कॉलेज की सबसे माल लड़की मेरे स्वाभिमान से खुश हुई

College ki sabse maal ladki mere swabhiman se khush hui:

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मेरा नाम रोहन है और मैं मध्यम वर्गीय परिवार से हूं। मेरी उम्र 23 साल है। हमारे घर में ज्यादा कोई पढ़ा लिखा नहीं है। इसलिए उनकी मानसिकता ऐसी है कि सिर्फ वह चाहते हैं कि जल्दी से कहीं नौकरी लग जाए और अपनी जिम्मेदारियों को अपने कंधे पर स्वयं ही उठा ले लेकिन मैं नहीं चाहता था कि मैं अभी इतनी जल्दी कुछ काम करने लग जाऊं। मैं किसी बड़े संस्थान में एडमिशन लेना चाहता था। जिसके लिए मैंने बहुत ही तैयारियां की। मेरे घरवाले तो मुझे पढ़ाना भी नहीं चाहते थे और उन्होंने मुझे स्कूल के बाद ही कह दिया था कि तुम अपने लिए कुछ काम देख लो। क्योंकि उनकी स्थिति कुछ ठीक नहीं है और वह बिल्कुल भी नहीं चाहते कि पढ़ाई में वह रुपए खर्च करे। उन लोगों की मानसिकता ही ऐसी बन चुकी है कि जल्दी से जल्दी कुछ काम कर लिया जाए और अपनी जिम्मेदारियों को अपने कंधो पर उठा लिया जाए। मेरा कई बार उनसे इस बात को लेकर घर में मतभेद भी रहता था लेकिन मैं उन्हें समझा नहीं पाया और ना ही वह कुछ समझना चाहते थे।

मैंने पार्ट टाइम करके अपने कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी की और अपनी फीस भी भरता रहा। मेरा ग्रेजुएशन तो जैसे कैसे करके पूरा हो गया लेकिन अब मैं एक बड़े संस्थान में एडमिशन लेना चाहता था। जिससे कि मैं अपने आगे की पढ़ाई कर पाऊँ और मैं उसी को लेकर तैयारी कर रहा था लेकिन मेरे पास पैसे भी नहीं होते थे और मुझे उस के लिए भी पार्ट टाइम जॉब करनी पड़ रही थी। जिससे कि मैं थोड़े बहुत पैसे जमा कर सकूं और अपने कॉलेज में आगे की पढ़ाई को पूरा कर लू। मैं पार्ट टाइम काम करता था तो मुझे अपनी पढ़ाई के लिए थोड़ा समय कम मिलता था। इसलिए काम के दौरान जब भी मुझे समय मिल जाता तो मैं वहां पर भी अपनी पढ़ाई करने लगता। अब मैंने एक बड़े संस्थान के लिए अप्लाई किया और उसकी तैयारी में लगा रहा। मैंने बहुत ज्यादा मेहनत की, कि मैं वहां पर निकल जाऊं। मैंने रात दिन एक कर दिया और अपनी नौकरी भी करता। जब मैंने उसका एग्जाम दिया था तो मुझे पूरा भरोसा था कि मैं उस कॉलेज में निकल जाऊंगा। मैने उस कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए पूरी मेहनत की थी। मैं उसी कॉलेज में अपनी आगे की पढ़ाई करना चाहता था क्योंकि उस कॉलेज का बहुत बड़ा नाम था और जो बच्चा भी वहां से पढ़ता वह किसी अच्छी जगह पर नौकरी पाता था। उसका रिजल्ट एक महीने बाद आना था। मैंने उसका रिजल्ट इंटरनेट पर देखा तो मेरा नंबर उस संस्थान में हो चुका था और मैं बहुत ज्यादा खुश हुआ। जब मेरा उस में सलेक्शन हो गया तो मैंने अपने घर में बारे में बताया लेकिन वह बिल्कुल भी खुश नहीं थे और उन्होंने मुझे बधाई भी नहीं दी। वह कहने लगे कि तुम अपने हिसाब से देख लो। तुम्हें जैसा भी अच्छा लगता है तुम वही करो। मैंने भी उनसे ज्यादा बातें नहीं की और अब मैं बहुत खुश था।

कुछ दिनों बाद कॉलेज में एडमिशन होने शुरू हो गए और मैंने वहां पर एडमिशन ले लिया। मेरे पास कुछ पैसे जमा थे। मैंने उससे अपनी फीस भर दी। अब मैं उस कॉलेज में जाने लगा और अपने पार्ट टाइम नौकरी भी करता था। क्योंकि मुझे पैसों की आवश्यकता थी। इसलिए मुझे कुछ ना कुछ तो करना ही था। अब जब मैं कॉलेज में पहले दिन गया तो वहां पर सब अमीर घर के बच्चों का एडमिशन हो रहा था। वह सब अपनी-अपनी कारो से आते थे और मैं पैदल ही कॉलेज जाया करता था। धीरे-धीरे सब बच्चे आने लगे लेकिन अब भी पूरे बच्चे कॉलेज में नहीं आ रहे थे। मैं अपनी पढ़ाई में ही लगा रहता था और कालेज के बाद अपनी जॉब पर निकल जाता था। वहां मैं ज्यादा किसी से भी बात नहीं करता था और कोई मुझसे भी बात नहीं करता था। एक दिन हमारे क्लास में एक बहुत ही सुंदर लड़की आई। उसका नाम शीतल था। वह दिखने में बहुत ज्यादा खूबसूरत थी। उसकी हाइट भी पांच फुट की थी। उसके लंबे लंबे बाल थे। मैं उसे देखकर उसकी तरफ आकर्षित हो गया और उसकी बड़ी बड़ी आंखें मुझे अपनी तरफ खींच रही  थी। जब भी वह मुझे देखती तो मुझे ऐसा लगता कि उसकी झील सी आंखों में कहीं मैं खो ना जाऊं लेकिन मैं उससे बात करने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था और ना ही वह मुझसे बात करती थी। क्योंकि मैं अपनी क्लास पढ़ने के बाद सीधा ही अपने घर के लिए निकल जाता था और वहां से अपनी जॉब पर चला जा रहा था। एक बार हमारे टीचर ने हमसे कुछ सवाल किए। जिसके वह जवाब चाहते थे लेकिन हमारी क्लास में से किसी ने भी कुछ नहीं कहा। जब उन्होंने मुझसे पूछा तो मैंने उनके सारे सवालों के उत्तर दे दिए। जिससे वह बहुत ही ज्यादा खुश हुए और जितने भी मेरे क्लास में बच्चे थे वह सब मेरी तरफ देखने लगे। वह मुझसे पूछने लगे कि तुम्हें यह सब कैसे पता चलता है। मैंने उन्हें बताया कि मैं सिर्फ पढ़ाई पर ही ध्यान देता हूं। इसी कारण अब मेरी उन लोगों से दोस्ती होने लगी और शीतल ने भी मुझ से बात करनी शुरू कर दी। जब उसने मुझसे पहली बार बात की तो मैं उसकी आंखों से आंखें भी नहीं मिला पा रहा था और मुझे बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी लेकिन फिर भी मैंने उससे बात की। अब वह भी मेरी अच्छी दोस्त बन चुकी थी। उसे कभी भी किसी प्रकार की समस्या होती तो वह मुझसे पूछ लिया करती थी। सब लोगों को यह बात पता चल चुकी थी कि मैं पढ़ने में बहुत ही अच्छा हूं और सारे टीचर भी मुझसे बहुत खुश थे।

एक दिन शीतल ने मुझसे पूछा क्या, मैं तुमसे तुम्हारा फोन नम्बर ले सकती हूं। यदि मुझे पढ़ाई में कभी भी कोई समस्या हो तो मैं तुम्हे फोन कर सकूं। मैंने उसे कहा ठीक है। तुम मुझे कभी भी पूछ लेना और मैंने उसे अपना नंबर दे दिया। अब जब भी उसे कोई समस्या होती थी तो वह मुझे फोन कर दिया करती थी। एक दिन मैं जॉब पर था। तभी उसका फोन आ गया और मैंने उसे कहा कि मैं बाद में फोन करता हूं। अभी मैं कुछ काम कर रहा हूं। जब मैंने उसे रात को फोन किया तो वो कहने लगी कि तुम इतने बिजी कहां थे। मैंने उसे बताया कि मैं पार्ट टाइम जॉब करता हूं और उसी से मैं अपनी फीस भरता हूं। वह यह बात सुनकर बहुत ही खुश हो गई। वह मुझे कहने लगी तुम्हारे पिताजी तुम्हारी फीस नहीं देते हैं। मैंने उसे कहा कि वह तो मुझे पढ़ाना भी नहीं चाहते थे और मैंने यह सब अपने पैसों से ही किया है। तब वह मुझे कहने लगे कि तुम बहुत ही स्वाभिमानी और मेहनती लड़के हो। मैं यह बात सुनकर बहुत ज्यादा गर्व महसूस कर रहा था और मैं खुश भी था। क्योंकि अब शीतल से भी मेरी बातें होने लगी थी।

अगले दिन वह मुझे कॉलेज में मिली और कॉलेज में मुझे कहने लगी कि मैं तुमसे बहुत प्रभावित हूं और मैं तुमसे अपने चूत मरवाना चाहती हूं। मैंने उसे कहा तुम बहुत बड़े घराने की हो मैं एक मामूली सा इंसान हूं। वह मुझे अब बाथरुम में लेकर गई हम दोनों बाथरूम के अंदर थे। उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेते हुए चूसना शुरू किया और वह बहुत ही अच्छे से मेरे लड को चूसती जाती। मैंने भी उसकी चूत को बहुत देर तक चाटा और वह उत्तेजित हो गई। मैंने उसे वहीं टॉयलेट सीट के सहारे खड़ा कर दिया और उसकी चूतडो को अपने हाथ में लेते हुए उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को अंदर डाला तो उसके मुह से बहुत ही तेज आवाज निकली और मेरा लंड पूरा उसकी चूत के अंदर जा चुका था। मुझे उसकी चूत  मे डालने में बहुत ही मेहनत करनी पड़ी। मैं अब उसे ऐसे ही धक्के मार रहा था और बड़ी तेज गति से उसे चोदे जा रहा था उसकी योनि बहुत ही टाइट थी मुझे बहुत गर्म महसूस हो रहा था। वह भी अपनी चूतड़ों को मेरी तरफ  मिलाती जाती। उसके चूतड़ों का साइज 38 था और मैंने उसकी चूतड़ों को पकड़ते हुए बड़ी तेजी से उसे धक्का मारना शुरू किया। जिससे कि उसके चूतड़ों पर मेरे हाथ के निशान भी पड़ गए थे और मैं ऐसे ही उसे चोदता जा रहा था। वह बड़ी ही तेज आवाज में चिल्ला रही थी और कह रही थी तुमने मेरी चूत बहुत ही अच्छे से मारी है मुझे काफी मजा भी आ रहा है। उसकी चूत से बहुत तेज आग निकल रही थी और मेरे लंड से भी बहुत तेज आग निकल रही थी। मेरा शरीर पूरा पसीना-पसीना हो चुका था मेरा पसीना टपक कर उसकी चूतड़ों पर गिरता और उसका पसीना भी टपक रहा था। मुझसे वह गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी और थोड़े समय में मेरा वीर्य पतन हो गया। जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैं ऐसे ही उसके चूतड़ों को काफी देर तक देखता रहा।


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