देर मत करो और ज्यादा

Der mar karo aur jyada:

Antarvasna, kamukta मैं अपने काम से इतना ज्यादा परेशान हो चुका था कि मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा कि मुझे क्या करना चाहिए। मेरा कंस्ट्रक्शन का काम है लेकिन कुछ समय से मेरा काम ठीक नहीं चल रहा मैंने जिसके साथ काम किया था उस व्यक्ति ने मेरे पैसे नहीं दिए और इसकी वजह से मेरी स्थिति बहुत खराब हो गई बैंक से भी मुझे अब नोटिस आने लगे थे क्योंकि मैंने जो पैसे बैंक से लोन लिए थे वह मैं चुका नहीं पाया था दिन-ब-दिन मेंरी स्थिति बहुत खराब होती जा रही थी मेरे ऊपर मेरे बच्चों की पढ़ाई का भी दबाव था और घर के खर्चे के लिए भी दिक्कत थी। मेरी पत्नी मुझे हमेशा कहती कि आप चिंता ना कीजिए सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन मैं इतना ज्यादा टेंशन लेना लगा था कि मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए। एक दिन मेरी लड़की मुझे कहने लगी पापा मुझे  कॉलेज की फीस जमा करनी है मैंने उसे कहा बेटा बस कुछ दिनों बाद मैं तुम्हें पैसे दे दूंगा लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि मैं फीस नहीं दे पाऊंगा जिसकी वजह से मेरी लड़की सुचिता को घर पर ही बैठना पड़ेगा।

उसने अपना कॉलेज भी छोड़ दिया था और जिन व्यक्ति ने मेरे पैसे देने थे उन्होंने मेरे पैसे अब तक नही लौटाये थे उनकी वजह से मेरा काम पूरी तरीके से बर्बाद हो चुका था मेरे पास अब कोई भी रास्ता नहीं था मैं पूरी तरीके से टेंशन में था लेकिन फिर भी मैं हिम्मत नहीं हारा इसलिए मैंने अपने दोस्तों से मदद लेने की सोची। वैसे तो मैं कभी भी अपने दोस्तों से मदद नहीं लेता लेकिन इस वक्त मुझे अपने दोस्तों की मदद लेनी पड़ी मैंने अपने दोस्तों की मदद से अपनी लड़की की फीस जमा कर पाया जिससे कि वह दोबारा से कॉलेज जाने लगी लेकिन मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए मैं इतनी मेहनत करता उसके बाद बजी मुझे इतनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। मैंने अपना काम भी छोड़ दिया था मैं सोचने लगा कि मैं अब कोई नौकरी कर लेता हूं इसलिए मैंने नौकरी करने की सोच ली थी परंतु उसी वक्त मेरे दोस्त ने मेरा हाथ थाम लिया और उसने मुझे कहा तुम चिंता ना करो मैं तुम्हारे साथ हूं।

वह आर्थिक रूप से बहुत मजबूत है और उसने ही मुझे उस वक्त सहारा दिया मेरे दोस्त का नाम संजय है संजय ने मेरा इतना साथ दिया कि मैं अब अपने काम में पूरी तरीके से ध्यान देने लगा था और मुझे अब काम भी मिलने लगे थे मुझे अब काम मिलने लगे थे तो उन्हें मैं बड़े अच्छे से करता। मैंने संजय के पैसे भी लौटा दिए थे और संजय भी खुश था मेरा घर भी अब अच्छे से चलने लगा तो सब कुछ पहले जैसा सामान्य हो गया था मेरी पत्नी मुझे हमेशा कहती कि मैं तुम्हें कहती ना थी कि सब कुछ ठीक हो जाएगा तुम बेवजह टेंशन ले रहे थे। मैंने अपनी पत्नी से कहा मैं तुम्हें क्या बताऊं मैं कितनी परेशानियों से जूझ रहा था लेकिन उसके बावजूद भी सब कुछ ठीक हो गया और यह सब संजय की वजह से ही संभव हो पाया है यदि संजय मेरा साथ नहीं देता तो शायद यह सब ठीक नहीं होता परंतु अब सब ठीक हो चुका है तो मैं सोच रहा हूं कि हम लोगों को कहीं घूमने जाना चाहिए। मैंने संजय से कहा यार संजय मैं सोच रहा हूं कि काफी समय से मैं बच्चों को कहीं ले भी नहीं पाया हूं हम लोग कहीं घूमने का प्लान बनाते हैं संजय मुझे कहने लगा क्यों नहीं मैं भी अपने बच्चों को और अपनी पत्नी को कह देता हूं वैसे भी वह लोग तो हमेशा ही घूमते रहते हैं परंतु फिर भी इस बार वह तुम्हारे परिवार के साथ चलेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा मैंने संजय से कहा ठीक है तुम भाभी से इस बारे में बात कर लेना। संजय दिल का बहुत अच्छा है और उसी की बदौलत मैं अपने काम को दोबारा से शुरू कर पाया नहीं तो मेरे काम की स्थिति बहुत ज्यादा बुरी हो चुकी थी परंतु अब सब कुछ ठीक होने लगा था और इसी के चलते मेरी और संजय की दोस्ती और भी गहरी हो गई थी। जब संजय और मैं कॉलेज में पढ़ते थे तो हम दोनों की बिल्कुल भी नहीं बनती थी लेकिन मुझे तब पता चला कि संजय एक अच्छा लड़का है उसके बाद संजय से मेरी दोस्त गहरी हो गई और उससे मेरी दोस्ती जब गहरी हुई तो उस वक्त से हम दोनों की दोस्ती चली आ रही है मैंने उससे मदद लेने के बारे में कभी नहीं सोचा था लेकिन जब संजय को मेरे बारे में पता चला तो उसने ही मेरी मदद के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया।

सब कुछ ठीक हो चुका था और हम लोग घूमने के लिए विदेश चले गए हम लोग घूमने के लिए स्पेन गए हुए थे स्पेन में हम लोगों ने बहुत अच्छा समय बिताया मेरा परिवार भी बहुत खुश था और संजय का परिवार भी बहुत खुश था मेरी लड़की सुचिता तो इतनी खुश थी कि वह मुझे कहने लगी पापा मुझे यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने सुचिता को कभी भी कोई कमी नहीं होने दी और उसके चेहरे पर जब भी मैं मुस्कान देखता हूं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है हम लोगों ने स्पेन में बहुत इंजॉय किया और जब हम लोग वापस लौट आए तो मैं अपने काम पर लग गया संजय कि मदद से मुझे अब अच्छा काम भी मिलने लगा। अब मैं बड़े अच्छे तरीके से काम करने लगा था सब कुछ पहले जैसा सामान्य हो गया था लेकिन मुझे नहीं पता था कि मेरे जीवन में अब एक और तकलीफ आ जाएगी, मेरी पत्नी की तबीयत खराब होने लगी अचानक से उसकी तबीयत में बहुत ज्यादा गिरावट आने लगी मैंने कई जगह डॉक्टरों को दिखाया लेकिन डॉक्टर भी मेरी पत्नी का इलाज ना कर सके वह घर पर ही थी मुझे उसे देखकर हमेशा ही टेंशन होती मैं जब भी अपनी पत्नी के चेहरे को देखता तो मुझे लगता मेरे जीवन में हमेशा ही परेशानियां बनी हुई है और कुछ समय बाद ही मेरी पत्नी का देहांत हो गया।

सुचिता भी पूरी तरीके से टूट चुकी थी हम दोनों अब अकेले हो चुके थे मेरी लड़की सुचिता तो बहुत ज्यादा दुखी थी काफी समय तक उसे इस बात का दुख था। मैंने सुचिता को उसके नाना नानी के घर भेज दिया था ताकि वह ठीक हो सके, मैं घर पर अकेला रहता था मुझे मेरी पत्नी की हमेशा याद आती थी और मैं जब भी उसके बारे में सोचता तो मेरी आंखें नम हो जाती। सुचिता अपने नाना नानी के साथ थी अब वह भी ठीक होने लगी थी और वह घर वापस लौट आई सुचिता को पता था कि मैं बजी अंदर से दुखी हूं लेकिन सुचिता ने कभी भी मुझे मेरी पत्नी की कमी महसूस नहीं होने दी वह घर का सारा काम अच्छे से संभालती थी। मैं जब भी सुचिता के चेहरे पर देखता तो उसके चेहरे पर हमेशा दुख होता लेकिन उसके बावजूद भी वह अपने दुख को कभी बयां नहीं करती थी उसे अपनी मां की बहुत याद आती थी लेकिन अब शायद उसका वापस लौटना मुश्किल था, मैं अपने काम पर लगा हुआ था मैं भी पूरी तरीके से टूट चुका था लेकिन मुझे अपना काम तो करना ही था क्योंकि मुझे सुचिता की देखभाल करनी थी और उसका अब मेरे सिवा इस दुनिया में कोई भी नहीं था मैं नहीं चाहता था कि मैं सुचिता को कभी कोई कमी होने दूँ। मैंने उसे कभी भी कोई कमी महसूस नहीं होने दी कुछ समय बाद मैंने सुचिता कि शादी कर दी अब मैं घर में अकेला हो चुका था पूरा घर मुझे काटने को दौड़ता। संजय मेरे साथ हमेशा खड़ा था और वह मुझे हमेशा ही सपोर्ट किया करता लेकिन मेरा अकेलापन अब इतना ज्यादा बढ़ चुका था कि मैं घर से कम ही बाहर नहीं निकलता था जब कोई काम होता तो मैं घर से बाहर निकलता उसी दौरान मेरे एक महिला से मुलाकात हुई है उसका नाम राधिका है।

राधिका की उम्र 35 वर्ष थी और उसके जीवन में भी मेरी तरह ही अकेलापन था उसके पति के साथ उसका डिवोर्स हो चुका था और वह अकेली ही रहती थी। हम दोनों के विचार एक दूसरे से बहुत मिलते थे, जब राधिका को मेरे बारे में पता चला तो उसे भी एहसास हुआ कि उसके जीवन में कितना अकेलापन है उसने मेरा साथ देने की सोची। वह मुझसे मिलने के लिए मेरे घर पर आया करती हम दोनों के बीच ना जाने ऐसा क्या था कि हम दोनों एक दूसरे के बिना रह ही नहीं सकते थे। एक दिन मुझसे मिलने के लिए राधिका आई तो जब राधिका मुझसे मिलने आई तो वह मुझे कहने लगी आप ठीक है। मैंने कहा मैं तो ठीक हूं तुम सुनाओ तुम कैसी हो वह कहने लगी मैं भी ठीक हूं। वह मेरे पास बैठी हुई थी मैंने उसकी जांघ पर हाथ रखते हुए उसे कहा मुझे कुछ दिनों से बहुत ज्यादा अकेलापन महसूस हो रहा है। वह कहने लगी मेरे होते हुए आपको कभी अकेलापन नहीं होगा उसने मुझे गले लगा लिया जब राधिका ने मुझे गले लगाया तो मुझे अंदर से एक अलग तरीके का मजा आ रहा था। मैंने उसके हाथों को चूमना शुरू किया और उसके सारे कपड़े उतारे।

वह मेरे सामने नग्न अवस्था में थी मैंने जब उसके स्तन और उसकी योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे बड़ा अच्छा लगता, मैं काफी देर तक ऐसे ही करता रहा। जब उसने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लिया तो उसे भी अच्छा महसूस हुआ वह मुझे कहने लगी आप देर मत कीजिए। मैंने अपने मोटे लंड को उसकी चूत में प्रवेश करवा दिया मेरा लंड उसकी चूत में जाते ही उसे दर्द महसूस होने लगा। वह सिसकिया लेने लगी मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के दे रहा था और वह भी बहुत तेज आवाज में चिल्ला रही थी। उसने अपने दोनों पैरों से मुझे जकड लिया था जिससे कि मैं भी नहीं हिल पा रहा था। जैसे ही मेरा वीर्य पतन राधिका की योनि में हुआ तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैं जन्नत में पहुंच गया हूं। उसके बाद राधिका ने मेरा साथ दिया राधिका को मेरे साथ गुजारना अच्छा लगता था और मैं भी उसके साथ में बहुत खुश था। मैने अपने और राधिका के बारे में किसी को भी नहीं बताया था, हम दोनों का रिश्ता अब भी चल रहा है, राधिका मेरे साथ बहुत खुश है।


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