एक अनजान गांव में भाभी ने मेरी रात रंगीन कर दी

Ek anjan gaanv me bhabhi ne meri raatrangeen kar di:

desi sex kahani, antarvasna

मेरा नाम राहुल है मैं दिल्ली का रहने वाला हूं,  मुझे घूमने का बहुत शौक है इसलिए मैं हमेशा ही नई नई जगह जाने का शौक रखता हूं। मैंने अपने पास सॉरी कुछ व्यवस्थाएं रखी है, मेरे पास मेरा एक कैमरा भी है जो कि मेरे पिता जी ने मुझे दिलवाया था। मेरे पिताजी और मेरी मां को मेरे घूमने से कोई भी आपत्ति नहीं है,  वह लोग हमेशा मुझे कहते हैं कि तुम अपने जीवन को अच्छे से जियो ताकि तुम हमें यह ना कहो कि हमने तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं किया। मेरे पिताजी ने मेरे लिए बहुत ही संपत्ति जोड़ ली है इसीलिए उन्होंने मुझ पर कभी भी दबाव नहीं डाला और कुछ संपत्ति हमारी पहले की भी थी। मैं घर में एकलौता हूं इसी वजह से मुझ पर कोई भी दबाव नहीं है और मैं बिल्कुल ही निश्चिंत होकर अपनी जिंदगी को जीता हूं। मैंने कभी भी अपने माता-पिता से कोई भी चीज मांगी हो तो उन्होंने मुझे वह चीज उसी वक्त दिलवादी दी, उन्होंने मुझे बचपन से इतना ज्यादा प्यार प्रेम दिया कि मुझे उनकी आदत सी हो गई है, मैं उनका बहुत ही आदर और सम्मान करता हूं।

एक बार मेरे पिताजी का कार एक्सीडेंट हो गया था उस वक्त मैं काफी दिनों तक अस्पताल में ही था, मैं बहुत ज्यादा चिंतित था और बहुत टेंशन में भी था क्योंकि मैंने अपने जीवन में पहली बार ही ऐसी स्थिति देखी थी। मैं जब अपने पिताजी का चेहरा देखता तो मुझे बहुत ही बुरा लगता। धीरे धीरे वह ठीक होने लगे तो मैं भी संतुष्ट हो गया था। एक दिन मैं और मेरे पिताजी साथ में बैठे हुए थे, वह मुझसे मेरे मध्य प्रदेश के टूर के बारे में पूछने लगे, मैंने उन्हें कहा कि पिताजी आप रहने दीजिए यदि आप वहां के बारे में ना ही पूछे तो अच्छा रहेगा, वह मेरे लिए बहुत ही खराब अनुभव था। कुछ देर तक मेरे पिताजी मेरे साथ बैठे रहे लेकिन जब वह चले गए तो मैं सोचने लगा कि वाकई में वह कितना खराब था, मैं जब मध्य प्रदेश पहुंचा तो मैंने पूरे मध्यप्रदेश का नक्शा अपने पास रख लिया था, मैंने सोचा था कि मैं जितना भी हो सके उतनी जगह घूम लूंगा इसीलिए मैंने एक बुलेट किराए पर ले ली।

मैं घूमते घूमते जब एक गांव में पहुंचा तो वहां पर मुझे कुछ बच्चे दिखाई दिए, मैंने उन बच्चों से पूछा कि यह रास्ता कहां जा रहा है। मुझे इंदौर जाना था लेकिन उन्होंने शायद मुझे गलत रास्ता बता दिया इसीलिए मैं इंदौर की जगह एक दूसरे ही रास्ते पर निकल गया और जब मैं गांव में पहुंचा तो उस वक्त अंधेरा सा होने लगा था, अंधेरा भी काफी हो चुका था इसलिए मैं सोचने लगा शायद मैं रास्ता भटक गया हूं यदि मैं वापस उस रास्ते पर जाता तो शायद मुझे कोई भी नहीं मिलता इसीलिए मैंने निर्णय किया कि मैं अब सीधा ही चलता रहूंगा। मैं जब आगे गया तो मुझे कुछ लाइट जलती हुई दिखाई दी, मैंने सोचा कि मैं यहीं पर रुक जाता हूं। मैं जब गांव में पहुंचा तो वहां मुझे एक व्यक्ति दिखाई दिए, वह मुझे बड़े गौर से देख रहे थे। उन्होंने एक बड़ा सा चश्मा लगा रखा था और वह काफी देर तक मुझे देखते रहे, मुझे लगा कि शायद मैं आज बहुत बुरा फंस गया हूं, शायद मेरी मदद कोई भी नहीं करेगा। उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम कहां जा रहे हो, मैंने उन्हें बताया कि मैं रास्ता भटक गया हूं इसीलिए मुझे आज आप लोगों की मदद चाहिए यदि आप मुझे आज अपने घर पर रुकने का मौका दे दे तो मैं आपका बहुत आभारी रहूंगा, वह कहने लगे कि तुम कुछ देर यहीं बैठो मैं अपने लड़के को बुला कर लाता हूं। मैं वही बाहर पर लगी एक खाट पर बैठ गया, मैं जब उस खाट पर बैठा तो मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कि मैं गलत फस गया हूं, मैं बहुत टेंशन में आ गया और जब कुछ देर बाद उनका लड़का आया तो वह बहुत ही लंबा चौड़ा था। मैं उसे देख कर बहुत दंग रह गया क्योंकि उसकी जिस प्रकार की कद काठी थी मुझे उसे देख कर डर भी लग रहा था। उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम कहां से आ रहे हो, मैंने उन्हें बताया कि मैं दिल्ली का रहने वाला हूं और मध्य प्रदेश घूमने के लिए निकला था लेकिन मैं रास्ता भटक गया और मैं आपके गांव में आ पहुंचा, मुझे आप लोगों की मदद चाहिए यदि आज आप मुझे रुकने की जगह देदे तो मैं आपका बहुत ही आभारी रहूंगा। वह पहले मुझे बहुत देर तक देखते रहे, जब उन्हें यह संतुष्टि हो गई कि मैं वाकई में भटक गया हूं तो उन्होंने उस दिन मुझे अपने घर पर रुकने के लिए कह दिया, मैं बहुत ही टेंशन में था लेकिन मेरे पास और कोई भी रास्ता नहीं था। मैं जब उनके घर पर रुका तो उन्होंने मुझे रात को अपने साथ खाना भी खिलाया।

उनकी पत्नी ने बड़ा अच्छा खाना बनाया था और वह लोग मुझसे मेरे बारे में पूछने लगे। मुझसे जितना हो सकता था मैंने उनके साथ बात की और उसके बाद वह मुझे एक कमरे में ले गए, मैं उस कमरे में लेटा हुआ था, वहां पर मोबाइल के सिग्नल भी अच्छे से नहीं आ रहे थे इसलिए मैं किसी के साथ भी संपर्क नहीं कर सकता था, मैं चुपचाप ही खाट पर लेटा हुआ था। मैं जब लेटा हुआ था तो उनकी पत्नी मेरे पास आई मैं थोड़ा घबरा गया। वह मेरे बगल में आकर बैठ गई, जब वह मेरे बगल में बैठी तो मैं बहुत डर रहा था क्योंकि मैं कभी भी गांव में नहीं रहा था और यह मेरे लिए पहले बार था जब मै ऐसे स्थिति में फंसा था। उनका  गदराया बदन देखकर मैं बहुत उत्तेजित होने लगा वह काफी देर से मेरे साथ बैठी हुई थी। मैंने हिम्मत करते हुए उन्हें कह दिया आज आप मेरी रात रंगीन कर दीजिए, मैं आपको कुछ पैसे दे दूंगा। मुझे उनसे यह बोलते हुए डर लग रहा था लेकिन मैंने हिम्मत करते हुए उनसे यह बात कह दी। जब मैंने उनसे यह बात कही तो उन्होंने मुझे कहा तुम मुझे उसके बदले क्या दोगे। मेरे पास एक बहुत महंगी घड़ी थी मैंने वह उन्हें दे दी। जब मैंने उन्हें वह घड़ी दी तो वह मेरे पास लेट गई और जब मैं उनके बड़े स्तनों को दबाता तो मुझे बड़ा अच्छा प्रतीत होता।

मैं काफी देर तक उनके नरम और मुलायम स्तनों को दबाता रहा, जब मैंने उनके होंठों को चुमा तो मुझे ऐसा लगा जैसे कि वह बड़ी ही सेक्स की भूखी है। मैंने उनके सारे कपड़े उतारते हुए उन्हें नंगा कर दिया। मैंने उनके बड़े स्तनों को अपने मुंह के अंदर ले लिया और चूसने लगा। मैं काफी देर तक उनके स्तनों को चूसता रहा वह पानी छोड़ने लगे। मैंने उनकी योनि के अंदर उंगली डाल दी उनकी योनि बड़ी ही टाइट थी। मैंने जब उनकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह उत्तेजित हो गई, वह अपने पैरों को खोलने लगी वह जिस प्रकार से अपने पैरों को खोलती तो मैंने भी उन्हें उतनी ही तेज गति से धक्के देने शुरू कर दिया। मैं उन्हें इतनी तेजी से चोद रहा था कि उन्हें बड़ा दर्द होता। मैं उनके साथ 5 मिनट तक संभोग का आनंद उठा पाया और जब मेरा वीर्य उनकी योनि के अंदर गिरा तो मैं कुछ देर तो लेटा रहा। उनकी गांड को देखकर दोबारा से मेरा लंड खड़ा हो गया, मैंने उनकी गांड मारने का फैसला कर लिया। मैंने उसके बदले उन्हें कुछ और पैसे भी दे दिए उन्होंने मेरे लंड पर सरसों का तेल लगा लिया और बड़े अच्छे से उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसा। जब मैंने उनकी गांड के अंदर उंगली डाली तो मुझे लगा शायद मैं उनकी गांड नहीं मार पाऊंगा लेकिन मैंने अपने लंड को उनकी गांड मे प्रवेश करवाया। मेरा लंड तेजी से उनकी गांड मे जा चुका था इसीलिए वह बहुत खुश थी। वह अपनी गांड को मुझसे मिलाने की कोशिश करती, मैं भी उन्हें उतनी ही तेज गति से झटके दे रहा था। मैं उनकी गांड का आनंद उठा रहा था उनकी गांड का छेद इतना ज्यादा टाइट था कि मेरे लंड से तो खून निकल ही गया था लेकिन उनकी भी गांड से खून निकलने लगा था। जब मेरा वीर्य उनकी गांड में गिरने वाला था तो मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उनकी बड़ी चूतडो के ऊपर अपने वीर्य को गिरा दिया। उसके बाद वह चुपचाप से अपने कमरे में चली गई और मैं रात भर वहां पर रुका लेकिन सुबह जब मैं वहां से इंदौर के लिए निकला तो मेरी जेब में एक भी रुपए नहीं थे, मैं पैसो से नंगा हो चुका था।


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