चूत से खून आया पहली बार

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Chut se khoon aaya pahli baar मैं और मेरी सहेली काव्या हम दोनों ही अपनी पहली डेट पर जाने के लिए बड़े ही उत्साहित थे काव्या और गगन की मुलाकात कुछ समय पहले ही हुई थी गगन और काव्या जल्दी एक दूसरे से सगाई करने वाले थे। हम दोनों के परिवार पहले से ही एक दूसरे को जानते थे इसीलिए काव्या गगन से मिलना चाहती थी। यह काव्य की पहली डेट थी और मेरी भी रोहित के साथ पहली डेट होने वाली थी क्योंकि हम दोनों सहेलियां बचपन से ही एक दूसरे के साथ इतना घुलमिल कर रहे हैं कि हमने कभी भी एक दूसरे से कोई भी बात नही छुपाई। काव्या तैयार होकर मेरे घर पर आई और कहने लगी प्रतिभा तुम अभी तक तैयार नहीं हुई हो मैंने उसे कहा बस कुछ ही देर बाद तैयार हो जाऊंगी।

मैंने काव्या से कहा मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा कि मुझे क्या पहनना चाहिए काव्या कहने लगी तुम एक नंबर की पागल हो मैं तुम्हें बताती हूं तुम्हें क्या पहनना है यदि तुम मुझे पहले ही बता देती तो मैं कब का आ जाती। काव्या के  कहने पर मैंने अपने पीले रंग के कढ़ाई दार पटियाला सूट को पहन लिया और मेरे बाल भी खुले हुए थे मैंने काव्या से कहा तुम मेरे बाल बना दो तो काव्या ने मेरे बालों को हेयर ड्रायर से पहले तो सूखाया उसके बाद उसने मेरे बालों को बना दिया। मैं अब अपने श्रृंगार में लगी हुई थी मैंने अपनी आंखों पर काजल भी लगा लिया था और अपने होठों पर मैंने लाल रंग की लिपस्टिक भी लगा ली। मुझे लग रहा था कि कहीं कोई कमी ना रह जाए यह पहली ही मुलाकात थी जब रोहित से मैं मिलने वाली थी। मैंने काव्या से कहा मैं कैसी लग रही हूं तो काव्या कहने लगी तुम बहुत ही सुंदर लग रही हो काव्या भी मुझसे पूछने लगी मैं तो ठीक लग रही हूं ना। हम दोनों अब तक समझ नहीं पाए थे कि हम दोनों को और क्या करना चाहिए आखिरकार हम दोनों ने जाने का फैसला किया और हम दोनों रोहित और गगन से मिलने के लिए एक बड़े से रेस्टोरेंट में चले गए।

काफी देर तक तो हम लोग एक दूसरे को देखते रहे किसी की भी बात करने की हिम्मत नहीं हुई लेकिन रोहित ने बात को आगे बढ़ाया और कहा अच्छा तो गगन तुम्हारी सगाई काव्य से हो जाएगी उसके बाद तुम लोगों का क्या प्लान है। गगन भी बात करने लगे थे और गगन कहने लगे कि मैं तो इसके बाद विदेश में ही अपना काम शुरू कर लूंगा। मैंने गगन से पूछा क्या तुम काव्या को भी अपने साथ ले जाओगे गगन कहने लगे हां क्यों नहीं काव्या को भी मैं अपने साथ ले जाऊंगा। हम लोग आपस में बात कर ही रहे थे कि तभी रेस्टोरेंट का वेटर हमारे पास आया और बड़ी ही तहजीब से उसने हमें रेस्टोरेंट का मेनू कार्ड दिया। वह हमें बड़े ही ध्यान से देख रहा था और फिर हम लोगों ने ऑर्डर दे दिया कुछ ही देर बाद हमारा ऑर्डर आ गया। हम लोग एक दूसरे से खुलकर बातें करने लगे थे रोहित और गगन भी एक दूसरे से पहली बार ही मिले थे लेकिन उन दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई थी। मैं और रोहित भी एक दूसरे से शादी करना चाहते थे लेकिन हम दोनों के बीच में मेरे पिताजी जो खड़े थे मेरे पिताजी रोहित को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे। एक बार रोहित और मेरे पिताजी के बीच में कुछ अनबन हो गई थी उसके बाद से वह रोहित को बिल्कुल पसंद नहीं करते थे रोहित हमारे घर से कुछ दूरी पर ही रहता है। मेरे पिताजी एक दिन अपने स्कूटर से लौट रहे थे तभी रोहित भी अपनी कार से आ रहा था और शायद रोहित को यह बात मालूम नहीं थी कि वह मेरे पिताजी हैं। रोहित की कार से मेरे पिताजी का एक्सीडेंट हो गया और उन्हें काफी चोट भी आई उसके बाद रोहित उनसे माफी मांगने के लिए घर पर भी आया था लेकिन उन्होंने रोहित को घर से जाने के लिए कह दिया और कहा आज के बाद तुम कभी अपनी शक्ल भी मुझे मत दिखाना। यह बात शायद रोहित को कहा मालूम थी कि वह मेरे पिताजी हैं इसलिए हम दोनों की सगाई का फैसला तो अभी दूर की बात थी। हम लोगों ने उस दिन साथ में अच्छा समय बिताया मैं और काव्या बहुत खुश थे जब हम लोग घर वापस लौटे तो काव्या कहने लगी तुम्हें गगन से मिलकर कैसा लगा। मैंने काव्य को कहा गगन तुम्हारे लिए बिल्कुल सही है और वह तुम्हारा बहुत ख्याल भी रखेगा।

काव्या कहने लगी मैं जब गगन से पहली बार मिली थी तो गगन मेरी कुछ भी बात नहीं हो पाई थी लेकिन आज पहली बार मेरी गगन से बात हुई है मुझे उससे बात करके बहुत अच्छा लगा और अपनापन सा लगा। जब यह बात मुझे काव्या ने कहीं तो मैंने काव्या से कहा तुम्हारी किस्मत तो बहुत अच्छी है जो तुम्हारी जीवन में गगन आ चुका है और तुम्हारे परिवार वालों ने भी उसे स्वीकार कर लिया है लेकिन मेरे और रोहित के बीच ना जाने क्या होगा मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं पता। काव्या मुझे कहने लगी प्रतिभा सब कुछ ठीक हो जाएगा तुम्हारे पिताजी तुमसे बहुत प्यार करते हैं और वह तुम्हारी बातों को कभी भी मना नही कर सकते मैंने देखा है कि वह तुम्हारे बारे में कितना सोचते हैं और तुम्हें कितना प्यार करते हैं। काव्या ने बचपन से लेकर अब तक हमेशा ही मेरा साथ दिया है और जब काव्या और गगन की शादी का दिन तय हो गया तो मुझे काफी बुरा लग रहा था क्योंकि काव्या अब ससुराल जाने वाली थी। मैंने काव्या से कहा जब तुम अपने ससुराल चली जाओगी तो मुझे काफी अच्छा लगेगा बचपन से ही हम दोनों एक साथ रहे हैं हम दोनों के बीच सगी बहनों का प्यार था।

कुछ ही दिन बाद काव्य की शादी का गगन के साथ हो गई जब काव्य की शादी गगन के साथ हुई तो वह अपने ससुराल चली गई। मैं काफी अकेली हो चुकी थी रोहित से मैं सिर्फ फोन पर ही बात किया करती थी और कभी कबार उसे चोरी छुपे मिल लिया करती थी लेकिन काव्या के जाने का दुख मुझे बहुत था। एक दिन रोहित मुझे कहने लगा अब तो काव्या की शादी हो चुकी है हमें भी शादी के बारे में सोच लेना चाहिए मैंने रोहित से कहा लेकिन पापा कहां मानेंगे तुम्हें तो मालूम ही है ना तुम पापा को अच्छे से जानते हो। रोहित कहने लगा देखो प्रतिभा तुम्हें पापा से बात तो करनी ही पड़ेगी तभी जाकर आगे कोई बात बन बढ़ पाएगी। काफी समय बाद काव्या अपने ससुराल से घर आई तो मैं उससे मिलने के लिए चली गयी मैंने काव्या से कहा की गगन तुम्हारा ध्यान तो रखते हैं ना। काव्या कहने लगी गगन मुझे बहुत प्यार करते हैं और उनके मम्मी पापा भी मुझे बहुत अच्छा मानते हैं। मैं काव्या को छेड़ते हुए कहने लगी शादी की पहली रात तो गगन ने तुम्हारे साथ बहुत प्यार किया होगा। काव्या शर्मा कर कहने लगी प्रतिभा तुम किस प्रकार की बातें कर रही हो मैंने काव्या से कहा यार मुझे भी बताओ ना तुम्हारी पहली रात कैसी रही थी। काव्या मुझे कहने लगी अब तुम जाने भी दो बेवजह की बातें मत करो। मैंने काव्या और गगन के बीच हुई सेक्स की रात को पूछ लिया जब उसने मुझे बताया कि किस प्रकार से गगन ने उसके साथ सेक्स संबंध बनाए थे उससे वह पूरी तरीके से मचलने लगी थी। वह बहुत खुश हो गई थी काव्या ने मेरे मन में भी चिंगारी पैदा करती थी और जिसको सिर्फ और सिर्फ रोहित ही बुझा सकता था। रोहित ने मुझे मिलने के लिए बुलाया तो मैं उससे मिलने के लिए चली गई मेरे अंदर सेक्स कि आग लगी हुई थी। मैं बिल्कुल भी अपने आपको ना रोक सकी मैंने रोहित को किस कर लिया और किस करने के बाद वह कहने लगा तुम क्या कर रही हो। मैंने उसे कहा बस ऐसे ही तुम पर कुछ ज्यादा ही प्यार आ रहा था। वह मुझे कहने लगा लेकिन पब्लिक प्लेस में यह सब करना ठीक कहां है।

मैंने उसे कहा सब कुछ ठीक है यह कहते ही रोहित ने मुझे भी किस कर लिया उसके बाद हम दोनों ही अपने आपको एक-दूसरे की बाहों में आने से नहीं रोक सके। वह मुझे अपने घर पर ले आया जब मैं रोहित के साथ उसके घर पर गई त रोहित ने मेरी सूट को उतारते हुए मुझे कहां तुम्हारा बदन तो बड़ा लाजवाब है जैसे ही रोहित ने मेरी लाल रंग की पैंटी और ब्रा को उतारा तो मैं और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगी। रोहित के हाथ जब मेरे स्तनों पर लग रहे थे तो उससे मेरी योनि से पानी बाहर को निकल आया था मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी। मैंने रोहित से कहा तुम भी मुझे अपने लंड को दिखाओ? रोहित कहने लगा तुम बडी बेचैन लग रही हो यह कहते ही रोहित ने जब अपने मोटे से लंड को बाहर निकाला तो मैं उसे हिलाने लगी। जब मैं उसे अपने हाथों से हिलाती तो रोहित को मोटा लंड एकदम तन कर खड़ा हो चुका था वह बहुत ही ज्यादा जोश में आ गया। उसने अपने मोटे से लंड को मेरी योनि पर लगाया और कहने लगा तुम्हारी योनि से पानी बाहर की तरफ को आ रहा है।

यह हम दोनों के बीच पहला ही सेक्स संबध होने वाला था इसलिए मेरे दिल की धड़कने बहुत तेज थी और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं रोहित के लंड को अपनी योनि में नहीं ले पाऊंगी लेकिन जैसे ही रोहित ने अपने मोटे लंड को मेरी योनि के अंदर डाला तो मेरे मुंह से आह की आवाज निकली और उसी के साथ रोहित का मोटा सा 9 इंच का लंड मेरी चूत में प्रवेश हो चुका था। जैसे ही रोहित का मोटा लंड मेरी योनि में प्रवेश हुआ तो मेरे दिल की धड़कने तेज होने लगी। रोहित ने मुझे कसकर अपनी बाहों में भर लिया था वह जिस प्रकार से मेरे दोनों जांघों को पकड़कर मुझे धक्के मार रहा था उससे मेरी योनि से खून बाहर की तरफ को निकल रहा था और मेरी योनि की चिकनाई मैं भी बढ़ोतरी होने लगी थी। जैसे ही मेरी योनि में रोहित का वीर्य समाया तो मैंने उसे गले लगा लिया उस रात हम दोनों के बीच पहली बार सेक्स संबंध स्थापित हुए थे।


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