गांव की सेक्सी भाभी

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Gaanv ki sexy bhabhi मैं अपने गांव से पहली बार ही मुंबई जैसे बड़े शहर में आया था मेरे लिए सब कुछ नया ही था मैं गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ा था और उसके बाद मैंने गांव के ही पास में एक कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। मैं जब मुंबई आया तो मेरे लिए सब कुछ काफी नया था और इतने बड़े शहर में मुझे कुछ दिनों तक तो रास्तों को ही समझने में समय लग गया। मैं अपने मामा के साथ रहता था और मेरे मामा जी ने मेरी काफी मदद की उन्होंने ही अपनी कंपनी में मेरी नौकरी लगवाई। उन्होंने जब कंपनी में मेरी नौकरी लगवाई तो उसके बाद मैंने अपने लिए अलग रहने के लिए घर देख लिया था मैं चाहता था कि मैं अपने बूढ़े मां-बाप को अपने साथ मुंबई में ही ले आऊं क्योंकि उनकी उम्र भी काफी हो चुकी है और वह लोग अब चलने फिरने में भी असमर्थ हैं। पिताजी और मां की तबीयत ठीक नहीं रहती थी इसलिए मुझे उनकी चिंता हमेशा ही सताती रहती थी इस वजह से मैंने उन्हें फोन कर के अपने पास बुला लिया वह लोग मेरे पास आ गये और अब मैं ही उनकी देखभाल करने लगा मेरे मां-बाप मुझसे बहुत खुश थे।

मेरे मामाजी का मुझ पर काफी बड़ा एहसान है इसीलिए तो मैं उन्हें काफी मानता था मैं अभी तक उसी कंपनी में जॉब कर रहा था। मेरी जिंदगी बिल्कुल सामान्य तरीके से चल रही थी और सब कुछ ठीक था परंतु एक दिन जब पापा ने मुझे कहा कि सुधीर बेटा मैं सोच रहा हूं कि हमारे गांव का मकान भी खराब होने लगा है तो क्या हम लोगों को उसमें कुछ काम करवाना चाहिए। मैंने पापा से कहा कि देखिए अभी तो मेरे पास बिल्कुल भी पैसे नहीं है लेकिन थोडे समय बाद मैं जरूर गांव के मकान के लिए कुछ पैसे जमा कर के उसे ठीक करवा दूंगा। अब थोड़े समय बाद ही मैं अपने गांव के मकान को ठीक करवाना चाहता था मैंने कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी भी ले ली थी और अपने गांव के मकान की मरम्मत के लिए मैं अपने गांव चला गया था। अब मकान की मरम्मत का काम चल रहा था और जब मकान की मरम्मत का काम चल रहा था तो हमारे पड़ोस में रहने वाली चाची मुझे कहने लगी कि सुधीर बेटा तुम कितने दिनों तक घर में रुकने वाले हो मैंने उन्हें कहा मैं तो चाची अभी कुछ दिनों तक यहां रुकूंगा। उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हारे मां-बाप कैसे हैं तो मैंने उन्हें कहा वह लोग तो ठीक हैं वह मेरे साथ काफी देर तक बात करती रही और फिर वह चली गई।

जब वह चली गई तो मैंने भी सोचा कि मैं अपने लिए पानी ले आता हूं मैं पास के ही हैंडपंप में चला गया और वहां से मैं अपने लिए पानी भरने लगा मैं जब पानी भर रहा था तो वहां पर मेरा दोस्त मुझे मिला। मेरा पुराना दोस्त मुझे मिला तो वह मुझे कहने लगा कि सुधीर तुम कितने सालों बाद दिख रहे हो मैंने उससे कहा कि तुम्हारा नंबर मेरे पास था ही नहीं इसलिए मैं तुम्हें फोन नहीं कर पाया मैंने उससे सबसे पहले तो उसका नंबर लिया और अपने दोस्त के साथ मैं बैठा रहा कुछ देर तक हम दोनों वहीं बैठ कर बात करते रहे। मेरे दोस्त माधव ने मुझसे पूछा कि तुम गांव में कितने दिनों तक रहने वाले हो मैंने उसे बताया कि अभी मैं अपने घर की मरम्मत का काम करवा रहा हूं तो मुझे लगता है मुझे कुछ दिन यहां पर रुकना ही पड़ेगा। वह मुझे कहने लगा कि लेकिन तुम्हारे मां-बाप तो अब तुम्हारे साथ ही रहते हैं तो तुम मुंबई में ही अपने लिए कोई घर क्यों नहीं खरीद लेते मैंने माधव से कहा देखो माधव यह सब इतना आसान नहीं है कि मुंबई में मैं घर खरीद लूं, मैं गांव में घर का काम इसलिए करवा रहा हूं क्योंकि पिताजी ने मुझसे कहा कि सुधीर बेटा तुम गांव में घर का काम करवा दो। तुम देख ही रहे हो कि हमारे घर की दीवारें कितने कच्ची हो चुकी थी और ना जाने कबसे उनका काम भी नहीं हुआ था हम दोनों काफी देर तक साथ में बैठ कर बात कर रहे थे। मैंने माधव से कहा कि अभी मैं चलता हूं तुमसे मैं बाद में मुलाकात करूंगा तो वह कहने लगा कि ठीक है सुधीर मैं तुमसे मिलने के लिए तुम्हारे घर पर आ जाऊंगा। मैं अब अपने घर पर चला गया था और जब मैं अपने घर पर गया तो मेरी चाची ने मुझे कहा कि सुधीर बेटा तुम खाना खा लो मैंने उन्हें कहा नहीं चाची रहने दीजिए लेकिन चाची ने मुझे अपना घर पर बुला लिया और मैं उनके घर पर खाना खाने के लिए चला गया। मैं चाची के साथ बैठा हुआ था और उनसे बात कर रहा था मैंने जब चाची से कहा कि चाची आपके हाथ में तो वाकई में जादू है चाची कहने लगी कि बेटा अब तुम इतनी भी तारीफ मत करो। मेरे चाचा जी का देहांत भी काफी समय पहले हो चुका था और उनके बेटे ने घर की सारी जिम्मेदारी को संभाला हुआ था उनकी बेटी यानी की मेरी चचेरी बहन की शादी भी अभी कुछ समय पहले ही हुई थी परन्तु मैं शादी में आ नहीं पाया था।

मैं अब खाना खाकर कुछ देर आराम करना चाहता था मैं आराम करने के लिए अपने कमरे में चला गया घर की मरम्मत का काम अभी भी चल रहा था और उसी दिन शाम को मुझे माधव मिला। जब माधव मुझे मिला तो मैं माधव के साथ अपने घर पर बैठा हुआ था माधव मुझे कहने लगा कि सुधीर तुमने तो बहुत अच्छा किया जो तुम मुंबई चले गए। मैंने उसे बताया कि मुंबई जाकर भी कुछ अच्छा नहीं हुआ है जिंदगी सामान्य तरीके से चल रही है और जिंदगी में कुछ नया भी नहीं है मैं सुबह ऑफिस चला जाता हूं और शाम के वक्त ही घर लौट आता हूं मुझे तो मां और पिताजी के साथ भी समय बिताने का मौका नहीं मिल पाता। माधव मेरे साथ काफी देर तक बैठा हुआ था और वह मुझे कहने लगा कि सुधीर अब मैं चलता हूं अंधेरा भी काफी होने लगा है। मैंने माधव से कहा मैं तुमसे कल मुलाकात करूंगा माधव कहने लगा ठीक है और अब माधव वहां से चला गया।  माधव घर से जा चुका था मैं घर में अकेला ही था हमारे पड़ोस मे रहने वाली सविता भाभी जो की बड़ी ही सुंदर है वह मुझे देखा भी करती थी लेकिन मैं हमेशा ही अपनी नजरे बचाने की कोशिश करता हूं।

उस दिन मुझे लगा सविता भाभी को अपने पास बुलाना चाहिए सविता भाभी का घर मेरे घर के बिल्कुल सामने ही था इसलिए मैं उन्हें देखकर उस दिन मुस्कुरा रहा था लेकिन उस दिन तो वह मेरे पास नहीं आई। उसके अगले दिन जब वह मुझे मिली तो वह मुझे कहने लगी आप मुझे देखकर कुछ ज्यादा ही मुस्कुरा रहे थे। मैंने उन्हें कहा भाभी आप काफी सुंदर है वह मुझे कहने लगी मैं अगर इतनी सुंदर हूं तो इस से पहले तुमने मुझे कभी देखा क्यो नहीं। मैने उनको कहा लेकिन अब तो मैं आपको देख रहा हूं यह कहते हुए मैंने उनकी गांड पर अपने हाथ को लगा दिया। वह भी मेरी तरफ प्यासी नजरों से देखने लगी उनकी आंखों में मुझे साफ नजर आ रहा था कि कितनी गर्मी है अब वह मेरा साथ देना चाहती थी। मैंने उन्हें कहा क्या रात को मैं आपके घर पर आ जाऊं। वह कहने लगी नहीं मैं ही रात को तुम्हारे पास आ जाऊंगी। भाभी रात के वक्त मेरे पास आ गई जब वह मेरे पास आई तो मैंने उन्हें देखते ही उनके बदन को महसूस करना शुरू किया और उन्हें अपनी बाहों में समा लिया। वह मेरी बाहो में आ चुकी थी मैंने जब उनकी साड़ी को ऊपर करते हुए उनकी पैंटी को उतारना शुरू किया मैने देखा उनकी पैंटी से एक अलग प्रकार की खुशबू आ रही थी और उनकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने उनकी चूत पर देखा तो उनकी चूत बहुत ज्यादा गीली हो चुकी थी अब वह अपने पैरो को खोलने लगी मैंने अपनी उंगली को उनकी चूत के अंदर घुसा दिया मेरी उंगली उनकी चूत मे जा चुकी थी।

मैंने उनके ब्लाउज को खोलते ही उनके स्तनों का रसपान करना शुरू कर दिया था और उनके बदन की गर्मी को बहुत ज्यादा बढ़ा कर रख दिया था। वह मुझे कहने लगी आप तो बड़े ही अच्छे से मेरे स्तनों का रसपान कर रहे हो। मैंने उनके स्तनों को पूरी तरीके से मसल कर रख दिया था और उनकी चूत से पानी कुछ ज्यादा ही अधिक मात्रा में बाहर निकलने लगा था। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाना शुरू किया और काफी देर तक वह मेरे लंड को हिलाती रही। जब उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में समा लिया तो मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने उन्हें कहा मुझे बहुत ही मजा आ रहा है। अब वह मेरे लंड को ऐसे ही चूस रही थी मैंने उनके बदन की गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ा दिया था। मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर लगाया तो मैंने उन्हें  धक्के मारने शुरू कर दिए थे और वह अपने पैरों को चौडा कर लेती। जब वह अपने पैरों को चौड़ा करती तो उनकी चूत के अंदर बाहर मेरा लंड हो रहा था वह मुझे कहने लगी आपके साथ तो मुझे बहुत ही मजा आ रहा है।

मैंने उन्हें कहा मुझे भी तो आपके साथ सेक्स करने में बड़ा मजा आ रहा है भाभी ने उस दिन मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बढा कर रख दिया था। उन्होंने मुझे कहा मुझे तुम अब घोड़ी बनाकर चोदा उन्हें घोड़ी बनाकर चोदने में मुझे जो आनंद आ रहा था वह मेरे लिए अलग फीलिंग थी। मैं उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था उनकी चूतड़ों पर जब मैं प्रहार कर रहा था तो उनकी चूतड़ों से आवाज आ रही थी। वह अपनी चूतडो को मुझसे मिला रही थी मैं भी उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था और उनकी चूतडो को पूरी तरीके से लाल कर दिया था। सविता भाभी ने कहा आज तो तुमने मेरी चूत की गर्मी को पूरी तरीके से बुझा कर रख दिया है। मैं तुम्हारे साथ आज सेक्स कर के बहुत ही खुश हूं मैंने उन्हें कहा मेरा वीर्य आपकी चूत के अंदर गिरने वाला है। वह मुझे कहने लगी तुम अपने वीर्य को मेरी चूत मे ही गिरा दो। मैंने भी अपने वीर्य को उनकी चूत के अंदर ही गिरा दिया अब वह इतनी ज्यादा खुश हुई कि मुझे कहने लगी मुझे आज बहुत ही ज्यादा मजा आ गया और मैं बहुत ज्यादा खुश हूं। रात को वह अपने घर चली गई और उन्होंने मेरी इच्छा को बड़े अच्छे से पूरा कर दिया था।


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