एक हाथ चूत मे, दूसरा हाथ चूचो मे

Ek hath chut me, dusra hath chuchon me:

kamukta, antarvasna मेरा नाम सुजीत है, मेरी पैदाइश हरियाणा के छोटे से गांव में हुई है लेकिन मेरे पिता जी दिल्ली में आकर बस गए। हमें दिल्ली में आए हुए काफी वर्ष हो चुके हैं दिल्ली में मेरे अब अच्छे दोस्त भी बन चुके हैं, मेरा जो ग्रुप है हम लोग उसमें चार लोग हैं मेरे दोस्तों का नाम साहिल शोभित और कविता है। साहिल और शोभित से मेरी दोस्ती स्कूल के दौरान हुई और शोभित ने मेरी मुलाकात कविता ने करवाई, कविता हालांकि लड़की है लेकिन वह हमारे साथ बिल्कुल हमारे दोस्तों की तरह रहती है और हमें कभी भी ऐसा नहीं लगा कि वह एक लड़की है, हम जब भी घूमने का प्लान बनाते हैं तो वह हमेशा हमारे साथ आती है कविता शोभित की ममेरी बहन भी है। एक दिन मुझे कविता का फोन आया वह कहने लगी सुजीत हम लोग काफी दिनों से कहीं घूमने नहीं गए हैं क्यों ना मेरी एक दोस्त के गांव हम लोग घूमने के लिए चले, वह मुझे कहने लगी तो मैंने उसे कहा अभी तो मेरा आना संभव नहीं है लेकिन कुछ दिनों बाद हम लोग प्लान कर लेते हैं तुम इस बारे में साहिल और शोभित से भी बात कर लेना, कविता कहने लगी ठीक है मैं उन दोनों से भी बात कर लेती हूं।

कुछ दिनों बाद हम चारों लोग मिले तो हम लोगों ने वहां जाने का फैसला कर लिया, वैसे भी काफी समय हो चुका था जब हम लोग गांव में नहीं गए थे और मेरा तो गांव से पहले से ही जुड़ाव है। कविता की दोस्त का नाम संगीता है, हम लोग उसके गांव चले गए और जब हम लोग उसके गांव पहुंचे तो वह जयपुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर था हम लोगों को वहां पर रहने की कोई दिक्कत नहीं हुई क्योंकि संगीता के ताऊ जी और चाचा लोग वहीं रहते हैं उन्होंने हमें कोई भी दिक्कत नहीं होने दी, हम लोग बड़ा ही इंजॉय कर रहे थे। संगीता के ताऊजी ने हमें एक कहानी सुनाई और कहा कि तुम लोग गांव के कुएं की तरफ मत जाना वहां पर रात के वक्त कोई भी नहीं जाता लेकिन हम लोगों ने उनकी बात नहीं सुनी और हम लोग रात को जाने की बात करने लगे, हम पांचों ने कुएं के पास जाने का फैसला कर लिया, हम लोग जब उस कुएं के पास जा रहे थे तो तभी उसके ताऊजी ने हमें देख लिया और आवाज देते हुए हमें कहा तुम लोग इतनी रात को कहां जा रहे हो? संगीता ने अपने ताऊ जी से कहा कि कहीं नहीं बस ऐसे ही टहल रहे हैं। वह कहने लगे इतनी रात को कोई टहलता है तुम लोग अंदर जाकर सो जाओ।

हम लोग अंदर चले गए लेकिन हमारे दिमाग में वही बात बैठी हुई थी और हमें किसी भी हालत में कुएं के पास जाना ही था, जब हम लोग दबे पाओं सीढ़ियों से नीचे उतरे तो मैंने सबसे पहले नजर संगीता के ताऊ के रूम की तरफ मारी वह सो चुके थे मैंने साहिल से कहा तुम आगे चलो और हम लोग तुम्हारे पीछे आ रहे हैं, साहिल आगे आगे चलने लगा जैसे ही हम लोग उस कुएं के पास पहुंचे तो वहां पर हमें ऐसा कुछ भी नहीं दिखाई दिया हम लोग वहीं पर खड़े हो गए, मैंने शोभित से कहा तुम मुझे सिगरेट तो पिलाओ, उसने जैसे ही मुझे सिगरेट जला कर दी तो सिगरेट मेरे हाथ से नीचे गिर गई मैंने सिगरेट को उठाया तो वह लोग वहां आसपास नहीं थे मैंने सोचा मैं उन्हें आवाज़ देता हूं, मैंने जब उन्हें आवाज दी तो वह लोग कहीं भी मुझे दिखाई नहीं दे रहे थे मेरी हालत तो खराब होने लगी थी लेकिन फिर भी मैंने उन्हें आवाज देनी जारी रखी लेकिन उन चारों की मुझे कोई भी आवाज नहीं आ रही थी और ना ही वह मुझे कहीं आस-पास दिखाई दे रहे थे, मैं जब थोड़ा आगे की तरफ दौड़ा तो वहां झाड़ियों में कोई आवाज सुनाई देने लगी मुझे लगा शायद वही लोग होंगे, मैं जैसे ही झाड़ियों की तरफ गया तो मुझे वहां पर कोई भी नहीं दिखा। काफी देर हो चुकी थी और मुझे डर लगने लगा था मैं घबरा कर कुएं के पास ही खड़ा हो गया मेरी हालत इतनी ज्यादा खराब हो चुकी थी कि मैं पसीना पसीना होने लगा था लेकिन उन लोगों का कहीं भी पता नहीं था मैंने सोचा मैं अब घर की तरफ ही चलता हूं, मैं जब घर की तरफ जाने लगा तो मुझे पायल की आवाज सुनाई देने लगी  लेकिन  मैंने पीछे पलट कर बोलने की हिम्मत नहीं की और मैं आगे आगे ही चलता रहा, तभी आगे से बड़ी तेजी से साहिल मेरे तरफ दौड़ा, मैं डर के मारे वही जमीन पर गिर पड़ा और वह लोग मुझे देखकर हंसने लगे, मैंने उन्हें कहा तुम्हारा दिमाग तो सही है तुम लोग मुझे क्या यहां डराने के लिए लाए थे।

वह लोग बड़ी जोर जोर से हंस रहे थे और मैंने उन्हें कहा अब मैं घर जा रहा हूं मैं वहां से घर चला गया, वह लोग भी मेरे पीछे पीछे आने लगे वह चारों मुझे देख कर बहुत हंस रहे थे और कह रहे थे तुम तो बड़े ही डरपोक किस्म के व्यक्ति हो। मैंने उनसे कहा यदि तुम लोग मेरी जगह होते तो क्या तुम लोग नहीं डरते। मैं वहां से गुस्से में घर की तरफ बढ़ गया, जब मैं घर पहुंचा तो सब लोग मेरा बहुत मजाक बना रहे थे लेकिन जब संगीता ने उन्हें चुप रहने के लिए कहा तो वह लोग चुप हो गए। उसके बाद मैंने उन्हें कहा मुझे बहुत नींद आ रही है हम सब लोग सो चुके थे। कविता और संगीता दूसरे रूम में सो रहे थे रात के 2:00 बजे मेरी नींद खुली। जब मेरी नींद खुली तो मैं सोने की कोशिश करने लगा लेकिन मुझे नींद ही नहीं आ रही थी मेरे दिमाग में सिर्फ उसी बात का ख्याल आ रहा था मेरे दोस्तों ने मुझे किस प्रकार से डराया। मैं वहां से उठकर बाहर आ गया मै बाहर इधर उधर टहलने लगा मैंने देखा जिस कमरे में कविता और संगीता लेटे हुए थे वहां की लाइट अब भी खुली हुई थी। मैंने वहां से झांकने की कोशिश कि तो मुझे देखकर बड़ी हैरानी हुई। वह दोनों बिल्कुल नग्न अवस्था में थी वह एक दूसरे के स्तनों को चूस रही थी। मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया मैं बड़े आराम से देख रहा था। मुझे उन दोनों का नंगा बदन देखकर बहुत जोश चढ चुका था। मैं उन दोनों की चूत के मजे लेना चाहता था मैंने जब दरवाजे को खटखटाया तो वह दोनों जल्दी से बिस्तर के अंदर चली गई।

हम दोनों ने दरवाजा खोलने की हिम्मत नहीं कि काफी देर तक में दरवाजे को खट खटाता रहा। मैंने जब आवाज दी तो संगीता ने दरवाजा खोला। संगीता दरवाजे पर खड़ी थी मैंने उससे कहा तुम लोग दरवाजा क्यों नहीं खोल रहे हो। संगीता ने अपने कपड़े पहन लिए थे मैं उन दोनों के पास जाकर बैठ गया वह लोग मुझे कहने लगी क्या तुम्हें नींद नहीं आ रही। मैंने उन्हें कहा नहीं मुझे नींद नहीं आ रही मैंने सोचा तुम लोगों से बात कर लू। वह दोनों बहुत घबराई हुई लग रही थी मैंने उन दोनों से कहा तुम लोग बहुत घबराई हुई लग रही हो क्या तुम कुछ गलत काम कर रही थी। कविता मुझसे कहने लगी तुम्हारा दिमाग तो सही है मैंने उनसे कहा मैंने सब कुछ देख लिया है मैं अब तुम दोनों के साथ सेक्स करना चाहता हूं। यह कहते हुए मैंने संगीता को अपने बाहों में ले लिया और उसके होठों को चूसने लगा। जब मैं उसके होठों को चूस रहा था तो कविता ने मेरी पैंट को खोलते हुए मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया वह मेरे लंड का रसपान बड़े अच्छे से करने लगी। मैने काफी देर तक संगीता के स्तनों का जमकर रसपान किया। कविता ने अपनी चूत को मेरे लंड पर सटाते हुए लगा दिया। मेरा लंड उसकी चूत के अंदर जा चुका था वह अपनी बडी चूतडो को मेरे लंड पर हिला रही थी वह ऐसा काफी देर तक करती रही। जब उसकी इच्छा पूरी तरीके से भर गई तो उसने मुझे कहा अब तुम संगीता को चोद लो। मैंने भी संगीता के दोनों पैरों को चौड़ा किया और संगीता की योनि पर अपने लंड को सटाते हुए अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। मैने संगीता कि चूत काफी देर तक मारी मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन मुझे उन दोनों के साथ सेक्स करने मे मुझे बहुत आनंद आया। वह दोनों कहने लगी तुम हमारे साथ ही सो जाओ मैं उन दोनों के बीच में सो गया, वह दोनों नंगी लेटी हुई थी मेरा एक हाथ संगीता के स्तन पर था और दूसरा हाथ कविता की चूत पर था। उसके बाद मुझे गहरी नींद आई मुझे पता ही नहीं चला कब सुबह हो गई।


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