गैर मर्द से चुदकर मुझे गलत नहीं लगा

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Gair mard se chudkar mujhe galat nahi laga हर रोज की तरह सुबह उठ कर मैं घर का काम कर रही थी सुबह के करीब 7:00 बज रहे थे और मैंने बच्चों के लिए नाश्ता तैयार कर दिया था थोड़ी देर बाद बच्चे स्कूल जाने वाले थे और मेरे पति भी अपने ऑफिस के लिए निकल चुके थे मैं घर पर अकेली ही थी। मेरे पति का कुछ समय पहले ही नागपुर में ट्रांसफर हुआ है और जब उनका नागपुर में ट्रांसफर हुआ था उस दौरान मेरी मुलाकात आशा से हुई आशा से मेरी बहुत अच्छी दोस्ती हो चुकी थी आशा हमारी कॉलोनी में ही रहती है। आशा का मुझे फोन आया और वह कहने लगी कि मोनिका तुम क्या कर रही हो तो मैंने आशा को बताया कि मैं तो घर पर अकेली ही बैठी थी। आशा ने मुझसे मिलने की बात कही मैंने भी आशा को कहा ठीक है मैं तुमसे मिलने के लिए आती हूं और मैं आशा से मिलने के लिए चली गई।

जब मैं आशा को मिलने के लिए गई तो उस वक्त आशा के घर पर उनके कोई मेहमान आए हुए थे, मैंने आशा से कहा अभी मैं चलती हूं तुमसे बाद में मिलूंगी आशा मुझे कहने लगी की नहीं मोनिका तुम रुक जाओ। आशा मुझसे भी बात करती और अपने मेहमानों को भी वह मैनेज कर रही थी थोड़े ही समय बाद वह लोग चले गए मैंने आशा को कहा तुम तो बहुत बिजी हो गई थी। आशा मुझे कहने लगी कि कुछ दिनों से हमारे रिश्तेदार घर पर आए हुए थे इसलिए मैं तुमसे मुलाकात नहीं कर पाई मैंने आशा को कहा कोई बात नहीं। हम लोग साथ में बैठकर बात करने लगे तो आशा मुझे कहने लगी की मोनिका मैं भी घर पर अकेले बोर हो जाया करती हूं क्यों ना हम लोग कोई काम शुरू करने के बारे में सोचें। आशा ने जब मुझे यह बात कही तो मुझे भी कहीं ना कहीं यह लगा कि आशा बिल्कुल ठीक कह रही है क्योंकि मैं भी घर में अकेले ही रहती हूं इसलिए हम लोगों ने कोई काम शुरू करने के बारे में सोचा लेकिन उसके लिए हम लोगों को पैसे भी चाहिए थे। आशा ने मुझे कहा कि थोड़े बहुत पैसे तो मैंने जमा किए हुए हैं यदि तुम भी थोड़े बहुत पैसे जमा कर लो तो हम लोग टिफिन सर्विस शुरू कर सकते हैं।

मुझे भी आशा की यह बात अच्छी लगी और मैंने आशा को कहा ठीक है मैं तुम्हें एक दो दिन में इस बारे में सोच कर बताती हूं। मैं जब घर लौटी तो मुझे आशा की बात बहुत अच्छी लगी और मैंने यह सोच लिया था कि मैं आशा के साथ टिफिन सर्विस का काम शुरू कर दूंगी अब मैंने अपने पति से इस बारे में बात की तो उन्होंने मुझे कहा कि मोनिका लेकिन तुम्हें यह सब करने की क्या जरूरत है। मैंने अपने पति से कहा कि आप मुझे आशा के साथ मिलकर यह काम शुरू करने दीजिए मेरे पति ने मुझे कहा मोनिका जैसा तुम्हें उचित लगता है तुम वैसा ही करो। मुझे भी आशा की बात अच्छी लगी थी इसलिए मैंने टिफिन सर्विस का काम शुरू करने का सोचा और हम दोनों ने मिलकर टिफिन सर्विस का काम शुरू कर लिया। थोड़े ही समय बाद हमारे पास टिफिन के लिए ऑर्डर आने लगे क्योंकि हम लोग अपने कॉलोनी में ही इसे शुरू कर रहे थे इसलिए हमारे कॉलोनी से काफी ऑर्डर आने लगे। शुरुआत में तो हम लोगों ने एक लड़के को टिफिन की डिलीवरी के लिए रखा था और धीरे-धीरे अब काम भी बढ़ने लगा था आशा और मैं मिलकर काम करते हम दोनों ही खाना बनाते। हम लोगों के पास अब काफी ज्यादा ऑर्डर आने लगे थे इसलिए हम लोगो ने एक महिला को अपने साथ काम पर रख लिया उसका नाम लता है। लता हमारे साथ हमारी मदद करती और एक लड़का हम लोगों ने डिलीवरी के लिए रखा हुआ था सब कुछ बड़े ही अच्छे से चल रहा था और हमारे पास अब काफी पैसे भी आने लगे थे आशा और मैं बहुत ज्यादा खुश थे। कुछ ही समय बाद हमारा काम इतना अच्छा चलने लगा कि इसकी उम्मीद हम लोगों ने कभी की भी नहीं थी लेकिन काम अब इतना अच्छा चलने लगा था कि हम लोगों के पास काफी पैसे शेविंग होने लगे। थोड़े ही समय बाद हम लोगों ने काम करने के लिए दो-तीन लोगों को और रख लिया इस बीच हम लोग बात करने लगे कि हम लोगों को कहीं जाना चाहिए क्योंकि काफी समय हो गया था जब हम अपने परिवार के साथ कहीं गए नहीं थे। मैं भी अपने पति और बच्चों को ज्यादा समय नहीं दे पा रही थी इसलिए मैंने और आशा ने घूमने के बारे में सोचा बच्चों की स्कूल की छुट्टियां पढ़ने वाली थी।

मैंने अपने पति से जब इस बारे में बात की तो मेरे पति कहने लगे कि मोनिका लेकिन हम लोग घूमने के लिए कहां जाएंगे मैंने अपने पति से कहा कि मैंने अभी इस बारे में सोचा तो नहीं है लेकिन आशा से पूछ कर बताऊंगी मेरे पति कहने लगे कि ठीक है। हम लोगों ने सोचा कि क्यों ना कुछ दिन हम लोग गोवा घुम आये और हम लोगों ने गोवा जाने का प्लान बना लिया। गोवा जाना हम लोगों के लिए बहुत ही अच्छा रहा क्योंकि मैं तो पहली बार ही गोवा गयी थी और आशा भी शायद पहली बार ही गोवा गयी थी। मैं और आशा बहुत खुश थे मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जी पा रही हूं शायद यह सब आशा की वजह से ही संभव हो पाया था यदि आशा टिफिन सर्विस की बात मुझसे नहीं कहती तो शायद मैं भी कभी इस बारे में सोचती नहीं लेकिन अब हम लोगों का काम तो अच्छे से चल ही रहा था और हम लोग अपने परिवार को भी अच्छा समय दे पा रहे थे। मैं अपने पति के साथ भी बहुत खुश थी और काफी समय हम लोग गोवा में रहे गोवा में हम लोग जिस होटल में रुके थे उस होटल में मुझे बहुत ही अच्छा लगा हम लोग अब कुछ दिनों तक गोवा में रुके और उसके बाद हम लोग वापस नागपुर लौट आए।

जब हम लोग नागपुर वापस लौटे तो हम लोग अपना काम देखने लगे अपने काम से हम लोग बहुत खुश थे। हालांकि मैं काफी थक भी जाया करती थी लेकिन उसके बाद भी मैं काम अच्छे से करती, हम दोनों का काम बहुत ही अच्छे से चल रहा है। मैं अपने पति को समय नहीं दे पा रही थी और कहीं ना कहीं मेरे अंदर इस बात को लेकर थोड़ा परेशानी तो थी। उस वक्त आशा ने मेरी मुलाकात अनिल से करवाई जब मेरी मुलाकात अनिल से हुई तो उसके बाद हम लोगों को मिलना अच्छा लगने लगा मैं कई बार अनिल से मिलती और खाली समय में अनिल से फोन पर बातें करने लगी। मुझे ऐसा लगने लगा कि शायद अनिल को मैं पसंद करने लगी हूं लेकिन मेरे पीछे मेरे शादीशुदा जिंदगी भी थी हालांकि अनिल भी शादीशुदा है लेकिन हम दोनों ज्यादातर समय साथ में बिताते। मेरे पास जितना भी समय होता मैं अनिल के साथ समय बिताया करती। आशा को भी इस बारे में पता चल चुका था एक दिन मैने आशा से इस बारे में बात की तो आशा ने मुझे कहा देखो मोनिका जैसा तुम्हें अच्छा लगता है तुम वैसा करो और यह तुम्हारी जिंदगी है लेकिन मुझे नहीं पता था कि हम दोनों इतना आगे बढ़ जाएंगे कि अनिल और मेरे बीच सेक्स संबंध बन जाएंगे। पहली बार जब हम लोगों के बीच सेक्स संबंध बने तो हम दोनों मेरे घर पर थे। जब पहली बार अनिल ने मेरे होंठों को चूमना शुरू किया तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मैं इस बात से बहुत खुश थी कि अनिल मेरे होठों को किस कर रहा है। अनिल जिस प्रकार से मेरे होठों को चूम रहा था उससे मैं अपने आपको बिल्कुल रोक नहीं पा रही थी और ना ही अनिल अपने आपको रोक पाया। मैंने उसके मोटे लंड को अपने मुंह में ले लिया और अपने मुंह में लेकर बहुत अच्छा लग रहा था। मैं अनिल को किसी भी प्रकार की कोई कमी महसूस नहीं होने देना चाहती थी। मैं अनिल के मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर ले रही थी तो उसे बहुत ही अच्छा लग रहा था वह बहुत ज्यादा खुश था।

अनिल मुझे कहने लगा मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है जिस प्रकार से तुम मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही हो उस से मैं बहुत ही ज्यादा खुश हूं। अब हम लोगों की उत्तेजना बढ़ने लगी थी अनिल ने मेरे स्तनों को भी चूसना शुरू कर दिया। अनिल ने मेरी गर्माहट को पूरी तरीके से बढ़ा दिया था और मैं जब अपनी की चूत पर अपनी उंगली को लगा रही थी तो मेरी चूत से निकलता हुआ पानी इतना ज्यादा बाहर की तरफ निकलने लगा कि मैं बिल्कुल भी अपने आपको रोक ना सकी और मेरे अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि कहीं ना कहीं मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गई थी। मैंने अनिल से कहा मुझे लगता है मैं शायद अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाऊंगी। अनिल ने मेरी चूत को बहुत देर तक चाटा। अनिल मेरी चूत को चाट रहा था तो मेरी चूत से पानी बाहर निकाल रहा था। मेरी चूत पर जब अनिल ने लंड को सटाया तो मैंने अनिल को कहा तुम अपने लंड को मेरी चूत में डाल दो। अनिल का लंड मेरी चूत में गया तो मैं जोर से चिल्लाई उसने मेरे स्तनों को चूसना शुरू कर दिया।

वह मुझे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था जिस गति से वह मुझे चोद रहा था उससे मुझे और भी मज़ा आ रहा था। मैं कहीं ना कहीं बहुत ज्यादा गर्म होने लगी थी और अपने आपको मैं बिल्कुल भी नहीं रोक पा रही थी। मैंने अनिल को कहा मुझे लगता है मैं बिल्कुल भी नहीं रह पाऊंगी। इस बात से अनिल इतना ज्यादा उत्तेजित हो गया था कि अनिल ने मुझे बहुत तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए। अनिल जब मुझे धक्के मार रहा था तो मुझे बहुत ही मजा आ रहा था वह अपने लंड को मेरी चूत के अंदर बाहर कर रहा था उसका लंड मेरी चूत के अंदर बाहर होता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता। मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था मैं झड़ने वाली थी मैंने अनिल को अपने पैरों के बीच में जकड़ लिया। अनिल ने मुझे और भी तेजी से धक्के देने शुरू किए जब तेज गति से उसने मुझे धक्के देने शुरू किए मुझे लगा कि शायद अनिल का वीर्य जल्दी गिर जाएगा। अनिल का वीर्य जैसे ही मेरी चूत में गिरा तो मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई। हम दोनो के बीच सेक्स होता रहा लेकिन मुझे कभी भी ऐसा नहीं लगा कि हम दोनों के नाजायज रिश्ते गलत हैं।


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