दीक्षा के साथ प्यार भरा सेक्स

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Diksha ke sath pyar bhara sex मैं एक ऑफिस में काम करता हूँ। मैंने घर जाने के लिए एक हफ्ते की छुट्टी ली और घर चला गया। एक हफ्ते बाद मैं ऑफिस गया जब मैं ऑफिस गया तो उस दिन मेरी मुलाकात दीक्षा के साथ हुई। दीक्षा ने कुछ दिन पहले ही ऑफिस ज्वाइन किया था और मुझे उससे मिलकर अच्छा लगा। दीक्षा और मैं एक दूसरे के काफी ज्यादा करीब आने लगे थे हम दोनों की नजदीकियां बढ़ने लगी थी। इस बात के हमारे ऑफिस में भी चर्चे चलने लगे थे कि दीक्षा और मेरे बीच में कुछ तो चल रहा है लेकिन हम दोनों के बीच ऐसा कुछ भी नहीं था हम दोनों सिर्फ एक दूसरे को अच्छे से समझते और हम दोनों एक दूसरे से बात किया करते। मैं दीक्षा से काफी बातें किया करता था जिस वजह से दीक्षा और मैं साथ में बहुत ही ज्यादा खुश थे। समय के साथ साथ हम दोनों एक दूसरे के और भी नजदीक आते चले गए और अब हम दोनों एक दूसरे को वाकई में चाहने लगे थे। मैं दीक्षा के बिना एक पल भी नहीं रह पाता था और ना ही दीक्षा मेरे बिना रह पाती थी यही वजह थी कि हम दोनों एक दूसरे को इतना ज्यादा प्यार करने लगे थे कि हम दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन में रहने लगे थे और हम दोनों एक दूसरे के बिना बिल्कुल भी नहीं रह पाते थे। एक दिन दीक्षा और मैं साथ में थे उस दिन जब हम दोनों ने रात में डिनर पर जाने का फैसला किया तो मैंने दीक्षा को कहा कि हां यह बिल्कुल अच्छा रहेगा। काफी दिन हो गए थे हम लोग साथ में कहीं घूमने भी नहीं गए थे उस दिन हम लोग जैसे ही ऑफिस से फ्री हुए तो उसके बाद हम दोनों मूवी देखने के लिए चले गए और वहां से हम दोनों डिनर पर गए। हम दोनों ने साथ में डिनर किया और मुझे दीक्षा के साथ में बहुत ज्यादा अच्छा लगा।

जब मैंने और दीक्षा ने डिनर किया तो उसके बाद मैं दीक्षा को छोड़ने के लिए उसके घर पर गया और वहां से मैं अपने घर लौट आया था। मैं जब घर लौटा तो मां मेरा इंतजार कर रही थी वह मुझे कहने लगी कि रोहित बेटा आज तुम काफी देर से आ रहे हो। मैंने मां को कहा कि हां मां आज काम में बिजी था इसलिए मुझे घर आने में लेट हो गई। मैंने मां से झूठ कहा था मैं मां को दीक्षा के बारे में बताना तो चाहता था लेकिन मुझे लग रहा था कि शायद अभी यह सही समय नहीं है इसलिए मुझे मां को अभी इस बारे में नहीं बताना चाहिए लेकिन समय के साथ मां को भी यह बात पता चलने लगी थी कि मैं किसी लड़की को प्यार करता हूं। एक दिन मां ने मुझसे इस बारे में पूछा तो मैंने मां को दीक्षा के बारे में बता ही दिया और मैं चाहता था कि मां दीक्षा को मिले इसलिए मैं एक दिन दीक्षा को घर पर ले आया और मैंने दीक्षा को मां से मिलाया। उस दिन दीक्षा बहुत खुश थी और मुझे भी बहुत अच्छा लगा जब मैंने दीक्षा को मां से मिलवाया था। दीक्षा भी मां से मिलकर बहुत खुश थी और वह मुझे कहने लगी कि मुझे आज बहुत ही अच्छा लगा। उसके बाद दीक्षा का हमारे घर पर अक्सर आना जाना होता रहा और मुझे भी इस बात की बड़ी खुशी थी। दीक्षा और मैं एक दूसरे से मिलते हैं तो हम दोनों को बहुत ही अच्छा लगता है हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी लंबे समय से थे और सब कुछ हमारी जिंदगी में ठीक चलने लगा था।

मैं चाहता था कि मैं दीक्षा के साथ में शादी कर लूं लेकिन दीक्षा अभी इस बात के लिए तैयार नहीं थी। मैंने दीक्षा को इस बारे में कहा तो वह मुझे कहने लगी कि मुझे थोड़ा समय और चाहिए। मैं दीक्षा की भावनाओं की रिस्पेक्ट करता था इसलिए मैं दीक्षा की बात मान गया और हम दोनों का रिलेशन एक दूसरे के साथ चल रहा था। हम दोनों एक दूसरे से काफी प्यार करते और एक दूसरे को अच्छे से भी समझते थे लेकिन हम दोनों अभी भी एक दूसरे से शादी करने के लिए तैयार नहीं थे। दीक्षा को इस बात के लिए समय चाहिए था मैंने दीक्षा को कहा कि दीक्षा आज हम दोनों कहीं साथ में चलते हैं। मैं यह बात बिल्कुल भूल चुका था कि दीक्षा का जन्मदिन भी नजदीक आने वाला है। उस दिन हम दोनों साथ में गए और मुझे जब दीक्षा ने अपने बर्थडे के बारे में बताया तो तब जाकर मुझे ध्यान आया कि दीक्षा का जन्मदिन नजदीक आने वाला है। उस दिन हम दोनों ने डिनर किया उसके बाद मैं दीक्षा के जन्मदिन का तोहफा उसे देना चाहता था। जब मैंने दीक्षा के बर्थडे पर उसके लिए एक सरप्राइज पार्टी का अरेंज किया तो वह बड़ी ही खुश हो गई और मुझे कहने लगी कि रोहित मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि तुम मेरे लिए इतनी अच्छी पार्टी अरेंज करोगे। दीक्षा इस बात से बड़ी खुश थी और वह मुझे कहने लगी कि रोहित क्या तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो तो मैंने दीक्षा से कहा कि हां मैं तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करता हूं।

दीक्षा और मैं एक दूसरे के साथ उस दिन समय बिताना चाहते थे। हम दोनों ने उस दिन साथ में रुकने का फैसला कर लिया था मेरी बात दीक्षा मान चुकी थी। इस बात से मैं बड़ा खुश था दीक्षा मेरी बात मान चुकी है और उस दिन हम दोनों साथ में ही रुके। हम दोनों एक होटल में चले गए। जब हम लोग उस होटल में रुके तो दीक्षा और मैं एक ही बिस्तर पर लेटे हुए थे क्योंकि दीक्षा को भी यह बात अच्छे से पता थी कि हम दोनों के बीच आज सेक्स होगा दीक्षा को इस बात से कोई भी आपत्ति नहीं थी वह मेरा साथ देना चाहती थी। मैंने दीक्षा को अपनी बाहों में ले लिया था। कुछ देर तक दीक्षा मेरी बाहों में थी फिर मैंने उसे किस करना शुरु किया मै जब उसके होंठों को चूमने लगा तो मुझे अच्छा लग रहा था और दीक्षा को भी बड़ा मजा आ रहा था जिस तरीके से मै उसके होठों को चूम रहा था। हम दोनों की गर्मी बढ़ती ही जा रही थीमैंने दीक्षा के होठों को काफी देर तक चूमा जिसके बाद वह बहुत ही ज्यादा अधिक गर्म हो गई थी। दीक्षा और मैं एक दूसरे का साथ अच्छे से दे रहे थे। मैंने दीक्षा से कहा मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है मैंने दीक्षा के होंठो को काफी देर तक चूमने के बाद जब उसके कपडो को उतारना शुरू किया तो मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लगने लगा था। दीक्षा कोभी काफी ज्यादा अच्छा लगने लगा था जिस तरीके से वह मेरा साथ दे रही थी उससे मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था।

मैं और दीक्षा एक दूसरे के साथ खुश थे। मैंने अपने लंड को दीक्षा के सामने किया तो दीक्षा ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है। वह मेरे लंड को बहुत देर तक अपने मुंह में लेकर उसे चूसती रही। जब वह अपने मुंह में मेरे लंड को ले रही थी तो मेरे लंड से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था। मैंने दीक्षा से कहा मेरे लंड से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा है मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे अब हम दोनों की गर्मी बहुत ज्यादा बढने लगी थी। मेरी गर्मी बढ़ती ही जा रही थी वह बहुत ही ज्यादा खुश थी जिस तरीके से हम दोनो एक दूसरे की गर्मी को बढ़ाए जा रहे थे। मैंने और दीक्षा ने एक दूसरे को इतना ज्यादा गर्म कर दिया था मैंने दीक्षा के कपड़े उतार कर उसके स्तनों के बीच में अपने लंड को रगड़ना शुरू किया उसे मज़ा आने लगा। दीक्षा की दो पहांड जैसे स्तनों के बीच में मेरा लंड था और मैं अपने लंड को दीक्षा के स्तनों के ऊपर नीचे कर रहा था। जब मैंने दीक्षा के स्तनों को अपने मुंह के अंदर लिया तो उसे मज़ा आने लगा वह बहुत ज्यादा गर्म होने लगी थी। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था उसको भी बहुत ही ज्यादा मज़ा आने लगा था और मुझे भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था। दीक्षा अपने आपको बिल्कुल भी नहीं हो पा रही थी उसने मुझे कहा मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही हूं।

दीक्षा की चूत से पानी बाहर की तरफ को निकल रहा था और मैंने उसकी चूत को कुछ देर तक चाटा जिससे कि उसे मज़ा आने लगा और वह मेरे बालों को अपने हाथों से खींचने लगी थी। मैंने काफी देर तक उसकी योनि का मजा लिया फिर अपने लंड को उसकी योनि में घुसा कर अंदर की तरफ से डाल दिया। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर जा चुका था उसकी चूत के अंदर से पानी निकल रहा था। जब उसकी योनि से पानी बाहर निकलता तो मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था हम दोनों पूरी तरीके से गर्म होते जा रहे थे हमारी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। मैंने दीक्षा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को काफी देर तक किया जब मैं दीक्षा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करता तो वह मुझे कहती मुझे और भी तेजी से चोदता जाओ।

मैं उसे तेजी से चोदता जा रहा था। हम दोनों बहुत ही ज्यादा गरम हो चुके थे एक समय ऐसा आया जब मेरा वीर्य बाहर की तरफ को निकलने को था मैंने दीक्षा से कहा तुम अपनी चूतड़ों को मेरी तरफ कर लो। दीक्षा ने अपनी चूतड़ों को मेरी तरफ किया मैंने उसकी योनि में अपने लंड को घुसा दिया मेरा लंड उसकी योनि में जा चुका था। मेरा लंड दीक्षा की योनि के अंदर बाहर हो रहा था मैं बड़ी तेजी से उसे धक्के मार रहा था और वह मेरा साथ अच्छे से दे रही थी। जब मैं उसे धक्के मारता तो मुझे मजा आता और दीक्षा को भी बड़ा मजा आ रहा था जिस तरीके से वह मेरा साथ दे रही थी। हम दोनों ने एक दूसरे का साथ काफी अच्छे से हमने एक दूसरे का साथ दिया। इस तरह से हम दोनों ने अपना पहले सेक्स किया। उस दिन के बाद हम दोनों अक्सर सेक्स किया करते थे।


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