गांड मारने का सपना पूरा हुआ

Gaand maarne ka sapna pura hua:

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मेरा नाम राकेश है मैं मुंबई का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 30 वर्ष है। मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करता हूं और मेरे माता-पिता भी जॉब करते हैं। मैं घर में एकलौता हूं और मैंने मुंबई से ही अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी की है। मैं शुरुआत से ही ज्यादा किसी के साथ घुलता मिलता नहीं हूं, मेरा नेचर थोड़ा अलग तरीके का है इसलिए मैं बहुत कम लोगों से बात कर रहा हूं। मैं सिर्फ काम की बात करता हूं और उससे अधिक मैं ज्यादा किसी के साथ बात नहीं करता। मेरे पिताजी मुझे हमेशा ही कहते हैं कि तुम लोगों से बहुत कम मिलते हो, तुम्हें लोगों से मिलना चाहिए जिससे कि तुम्हें भी अच्छा लगेगा लेकिन मैं उन्हें कहता हूं कि मेरा नेचर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है मुझे ज्यादा लोगों के साथ बात करना अच्छा नहीं लगता। मुझे ऑफिस में काम करते हुए काफी समय हो चुका था और मैं सोचने लगा मैं कुछ दिन छुट्टी ले लेता हूं जिससे कि मुझे थोड़ा रिलैक्स फील हो और अच्छा भी महसूस हो।

मैंने अपने ऑफिस में छुट्टी के लिए अप्लाई कर दिया और मुझे कुछ दिनों के लिए छुट्टी मिल गई। मैं सोचने लगा कि मुझे कहां जाना चाहिए, उसी दौरान मेरी मम्मी ने मुझसे कहा कि तुम्हारे मामा के लड़के की शादी है तुम कुछ दिनों के लिए बनारस चले जाओ, तुम्हें वहां पर अच्छा भी लगेगा और तुम अपने आपको अच्छा महसूस भी कर पाओगे। मैंने सोचा चलो यह तो अच्छी बात है इसलिए मैं बनारस जाने की तैयारी करने लगा। मैंने अपना सारा सामान रख दिया था क्योंकि मैं बहुत ही डीसीप्लेन में रहने वाला व्यक्ति हूं, मैंने अपने हर एक चीज को अच्छे से अपने बैग में रख लिया था ताकि मुझे कोई भी परेशानी ना हो। मैं बनारस अपने मामा के पास एक या दो बार ही गया हूं इसलिए मुझे बनारस के बारे में ज्यादा कोई जानकारी नहीं थी। मैं जब अगले दिन ट्रेन में निकला तो मेरे पिताजी ही मुझे स्टेशन तक छोड़ने आए थे, उन्होंने मुझे कहा कि तुम्हें कोई भी परेशानी हो तो तुम मुझे फोन कर देना।

मैंने उन्हें कहा ठीक है यदि मुझे कोई भी परेशानी होती है तो मैं आपको ही फोन करूंगा। मैं जब ट्रेन में बैठा हुआ था तो मैंने अपने कानों में हेडफोन लगा लिया और मैं गाने सुनता रहा, मैं ज्यादा किसी के साथ बात नहीं करता। मेरे आस पास जो भी लोग बैठे थे वह सब लोग आपस मे बात कर रहे थे, मेरे सामने एक फैमिली बैठी हुई थी। मैं जब अगले दिन बनारस पहुंचा तो मैंने बनारस पहुंचते ही अपने मामा को फोन कर दिया और उन्होंने किसी लड़के को मुझे रिसीव करने के लिए भेज दिया, जब वह मुझे मेरे मामा के घर ले गया तो मेरे मामा के लड़के मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए और कहने लगे तुम काफी सालों बाद यहां आ रहे हो, चलो तुमने यह तो अच्छा किया कि तुम शादी में आ गए। मेरे मामा का लड़का भी दिल्ली में जॉब करता है और उससे मेरी बातचीत ठीक-ठाक है, मैं इतना ज्यादा भी उससे घुला मिला नहीं हूं लेकिन उसके साथ मैं बात कर लेता हूं। मैं जब अपने मामा के लड़के राज से मिला तो रज मुझे देखते ही कहने लगा क्या बात है तुम तो हमारे घर पर आ गए, मुझे तो बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। मुझे ऐसा लगा जैसे राज ने मुझ पर टौंट कसा हो, मेरी आदत ज्यादा मजाक करने की नहीं है और ना ही मैं किसी की बातों को अपने दिल पर लेता हूं। मैंने उससे बड़े ही प्यार से कहा कि मैं सोच तो काफी समय से रहा था लेकिन आ नहीं पाया, इस बार मैने सोचा की सबसे मिल आता हूं। राज मुझे कहने लगा चलो यह तो तुमने अच्छा किया कि तुम मेरी शादी में आ गए, मुझे बहुत ही खुशी हुई। राज ने मुझे अपने कुछ दोस्तों से भी मिलवाया और उसके दोस्तों से मिलकर मैं काफी खुश हुआ। इतने में मेरे मामा भी आ गये और वह कहने लगे बेटा तुम पहले अपना सामान रख लो और उन्होने राज से कहा कि तुम राकेश को उसका रूम दिखा दो और राकेश को कोई भी परेशानी नहीं होनी चाहिए। राज कहने लगा पिताजी मेरे होते हुए राकेश को कैसी परेशानी हो सकती है आखिरकार राकेश भी मेरा भाई है। राज मुझे अपने साथ लेकर चला गया और उसने मुझे मेरा रूम दिखा दिया, वहां पर मैंने अपना सामान रखा।

कुछ देर तो राज मेरे साथ बैठा रहा और उसके बाद वह कहने लगा मैं अभी चलता हूं क्योंकि काफी रिश्तेदार आ रहे हैं और मुझे उन्हें भी देखना है, मैंने राज से कहा ठीक है तुम चले जाओ मैं तब तक फ्रेश हो लेता हूं। मैंने भी अपने बैग से तौलिया निकाला और उसके बाद मैं बाथरूम में नहाने के लिए चला गया, मैं 10 मिनट तक नहाने के बाद बाथरूम से बाहर निकला तो मैंने देखा की रूम में और भी काफी सारे लोग बैठे हैं इसलिए मुझे थोड़ा अजीब सा महसूस होने लगा। मैं उन्हें पहचानता भी नहीं था, कुछ देर वह लोग बैठे रहे, उसके बाद जब वह लोग चले गए तो मैंने अपने बैग से अपना कुर्ता पजामा निकाल लिया और मैंने कपड़े चेंज कर लिए। मैं रूम में ही बैठा हुआ था और मैंने उसके बाद अपनी मम्मी को फोन कर दिया, मेरी मम्मी कहने लगी क्या तुम सही सलामत पहुंच गए थे। मैंने मम्मी से कहा हां मैं पहुंच गया था और मुझे रास्ते में कोई भी परेशानी नहीं हुई। वह लोग मेरी बहुत ज्यादा चिंता करते हैं क्योंकि मैं ज्यादा किसी को कुछ भी नहीं बोलता इसलिए वह लोग हमेशा ही मुझे लेकर बहुत चिंतित रहते हैं, यह बात मुझे भी पता है लेकिन फिर भी मैं अपने आप को बदल नहीं सकता क्योंकि मेरा नेचर ही ऐसा है। मैं रूम में ही बैठा हुआ था, मेरे सामने एक खूबसूरत सी लड़की आकर बैठ गई।

मैं उसकी तरफ नजरे मिला भी नहीं पा रहा था लेकिन उसने मुझसे कुछ देर बाद बात की और कहने लगी मैं राज की दोस्त हूं। मैंने उसे हेलो कहा और मैं चुपचाप बैठ गया लेकिन वह भूखी नजरों से मुझे देखी जा रही थी। वह मेरे पास आकर बैठ गई, उसने मेरी जांघ पर हाथ रख दिया मेरा लंड भी खड़ा हो गया, मैंने उसे कहा यह आप क्या कर रही हैं लेकिन मेरे अंदर से  आवाज आ रही थी कि आज तुम इसकी गांड फाड़ कर रख दो, मैं उसे बोल नहीं पाया। मैंने उसे कहा यह आप सही नहीं कर रही मैं उठकर थोड़ा सा किनारे आ गया वह मुझसे आकर चिपक गई और कहने लगी जानू तुम्हें देख कर तो मेरी इच्छा जाग उठी है और तुम मुझसे दूर भाग रहे हो। जब उसने यह बात कही तो मैंने भी कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और उसको पूरा नंगा कर दिया उसका फिगर बड़ा सॉलिड था उसकी हाइट तो कम थी लेकिन वह देखने में बड़ी सॉलिड थी। मैंने उसके नरम और मुलायम होठों का रसपान किया और जब उसके होठों से खून निकलने लगा तो मैंने उसके स्तनों को भी अपने मुंह में लेकर चूसा, मैं जैसे ही उसके निप्पल पर अपनी जीभ लगाता तो बहुत मजे मे आ जाती। मैंने उसके दोनों पैरों को खोलते हुए जैसे ही उसकी चकनी योनि के अंदर अपने लंड को डालता तो उसकी योनि बहुत टाइट थी मैंने भी उसे बड़े अच्छे तरीके से पेलना शुरू कर दिया। जब मेरा काला लंड उसकी योनि के अंदर जाता तो वह चिल्ला उठती मैंने काफी देर तक उसे बड़े अच्छे से चोदा लेकिन उसकी चूत इतनी ज्यादा टाइट थी कि मेरा वीर्य कुछ  ही झड़कों के बाद पिचकारी के रूप मे बाहर की तरफ निकल आया। हम दोनों कुछ देर तक तो बैठे रहे लेकिन थोड़ी देर बाद मेरा लंड उसे देखकर दोबारा से खड़ा हो गया। मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया और जैसे ही मैंने उसकी गांड के अंदर अपने मोटे लंड को डाला तो वह चिल्ला उठी। वह कहने लगी तुम  देखने में शरीफ हो लेकिन तुम्हारा लंड तो बड़ा ही मोटा हो तगड़ा है तुमने मेरी गांड पूरी तरीके से छिल कर रख दी है। मैंने उसकी गांड वाकई में बुरी तरीके से छिल दी थी, मैंने उसे बड़ी तेज तेज झटके मारने शुरू कर दिए। वह बड़े मूड में थी और उसने भी अपनी चूतड़ों को थोड़ी बहुत मुझसे मिलाने की कोशिश की लेकिन जैसे ही मेरा वीर्य उसकी गांड में गिरा तो मैं पूरे मजे में आ गया और मेरा गांड मारने का सपना भी पूरा हो गया। मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि मेरे साथ ऐसा हो जाएगा मेरी झोली में एक हसीना आ कर गिर गई। मैंने उसका नंबर भी ले लिया और अभी भी मैं उससे बात करता हूं।


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