दोस्ती का वास्ता पत्नी को चोदो

Dosti ka wada patni ko chodo:

antarvasna, hindi sex stories मेरे कॉलेज की पढ़ाई होते ही मैं अपने मामा के साथ दुबई में काम करने के लिए चला गया, मैंने दुबई में कई वर्षों तक काम किया और जब मैं वापस दुबई से काम कर के दिल्ली लौटा तो सब कुछ बदल चुका था, मेरे लिए तो जैसे इतने वर्षों बाद दिल्ली आना बिल्कुल ही किसी सपने से कम नहीं था और मैं अपने पुराने दोस्तों को ढूंढने लगा, उसी दौरान मेरी मुलाकात मेरे एक दोस्त संतोष से हुई, वह कॉलेज में मेरे साथ ही पड़ता था और अब दिल्ली में उसका एक शोरूम है। मैंने संतोष से पूछा कि हमारे साथ में और भी क्लासमेट थे क्या तुम्हारी उनसे कोई बातचीत होती है? वह कहने लगा हां उन लोगों से मेरी बातचीत तो होती है परंतु अब मिलना नहीं हो पाता क्योंकि सब अपनी जिंदगी में व्यस्त हो चुके हैं।

संतोष मुझसे पूछने लगा क्या तुम्हारी शादी हो चुकी है? मैंने उससे कहा हां दोस्त मैंने तो दुबई में ही शादी कर ली। उसने मुझे कहा तुम अपनी पत्नी की तो तस्वीर मुझे दिखाओ, मैंने जब उसे अपनी पत्नी की तस्वीर दिखाई तो वह कहने लगा तुम्हारी पत्नी तो बहुत खूबसूरत है, वह कहने लगा क्या तुम्हारे बच्चे भी हैं? मैंने उसे कहा हां मेरे बच्चे भी हैं और अब हम लोग यहीं दिल्ली में सेटल हो चुके हैं, मैंने काफी साल दुबई में काम किया लेकिन मुझे लगा कि मुझे अब दिल्ली में ही अपना कोई काम शुरू कर लेना चाहिए। संतोष कहने लगा चलो तुमने यह तो बहुत अच्छा किया, मैंने संतोष से कहा तुम भी तो मुझे अपनी पत्नी की तस्वीर दिखाओ, जब उसने मुझे अपनी पत्नी की तस्वीर दिखाई तो मैं उसे देख कर दंग रह गया, मैंने उसे कहा यह तो रोशनी है, वह कहने लगा हां यही तो मेरी पत्नी है, मैंने उसे कहा तुम तो बड़े ही छुपे रुस्तम निकले, यह सब कैसे हो गया? वह कहने लगा बस हम दोनों के विचार एक दूसरे से मिल गए और हम दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया। मैंने संतोष से कहा तुम दोनों तो बिल्कुल एक दूसरे के विपरीत थे और तुम दोनों एक दूसरे को पसंद भी नहीं करते थे लेकिन यह सब कैसे हो गया? वह कहने लगा किसी दिन तुम मेरे घर आना फिर फुर्सत में इस बारे में बात करेंगे।

मैंने सोचा चलो इसी बहाने मैं रोशनी से भी मिल लूंगा, मैंने संतोष से कहा तुम मुझे यहां पर कोई ऐसी जगह दिलवा दो जहां पर मैं अपना काम शुरू कर पाऊं, वह कहने लगा मेरे एक मित्र हैं वह अपना होटल किराए पर देना चाहते हैं, मैंने संतोष से पूछा वह अपना होटल क्यों किराए पर देना चाहते हैं? वह कहने लगा वह अब ऑस्ट्रेलिया में ही सेटल हो चुके हैं लेकिन यहां पर पहले जो व्यक्ति उनका काम संभालता था उसने अब काम छोड़ दिया है इसीलिए वह अपना होटल किराए पर देना चाहते हैं। मैंने संतोष से कहा तुम एक काम करना मुझे वह होटल दिखा देना यदि मुझे वह पसंद आ जाता है तो मैं उसे किराए पर उनसे ले लूंगा, वह कहने लगा ठीक है मैं तुम्हारी बात उनसे ही करवा दूंगा और तुम किराये पर उनसे होटल ले लेना, मैंने संतोष से कहा ठीक है तुम मुझे वह होटल कब दिखा दोगे? वह कहने लगा तुम कल यहां आ जाओ  और कल तुम मेरे घर पर डिनर पर आ जाना, मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हारे घर डिनर पर भी आ जाऊंगा। अगले दिन ही मैंने संतोष को फोन कर दिया और उसे कहा क्या तुम आज फ्री हो? वह कहने लगा हां मैं तुम्हारे फोन का ही इंतजार कर रहा था और आज मैं कहीं भी काम पर नहीं गया। मैंने उसे कहा चलो ठीक है तो फिर मैं थोड़ी देर बाद तुम्हारे पास पहुंच जाता हूं, उसने मुझे कहा मैं तुम्हें वह होटल का एड्रेस दे देता हूं तुम सीधा ही वहां पर पहुंच जाना मैं भी वहां आ जाता हूं,  उसने मुझे होटल का एड्रेस मैसेज कर दिया मैं भी सीधा उस बताए हुए पते पर पहुंच गया। जब मैंने होटल देखा तो वह मुझे काफी अच्छा लगा और काफी बड़ा भी था, मैंने संतोष से कहा यह होटल तो मेरे लिए बिल्कुल सही रहेगा, मैं इसे अच्छे से चला पाऊंगा और जिस तरीके से मैं सोच रहा था वैसे ही यह होटल है, उसने मुझे कहा मैं तुम्हारी बात अपने दोस्त से करवा देता हूं। उसने मेरी बात अपने दोस्त से करवा दिया और जब मेरी उससे बात हुई तो वह होटल देने के लिए तैयार हो चुके थे उन्होंने मुझे कहा मैं कुछ दिनों बाद दिल्ली आऊंगा तो उस वक्त आप से बैठ कर बात करूंगा, संतोष ने मुझे कहा चलो यह तो काम हो चुका है अब तुम मेरे साथ मेरे घर पर चलो, हम दोनों संतोष के घर पर चले गए, जब मैं संतोष के घर पहुंचा तो रोशनी मुझे देख कर खुश हो गई और कहने लगी तुम इतने बरसों बाद मुझे मिल रहे हो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, संतोष मुझे कहने लगा शांतनु तो अब बड़ा आदमी हो चुका है और इतने सालों बाद दिल्ली लौट रहा है।

मैंने रोशनी से कहा तुम दोनों ने भी तो किसी को नहीं बताया कि तुम दोनों ने शादी कर ली है और मुझे संतोष ने तुम्हारी तस्वीर दिखाई तो मैं यह बात सुनकर बिल्कुल दंग रह गया, तुम दोनों ने आपस में शादी कर ली, तुम दोनों के विचार तो एक दूसरे से बिल्कुल भी मिलते नही थे लेकिन अब तुम दोनों एक दूसरे के साथ एक बंधन में हो, वह कहने लगी मुझे उस वक्त पता नहीं क्या हो गया था मैंने संतोष के साथ शादी कर ली, संतोष भी हंसने लगा और कहने लगा तुम्हें तो उस वक्त कुछ नहीं हुआ था लेकिन मुझे ही शायद कुछ हो गया था कि मैंने तुमसे शादी का फैसला कर लिया। मैंने उन दोनों से कहा तुम यह बात छोड़ो और तुम यह बताओ तुम लोग आज मुझे क्या खिलाने वाले हो? रोशनी कहने लगी आज मैं तुम्हें अपने हाथ की बनाई हुई डिश खिलाऊंगी तुम चिंता मत करो खाना तुम्हें अच्छा ही मिलेगा, संतोष और मैं बैठकर आपस में बात करने लगे। संतोष मुझसे कहने लगा यार मैं बहुत ज्यादा बेबस हो गया हूं और बहुत परेशान भी हूं मैं रोशनी को सेक्स को लेकर संतुष्ट नहीं कर पाता हूं। मैंने उससे कहा है ऐसी क्या बात हो गई तुम उसे संतुष्ट नहीं कर पा रहे हो।

वह कहने लगा मुझे ऐसा लगता है मेरा लंड खड़ा ही नहीं होता। उसकी बेबसी सुनकर मैंने उसके कंधे पर हाथ रख दिया उसने मुझसे कहा तुम रोशनी को चोदकर उसकी इच्छा पूरी कर दो। मैं यह बात सुनकर बड़ा दंग रह गया मैंने उसे कहा तुम्हारा दिमाग तो सही है वह कहने लगा देखो शांतनु तुम्हें इतना तो मेरे लिए करना ही पड़ेगा इतने वर्षों से मेरे बच्चे भी नहीं हुए हैं तुम उसे चोद कर प्रेग्नेंट कर दो। उसने मुझे अपनी दोस्ती का वास्ता दिया तो मैं उसे मना नहीं कर पाया जब हम लोगों ने डिनर कर लिया था तो संतोष ने मुझे अपने बेडरूम में भेज दिया। रोशनी ने उस दिन नाइटी पहनी हुई थी वह अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी, जैसे रोशनी को भी यह सब पता था, वह मुझे कहने लगी आओ शांतनु मेरे पास बैठो। जब मैं उसके पास गया तो वह मेरी छाती के अंदर हाथ डालने लगी उसने मेरे होंठो को भी चूमना शुरू कर दिया, वह बड़े अच्छे से मेरे होठों को किस कर रही थी मैंने भी रोशनी को अपनी बाहों में ले लिया। जब वह मेरी बाहों में आ गई तो मैंने उसे कहा तुम मेरे लंड को चूसकर खड़ा कर दो। उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो मेरा लंड एकदम तन कर खड़ा हो गया। जब मैंने उसके पूरे कपड़े उतारे तो उसकी गांड अब भी पहले जैसी ही थी मैं कॉलेज में उसकी गांड देखकर बहुत खुश होता था। मैंने उसके पूरे शरीर को चाटना शुरू किया जब उसका शरीर पूरा लाल हो गया तो मैंने उसे घोडी बनाते हुए उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया। मैं उसे अच्छे से चोद रहा था और उसकी इच्छा भी पूरी हो रही थी जब उसकी खुजली मिट गई तो मैंने उसकी योनि के अंदर वीर्य को गिरा दिया। मुझ पर उसकी गांड का नशा था मैंने अपने लंड को हिलाते हुए उसकी गांड के अंदर प्रवेश करवा दिया। जब उसकी भारी भरकम गांड के अंदर लंड गया तो मेरे अंदर जोश पैदा होने लगा मै बड़ी तेजी से उसे धक्के मारने लगा। मैं उसे इतनी तेजी से धक्के मार रहा था मुझे बहुत आनंद आने लगा, मैं यह सोच नहीं पाया कि संतोष के अंदर क्या बिल्कुल भी ताकत नहीं बची है। मैंने उससे पूछा संतोष तुम्हें चोदता नहीं है ? वह कहने लगी उसने तो मेरी इच्छाओं को कब से पूरा नहीं किया है। जब उसने मुझे संतोष के बारे में बताया तो मै बहुत शॉक्ड हो गया। जब मेरा वीर्य उसकी मोटी गांड के अंदर गिर गया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ और उसके कुछ समय बाद वह प्रेग्नेंट भी हो गई थी।


Comments are closed.


error: