चूत लाजवाब थी उसकी

Chut lajawab thi uski:

Hindi sex stories, kamukta मैं बचपन से ही अपने मामा के पास रहने के लिए चला गया था क्योंकि हमारे घर की स्थिति ठीक नहीं थी इसलिए मेरे माता-पिता ने मुझे मेरे मामा के पास पढ़ने के लिए बेंगलुरु भेज दिया। मैंने बेंगलुरु में अपनी पढ़ाई अच्छे से की और मैं अपने पैरों पर खड़ा हो चुका हूं मैं बेंगलुरु में ही नौकरी करता हूं जब मेरी नौकरी लगी तो उसके बाद मैंने अपनी जिम्मेदारियों को समझी और अपने माता पिता को मैंने अपने पास बुला लिया। वह लोग कुछ समय के लिए मेरे पास आए लेकिन वह लोग ज्यादा समय तक रूक नहीं पाए और वह वापस चले गए क्योंकि उन्हें लगता है कि वह लोग अंबाला में ही ठीक है। अंबाला में मेरी बहन कविता भी रहती है मेरी बहन से मैं बहुत कम ही मिल पाया हूं लेकिन उसे जब भी मैं मिलता हूं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है लेकिन शायद मैं अपनी बहन कविता के साथ वह समय नहीं पीता पाया जो मैं उसके साथ बिताना चाहता था।

हमारी फोन पर हमेशा बात हुआ करती थी मेरी बहन ने एक सरकारी स्कूल से पढ़ाई की है और उसके बाद अब उसकी शादी की उम्र हो चुकी थी मेरे पापा मम्मी ने मुझे फोन किया और कहा बेटा अब कविता बड़ी हो चुकी है और उसके लिए हमें लड़का देख लेना चाहिए। मेरे मम्मी पापा ने उसके लिए लड़का देखना शुरू कर दिया, मैं अपने ऑफिस में पूरे ध्यान से काम किया करता हूं और अपनी पूरी मेहनत से काम करता। एक दिन मेरे पापा का मुझे फोन आया और वह कहने लगे बेटा हमने कविता के लिए एक अच्छा रिश्ता देखा है यदि तुम भी घर आ जाते तो अच्छा रहता मैंने पापा से कहा ठीक है मैं कुछ दिनों के लिए छुट्टी लेकर घर आ जाता हूं। मैं कुछ दिनों के लिए अंबाला चला गया और जब मैं अंबाला गया तो वहां पर मैंने अपने पापा मम्मी से बात की उन्होंने मुझे लड़के से मिलवाया क्योंकि पापा मम्मी नहीं चाहते थे कि उसकी किसी भी ऐसे वैसे लड़के से शादी हो। मैं जब पहली बार उस लड़के से मिला तो मुझे वह अच्छा लगा उसके विचार और उसके ख्यालात बहुत अच्छे थे मैंने पहले ही उससे यह बात कर ली थी कि मेरी बहन को तुम्हें खुश रखना होगा वह कहने लगा मैं आपकी बहन का पूरा ध्यान रखूंगा।

हम लोगों ने वह रिश्ता तय कर लिया अब कविता और चंदन की शादी होने वाली थी जब उन दोनों की शादी हो गई तो कविता ने अपनी शादी में मुझे अपनी सबसे अच्छी दोस्त अक्षिता से मिलवाया अक्षिता स्कूल में पढ़ाती है और उसे मिलकर मुझे अच्छा लगा। अब कविता की शादी हो चुकी थी मैं भी बेंगलुरु लौट चुका था और अपने काम में ही मैं बिजी था मेरी कविता से फोन पर बात होती रहती थी और अपने परिवार से भी मैं बात करता रहता था लेकिन अब मैं चाहता था कि पापा मम्मी मेरे पास ही रहे। मैंने उन्हें फोन कर के कहा कि आप मेरे पास ही रहने आ जाइए मुझे भी कई बार आप लोगों की याद आती है वह कहने लगे ठीक है हम लोग तुम्हारे पास ही रहने के लिए आ जाते हैं। वह लोग बेंगलुरु आ चुके थे और मेरे पास ही रहने लगे कविता से हम लोग फोन पर ही बात किया करते थे कविता की शादी को लगभग एक साल होने को था उसी वक्त कविता ने मुझे फोन किया और कहा उसके घर में कुछ ठीक नहीं चल रहा। मैंने कविता से पूछा तुम्हें क्या परेशानी है तो उसने मुझे बताया उसकी जो जेठानी है उसके साथ उसकी बिल्कुल भी नहीं बनती है मैंने कविता से कहा मैं तुम्हें शाम के वक्त फोन करूंगा अभी मैं ऑफिस में हूं। मैंने कविता को शाम के वक्त फोन किया उस वक्त चंदन भी घर आ चुका था और जब चंदन घर आया तो मैंने चंदन से बात की और कहा चंदन तुम्हारी भाभी और कविता के बीच में क्या झगड़ा हुआ था? वह कहने लगा हां उन दोनों के बीच में झगड़ा हुआ था लेकिन मैंने सब कुछ संभाल लिया था और उसके बाद ना जाने क्यों भाभी को कविता बिल्कुल भी पसंद नहीं है और उन दोनों के बीच झगड़े होते रहते हैं। मैंने चंदन से कहा तुमने मुझसे वादा किया था कि तुम कविता का ध्यान रखोगे और उसे कोई भी परेशानी नहीं होने दोगे चंदन कहने लगा ठीक है मैं इस बारे में देखता हूं।

कुछ दिनों बाद उसकी भाभी और उसके बीच में कुछ ज्यादा ही अनबन होने लगी उसकी भाभी अब चंदन को भी दोषी ठहराने लगी थी उसकी भाभी की तरफदारी उसकी मां बहुत ज्यादा करती थी इसलिए चंदन और कविता को अलग रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। वह लोग अब अलग रहने लगे थे मुझे इस बात का बहुत दुख हो रहा था क्योंकि इस झगड़े में चंदन भी पिस रहा था और कविता भी अलग रहने लगी थी मैंने सोचा कि मैं कविता से मिलना जाता हूं। मैं कुछ दिनों के लिए अंबाला आ गया और जब मैं कविता और चंदन से मिला तो मुझे बहुत बुरा लगा। मैंने चंदन से कहा मैं कभी नहीं चाहता था कि तुम लोग अपना घर छोड़ दो लेकिन तुम्हारी भाभी की वजह से ही ही यह सब हुआ और उन्हीं की वजह से इतना सब कुछ हो चुका है चंदन कहने लगा कोई बात नहीं हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं। मुझे इस बात की खुशी थी कि चंदन कविता के साथ खड़ा था और वह उसका बहुत ध्यान रखता था जब उस दिन मैं उन दोनों के साथ था तो शायद इस बात का पता अक्षिता को भी चल चुका था और अक्षिता भी कविता से मिलने के लिए आई हुई थी मैं काफी समय बाद अक्षिता से मिला था तो अक्षिता ने मुझे पहचान लिया और वह कहने लगी आप कैसे हैं। मैंने अक्षिता से कहा मैं तो ठीक हूं लेकिन तुम्हें तो पता ही होगा कि चंदन की भाभी की वजह से इन दोनों को अपने घर से अलग रहने के लिए मजबूर होना पड़ा अक्षिता कहने लगी आप चिंता मत कीजिए मैं यहां पर हूं और कविता को कोई भी दिक्कत नहीं होगी। मुझे इस बात की खुशी थी कि अक्षिता कविता के साथ थी।

मैं कुछ दिनों बाद बेंगलुरु लौट आया मैं कविता से हर रोज फोन पर बात किया करता था और चंदन भी उसे खुश रखने की कोशिश किया करता सब कुछ अच्छे से चल रहा था लेकिन मुझे इस बात की चिंता लगी रहती थी कि कहीं कविता को कोई तकलीफ तो नहीं है इसलिए मैं अक्षिता से उसके बारे में पूछता रहता था। अक्षिता उसके पास हर हफ्ते मिलने के लिए जाती थी क्योंकि जिस जगह वह लोग रहते थे उसके कुछ दूरी पर ही अक्षिता का भी घर है। कविता को शायद अक्षिता ने ही कहा कि तुम्हें भी जॉब कर लेनी चाहिए और उसने अक्षिता के साथ जॉब करने की सोच ली वह दोनों एक ही स्कूल में पढ़ाने लगे। अब कविता का भी समय कट जाया करता था और वह खुश भी रहती थी क्योंकि घर में वह काफी अकेली हो जाती है चंदन जॉब पर चले जाता था और कविता घर पर ही रहती थी लेकिन अब कविता भी नौकरी करने लगी थी। मेरे पापा मम्मी को हमेशा कविता की चिंता सताती रहती थी लेकिन मैं उन्हें समझा देता और कहता आप चिंता ना कीजिए उसके साथ उसकी सहेली भी है अब वह जॉब भी करने लगी है और चंदन उसका बहुत ध्यान रखता है। चंदन उसे बहुत प्यार करता है इस बात का पता तो मुझे था कि चंदन उसका बहुत ध्यान रखता है क्योंकि चंदन ने उसका साथ कभी नहीं छोड़ा और वह उसे हमेशा खुश रखने की कोशिश करता रहता है। अक्षिता भी कविता के साथ थी और वह भी कविता को बहुत सपोर्ट किया करती थी। मेरी अक्षिता से तो हमेशा फोन पर बात होती रहती थी लेकिन एक शाम जब मेरी अक्षिता से अश्लील बातें शुरू हुई तो वह भी अपने आप पर कंट्रोल ना कर सकी और मुझसे उसने अपने फिगर के बारे में बात की। मैंने उसे कहा तुम्हारा फिगर तो बड़ा ही सेक्सी है और तुम बहुत हॉट हो उसने मुझे अपनी नंगी तस्वीर भेज दी। उसके बड़े स्तन और उसकी चिकनी चूत देखकर मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाया और मैं अक्षिता से मिलने के लिए अंबाला चला गया।

मैं जब उससे मिला तो मैं अपने आप पर बिल्कुल भी काबू ना कर सका और मिलते ही मैंने उसे कहा कहीं चले तो वह कहने लगी ठीक है चलो। मैं उसे एक होटल में लेकर चला गया वहां पर जब मैंने उसे नंगा किया तो उसकी बड़ी गांड और उसके स्तनों को देखकर मैं अपने आप पर काबू नहीं रख सका। मैंने उसके स्तनों को चूमना शुरू किया उसके स्तनों से मैंने खून भी निकाल दिया था जब मैंने उसकी गांड को दबाना शुरु किया तो उसे मजा आने लगा और वह उत्तेजित होने लगी। उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर तक ले लिया और उसे चूसने लगी काफी देर तक वह ऐसा करती रही लेकिन जब मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया तो मुझे भी मजा आने लगा। मैंने उसकी चूत के मजे काफी देर तक लिए जैसे ही मैंने उसके दोनों पैरों को खोलते हुए उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो वह खुश हो गई वह कहने लगी मजा आ गया। जैसे ही मैं अपने लंड को अंदर बाहर करता तो उसकी उत्तेजना और भी बढ जाती वह मेरा पूरा साथ देती।

मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के देता जा रहा था उसे जिस प्रकार से मैंने चोदा उससे उसका शरीर पूरी तरीके से हिल जाता लेकिन वह मेरा साथ बड़े अच्छे से देती। मैं उसे बहुत अच्छे से चोदता जाता मैंने काफी देर तक उसकी चूत के मजे लिए जब वह झडने वाली थी तो उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ लिया और कहने लगी मैं झड़ चुकी हूं तुम तेजी से धक्के देते रहो। मैंने उसे तेजी से धक्के दिए और वह अपने मुंह से मादक आवाज निकालती जिससे कि उसके मुंह से जो सिसकियां निकलती और उसकी मादक आवाज मेरे कानों में जाते ही मेरे अंदर उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ जाती। मै उसके स्तनों को अपने हाथो से दबाता और उसकी चूत को बड़े अच्छे से धक्के मारता मैने उसकी चूत के मजे काफी देर तक लिए और जैसे ही मेरा गरमा गरम वीर्य अक्षिता की योनि में गिरा तो वह खुश हो गई। हम दोनों ने कपड़े पहने और कुछ देर तक हमने बात की उसके बाद हम लोग कविता और चंदन से मिलने के लिए चले गए। अक्षिता की चूत के मजे मैंने बड़े अच्छे से लिए और उसे चोद कर मुझे बहुत अच्छा लगा।


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