चूत तडपती और लंड उसकी प्यास बुझाता गया

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Chut tadapti aur lund uski pyas bujhaya gaya मेरे ऑफिस का पहला दिन था और पहले दिन ही मुझे ऑफिस पहुंचने में देरी हो गई। जब मैं ऑफिस पहुंचा तो बॉस ने मुझसे ऑफिस देरी से पहुंचने का कारण पूछा, मैंने उन्हें बताया कि मुझे घर से निकलने में ही देरी हो गई थी। मैंने उसके लिए उनसे माफी मांगी तो उन्होंने भी मुझे कुछ नहीं कहा क्योंकि मेरा ऑफिस का पहला दिन ही था। मैंने अपने काम से अपने बॉस को बहुत ज्यादा प्रभावित कर दिया था और वह भी काफी खुश थे मुझे अपने ऑफिस में जॉब करते हुए 6 महीने हो चुके है। मैं छोटे शहर का रहने वाला हूं मेरे लिए मुंबई जैसे बड़े शहर में अपने आप को एडजस्ट करना ही बहुत मुश्किल था लेकिन अब मैं मुंबई में  अपने आपको अच्छे से एडजेस्ट कर चुका था और सब कुछ ठीक से चल रहा था। मेरी जॉब भी अच्छे से चल रही थी और जिस ऑफिस में मैं जॉब करता हूं वहीं पर मेरी मुलाकात सोहन के साथ हुई। सोहन का परिवार मुंबई में ही रहता है तो मैं भी सोहन के घर पर अक्सर चला जाया करता था।

जब भी मैं सोहन के घर पर जाता तो मुझे काफी अच्छा लगता सोहन के परिवार से मैं काफी नजदीक आ चुका था मैं जब भी सोहन के घर जाता तो मुझे ऐसा लगता जैसे कि मैं अपने परिवार के साथ हूं। सोहन की मां जो कि मुझे अपने काफी करीब मानती थी तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता लेकिन एक दिन उनकी तबीयत काफी ज्यादा खराब हो गई। जब मुझे सोहन ने इस बारे में बताया तो मैंने उससे कहा है कि आंटी की तबीयत अचानक से कैसे खराब हो गई तो उसने मुझे बताया कि उन्हें कुछ दिनों से पेट में काफी शिकायत हो रही थी जिससे कि डॉक्टर ने उन्हें आराम करने के लिए कहा था। मैंने सोहन को कहा कि चलो आज मैं आंटी से मिलने के लिए तुम्हारे साथ ही चलता हूं और ऑफिस खत्म हो जाने के बाद मैं सोहन की मां को मिलने के लिए चला गया। मैं जब आंटी को मिलने के लिए गया तो वह घर पर ही थी और उनकी तबीयत काफी ज्यादा खराब थी मैंने उनसे उनकी तबियत के बारे में पूछा तो वह मुझे कहने लगी की मेरी तबीयत काफी खराब हो गयी थी। उनकी तबियत कुछ ज्यादा ही खराब थी इसलिए वह ज्यादा बात नहीं कर पा रही थी और उन्होंने मुझसे ज्यादा बात भी नहीं की।

मैंने आंटी से कहा कि आप आराम कीजिए उसके बाद मैं और सोहन एक दूसरे से बात करने लगे सोहन ने मुझे कहा कि आज तुम घर पर ही रुक जाओ। मैंने उसे कहा नहीं लेकिन सोहन के कहने पर मैं उसके घर पर ही रुक गया उस दिन हम लोगों ने बाहर से ही खाना ऑर्डर करवा लिया था। सोहन के पापा भी अपने काम के सिलसिले में बाहर गए हुए थे इसलिए सोहन और मैं घर पर ही थे। अगले दिन हम दोनों सुबह ऑफिस चले गए जब हम लोग ऑफिस गए तो उस दिन मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था मेरे सर में भी काफी दर्द हो रहा था इसलिए मैं घर जल्दी लौट आया। मैं जब लौटा तो सोहन ने मुझे शाम के वक्त फोन किया मैंने सोहन से कहा कि मेरी तबीयत कुछ ठीक नही थी वह कहने लगा कि तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है तो मैं तुम्हें अस्पताल लेकर जाता हूं। मैंने सोहन से कहा कि नहीं मेरी तबीयत पहले से ठीक है तुम चिंता मत करो। उस दिन मेरे सर में काफी ज्यादा दर्द हो रहा था इसलिए मैं  हमारी कॉलोनी के डॉक्टर के पास चला गया। जब मैं उनके पास गया तो मुझे काफी अच्छा लग रहा था और पहले से मैं अपने आप को बहुत अच्छा महसूस कर रहा था। अगले दिन जब मैं सुबह ऑफिस गया तो सोहन ने मुझे कहा कि अब तुम्हारी तबीयत कैसी है मैंने उसे कहा अब तो मेरी तबीयत ठीक है। मैंने सोहन से पूछा कि आंटी की तबीयत कैसी है तो उसने मुझे बताया हां मम्मी की तबीयत भी पहले से ज्यादा बेहतर है और वह भी ठीक हैं।

जल्द ही सोहन के परिवार वालों ने सोहन के लिए एक लड़की देख ली और जब उन्होंने सोहन के लिए लड़की देखी तो सोहन ने मुझे भी कोमल से मिलवाया। जब मैं कोमल से मिला तो मैंने सोहन को कहा कोमल काफी अच्छी लड़की है। सोहन और कोमल की अब सगाई तय हो चुकी थी कोमल की एक सहेली है जिसका नाम महिमा है। जब कोमल ने मेरी मुलाकात महिमा से करवाई तो मुझे भी महिमा से मिलकर अच्छा लगा और हम दोनों एक दूसरे को अक्सर मिलने लगे। जब भी हम दोनों एक दूसरे को मिलते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता और हम दोनों का मिलना कुछ ज्यादा ही होने लगा था। महिमा को मेरा साथ अच्छा लगता और महिमा बहुत ही ज्यादा खुश थी कि वह मेरे साथ अच्छे से समय भी बिता पा रही है। हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा खुश थे और जब भी महिमा मेरे साथ होती तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता और मैं अपने आप को महिमा के बहुत ही करीब पाता था। कई बार मुझे लगता कि महिमा और मुझे अब एक हो जाना चाहिए क्योंकि हम दोनों एक दूसरे से प्यार तो करने लगे थे लेकिन महिमा के परिवार वालों को हमारा रिश्ता मंजूर नहीं था और जब मैंने उनसे इस बारे में बात की तो उन्होंने साफ तौर पर मना कर दिया। महिमा के पिताजी बड़े व्यापारी हैं और उन्होंने महिमा के लिए अपने दोस्त के लड़के को पसंद किया हुआ था। जब महिमा ने मुझे यह बात बताई तो मैंने महिमा को कहा कि अब हम लोग यह सब समय पर छोड़ देते हैं सब कुछ ठीक हो जाएगा। हम लोगों ने यह सब आप वक्त पर छोड़ दिया और हम लोग आगे बढ़ गए हम दोनों का रिलेशन तो बहुत ही अच्छे से चल रहा था। हम दोनों का रिलेशन इतने अच्छे से चल रहा था कि जब भी मुझे महिमा की जरूरत होती तो महिमा हमेशा मेरे लिए तैयार रहती। महिमा और मैं एक दूसरे के साथ बहुत ही खुश हैं और हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।

महिमा और मैं एक दूसरे से बहुत ज्यादा प्यार करते हैं। हम दोनों को एक दूसरे का साथ काफी भाता था इसलिए हम दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश किया करते है। एक दिन मै अपने ऑफिस से घर लौटा तो उस दिन मैंने महिमा को फोन किया। जब मैंने महिमा को फोन किया तो महिमा ने मुझे कहा वह मुझसे मिलना चाहती है। मैंने महिमा को कहा ठीक है मैं तुमसे मिलने के लिए आता हूं। मैं महिमा को मिलने के लिए कॉफी शॉप में चला गया और वहां पर हम दोनों मिले। मैं और महिमा एक दूसरे से बातें करने लगे अब हम दोनों को एक दूसरे से बातें कर के बहुत ही अच्छा लग रहा था। हम दोनों बहुत ज्यादा खुश थे। मै महिमा के साथ अच्छा समय बिता रहा था मैंने महिमा से पूछा क्या हुआ तुमने मुझे फोन किया? महिमा मुझे कहने लगी आज मुझे तुमसे मिलना था। मैंने महिमा को कहा हम लोग कल ही तो मिले थे लेकिन महिमा चाहती थी कि हम लोग एक दूसरे से मिले और महिमा ने मुझसे मिलने का मन बना लिया था। मुझे महिमा से बातें करना बहुत अच्छा लग रहा था और महिमा भी बहुत ज्यादा खुश थी। जब हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो मैंने महिमा से कहा मुझे तुमसे बातें करके अच्छा लग रहा है। महिमा ने कहा आज मेरा मन तुम्हारे साथ समय बिताने का हो रहा है। महिमा को मैंने कहा तुम मेरे साथ आज समय बिता लो। महिमा ने कहा ठीक है और हम दोनों ने उस दिन रुकने का फैसला कर लिया। हम दोनों साथ में रुके। मैं और महिमा एक दूसरे के साथ रुके तो हम दोनों को ही अच्छा लग रहा था। उस दिन हम दोनों ही एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए उतावले थे। मैंने उस दिन महिमा के होंठों को चूमना शुरू किया तो मुझे अच्छा लगने लगा था और महिमा को भी बहुत ही अच्छा लग रहा था। महिमा को इतना मजा आ रहा था कि महिमा मुझे कहने लगी तुम मेरे होंठो को ऐसे ही चुमते रहो। मैंने महिमा के होठों को किस किया और काफी देर तक मैं महिमा के नरम होंठो को चूसता रहा। मैंने महिमा के बदन से कपड़े उतार दिए थे यह पहली बार था जब महिमा और मेरे बीच शारीरिक संबंध बनने वाला था। मैं बहुत ज्यादा खुश था हम दोनों के बीच शारीरिक संबंध बनने वाला है। मै महिमा के होंठो को चूम रहा था मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। मैने उसके स्तनों का रसपान करना शुरू कर दिया था उसको अच्छा लग रहा था और वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई थी। अब मैंने महिमा के स्तनों को चूस कर पूरी तरीके से महिमा को अपना बना लिया था। महिमा की योनि से निकलते हुए पानी को भी मैं अब अपनी जीभ से चाटने लगा था।

मुझे बहुत ही मजा आने लगा था जब मैं महिमा की योनि से निकलते हुए पानी को चाटने लगा था। मैंने महिमा की चूत को बहुत ही अच्छे से चाटा और महिमा की योनि मेरे लंड को चूत मे लेने के लिए तैयार थी। मैंने महिमा की योनि पर अपने लंड को लगाया तो महिमा मुझे कहने लगी मेरी चूत के अंदर लंड को डाल दो। मैंने महिमा की चूत के अंदर लंड को घुसा दिया। मै महिमा की चूत के अंदर बाहर लंड को बड़ी तेजी से कर रहा था। महिमा को बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। वह कहने लगी मुझे ऐसे ही धक्के मारते रहो मैंने महिमा की योनि की तरफ देखा तो उसकी चूत से खून निकालने लगा था। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब मैं महिमा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करता। मुझे मजा आ रहा था। मै अब समझ चुका था मै ज्यादा देर तक रह नहीं पाऊंगा। मैंने महिमा की चूत में अपने माल को गिरा कर उसकी इच्छा को पूरा कर दिया और मेरी भी इच्छा पूरी हो गई थी। उस रात हम दोनों ने एक दूसरे के साथ तीन बार सेक्स का मजा लिया। मुझे बहुत ही अच्छा लगा महिमा और मेरे बीच शारीरिक संबंध बने। अब हम दोनो एक-दूसरे के साथ खुलकर सेक्स का मजा लेते हैं और जब भी मेरा मन महिमा के साथ सेक्स करने का मन होता तो मैं महिमा को बुला लिया करता और हम दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन जाते। मुझे बहुत ही अच्छा लगता जब भी मैं उसके गोरे बदन को महसूस करता और उसकी चूत मारता।

 


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