चूत पेल बदन लाल कर दिया

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Chut pel badan laal kar diya पापा का ट्रांसफर कोलकाता हो चुका था और हमारा पूरा परिवार अब कोलकाता में ही रहने लगा। हम लोगों को कोलकाता में आये हुये अभी एक महीने के आस-पास ही हुआ था लेकिन कोलकाता में हम लोगों की काफी अच्छी जान पहचान हो चुकी थी जिसके बाद मैं अपने पड़ोस के लोगों को भी जानने पहचानने लगा। मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था और मैं हर रोज अपने घर से सुबह अपने कॉलेज के लिए जाया करता। सुबह के वक्त मैं जिस बस से अपने कॉलेज जाया करता उसी बस में मुझे हमेशा हमारे पड़ोस में रहने वाली सुरभि दिखाई देती। सुरभि जॉब करती थी और वह जब भी मुझे देखती तो मुझे बहुत अच्छा लगता लेकिन सुरभि मुझसे उम्र में बड़ी थी शायद इसीलिए सुरभि से मेरी कभी बात करने की हिम्मत नहीं हो पाई लेकिन मुझे अब सुरभि से बात तो करनी ही थी।

मैं चाहता था कि किसी भी तरीके से मैं उससे बातें करूं, मैंने सोच लिया था कि मैं सुरभि से बात करके ही रहूंगा लेकिन यह सब इतना भी आसान नहीं था कि मैं सुरभि से बात कर पाऊं। एक दिन सुरभि बस स्टॉप पर ही खड़ी थी और मैं भी बस स्टॉप पर खड़ा था मैं चाहता था कि मैं उससे बात करूं लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं उससे कुछ कह पाऊं तभी बस आ गई और बस में सब लोग चढ़ने लगे। काफी ज्यादा भीड़ थी तो मैं किसी प्रकार से बस के अंदर चला गया और मुझे सीट मिल गई मुझे बैठने के लिए सीट मिल चुकी थी लेकिन सुरभि को सीट नहीं मिली थी और वह खड़ी ही थी लेकिन मुझे यह बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। मैंने सुरभि को कहा कि तुम मेरी सीट पर बैठ जाओ पहले तो उसने मना किया लेकिन फिर वह बैठ गई जब वह सीट पर बैठी तो उसने मुझे थैंक्यू कहा। मैं इस बात से बड़ा ही खुश हो गया था क्योंकि यह तो पहली बार ही था कि सुरभि ने मुझे थैंक्यू कहा था फिर उसके बाद तो हम दोनों की बातें अक्सर होने लगी। हालांकि अभी भी हम लोगों की बातें ज्यादा होती नहीं थी लेकिन फिर भी हम दोनों एक दूसरे से थोड़ी बहुत बातें तो कर ही लिया करते थे।

एक दिन मैंने सुरभि से उसका नंबर लिया और जब मैंने उसका नंबर लिया तो सुरभि का नंबर ले लेने के बाद भी मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं सुरभि को फोन करूं परंतु मैंने सुरभि से बाते करनी शुरू की और उसके बाद जब हम लोगों की बातें हुई तो मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा। सुरभि से बातें करके मुझे काफी अच्छा लगता और सुरभि को भी मुझसे बात करके बड़ा अच्छा लगता। एक दिन सुरभि और मैं आपस में फोन पर बातें कर रहे थे तो सुरभि ने मुझे बताया कि वह जिस ऑफिस में काम करती है वहां से वह जल्द ही रिजाइन देने वाली है। सुरभि और मेरी दोस्ती हो चुकी थी और सुरभि भी मुझसे अब अपनी बातों को शेयर करने लगी थी और हम लोगों की दोस्ती बहुत अच्छी हो चुकी थी इसलिए वह मुझे अपनी हर एक बात बताया करती। मुझे भी बहुत अच्छा लगता जब वह मुझसे अपनी बातें शेयर करती। एक दिन मैं और सुरभि साथ में बैठे हुए थे तो सुरभि ने मुझे बताया कि उसे अभी तक जॉब नहीं मिल पाई है। उसने अपनी जॉब से रिजाइन दे दिया था लेकिन उसे अभी तक दूसरी जॉब नहीं मिल पाई थी। मैंने सुरभि को कहा कि तुम चिंता मत करो तुम्हें जरूर जल्द ही दूसरी जॉब मिल जाएगी। मेरा भी कॉलेज अब खत्म होने वाला था और कुछ ही महीनों में मैंने अपने एग्जाम दे दिये थे। मेरा कॉलेज खत्म हो जाने के बाद मैं भी अब कहीं जॉब करना चाहता था मैं एक दिन सुबह अखबार पढ़ रहा था उसमें मैंने देखा कि एक कंपनी का इश्तहार था मैंने सोच लिया था कि मैं अब वहां इंटरव्यू देने के लिए जाऊंगा। मैंने यह बात सुरभि को भी बता दी थी तो सुरभि कहने लगी ठीक है हम दोनों साथ में ही जाएंगे। हम दोनों उस दिन इंटरव्यू देने ऑफिस में साथ में ही गए काफी देर तक तो हम लोग रिसेप्शन पर ही बैठे रहे और दोपहर के वक्त हम लोगों का नंबर आ पाया क्योंकि काफी ज्यादा भीड़ थी। जब मेरा इंटरव्यू हो गया तो मैं उसी वक्त सेलेक्ट हो चुका था और मेरे बाद सुरभि का भी सिलेक्शन हो गया था हम दोनों बड़े खुश थे। मेरी और सुरभि की जॉब अब एक ही ऑफिस में लग चुकी थी तो हम दोनों सुबह के वक्त साथ में ही ऑफिस जाया करते और शाम को एक साथ ही घर लौटा करते।

अब सुरभि और मुझे ज्यादा से ज्यादा समय बिताने का मौका मिलने लगा था और रात के वक्त भी हम लोग एक दूसरे से फोन पर बातें कर लिया करते थे। सुरभि को मेरा साथ पाकर बहुत ही अच्छा लगा और मुझे भी सुरभि का साथ काफी अच्छा लगने लगा था। अब वह समय आ चुका था जब मैं सुरभि को अपने दिल की बात बताना चाहता था और फिर मैंने सुरभि को अपने दिल की बात बता दी। जब मैंने सुरभि को अपने दिल की बात बताई तो वह भी बड़ी खुश थी और मुझे कहने लगी कि आखिरकार तुमने मुझे प्रपोज कर ही दिया मैं तो सोच रही थी कि तुम शायद कभी अपने दिल की बात मुझे कह ही नहीं पाओगे। मैंने सुरभि से कहा कि क्या तुम भी मुझे पसंद करती थी तो सुरभि कहने लगी कि हां तुम तो जानते ही हो अगर मैं तुम्हें पसंद नहीं करती तो शायद मैं तुमसे इतना बात भी नहीं करती लेकिन अब मुझे तुमसे बात करना अच्छा लगता है और तुम्हारे साथ समय बिताना भी मुझे बहुत अच्छा लगता है। सुरभि और मैं एक दूसरे के साथ खुश थे और हम दोनों अपनी जिंदगी को अच्छे से एक दूसरे के साथ बिता रहे थे। हम दोनों के जीवन में सब कुछ अच्छा हो चला था सुरभि और मैं एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बताया करते इसलिए हम दोनों के बीच नज़दीकियां बहुत बढ़ने लगी थी।

एक दिन हम दोनों की ऑफिस की छुट्टी थी तो उस दिन सुरभि ने मुझे कहा कि चलो आज हम लोग मूवी देख आते हैं। मैंने सुबह से कहा कि ठीक है और फिर हम लोग उस दिन मूवी देखने के लिए चले गए। हम लोगों मूवी देखने के लिए चले गए मूवी देखने के बाद जब मैं और सुरभि घर लौटे तो मैंने सुरभि से कहा आज तुम मेरे साथ मेरे घर पर चलो। वह मुझे कहने लगी लेकिन तुम्हारे घर पर तो तुम्हारे पापा मम्मी होंगे। मैंने सुरभि को कहा आज पापा मम्मी घर पर नहीं है और सुरभि मेरे साथ घर पर आ गई। जब वह घर पर आई तो मुझे सुरभि का साथ अच्छा लगने लगा और हम दोनों साथ में बैठकर एक दूसरे के बातें करने लगे। हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था सुरभि को भी बड़ा अच्छा लग रहा था। वह मुझे कहने लगी मेरे अंदर आज एक अलग फिलिंग पैदा हो रही है मैंने जैसे ही सुरभि की जांघ पर हाथ को रखा तो सुरभि पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी। वह इतनी मचलने लगी थी कि वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लगने लगा था। मैंने सुरभि की जांघ को बहुत देर तक सहलाया उसके बाद जब सुरभि पूरे तरीके से उत्तेजित होती गई तो मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाया और ना ही सुरभि अपने आपको रोक पा रही थी। मैंने सुरभि के होठों को चूमने के बाद सुरभि से कहा अब मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा हूं। सुरभि ने अपने कपड़े उतारने शुरू किए जब उसने अपने कपड़े उतारे तो उसका बदन देख मैं तो अपने अंदर की आग को बिल्कुल भी रोक ना सका। मै सुरभि के ऊपर टूट पड़ा मैंने सुरभि के स्तनों को दबाना शुरू कर दिया मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा जब मैं सुरभि के स्तनों को दबा रहा था।

उसके स्तनों के अंदर की आग बढ़ती ही जा रही थी और मेरे अंदर इतनी ज्यादा गर्मी पैदा हो चुकी थी मै बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था मैंने उसके होंठो को चूमना शुरू किया तो मुझे बहुत ही मजा आने लगा था। सुरभि को भी बड़ा आनंद आने लगा था हम दोनों के अंदर की गर्मी अब इस कदर बढ़ चुकी थी कि हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे। हम दोनों काफी उत्तेजित हो चुके थे मैंने सुरभि से कहा मैं तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाने वाला हू तो सुरभि मुस्कुराने लगी। मैंने सुरभि की चूत को कुछ देर तक चाटा और उसकी चूत को चाटने के बाद मैंने उसकी चूत का पानी बाहर निकाल दिया था जैसे ही मैंने सुरभि की योनि पर अपने लंड को लगाना शुरू किया तो वह बहुत जोर से चिल्लाने लगी। वह इतनी जोर से चिल्ला रही थी कि मुझसे तो बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था सुरभि की सील पैक और टाइट चूत का मजा लेकर मै बढा ही खुशी था।

मैं सुरभि के साथ संभोग कर रहा था तो सुरभि को मजा आता। मै उसे तेजी से धक्के मार रहा था जिससे कि मुझे मजा आने लगा और सुरभि को भी बड़ा ही आनंद आने लगा था। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है अब सुरभि और मैं एक दूसरे का साथ बड़े अच्छे से दे रहे थे मै उसे लगातार तेजी से चोद रहा था। मैं धक्के बहुत अधिक हो चुके थे मैं अपने अंदर की गर्मी को बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा था और ना ही मै अपने अंदर की ज्वालामुखी को रोक सका। जब मेरे अंदर से माल बाहर की तरफ आने लगा तो मैंने अपने माल की पिचकारी से सुरभि की चूत को नहला दिया। सुरभि बहुत खुश हो गई थी उसके बाद उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसा उसकी चूत से अभी भी मेरा माल टपक रहा था। वह मुझे कहने लगी बहुत अच्छा लग रहा है मैंने सुरभि से कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है जिस प्रकार से आज तुम्हारी चूत का मजा लिया उस से बड़ा मजा आया।


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