चूतडो को देखकर वीर्य गिरा दिया

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Chutadon ko dekhkar veerya gira diya मैं अपना सामान पैक कर रहा था तभी मां मेरे कमरे में आई और कहने लगी कि राहुल बेटा क्या मैं तुम्हारी मदद कर दूँ। मैंने मां को कहा नहीं मां रहने दीजिए मैं अपना सामान पैक कर चुका हूं मां कहने लगी कि ठीक है बेटा तो फिर तुम खाना खा लो। हम लोगों ने डिनर किया और उसके बाद मैं सोने के लिए अपने रूम में चला आया मैं जब लेटा हुआ था तो मेरी आंख के सामने सिर्फ कविता का चेहरा आ रहा था मुझे बार-बार उसी का ख्याल आ रहा था और मुझे नींद ही नहीं आ पाई। मैं उस रात सोया ही नहीं था अगले दिन मैं सुबह के वक्त फ्लाइट से कोलकाता चला गया मैं जब कोलकाता गया तो उस दिन मैं कविता से मिलना चाहता था।

मैंने कविता को फोन किया तो उसने मेरा फोन नहीं उठाया मुझे लगा कि कविता मुझसे बात भी नहीं करना चाहती लेकिन फिर भी मैं उसे उस दिन फोन करता रहा आखिरकार उसने मेरा फोन उठा ही लिया। मैं कविता से मिलना चाहता था मैंने उसे कहा कि कविता तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रही हो तो कविता ने मुझे बताया देखो राहुल मैं नहीं चाहती कि तुम्हें मेरी वजह से कोई भी परेशानी हो। मैंने कविता को कहा कविता मुझे कभी तुमसे कोई परेशानी नहीं है लेकिन कविता मुझसे दूर जाना चाहती थी। कविता और मैं एक दूसरे को एक पार्टी में मिले थे और उसके बाद हम दोनों एक दूसरे से बातें करने लगे, हम दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगने लगा लेकिन कविता को लगता था कि हम दोनों कुछ ज्यादा ही नजदीक आ चुके हैं और यह हम लोगों के लिए ठीक नहीं हैं। कविता पहले से ही शादीशुदा है और उसका डिवोर्स अभी कुछ समय पहले ही हुआ है वह अपने माता-पिता के साथ रहती है उसे लगता है कि हम दोनों एक दूसरे से शादी नहीं कर सकते इसीलिए तो वह मुझे अक्सर कहती है कि मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहती।

मैं भी कविता के बिना एक पल नहीं रह सकता था इसलिए उस दिन मैंने उसे मिलने के लिए बुलाया और मैंने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन वह मेरी बात समझ ही नहीं रही थी। वह कहने लगी कि देखो राहुल तुम बहुत ही अच्छे लड़के हो लेकिन तुम्हें यह बात भी तो पता है कि हम दोनों का रिश्ता हो पाना बहुत ही मुश्किल है मैं अपनी जिंदगी अकेले बिताना चाहती हूं। कविता को मैंने काफी समझाया लेकिन मेरी बात समझ ही नहीं रही थी और उस दिन के बाद कविता मुझे मिली ही नहीं। कविता कोलकाता से जा चुकी थी वह अपनी सहेली के साथ शायद शिमला चली गई थी, मुझे उसके बारे में कुछ पता नहीं था कि वह कहां रह रही है लेकिन मैं कविता को ढूंढना चाहता था। मैंने अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली और मैं कविता को ढूंढने चला गया, मैं शिमला चला गया लेकिन मुझे कविता कहीं नहीं मिली मुझे शिमला में करीब 3 दिन हो गए थे लेकिन कविता से मेरी मुलाकात हुई ही नहीं थी। एक दिन अचानक से उससे मेरी मुलाकात हो गई तो मैंने कविता को कहां देखो कविता मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं और तुम्हारे साथ ही मैं जीवन बिताना चाहता हूं। वह मुझे कहने लगी कि राहुल यह संभव नहीं है वह मुझे मना कर रही थी लेकिन उसके बावजूद भी मुझे कविता का साथ चाहिए था। उसने मुझे कहा कि तुम मेरी जिंदगी से चले जाओ लेकिन यह इतना आसान होने वाला नहीं था इसीलिए मैंने कविता को समझाने की कोशिश की लेकिन वह मेरी बात नहीं मानी और मैं वापस कोलकाता लौट आया। जब मैं वापस कोलकाता लौटा तो मुझे लगा कि शायद अब कविता से मेरी मुलाकात कभी होगी ही नहीं मैं अपने काम पर ध्यान देने लगा था। जब भी मैं कविता के बारे में सोचता तो मुझे लगता कि काश कविता मेरी बात मान जाती लेकिन यह सब इतना आसान नहीं था और इस बात को काफी समय हो चुका था। एक दिन कविता का मुझे फोन आया और जब उसने मुझे फोन किया तो वह बहुत ही ज्यादा घबराई हुई थी और मुझे कहने लगी कि राहुल मुझे तुम्हारी जरूरत है। मैंने उसे कहा आखिर हुआ क्या तो उसने मुझे कहा तुम तुरंत ही शिमला आ जाओ और मैं तुरंत ही शिमला चला गया। जब मैं शिमला गया तो मैंने देखा की कविता बहुत ही ज्यादा परेशान थी और कविता मुझे कहने लगी कि उसका पति उसकी बेटी को लेकर चला गया है जिस वजह से वह बहुत ही ज्यादा परेशान थी और शायद यह बात मेरे अलावा कोई समझ ही नहीं सकता था इसलिए उसने मुझे फोन किया।

मैंने उसे समझाया और कहा कि हम लोग उसके खिलाफ कोर्ट में जाएंगे तो कविता कहने लगी कि राहुल मुझे बहुत ज्यादा टेंशन हो रही है मैंने उसे कहा तुम घबराओ मत सब कुछ ठीक हो जाएगा। मैंने उसे कहा लेकिन तुम अब चाहती क्या हो तो वह कहने लगे कि मैं तो कोलकाता वापस आना चाहती हूं। मैं और कविता कोलकाता वापस आ गए कविता के माता-पिता को इस बारे में पता चला तो वह लोग भी बहुत गुस्सा हो गए और उसके बाद वह लोग संजीव के घर चले गए। संजीव कविता के पति का नाम है लेकिन वह उनकी एक बात न माना उसके बाद हम लोगों ने पुलिस में केस दर्ज करवा दिया था जो कि अब कोर्ट में चला गया और थोड़े ही समय बाद संजीव को कविता की बेटी को वापस लौटाना पड़ा। कविता की बेटी को तो उसके पति ने वापस लौटा दिया था एक दिन जब कविता मुझसे मिलने के लिए आई तो उस दिन कविता और मैं साथ में बैठे हुए थे हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे कि अचानक से मेरी नजर कविता के स्तनों पर पड़ने लगी।

जब मैं उसके स्तनों को देख रहा था तो मेरा मन उस दिन कविता के साथ संभोग करने का होने लगा और मैंने उस दिन कविता के साथ संभोग करने का पूरा फैसला कर लिया था। जब मैंने उसे अपनी बाहों में लेने की कोशिश की तो वह मुझे कहने लगी राहुल तुम ही यह क्या कर रहे हो यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है तुम अपनी मर्यादाओं को पार कर रहे हो। मैंने उसे कहा कविता मैं तुम्हें पसंद करता हूं और भला इसमें कौन सी मर्यादा है यह कहते हुए मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया जब वह मेरी बाहों में आई तो अब मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया था वह भी अब मेरे लिए तड़पने लगी थी और उसकी प्यास बहुत ही ज्यादा बढने लगी थी। जब वह मेरे बाहों में पूरी तरीके से आ गई तो अब हम दोनों ही एक दूसरे की गर्माहट को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे इसलिए मैंने कविता के स्तनों को दबाना शुरू किया और उसके स्तनों को मैंने कुछ ज्यादा ही दबा दिया था जिससे कि उसे काफी दर्द होने लगा था। वह मुझे कहने लगी राहुल तुम थोड़ा आराम से नहीं कर सकते यह कहते ही मैंने उसके ब्लाउज को खोला और उसके ब्लाउज को खोला तो उसकी ब्रा को मैंने फाडकर एक किनारे फेंक दिया और उसके स्तनों को मैं अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा था और उसे भी मजा आने लगा था वह पूरी तरीके से गर्म हो गई थी उसकी गर्माहट इतनी अधिक होने लगी थी कि मैं बिल्कुल भी रहा नहीं पा रहा था। मैंने उसे कहा मुझे तुम्हारे स्तनों को चूसना मैं बहुत ही मजा आ रहा है अब मैंने उसकी साड़ी को भी खोलना शुरू कर दिया था मैंने जैसे ही कविता की साड़ी को उतारा तो कविता की पैंटी पूरी तरीके से गीली हो चुकी थी उसकी गीली हो चुकी चूत से मै पानी बाहर निकलना चाहता था। मैंने जैसे ही उसकी चूत को चाटना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा और मैं उसकी चूत को बहुत ही अच्छे से चाटता रहा मुझे उसकी योनि को चाटने में इतना अधिक मज़ा आ रहा था कि उसकी गर्मी पूरी तरीके से बढ़ती जा रही थी और जब मैंने अपने लंड को उसकी चूत के अंदर घुसाया तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और कहने लगी तुमने मेरी चूत में दर्द कर दिया है।

मैंने उसे कहा लेकिन मुझे मजा भी तो बहुत आ रहा है और यह कहते ही मैंने उसके पैरों को चौड़ा कर लिया वह भी अब मेरा पूरा साथ देने लगी थी मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता तो वह भी पूरी तरीके से उत्तेजित हो जाती और उसकी गर्माहट अब इतनी अधिक होने लगी थी कि वह मुझे कहने लगी राहुल तुम मुझे और भी तेजी से चोदो मुझे बहुत ही मजा आ रहा है। मैंने उसे कहा मजा तो मुझे भी बड़ा आ रहा है और यह कहते ही मैंने उसकी योनि के अंदर बाहर अपने लंड को बड़ी तेजी से करना शुरू किया लेकिन मेरा वीर्य जल्दी गिर चुका था। मुझे कविता ने कहा तुम अपने लंड को बाहर निकाल लो मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो मेरा वीर्य अभी भी कविता की चूत से टपक रहा था।

मैंने कविता को कहा मैं तुम्हें दोबारा से चोदना चाहता हूं लेकिन कविता इसके लिए तैयार नहीं थी लेकिन मैंने कविता की कमर को पकड़ते हुए उसे घोड़ी बना दिया और घोड़ी बनाने के बाद मैंने अपने लंड को अपने हाथ से हिलाया और कुछ देर तक अपने लंड को हिलाने के बाद कविता की चूत पर जैसे ही मैंने अपने लंड को सटाया तो कविता की योनि के अंदर मेरा लंड चला गया। जब मेरा लंड उसकी योनि के अंदर गया तो वह बहुत जोर से चिल्लाई अब मैंने उसे बड़ी तेजी से चोदना शुरू कर दिया था और जिस प्रकार से मैं उसे चोद रहा था उस से मुझे बड़ा ही अधिक मज़ा आ रहा था और वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी। उसकी गर्मी बढ़ने लगी थी मैंने उसे कहा तुम अपनी चूतड़ों को मझसे मिलाते रहो। वह अपनी चूतड़ों को मुझसे मिलाए जा रही थी जब वह ऐसा कर रही थी तो मुझे मज़ा आ रहा था उसकी चूतड़ों पर प्रहार कर के मैं बहुत ही ज्यादा खुश था और काफी देर तक मैंने ऐसा ही किया लेकिन जब मुझे एहसास होने लगा कि जल्द ही मेरा माल गिरने वाला है तो मैंने अपने लंड को बड़ी तेजी से उसकी चूत के अंदर बाहर करना शुरू किया और अपने वीर्य की पिचकारी को उसकी चूत में गिराकर उसकी सारी गर्मी को मैंने शांत कर दिया।


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