दो बदन एक हुए और सेक्स हो गया

Do badan ek hue aur sex ho gya:

Antarvasna, hindi sex kahaniyan मेरे पिताजी बड़े ही सख्त मिजाज इंसान थे उन्होंने कभी भी हमें आजादी नहीं दी। मेरी बहन जिसकी शादी को हुए साल भर ही हुआ था लेकिन उसका तलाक हो गया यह सब कहीं ना कहीं मेरे पिताजी की बंदिशों का ही नतीजा था कि मेरी बहन सुप्रिया का तलाक हो गया। मेरे पिताजी ने हम दोनों बहनों को हमेशा ही अपनी नजरों के सामने रखने की कोशिश की वह चाहते थे कि हम लोग सिर्फ उनकी बातों को माने और इसी के चलते मेरी बहन सुप्रिया और उसके पति के बीच में ज्यादा ना बन सकी और उन दोनों का डिवोर्स हो गया।

मेरी बहन सुप्रिया देखने में बहुत ज्यादा सुंदर है लेकिन उसके बावजूद भी उसके पति के साथ उसकी ज्यादा समय तक ना बन सकी और यह सब मेरे पिताजी की वजह से ही हुआ था क्योंकि उन्होंने हम दोनों बहनों को कभी पूर्ण रूप से आजादी नहीं दी जिस वजह से हम दोनों बहने हमेशा ही घर की चार दीवारों में कैद रही। मेरे पिताजी का शायद कोई दोष ना था क्योंकि मेरे पिताजी एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं जब वह शहर में आए तो उसके बाद भी उन्होंने गांव की रीति रिवाजों को छोड़ा नहीं था और वह शहर के माहौल में कभी पूरी तरीके से ढल नहीं पाए थे। अब भी वह चाहते थे कि हम लोग गांव के तरीके से ही शहर में अपना जीवन व्यतीत करें। जब तक हम लोग छोटे थे तब तक तो शायद हमें इस बात का कभी कोई फरक नहीं पडा लेकिन जब मेरी बहन सुप्रिया की शादी हुई तो उसके बाद मैं भी चीजों को समझने लगी थी अब मैं बड़ी हो चुकी थी इसलिए मुझे सारी चीज पता चलने लगी थी। मेरे पिता जी ने कभी हमें पूर्ण रूप से आजादी ही नहीं दी। मैं जब कॉलेज में थी उसी वक्त मेरी बहन सुप्रिया की शादी हुई मेरे हाथ में पहली बार मेरे पिताजी ने मोबाइल दिया मेरी सहेलियों के पास तो ना जाने कितने समय से मोबाइल था लेकिन मैंने पहली बार जब मोबाइल को अपने हाथ में देखा तो मुझे ऐसा लगा जैसे कि मैं किसी और दुनिया में चली आई हूं क्योंकि इतने वर्षों से मेरा जो सपना था वह पूरा हुआ था।

अब मेरे पास भी मोबाइल था मेरे पिताजी ने कभी हमें मोबाइल लेने ही नहीं दिया। जब मेरे पास मोबाइल आया तो मैं अपनी सहेलियों से रात भर व्हाट्सएप पर बातें किया करती थी और मैं उन्हे फोन भी करती थी। एक दिन गलती से किसी अनजान व्यक्ति का कॉल मेरे नंबर पर आया मैंने जब फोन उठाया तो सामने से आवाज ऐसी प्रतीत होता कि कोई लड़का है जिसकी उम्र 25 से 26 वर्ष होगी। मैंने उस दिन उससे ज्यादा बात नहीं की जब अगले दिन मैंने दोबारा उस नंबर पर फोन किया तो सामने से एक नौजवान युवक बातें कर रहा था और उसकी बातों में जैसे जादू था मैं उसकी बातों में खींची चली आई। पहली बार मैंने इतनी देर तक किसी लड़के से बात की थी मेरे जीवन का यह पहला ही मौका था जब मैंने किसी नौजवान युवक से बात की थी मैं बचपन से ही सरकारी स्कूल में पढ़ती आई हूं और जिस स्कूल में मैं पढ़ती थी वहां पर सब लड़कियां ही थी। उसके बाद जब मैंने कॉलेज में दाखिला लिया तो वहां पर भी लड़कियां ही थी इस वजह से मेरा किसी भी लड़के के साथ कभी कोई भी संपर्क ही नहीं था। जब मेरी उस दिन अजय से बात हुई तो उसके बाद मेरे उससे बातें होने लगी और धीरे धीरे हम दोनों को एक दूसरे के बारे में पता चलने लगा। अजय को मैंने अपने बारे में सब कुछ बता दिया था वह मुझे हमेशा कहता कि तुम तो घर के चारदीवारी में ही बंद रह जाओगी। तुम्हे भी कुछ करना चाहिए मैंने उसे कहा लेकिन मैं क्या करूं वह मुझे कहने लगा तुम दिल्ली जैसे शहर में रहते हुए भी अपने आप को कैसे बंद रख लेती हूं। मैंने जब उससे अपनी बहन सुप्रिया के बारे में बताया तो वह कहने लगा तुम्हारी बहन सुप्रिया के साथ तो गलत हुआ है ऐसा उसके साथ नहीं होना चाहिए था। सुप्रिया के लिए पिताजी ने एक और लड़का देख लिया था वह लड़का दिखने में बिल्कुल भी अच्छा नहीं था और सुप्रिया के सामने उसका तो कोई भी मेल ही नहीं था। सुप्रिया के सामने वह बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन सुप्रिया के तलाक के बाद पिताजी काफी तनाव में थे और मेरी मां भी बहुत चिंतित रहने लगी थी इसलिए वह चाहते थे कि सुप्रिया की शादी जल्द से जल्द कहीं और हो जाए शायद वह सुप्रिया को अपने ऊपर बोझ समझने लगे थे।

मुझे भी कई बार लगता कि यदि पिताजी ने ऐसे ही मेरी शादी किसी और के साथ कर दी तो मैं भला कैसे किसी के साथ रह पाऊंगी। सुप्रिया ने तो जैसे अपनी जिंदगी को सिर्फ मम्मी पापा के नाम कर दिया था वह इस रिश्ते के लिए मान चुकी थी। मैंने सुप्रिया से कहा भी था कि क्या तुम इस रिश्ते के लिए तैयार हो तो वह कहने लगी बहन अब तुम ही बताओ मेरे पास क्या कोई और रास्ता है शायद मेरे पास उस वक्त इस बात का कोई जवाब नहीं था मैं भी चुप हो गई। मैंने जब यह बात अजय को बताई तो अजय कहने लगा सुप्रिया का जीवन अब बर्बाद हो चुका है उसे सिर्फ अपने माता पिता की बात माननी है और उसके अलावा उसके पास कोई रास्ता नहीं है। अजय की बाते मुझ पर जैसे जादू करती थी और उससे बात करना मुझे हमेशा अच्छा लगता। मुझे ऐसा लगता जो मेरे दिल में चल रहा है उसे अजय मुझे बता दिया करता अजय मेरे दिल की बात को पढ़ने लगा था मैं क्या सोचती थी वह भी उसे पता रहता था इसीलिए तो हम दोनों की नजदीकियां दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी और फोन पर हम दोनों घंटों बात किया करते। एक दिन सुप्रिया ने मुझसे कहा देखो तुम फोन पर ऐसे ही किसी पर भरोसा नहीं कर सकती आजकल का जमाना बहुत खराब है।

मैंने सुप्रिया को समझाया और कहां तुम मुझे यह बताओ कि तुमने भी तो मम्मी पापा की मर्जी से शादी की थी तो क्या तुम्हारे जीवन अच्छा चल पाया। सुप्रिया के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था वह चुप हो गई वह मेरे रूम से चली गई। उस दिन के बाद उसने मुझे कभी कुछ नहीं कहा हालांकि अब उसकी शादी हो चुकी है और वह सिर्फ अपने जीवन को काट रही है वह ना चाहते हुए भी अपने जीवन को व्यतीत करने के लिए मजबूर थी उसके पास कोई रास्ता ना था। इसी बीच मेरी और अजय की बातें और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी हम दोनों अब एक दूसरे से मिलना भी चाहते थे। इसी दौरान  मुझे अजय ने कहा मै दिल्ली आने वाला हूं और तुमसे मुलाकात करूंगा। मैं बहुत खुश थी क्योंकि पहली बार मै अजय से मिलने वाली थी। मैं जब अजय से मिली तो हम दोनों की जवानी फूट पड़ी मेरे अंदर भी अजय को लेकर कुछ चलने लगा था। अजय मेरे बारे में यही सोचता था कि मैं सिर्फ उसके साथ टाइमपास कर रही हूं इसी के लिए उसने मुझे कहा मैं देखना चाहता हूं कि क्या तुम मुझसे वाकई में प्यार करती हो या फिर सिर्फ फोन पर ऐसे ही बातें किया करती हो। मैंने अजय से कहा फिर मैं तुम्हें कैसे यकीन दिलाऊ? अजय मुझसे कहने लगा तो फिर हम लोग कहीं चलते हैं अजय मुझे अपने दोस्त के घर पर ले गया मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था मुझे काफी घबराहट महसूस हो रही थी। अजय मुझे कहने लगा तुम घबराओ मत जब हम दोनो उसके दोस्त के घर गए तो वहां पर उसके दोस्त से मेरी और अजय की मुलाकात हुई वह थोड़ी देर तो हमारे साथ बैठा रहा और उसके बाद वह चला गया। मैं बहुत घबरा रही थी मेरे हाथ से पसीना आ रहा था अजय मुझे कहने लगा तुम इतना अनकंफरटेबल क्यों हो।

मैंने उसे कहा नहीं ऐसा तो कुछ भी नहीं है लेकिन मुझे मालूम था कि मैं बहुत अनकंफरटेबल हूं और आखिरकार अजय ने वह सब मेरे साथ किया जो मैं सपने में सोचा करती थी। मैंने आज तक कभी किसी लड़के के साथ ऐसा नहीं किया था अजय ने मेरे होठों को चूसना शुरू किया और वह मेरे होठों का रसपान करने लगा उसे बड़ा अच्छा लग रहा था। वह काफी देर तक ऐसा ही करता रहा मेरे अंदर की उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी क्योंकि पहली बार ही मैंने किसी के साथ लिप किस किया था लेकिन मुझे बड़ा अच्छा लगा। जब अजय ने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए तो मैं अपने स्तनों को अपने हाथों से ढकने लगी लेकिन उसने ना जाने कब मेरी ब्रा को खोलते हुए मेरे स्तनों को अपने हाथ से दबाना शुरू कर दिया। मैंने अपनी आंखें बंद कर ली थी जब मैंने अपनी आंखें खोली तो मैं बिस्तर पर थी और मेरे बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था। मैंने जब अपनी आंखें खोली तो मेरे सामने अजय का मोटा सा लंड था उसके लंड को देखकर मैं और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगी। मैंने जब उसे हाथ में लिया तो उसकी गर्मी और भी ज्यादा बढने लगी उसने मुझसे पूछा क्या तुमने कभी किसी के लंड को अपने मुंह में लिया है? मेरे पास कोई जवाब नहीं था लेकिन मैंने उसके मोटे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसके लंड का काफी देर तक मैंने रसपान किया।

जब हम दोनों के अंदर की उत्तेजना बहुत ज्यादा बढने लगी तो उसने मेरी योनि में लंड को सटाया और कुछ देर तक वह अपने मोटे लंड को मेरे चूत पर सहलाता रहा जिससे कि मेरी योनि से तरल पदार्थ बाहर आने लगा। जैसे ही उसने अपने मोटा लंड को मेरी योनि के अंदर प्रवेश करवाया तो मेरी दिल की धड़कन बहुत तेज होने लगी मुझे ऐसा लगने लगा जैसे मैं कुछ ही देर बाद झड़ जाऊंगी लेकिन ऐसा नहीं था मुझे भी हम मजा आ रहा था। मेरी योनि से लगातार तरल पदार्थ और खून बाहर की तरफ को निकलता जाता। अजय मुझे इतनी तीव्र गति से धक्के देता मेरा पूरा शरीर हिलने लगा और उसने मेरे स्तनों से खून भी निकाल कर रख दिया। हम दोनों ही पूरे उत्तेजित हो चुके थे जब मैं झड़ गई तो उसके बाद भी अजय मुझे धक्के देता रहा जैसे ही उसका वीर्य मेरी योनि में गिरा तो मुझे आनंद आ गया और हम दोनों एक हो गए।


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