बहुत ज्यादा गर्म कर दिया। वह पूरी तरीके से गर्म हो चुके थी वह मुझे कहने लगे मुझे आपके बदन को अपनी बाहों में लेना है? मैंने अपने कपड़े उतारने शुरू किए मैं उनके सामने नग्न अवस्था में थी नग्न अवस्था में होने के बाद मैंने अपने बदन को उनको सौंप दिया और हम दोनों के बदन की गर्मी से एक अलग ही आग पैदा होने लगी और हम दोनों ही पसीना पसीना होने लगे। उन्होंने मुझे अपने नीचे लेटा दिया वह मेरे बदन के हर हिस्से को अपना बनाना चाहते थे उन्होंने मेरे होंठों को चूमा और धीरे-धीरे उन्होंने जब मेरे स्तनों को अपने हाथों में लेकर दबाना शुरू किया तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा। जब उन्होंने मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो मेरे अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बढने लगी थी मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगी। मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी थी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और ना ही वह रह पा रहे थे उन्होंने मेरी योनि के अंदर उंगली डाल दी पहले तो उन्होंने मेरी चूत के अंदर एक ही उंगली को घुसाया तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और उन्हें भी बड़ा मजा आ रहा था।

जब उन्होंने अपने लंड को मेरे हाथ में दिया तो मैंने उसे कुछ देर तक अपने हाथों से हिलाया वह एकदम तन कर खड़ा हो चुका था मैंने उसे अपने मुंह में लेने की सोची और जब मैंने उनके मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा। मैं उनके लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी वह बहुत ही ज्यादा खुश नजर आ रहे थे काफी देर तक मैंने अपने लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर किया वह बिल्कुल भी रह ना सके। उन्होंने मेरी चूतड़ों को पकड़ते हुए मेरे चिकनी चूत के अंदर लंड को धीरे धीरे घुसाना शुरू किया उनका लंड मेरी योनि के अंदर घुस चुका था जैसे ही उनका लंड मेरी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो मैं चिल्लाने लगी मुझे बहुत ज्यादा दर्द होने लगा उस दर्द में मुझे आनंद की प्राप्ति हो रही थी। उन्होंने मेरी चूतड़ों को पकड़ा हुआ था और बड़ी तेजी से वह मुझे धक्के दे रहे थे मैं भी उनसे चूतडो को मिलाने पर लगी हुई थी।

ऐसा करीब 5 मिनट तक हम एक दूसरे के साथ करते रहे जब उन्होंने मेरे गांड के अंदर अपने लंड को घुसाया तो मै चिल्लाने लगी उनका मोटा लंड मेरी गांड के अंदर तक जा चुका था। वहां बडी तेजी से मुझे अब धक्के देने लगे थे उनके धक्के मे और भी ज्यादा तेजी आने लगी थी मुझे भी अच्छा लगने लगा था। उन्होंने मेरी चूतड़ों को कसकर पकड़ा हुआ था और मेरी गांड से भी उन्होंने खून निकाल कर रख दिया था मेरी गांड से खून कुछ ज्यादा ही निकल रहा था। उनका 9 इंच मोटा लंड मेरी गांड के अंदर जाता और मेरे मुंह से जो चीख निकलती उसे उन्होंने अंदाजा लगा लिया कि मेरी गांड में कितना दर्द हो रहा है। बदन की गर्मी कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी उसी गर्मी के दौरान मेरी गांड मे वीर्य गिरा दिया मेरा किसी गैर मर्द के साथ शारीरिक संबंध बनाने का सपना पूरा हो गया।


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