चूतडो पर हाथ से प्रहार कर लाल किया

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Chutadon par hath se prahar kar laal kiya मेरी नौकरी पुणे में लगी थी और मुझे फोन आए हुए कुछ दिन ही हुए थे मैं उस दिन अपने ऑफिस जा रहा था और बस का इंतजार कर रहा था थोड़ी देर में बस आ गई और मैं जब बस में चढ़ा तो बस में काफी ज्यादा भीड़ थी बस में बहुत धक्का-मुक्की हो रही थी। कंडक्टर मेरे पास किसी प्रकार से आया और उन्होंने मुझे कहा कि कहां जाना है तो मैंने उनसे टिकट ले लिया और मैं अपनी जगह पर ही खड़ा था। मैं सोच रहा था कि क्या हर रोज मुझे ऐसे ही भीड़ का सामना करना पड़ेगा क्योंकि मैं एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं और अपनी मेहनत से ही मैं पुणे तक पहुंचा था मेरे पिताजी एक किसान हैं और उन्होंने मुझे किसी प्रकार से पढ़ाया। हालांकि पहले वह इस पक्ष में बिल्कुल भी नहीं थे लेकिन उन्होंने मुझे पढ़ाया तो मैंने भी सोच लिया था कि मैं किसी अच्छी कंपनी में जॉब करूंगा जब पुणे में मेरा सिलेक्शन हुआ तो मैं बहुत खुश था।

मुझे करीब एक महीना होने आया था और जब मुझे अपनी पहली सैलरी मिली तो मैं बहुत ही ज्यादा खुश था मेरे हाथ में जब पहली बार मैंने 25000 रुपये देखे तो मैं बहुत खुश हुआ मैंने आज तक कभी भी इतने पैसे एक साथ अपने हाथ में नहीं देखे थे। मैंने उसमें से आधे पैसे अपने पिताजी को भिजवा दिए थे उन्होंने मुझे फोन कर के कहा कि गौरव बेटा हम लोग बहुत ही खुश हैं कि तुमने अपना रास्ता खुद ही चुना और तुम उसमें सफल हुए। पिताजी मेरी इस सफलता से बहुत खुश थे और अब कुछ ही महीनों बाद मैंने भी अपनी तनख्वाह से एक मोटरसाइकिल खरीद ली थी। मैं अपने ऑफिस हर रोज अपनी मोटरसाइकिल से आया जाया करता जिस बस स्टॉप पर मैं काफी समय तक खड़ा होकर बस का इंतजार करता था उसी बस स्टॉप पर मुझे एक लड़की काफी दिनों से दिख रही थी उसके लंबे सुनहरे बाल और उसकी सुंदरता ने मुझे अपनी ओर आकर्षित कर लिया था लेकिन मैं उससे बात नहीं कर सका। मैं अक्सर उसे उसी बस स्टॉप पर देखा करता लेकिन एक दिन मैंने उससे बात करने का पूरा मन बना लिया और जब मैंने उस लड़की से पहली बार बात की तो उसने भी मुझसे बड़े खुलकर बात की उसने मुझे बताया कि वह नागपुर की रहने वाली है और कुछ समय पहले ही उसकी नौकरी एक कंपनी में लगी है। मैंने भी उससे बात की और उसका नाम मुझे पता चल चुका था उसका नाम सुहानी है सुहानी को अक्सर मैं उसी बस स्टॉप पर देखता तो उससे मैं बात कर लिया करता था।

एक दिन मैंने सुहानी से कहा कि मैं तुम्हें तुम्हारे ऑफिस छोड़ देता हूं तो सुहानी ने कहा कि ठीक है तुम मुझे मेरे ऑफिस छोड़ दो और उस दिन मैंने सुहानी को उसके ऑफिस छोड़ दिया। अब धीरे-धीरे हम दोनों की बातचीत होने लगी और हम दोनों के बीच अच्छी दोस्ती होने लगी थी हम लोग एक दूसरे के साथ अच्छा समय बिताने लगे थे। सुहानी अपनी मौसी के घर पर ही रहती थी उसकी मौसी पुणे में ही रहती हैं और सुहानी ने मुझे अपने परिवार के बारे में बताया तो मैंने भी उसे अपने परिवार के बारे में बताया और कहा कि मैंने कितनी मेहनत की है और इतनी मेहनत के बाद मैं पुणे में नौकरी कर पा रहा हूं। सुहानी मेरे साथ अक्सर समय बिताती तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता अब हम लोगों की फोन पर भी बातें होने लगी थी जिस दिन भी सुहानी मुझे नहीं मिलती उस दिन मैं बहुत ज्यादा परेशान हो जाता हूं। एक दिन सुहानी ने मुझे कहा कि गौरव हम लोग आज कहीं लॉन्ग ड्राइव पर चलते हैं उस दिन रविवार था और रविवार की हमारी छुट्टी थी हम दोनों उस दिन मेरी मोटरसाइकिल से ही लॉंग ड्राइव पर निकल गए। हम लोग पुणे से काफी आगे आ चुके थे और उस दिन जब हम लोग वापस लौटे तो काफी देर हो चुकी थी देर रात तक मैंने सुहानी के साथ समय बिताया और सुहानी को उसकी मौसी के घर छोड़ दिया। सुहानी के साथ मुझे ऐसा लगता कि जैसे मेरे लिए सबसे खुशी का पल यही हो मेरे जीवन में सुहानी के सिवा कुछ और था ही नहीं लेकिन मैं अपने दिल की बात अभी तक कह नहीं पाया था। हालांकि सुहानी की आंखो में मुझे प्यार नजर आता था लेकिन उसके बावजूद भी मैंने सुहानी को कभी अपने दिल की बात नहीं कही थी। एक दिन सुहानी का जन्मदिन था उस दिन सुहानी और मैंने उसका जन्मदिन सेलिब्रेट किया मुझे नहीं मालूम था कि सुहानी उस दिन मुझे प्रपोज करेगी।

जब उसने मुझे प्रपोज किया तो मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि सुहानी मुझे प्रपोज करेगी और उसने जब मुझे प्रपोज किया तो मैंने उसे तुरंत हां कह दिया। यह मेरे लिए बहुत ही ज्यादा खुशी का पल था और उस दिन के बाद सुहानी और मैं एक दूसरे के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण बन गए हम दोनों एक दूसरे के सुख दुख में एक दूसरे का साथ देते। जब भी सुहानी को मेरी जरूरत होती तो मैं हमेशा सुहानी के साथ खड़ा रहता मुझे भी जब सुहानी की आवश्यकता होती तो मैं सुहानी को कह दिया करता और सुहानी हमेशा ही मेरा साथ दिया करती। एक दिन सुहानी मेरे फ्लैट में आई हुई थी उस दिन मेरी छुट्टी थी और सुहानी की भी ऑफिस की छुट्टी थी इसलिए हम दोनो साथ में समय बिताना चाहते थे। सुहानी को मुझ पर पूरा भरोसा था उस दिन हम दोनों साथ में बैठकर टीवी पर मूवी देख रहे थे हम दोनों जब मूवी देख रहे थे तो उस दौरान टीवी पर एक किस सीन चल रहा था जिसे देखकर मेरा मन सुहानी को किस करने का होने लगा मैंने उसको किस कर लिया।

सुहानी का शरीर गरम होने लगा उसने मुझसे कुछ देर तक बात नहीं की हम दोनों ऐसे ही बैठे रहे लेकिन थोड़ी देर बाद जब मैंने उसके होंठों को चूमा तो शायद वह भी अपने आप पर काबू ना कर सकी और हम दोनों को मजा आने लगा। हम दोनों एक दूसरे को किस कर के बहुत ही ज्यादा खुश थे मैंने जब सुहानी को बिस्तर पर लेटाया तो सुहानी मुझे कहने लगी गौरव तुम मुझे किस करते रहो। सुहानी अब पूरी तरीके से गरम होने लगी थी इसलिए वह अपने कपड़ों को उतारने लगी उसने अपने बदन से अपने कपड़े उतार दिए थे जिसके बाद मै बिल्कुल भी रह ना सका। मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हारी चूत मारना चाहता हूं वह मेरे सामने नंगी थी। मैं उसके बदन को अच्छे से महसूस कर रहा था उसके बदन को महसूस करने मे मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। जिस प्रकार से मैंने उसके बदन की गर्मी को महसूस किया उससे वह भी गरम होती चली गई और उसने मेरे लंड को अपने मुंह मे लेकर उसे चूसना शुरू किया तो उसके अंदर की गर्मी और भी अधिक बढ़ने लगी थी। वह ऐसा काफी देर तक करती रही उसे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था और मुझे भी कहीं ना कहीं बहुत अच्छा लग रहा था लेकिन जब मेरे लंड से पानी बाहर की तरफ निकलने लगा तो मैंने उसे कहा मेरा वीर्य बाहर निकलने वाला है। उसने मुझे कहा कोई बात नहीं तुम अपने वीर्य को मेरे मुंह में ही गिरा दो। मैंने उसके मुंह मुंह मे ही अपने को गिरा दिया मैं बहुत ज्यादा खुश था और वह भी काफी खुश थी। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया मैंने जब उसकी योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे बहुत ही मज़ा आने लगा और उसकी योनि का रसपान मैंने बहुत देर तक किया। मै उसके स्तनों के साथ खेल रहा था और उसके स्तनों को चूसने मे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने जब उसके निप्पलो को अपने मुंह में लेकर उनका रसपान करना शुरू किया तो वह खुश हो गई और मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसते रहो।

मैंने उसे कहा आज तो मुझे बहुत ही गर्मी महसूस हो रही है हम दोनों पूरी तरीके से पसीना पसीना होने लगे थे। हमारा अब अपने आप पर बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं था मैंने जब उसकी चूत के ऊपर अपने लंड को लगाया तो चूत से इतना ज्यादा पानी बाहर की तरफ को निकाल रहा था। मैंने उसे कहा तुम्हारी चूत पूरी तरीके से गीली हो चुकी है उसने कुछ नहीं कहा लेकिन मैंने उसकी योनि के अंदर धक्का मारते हुए अपने लंड को घुसा दिया जैसे ही मेरा मोटा लंड उसकी चूत मे गया तो वह जोर से चिल्लाने लगी और कहने लगी तुमने मेरी चूत मे दर्द कर दिया। मैंने उसे कहा तुम्हारी चूत बहुत ज्यादा टाइट है वह मुस्कुराने लगी। मैं उसके पैरों को खोलने लगा मैंने देखा उसकी चूत से खून टपक रहा है लेकिन मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। सुहानी भी इस बात से बड़ी खुश थी मैंने उसकी सील पैक चूत को तोड़ दिया था।

मैं उसके पैरों को अपने कंधों पर रख कर उसको चोदना चाहता था कुछ देर तक मैंने ऐसा ही किया। जब मुझे एहसास हुआ मुझे उसे घोड़ी बना कर चोदना चाहिए तो मैंने उसे घोड़ी बना दिया और उसकी योनि के अंदर बाहर अपने लंड को करने लगा मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था और उसे भी बहुत मजा आ रहा था। उसने मुझे कहा मुझे आज तुम्हारे साथ बहुत आनंद आ रहा है मैंने उसे कहा मैं तुम्हारी चूत का जिस प्रकार से मजा ले रहा हूं और तुम जिस प्रकार से मेरा साथ दे रही हो उससे मुझे लग रहा है कि मैं ज्यादा देर तक तुम्हार साथ नहीं दे पाऊंगा। वह कहने लगी कोई बात नहीं और यह कहते हुए मैंने उसकी चूत पर अपने हाथ से प्रहार किया तो उसकी चूतडे अब लाल होने लगी थी। वह बडे अच्छे से मेरे साथ दे रही थी काफी देर तक ऐसा करने के बाद जब मुझे एहसास होने लगा कि मेरा वीर्य बाहर की तरफ आने वाला है तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और सुहानी ने उसे अपने मुंह में ले लिया। अब सुहानी ने उसे काफी देर तक चूसा जब उसने मेरे लंड को चूसा तो कुछ देर बाद मैंने अपने वीर्य को उसके मुंह के अंदर गिरा दिया। मै बहुत ज्यादा खुश था मैं सुहानी के साथ सेक्स का मजा ले पाया और सुहानी भी बड़ी खुश थी।


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