दोस्त ने मेरे सामने भाभी को पेश किया

Dost ne mere samne bhabhi ko pesh kiya:

hindi sex stories, antarvasna मेरा नाम संतोष है मैं बरेली का रहने वाला हूं, मैं बरेली के ही एक मेडिकल स्टोर में काम करता हूं। वहां पर मुझे काम करते हुए काफी समय हो चुका है, मेरे साथ में ही एक लड़का और काम करता है, जिसका नाम गौरव है। हम दोनों अब बहुत अच्छे दोस्त बन चुके हैं, वह अक्सर मेरे घर भी आता जाता रहता है। गौरव राजस्थान का रहने वाला है, वह बड़ा ही अच्छा लड़का है, कई बार वह मेरे घर पर भी रुक जाता है, वह मेरे साथ बहुत अच्छे से रहता है। उसका जब भी मन होता है तो वह मेरे साथ मेरे घर पर रुक जाता है, हम दोनों के बीच में बहुत गहरी दोस्ती हो चुकी है, जैसे जैसे समय बीतता गया, वैसे ही गौरव और मेरी भी दोस्ती बहुत मजबूत होती गई। उसे जब भी मेरी आवश्यकता होती तो मैं तुरंत ही उसकी समस्याओं का हल कर देता।
एक बार कुछ दिनों के लिए गौरव अपने गांव चला गया, वहां पर उसके पिताजी ने उसके लिए लड़की देख ली। जब गौरव ने मुझे यह बात बताई तो मैंने उसे कहा कि तुमने तो मुझे कुछ भी नहीं बताया मैं तुम्हारी बात से बहुत दुखी हूं, गौरव कहने लगा मुझे खुद कुछ पता नहीं था, मेरे पिताजी ने लड़की पहले से ही पसंद की हुई थी। वह मुझे कहने लगा तुम भी कुछ दिनों के लिए छुट्टी लेकर आ जाओ, मैंने उससे कहा ठीक है मैं कोशिश करता हूं, तुम्हें तो पता ही है आजकल स्टोर में कोई भी नहीं है और छुट्टी मिलना मुश्किल है, उसने कहा फिर भी तुम कोशिश करना। मैंने अपने मेडिकल स्टोर के मालिक से बात की तो वह कहने लगे ठीक है तुम कुछ दिनों के लिए चले जाओ क्योंकि उस वक्त दो लड़के और काम पर आ गए थे। मैंने गौरव से कहा कि मैं तुम्हारे पास आ रहा हूं लेकिन तुम मुझे लेने के लिए आ जाना क्योंकि मैं पहली बार ही राजस्थान आ रहा हूं, उसने मुझे कहा कि तुम जब जयपुर पहुंच जाओगे तो वहां से मुझे फोन कर देना। मैंने अपनी ट्रेन की रिजर्वेशन करवा लिया और मैं जयपुर पहुंच गया, जब मैं जयपुर पहुंचा तो मैंने गौरव को फोन कर दिया। गौरव ने मुझे बताया कि वहां से कौन सी बस पकड़नी है, मैंने वहां से एक बस ली जो कि सीधा ही गौरव के गांव जाती थी। मैं जैसे ही गौरव के गांव पहुंचा तो गौरव मुझे लेने के लिए पहुंचा हुआ था, गौरव मुझे कहने लगा तुमने यह बहुत अच्छा किया कि तुम आ गए, मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा था। गौरव मुझे अपने घर ले गया, जब मैं उसके घर पर पहुंचा तो उसने मुझे अपने घर वालों से परिचय करवाया, उसके परिवार वालों से मिलकर मैं बहुत खुश हुआ क्योंकि मैं पहली बार गौरव के परिवार वालों से मिला था।
गौरव ने मेरी बहुत खातिरदारी की, मैंने उसे कहा कि तुम मेरी इतनी खातिरदारी मत करो क्योंकि तुम भी मेरे घर आते हो तो मैं तुम्हारा इतना भी आदर सम्मान नहीं करता, वह कहने लगा तुम पहली बार मेरे गांव में आए हो इसीलिए हमें भी तुम्हारी सेवा का मौका देने दो। दो दिन बाद हम लोग लड़की वालों के घर गए तो वहां पर गौरव की सगाई हो गई, मैंने गौरव को बधाई दी, मैंने उसे कहा कि चलो कम से कम तुमने तो सगाई कर ली। गौरव और मैं उस दिन शाम को छत पर बैठकर शराब पी रहे थे, गौरव मुझसे पूछने लगा तुम्हें लड़की कैसी लगी, मैंने उसे कहा कि लड़की तो अच्छी है और दिखने में भी बहुत व्यवहारिक है। गौरव मुझसे अपने दिल की बात बिल्कुल भी नहीं छुपाता था, वह मुझसे कहने लगा क्या तुम्हें वाकई में वह पसंद आई, मैंने उसे कहा हां लड़की तो मुझे बहुत अच्छी लगी, वह बहुत संस्कारी और व्यवहारिक भी है इसीलिए तुम उसके साथ शादी कर लो, तुम जल्दी शादी कर लोगे तो तुम्हारे मम्मी पापा को भी सहारा मिल जाएगा। गौरव घर में एकलौता है इसीलिए उसके माता-पिता को भी घर में किसी की आवश्यकता थी। गौरव और मैंने उस दिन बहुत ज्यादा शराब पी ली थी इसलिए हम दोनों छत पर ही लेट गए। जब सुबह सूरज की रोशनी मेरी आंखों पर पड़ी तो मेरी आंख खुल गई, मैंने देखा कि हम लोग तो छत पर लेटे हुए हैं, मैंने गौरव को उठाया, वह कहने लगा क्या रात को हम दोनों यहीं पर सो गए, मैन कहा हां कल हम दोनों यहीं पर लेट गए थे।
हम दोनों जल्दी से नीचे गए, हम दोनों फ्रेश हो गए उसके बाद जब मैं फ्रेश हो चुका था तो गौरव मुझे कहने लगा मैं तुम्हें अपने गांव घुमा ले आता हूं। हम दोनों गांव की सैर पर निकल पड़े, उनके गांव में एक बहुत पुराना किला था हम लोग वहां पर काफी देर तक बैठे रहे, मैं उस किले को बहुत देर तक देखता रहा। वह मुझे उस किले के बारे में पूरी जानकारी दे रहा था और उसके बाद जब हम लोग वहां से घर की तरफ लौट रहे थे तो मैंने गौरव से कहा अब तो तुम्हारी शादी हो जाएगी उसके बाद क्या तुम बरेली में ही काम करोगे, या फिर तुम अपने लिए यहां पर काम देखने वाले हो, गौरव मुझे कहने लगा मैं तो बरेली में ही काम करूंगा क्योंकि वहां मुझे अच्छा लगता है और यहां गांव में तो मेरे पास कुछ भी काम करने के लिए नहीं है। मैंने गौरव से कहा आज मेरा सेक्स करने का मन है लेकिन क्या यहां गांव में कुछ जुगाड़ हो सकता है। वह कहने लगा तुमने कैसी बात कर दी तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया। वह मुझे एक भाभी के पास लेकर गया उसके घर में कोई भी नहीं था मैं जब उसके घर में गया तो मैंने गौरव से कहा यहां पर कोई दिक्कत तो नहीं है। वह कहने लगा नहीं कोई भी दिक्कत नहीं है तुम आराम से मजे लो और इस भाभी की चूत मारो। वह भाभी मुझे कमरे में ले गई उसने मेरे हाथों में कंडोम दे दिया मैंने उसे कहा तुम यह कंडोम खुद ही मेरे लंड पर पहना दो।
मैंने उसको कहा कंडोम चढ़ाने से पहले तुम मेरे लंड को सकिंग करो ताकि मुझे मजा आ जा।ए भाभी ने मेरे लंड को इतने अच्छे से सकिंग किया की मेरा पानी बड़ी तेजी से निकल रहा था, वह अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को चूस रही थी काफी देर तक भाभी ने मेरे लंड हो सकिंग किया। मैंने भी उसे नंगा किया और उसके स्तनों का रसपान बड़े अच्छे से किया, मैं उसके स्तनों को जब चुसता तो वह बहुत खुश हो जाती। मैंने उसके स्तनों को बहुत देर तक चूसा, मैंने भाभी से कहा अब तुम मेरे लंड पर कंडोम चढ़ा दो। उसने मेरे लंड पर कंडोम चढा दिया, जब उसने मेरे लंड पर कंडोम चढ़ाया तो मैंने भी उस भाभी की चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया, जैसे ही मेरा लंड भाभी की योनि के अंदर घुसा तो वह चिल्ला रही थी। वह मुझे कहने लगी तेरा लंड तो बहुत ही मोटा है, मैंने उसे कहा क्यों तुम्हें मजा नहीं आ रहा। वह कहने लगी मुझे तो बहुत मजा आ रहा है लेकिन तुम्हारा लंड वाकई में बहुत ही मोटा है मुझे उसे अपनी चूत में लेने में बड़ा मजा आ रहा है। मैंने भाभी के पैरों को अपने कंधे पर रखते हुए बड़ी तेज गति से उसे चोदना शुरू किया। मैंने उसे इतनी तेज गति से चोदा की मेरा वीर्य कुछ क्षणों बाद गिर गया, जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैंने अपने लंड को भाभी की चूत से बाहर निकाल लिया, भाभी ने कंडोम मेरे लंड से बाहर निकाला तो मेरा वीर्य उस कंडोम के अंदर जा चुका था। मैने उसे कहा तुम दोबारा से मेरे लंड पर कंडोम चढ़ा दो उसने दोबारा से मेरे लंड पर कंडोम चढ़ा दिया। मैंने भाभी को घोड़ी बनाकर झटके देना शुरू किया तो वह अपनी चूतड़ों को मुझसे मिला रही थी और एकदम सीधी खड़ी थी। मैंने बड़ी तेजी से उसे धक्के दिए, मुझे बड़ा आनंद आ रहा था जिस प्रकार से मैं भाभी को चोद रहा था, मुझे उन्हें चोदने में बड़ा मजा आ रहा था, मै काफी देर तक भाभी की योनि के अंदर अपने लंड को अंदर बाहर करे जा रहा था लेकिन जैसे ही मेरा वीर्य गरा तो मैंने अपने कपड़े पहन लिए। गौरव ने मुझसे पूछा तुम्हें कैसा लगा, मैंने उसे कहा तुमने मुझे मजे दिला दिए, भाभी बडे मजे देने वाली है। गौरव ने भी भाभी को चोदा और जब हम दोनों ने अपना कार्यक्रम खत्म कर लिया तो उसके बाद हम लोग गौरव के घर चले गए, उस दिन में बड़े आराम से सोया।


Comments are closed.


error: