दुकान मे रंगीन चुदाई

Antarvasna, hindi sex story:

Dukaan me rangeen chudai मैंने अपनी जॉब से रिजाइन दे दिया था, अपनी जॉब से रिजाइन देने के बाद मैं अपना बिजनेस शुरू करना चाहता था और मैंने जल्द ही एक गारमेंट शॉप खोल ली। मैंने जब गारमेंट शॉप खोली तो मेरा काम भी काफी अच्छा चल रहा था और मैं अपने काम से बहुत खुश था लेकिन उस वक्त पापा की तबीयत खराब हो गई जिससे की इलाज में काफी ज्यादा पैसे खर्च हो गए। पैसे भी काफी ज्यादा लग चुके थे जिससे कि मेरे ऊपर भी अब काफी दबाव आने लगा था क्योंकि मैंने अपने दोस्तों से कुछ पैसे लिए थे जो कि मैं अब तक लौटा नहीं पाया था। धीरे धीरे कर के मैं उनके पैसे लौटा रहा था लेकिन मैं उस वक्त पूरी तरीके से टूट चुका था जब  मेरी दुकान में एक दिन आग लग गई। आग लगने से मेरी दुकान का सारा सामान जल चुका था। मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गया था मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की आखिर ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए ना तो मेरे पास अब पैसे थे और ना हीं मेरे पास कोई काम था लेकिन ऐसी स्थिति में मेरे सबसे करीबी दोस्त राजीव ने मेरी बहुत मदद की।

उसने ही मुझे पैसों को लेकर मदद की राजीव विदेश में नौकरी करता है और वह कुछ समय के लिए घर आया हुआ था। राजीव ने मुझे कुछ पैसे दिए जिससे कि मैंने अब दोबारा से अपना काम शुरू कर लिया था शुरुआत में मैं सोच रहा था कि मेरा काम अच्छा चल पाएगा भी या नहीं लेकिन धीरे-धीरे अब काम अच्छे से चलने लगा था और मैं काफी ज्यादा खुश था। एक दिन मैं अपने काम से घर लौट रहा था उस दिन मेरी मां ने मुझे फोन किया और कहा कि बेटा तुम्हारे पापा की तबीयत बहुत ज्यादा खराब है तुम जल्दी से घर आ जाओ मैंने मां को कहा कि हां मां बस थोड़ी देर बाद मैं घर आ रहा हूं। थोड़ी ही देर बाद मैं घर पहुंच गया जब मैं घर पहुंचा तो मैंने मां से कहा कि मां क्या हुआ तुमने मुझे बताया कि पापा की तबीयत अचानक से खराब हो गई थी। मैंने पापा को देखा तो उन्हें काफी तेज बुखार था इसलिए मुझे उन्हें जल्दी से डॉक्टर के पास लेकर जाना पड़ा। मैं उन्हें डॉक्टर के पास ले कर चला गया जब मैं उन्हें डॉक्टर के पास लेकर गया तो वह काफी ज्यादा कमजोरी महसूस कर रहे थे, डॉक्टर ने कहा कि आज आपको इन्हें हॉस्पिटल में ही रखना पड़ेगा।

मैंने पापा को उस दिन हॉस्पिटल में एडमिट कर दिया, दो दिन तक पापा हॉस्पिटल में रहे उसके बाद उनकी तबीयत में सुधार होने लगा तो हम लोग उन्हें घर ले आए। हम लोग पापा को घर ले आए थे और पापा की तबीयत भी अब पहले से ज्यादा बेहतर हो चुकी थी वह काफी अच्छा महसूस कर रहे थे। मैं अपने काम में कुछ ज्यादा ही ध्यान दे रहा था इसलिए मुझे घर पर बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था मैं घर देरी से आता था। जब मैं शाम को घर आता तो मुझे समय नहीं मिल पाता था मेरी जिंदगी बिल्कुल भी अच्छे से नहीं चल रही थी मुझे लगता था कि कोई तो ऐसा होना चाहिए जिससे कि मैं अपनी बातों को शेयर कर पाऊं। पापा जी तबीयत ठीक नहीं रहती थी और मां पापा की देखभाल में ही लगी रहती थी मुझे समझने वाला कोई भी नहीं था मैं अंदर ही अंदर घुटता जा रहा था क्योंकि अपने काम के बोझ तले मैं बहुत ज्यादा बिजी रहने लगा था इसलिए मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पा रहा था। एक दिन मैं अपने एक रिलेटिव की शादी में गया हुआ था जब मैं वहां पर गया तो उस शादी में मुझे एक लड़की दिखी वह लड़की मुझे बहुत पसंद आई लेकिन मैं उससे बात नहीं कर पाया। उस दिन के बाद उस लड़की का चेहरा जैसे मेरे दिमाग में छप चुका था और मैं उसी के बारे में सोचता लेकिन मैं उसे जानता नहीं था और ना ही उसके बाद मेरी उससे कभी मुलाकात हुई लेकिन जब एक दिन मेरे दोस्त ने मुझे उस लड़की से मिलवाया तो मैं उससे मिलकर बहुत खुश हुआ। मुझे उस लड़की का नाम पता चल चुका था उसका नाम मनीषा है और मनीषा से मिलकर मैं काफी ज्यादा खुश था मनीषा से धीरे धीरे मेरी नजदीकियां बढ़ती जा रही थी। हम दोनों फोन पर भी एक दूसरे से बातें करने लगे थे पहले तो मुझे लगता था कि मनीषा शायद मुझसे कभी बात करेगी ही नहीं लेकिन अब मैं मनीषा के साथ अपनी बातों को शेयर करने लगा था क्योंकि मुझे कोई ऐसा चाहिए था जो मेरी बातों को समझ सके। जब मनीषा मेरे जीवन में आई तो वह मेरी बातों को अच्छे से समझती थी और मैं उससे अपनी बातों को शेयर भी कर लिया करता था सब कुछ ठीक चलने लगा था और मैं काफी खुश था कि अब सब कुछ ठीक से चलने लगा है। मेरी जिंदगी में खुशियां लौट आने के बाद मैं बहुत ही खुश हो गया था क्योंकि मनीषा के मेरे जीवन में आने से मेरी जिंदगी में सब कुछ ठीक होने लगा था। मनीषा और मैं एक दूसरे को प्यार भी करने लगे थे और हम दोनों का प्यार अब काफी ज्यादा बढ़ने लगा था। मैं मनीषा के साथ होता तो मुझे बहुत अच्छा लगता और मनीषा को भी मेरे साथ बहुत ही अच्छा लगता था।

हम दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश किया करते थे जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताया करते तो मुझे तो बहुत ही अच्छा लगता था मुझे ऐसा लगता था जैसे कि मनीषा के अलावा मेरी जिंदगी में कुछ और है ही नहीं। मनीषा मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी थी और मनीषा के बिना मेरी जिंदगी में कुछ भी नहीं था। मनीषा के मेरे जीवन में आने से मेरी जिंदगी में अब एक बाहार सी लौट आई थी और मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गया था। हम दोनों के बीच प्यार दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा था और मनीषा मुझे अच्छे से समझने लगी थी। मनीषा एक दिन मेरी शॉप में आती है। जब वह मेरी गारमेंट शॉप में आती है तो मैं उस वक्त शॉप में ही था। मनीषा के लिए मैंने बाहर से कोल्ड मंगवा ली। मेरी शॉप के अंदर ही एक रूम है मैं और मनीषा वहां पर बैठे हुए थे। हम दोनों साथ में बैठकर बातें कर रहे थे कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद मेरे अंदर ना जाने मनीषा को लेकर क्या भावना जागने लगी मैंने उसकी जांघ पर अपने हाथ को रख लिया था। मैंने जब मनीषा की जांघ पर अपने हाथ को रखा तो मनीषा पूरी तरीके से गर्म होने लगी थी।

वह मुझे कहने लगी मेरी गर्मी बढ रही है अब मनीषा भी अपने आपको कहां रोक पा रही थी। उसने अपने कपड़ों को उतारना शुरू कर दिया। मैंने कभी भी सोचा भी नहीं था कि मनीषा के गोरे बदन को मैं ऐसे देख पाऊंगा। जब मैंने मनीषा के बदन को देखा तो मेरे अंदर की आग पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी मुझे साफ तौर पर लगने लगा था मैं बिल्कुल भी रह नहीं पाऊंगा। मैंने जैसे ही मनीषा के स्तनों का रसपान करना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा था। मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी मैंने मनीषा से कहा मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। मनीषा मुझे कहने लगी मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा है मैंने अपने हाथों से मनीषा के स्तनों को दबाना शुरू कर दिया था। मनीषा के स्तनों को दबाकर मुझे मज़ा आ रहा था जब उसके स्तनों का मै रसपान कर रहा था तो हम दोनों के अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ती जा रही थी और मनीषा के अंदर की गर्मी भी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। वह मुझे कहने लगी मेरे अंदर की आग बहुत ज्यादा बढ़ने लगी है। मनीषा ने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया उसने मेरे लंड को तब तक चूसा जब तक मेरे लंड से पानी बाहर नहीं आ गया था। मेरे लंड से पानी निकल चुका था मैंने मनीषा की योनि पर अपनी जीभ को लगाकर उसकी योनि को चाटना शुरू किया तो मनीषा की योनि से पानी निकलने लगा था। मनीषा की योनि से पानी निकलने लगा था वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और ना ही मैं अपने आपको रोक पा रहा था। मैंने मनीषा से कहा मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा हूं। मैंने जैसे ही मनीषा की चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो मनीषा जोर से चिल्लाई। मैंने देखा मनीषा पूरी तरीके से मजे में आ चुकी थी। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने हाथों में उठाकर उसे तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए थे। मेरे धक्के अब इतने ज्यादा तेज हो रहे थे कि मनीषा बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। वह मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। मैंने मनीषा को कहा रहा तो मुझसे भी नहीं जा रहा है अब लग रहा है अपने माल को तुम्हारी चूत में गिरा कर तुम्हारी इच्छा को पूरा करना पड़ेगा। मनीषा बोली मेरी चूत में अपने माल को गिरा दो और अपनी इच्छा को पूरा कर दो। मैंने मनीषा की चूत के अंदर अपने माल को गिरा दिया था और अपनी इच्छा को पूरा कर दिया था।

मनीषा बहुत ज्यादा खुश थी जब मैंने उसकी चूत के अंदर अपने माल को गिराया। मनीषा की चूत से अभी भी मेरा माल बाहर की तरफ को निकल रहा था। मैंने मनीषा से कहा मुझे तुम्हारे साथ दोबारा से सेक्स करना है। मैंने मनीषा को दोबारा से चोदा। मनीषा की चूत के अंदर बाहर में अपने लंड को करने लगा तो वह बहुत जोर से सिसकारियां लेने लगी और उसकी सिसकारियां इतनी ज्यादा बढ़ रही थी कि मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाया। मैंने अपने माल को मनीषा की चूत में गिरा दिया था। मैने उसकी इच्छा को पूरा कर दिया था मेरे अंदर की इच्छा पूरी हो चुकी थी। मैं काफी ज्यादा खुश था मनीषा के साथ मै शारीरिक सुख का मजा ले पाया। मनीषा ने भी मेरे साथ सेक्स का जमकर मजा लिया हम दोनों ने एक दूसरे के साथ सेक्स का जमकर लुफ्त उठाया। अब हम दोनों की इच्छा पूरी हो चुकी थी हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे जिस प्रकार से हम दोनों ने ही एक दूसरे के साथ सेक्स का मजा लिया था।

 


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