एक लंड और दो हूर

Ek lund aur do hoor:

group sex kahani

हेल्लो मेरे प्यारे दोस्तों कैसे हो आप सब और उम्मीद करता हूँ सब खैरियत होगी | मेरा नाम चंदू है और मैं कटनी के पास एक गाँव मैहर का रहने वाला हूँ | मैं वैसे तो ज्यादा अच्छा दिखता नहीं हूँ पर मेरी सीरत काफी अच्छी है और मैं बोलता बड़े अच्छे से हूँ | मैं ऐसा बोलता हूँ कि किसी को भी आराम से शीशे में उतार लूँ | मेरे गाँव में पढाई लिखाई के लिए कुछ भी अच्छा नहीं था और ना ही कटनी में इसलिए मैंने सोचा क्यूँ न जबलपुर चला जाऊं | मैं जबलपुर गया और वहां नवयुग कॉलेज में दाखिला ले लिया | वहां पहले तो मेरा कोई दोस्त नहीं था पर जैसे जैसे सबसे बात होना शुरू हुयी तब मेरे दोस्त बन गए | ये तो हुयी मेरी बात अब मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मेरी जिंदगी में एक अजीब सा मोड़ आया और सब कुछ बदल गया | दोस्तों आप तो जानते ही हैं कि हमे तरह तरह के लोग मिलते हैं और कॉलेज का माहोल ही अलग होता | मेरे कॉलेज में लड़के और लड़कियां दोनों ही पढ़ते थे और मुझे ज्यादा तीन पांच करने की अदात तो थी ही नहीं इसलिए अपपनी मस्त कट रही थी |

दोस्तों अब मैं आपको बताने वाला हूँ कि मेरी जिंदगी में क्या हुआ और इसके लिए मुझे आपको थोडा पीछे लेके चलना होगा | मैं अपने गाँव का एक पढ़ा लिखा लड़का था और साब मेरे पापा की बड़ी इज्ज़त करते थे | हम थे बड़े गरीब पर इज्ज़त हमने काफी कमाई क्यूंकि मेरे पिता जी एक छोटे मोटे किसान हैं और हमारा गुज़ारा ही मुश्किल से हो पाता है पर फिर भी किसी से ना उधार लिया और ना ही सिर झुका | कुछ दिन बाद जब मैं १०वी में था तो मैंने सोचा क्यूँ न गाँव के बच्चों को कोचिंग दे दूँ जिससे मुझे कुछ खर्च मिल जाएगा और उनका भी भला हो जाएगा | मैं बच्चों को मन लगा के पढ़ाने लगा और वो लोग भी अपनी अपनी क्लास में अच्छा प्रदर्शन करने लगे | सब हैरान हो गए स्कूल में कि ये बच्चे इतने अच्छे कैसे हो गए | सब को बुलाया गया और पूछा आप कैसे पढ़ाई करते हो तो सबने कह दिया चंदू भैया हैं ना | अब सारे टीचर्स ने मुझे बुलाया और कहा ये आप क्या कर रहे हो ऐसा नहीं चल सकता | मैंने कहा क्या नहीं चलेगा तो विज्ञान वाले सर ने कहा आप बच्चों को स्कूल के बाहर नहीं पढ़ा सकते |

मैंने प्राचार्य से कहा महोदय आप बताइए मेरे पिताजी एक गरीब किसान हैं और हमे खाने के पैसे नहीं होते | इसी बीच अगर मैं इन बच्चों को पढाके कुछ खर्च निकाल रहा हूँ तो इसमें गलत क्या है ? प्राचार्य ने कहा कुछ नहीं और सारे सर भी उनकी बात से सहमत थे | अब टीचर्स मुझे खुद बुलाके बच्चों को पढ़ाने को कहते और मुझे पैसे भी मिल जाते | स्कूल का रिजल्ट आसमान छूने लगा और इसी बीच पूरे गाँव में मेरी वाह वाही होने लगी | सब इससे खुश थे पर फिर आगे पढने के लिए मैं गाँव से आ गया जबलपुर | अब सब कुछ सही था आप को भी पता है कोई पंगा नहीं न किसी से लेना एक न देना दो | पर ना जाने कहाँ से हमारे कॉलेज में दो लडकियां आ गयीं | वो रहीस थीं और सब उनके पीछे दीवाने हो गए क्यूंकि वो थीं ही इतनी सुन्दर | मुझे भी लगा वाह यार अगर इनसे दोस्ती हो जाए तो मजा आ जाए पर मैंने अपने मन को सम्भाल लिया और पढ़ाई में ध्यान देने लगा |

वो दोनों फर्स्ट इयर में थीं और मैं लास्ट में इसलिए ज्यादा कुछ हुआ नहीं और मैं कॉलेज से अव्वल दर्जे में पास हो गया | अब दिन भर नौकरी ढूँढने का काम था मेरे पास इसलिए मुझे कुछ और सूझता ही नहीं था | मैं भी तबीअत से लग गया और फिर मुझे क्रेक्स में नौकरी मिल गयी सेल्समेन की | मेरी तनखा दस हज़ार थी और इससे मैं आराम से रह पाता था और घर भी भेजता था पैसे | मुझे अच्छा लग रहा था मेरा काम और जैसा मैंने बताया मेरा बात करने का हुनर यहाँ मेरा भरपूर साथ दे रहा था | मुझे हर महीने कुछ टारगेट मिलते और मैं उनसे बढ़के देता था | ऐसे करते करते एक साल हो गया और फिर मुझे एरिया मैनेजर बना दिया और मेरी पेमेंट हो गयी सीधा चालीस हज़ार | अब मेरा घर पूरा संभल गया और मैं भी निश्चिंत रहने लगा | उसके एक साल बाद मुझे फिर साहब बना दिया और इस बार सीधा एक लाख पेमेंट | घर गाड़ी सब ले लिया मैंने और माँ बाप को भी यही बुला लिया | अब मुझे सब मिल गया था और मेरा काम भी सही चल रहा था |

एक बार की बात है मैं गोरखपुर एरिया में गया काम देखने और मैं अपनी कार में था | मैं एक दूकान में गया और उसके मालिक से बात करने लगा और इतने में मैंने देखा वही दो लड़कियां मुझे देख रही थीं | मैंने कहा जी आप वही हैं ना जो कॉलेज में थी | उन्होंने कहा हाँ चंदू हम वही हैं और हम तो तुम्हे गाँव से जानते हैं | मैंने कहा कैसे तो उन्होंने कहा हम आपसे कोचिंग लेते थे | मैंने कहा याद नहीं आया मुझे तो उन्होंने बताया हम अर्जुन ज़मींदार की बेटियाँ हैं | मैंने कहा गीता और सरीता | तो उन्होंने कहा हाँ चंदू जी | मैंने तुरंत कहा चलो मेरे घर तुम लोग थे और मैं पहचान ही नहीं पाया | मैंने उन दोनों को कार में बैठाया और उनको घर लेकर गया पर देखा घर पर ताला था और नीचे एक चिट्ठी में लिखा था बेटा हम गाँव जा रहे हैं परसों आयेंगे | मैंने कहा अरे यार मम्मी पापा तो नहीं है पर चलो अन्दर चलो | मैं उनको अन्दर लाया और कहा आप बैठो मैं चाय लाता हूँ आपके लिए |

मैं चाय लाया और उनसे बात करने लगा और वो दोनों भी काफी बातें बता रहीं थी | फिर मैं जैसे ही जाने लगा तो उन दोनों ने मेरा हाथ पकड़ा और कहा अब दूर मत जाओ और मुझसे लिपट गयीं | मैंने कहा आप ये क्या कर रहीं हैं ? तो उन्होंने कहा बस वही जो इतने सालों से करना चाहते थे | इतना कहते ही सरिता ने अपने कपडे उतार दिए और वो मुझे किस करने लगी | मुझे समझ नहीं आ रहा था पर कुछ भी हो मज़ा बड़ा आ रहा था | उसके बाद गीता ने भी अपने कपडे उतार दिए और उन दोनों ने मिलकर मेरे कपडे उतार दिए | मैं एक अबला मर्द जैसे अपनी इज्ज़त लुटते हुए देख रहा था पर एक बात कहूँगा उन दोनों के बदन बड़े मस्त थे | उनके दूध उनका पेट और गांड सब मस्त | गीता ने मेरे हाथ उठाये और अपने दूध पर रख दिए और कहने लगी दबाओ इनको | मैंने उसकी बात मानी और उसके दूध मसलने लगा | उसके बाद सरीता ने मेरा लंड पकड़ा और उसे हिलाने लगी | मुझे और मज़ा आने लगा और इतने में ही उसने मेरा लंड मुह में ले लिया |

जैसे ही उसने मेरा लंड मुह में लिया मेरे मुह से सिकारियां निकलने लगी | उसने बाद गीता ने मेरे मुह के पास अपनी चूत को खिसकाया और कहा चाटो | मैं गरम हो गया था तो मैंने झट से चाटना चालु कर दिया | उन दोनों की चूत बिलकुल गुलाबी थी और वो कह रही थी हमारी जवानी बस तुमाहरी है और किसी की नही | फिर वो दोनों मेरे लंड से खलेने लगी और मेरे मुह से आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः निकलने लगी और मेरे लंड से मुट्ठ निकाल दिया | अब मैंने उनसे कहा तुम्हरी चूत बस मेरी है और मैं उसको चाटने लगा रगड़ के और वो दोनों आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः करने लगी | अब मुझे चोदने के लिए गीता ने अपनी चूत पर मेरा लंड रखा और उसके ऊपर बैठ गयी और एक झटके में अन्दर ले लिया और उसकी चूत से निकला खून मेरे लंड पे लग गया | वो चिल्ला पड़ी पर ऊपर नीचे होकर चुदती रही | मैं सरिता की चूत चाट रहा था फिर गीता नीचे आई और सरिता ने अपनी चूत मुझसे चुदवाना चालू किया और उसक चूत से भी खून निकला |

वो दोनों आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः करते हुए बहुत चुदवा रही थीं | ऐसे ही हमने दो दिन तक चुदाई की और गीता से मेरी शादी हुई पर सरिता भी मुझसे ही चुदती है |


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