चूत लाल कर दी

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Chut laal kar di मैं जिस कॉलोनी में रहता हूं उसी कॉलोनी में सुरभि रहा करती थी सुरभि की यादें आज भी मेरे दिल और दिमाग में है मैं उसे कभी भी अपने दिल से भुला नहीं पाया हूं। सुरभि और मैं एक दूसरे से बहुत प्यार करने लगे थे लेकिन सुरभि के पापा और मम्मी की मंजूरी हम दोनों के रिश्ते को मिल नहीं पाई इसलिए सुरभि की शादी कहीं और हो गई। मैं चाहता था कि मैं सुरभि से शादी करूं लेकिन उससे मेरी शादी हो नहीं पाई। मेरा जीवन भी अब आगे बढ़ने लगा था और मैं अब अपने पापा की गारमेंट शॉप को संभालने लगा पापा भी इस बात से काफी खुश थे, वह मुझे कहने लगे कि सुरेश बेटा मुझे तुमसे यही उम्मीद थी पापा हमेशा से ही चाहते थे कि मैं उनकी गारमेंट शॉप को संभालूं।

घर में मैं ही एकलौता हूं और मेरे ऊपर ही घर की सारी जिम्मेदारियां आन पड़ी थी क्योंकि मैं ही अब दुकान का काम संभाल रहा था और मेरी बहन की शादी भी नजदीक थी। मेरी छोटी बहन जो कि उम्र में मुझसे दो वर्ष ही छोटी है उसकी शादी भी निखिल के साथ तय हो गई थी। निखिल हमारे परिवार को पहले से ही जानता था क्योंकि मेरे पापा और निखिल के पिताजी की काफी पुरानी जान पहचान है और अब वह रिश्तेदारी में बदलने वाली थी। इस बात से मैं तो खुश था ही और साथ में मेरी बहन भी अपनी शादी से बहुत खुश थी क्योंकि निखिल बहुत ही अच्छा लड़का है और निखिल का परिवार भी काफी अच्छा है। हम लोगों ने मेरी बहन की शादी में कोई भी कमी नहीं रखी पापा चाहते थे कि मेरी बहन की शादी धूमधाम से हो और उसकी शादी बड़े ही धूम धाम से हुई। उसकी शादी हो जाने के बाद घर काफी सूना हो गया था और मुझे बहुत अकेला भी महसूस हो रहा था क्योंकि घर मे एक मेरी बहन ही थी जिससे कि मैं अपनी बातों को शेयर कर लिया करता था और वह बहुत ही ज्यादा खुश रहा करती थी।

मेरी बहन की शादी हो जाने के बाद मैं काफी अकेला हो गया था वह मुझे बड़े अच्छे से समझती थी। मैं और मेरा दोस्त सुनील एक दिन एक पार्टी में गए हुए थे सुनील हमारे पड़ोस में ही रहता है सुनील ने ही मुझे कहा था कि हम लोग साथ में चलेंगे इसलिए हम दोनों पार्टी में साथ में ही गए। काफी समय बाद मैं सुनील को मिला था सुनील भी काफी खुश था क्योंकि सुनील ने भी अभी कुछ दिनों पहले ही अपना नया ऑफिस ज्वाइन किया था और वह मुझे बता रहा था कि उसकी तनख्वा भी काफी अच्छी है। मैंने सुनील को कहा चलो यह तो बड़ी खुशी की बात है कि अब तुम्हें जॉब मिल चुकी है वह अपनी जॉब से काफी खुश था। मैं सुनील के साथ ही बात कर रहा था और उस पार्टी में जब मैंने कोमल को देखा तो कोमल अब काफी बदल चुकी थी कोमल पहले की तरह बिल्कुल भी नहीं थी कोमल को मैं पहले से ही जानता हूं लेकिन उसके बदलने का कारण मुझे नहीं पता था। जब मुझे सुनील ने कोमल के बारे में बताया तो मैंने सुनील से कहा कि कोमल तो पूरी तरीके से बदल चुकी है वह पहले की तरह तो बिल्कुल भी नहीं है उसके पहनावे में भी काफी बदलाव आ गया है और वह पहले की तरह बिल्कुल भी शरमाती नहीं है। कोमल हम लोगों के साथ ही स्कूल में पढ़ा करती थी लेकिन उसके बाद कॉलेज की पढ़ाई उसने अपने मामा जी के साथ रहकर की। उसके मामा जी मुंबई में रहते हैं शायद मुंबई में रहने के दौरान कोमल के अंदर बदलाव आ गया था मुझे तो लगा था कि कोमल मुझसे बात भी नहीं करेगी और शायद वह मुझे पहचानती भी नहीं होगी लेकिन कोमल खुद ब खुद मेरे पास आई और कहने लगी कि सुरेश तुम कैसे हो। मैंने कोमल को कहा मैं तो ठीक हूं लेकिन मुझे तो लगा था कि तुम शायद मुझे पहचानोगी ही नहीं कोमल मुझे कहने लगी कि नहीं सुरेश ऐसा नहीं है मैं मुंबई में रहती हूं लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि मैं अपने पुराने दोस्तों को भूल जाऊं और तुम तो मेरे साथ स्कूल में जो पढ़ा करते थे। मैंने कोमल को कहा खैर यह बात तुम छोड़ो और तुम यह बताओ कि तुम मुंबई में क्या कर रही हो। कोमल कहने लगी कि मैं तो मुंबई में जॉब कर रही हूं और कुछ दिन पहले ही मेरी जॉब एक मल्टीनैशनल कंपनी में लगी है।

मैंने कोमल को उसकी जॉब लगने के लिए उसे बधाई दी और कहा कि चलो यह तो बड़ी अच्छी बात है कि तुम्हारी जॉब लग चुकी है और शायद अब तुम मुंबई में ही रहोगी तो कोमल कहने लगी हां मैं अब मुंबई में ही रहूंगी। मैंने कोमल को कहा क्या तुम्हारा मुंबई में मन लगता है वह मुझे कहने लगी कि सुरेश अब मुझे वहां रहने की आदत हो चुकी है। मैंने कोमल से कहा चलो कोमल हम लोग कभी और मुलाकात करते हैं अभी हम लोगों को घर निकालना है। मैं और सुनील उस दिन घर आ गए और मैंने कोमल का नंबर भी ले लिया था लेकिन उसके बाद कोमल से काफी समय तक मेरी बातचीत नहीं हो पाई थी। एक दिन कोमल का मुझे फोन आया उस वक्त मैं शॉप में हीं बैठा हुआ था मैंने जब कोमल का फोन उठाया तो मैं कोमल से बातें करने लगा। वह मुझे कहने लगी कि मुझे लगा आज तुमसे बात कर लेती हूं तो मैंने कोमल को कहा यह तो तुमने बहुत ही अच्छा किया। उस दिन हम लोगों की करीब 10 मिनट तक बात हुई और 10 मिनट बाद मैंने फोन रख दिया इसके बाद भी कोमल और मेरे बीच कई बार फोन पर बातें होने लगी थी और हम दोनों एक दूसरे से काफी बातें करने लगे थे।

उसके बाद भी कई बार कोमल और मेरे बीच फोन पर बातें हुए हम दोनों एक दूसरे से फोन पर बहुत बातें करने लगे थे। मैने एक दिन कोमल से फोन पर उसके फिगर का साइज पूछ लिया वह पहले तो मुझे बताने में शर्मा रही थी लेकिन फिर उसने मुझे इस बारे में बता दिया। उसके फिगर का साइज मुझे पता चल चुका था मैंने कोमल से उसकी कुछ नंगी तस्वीरें मांगवा ली। कोमल भी मुझसे खुल कर बातें करने लगी थी। उसे किसी भी बात की कोई शर्म नहीं थी इसलिए तो कोमल मुझसे मिलना चाहती थी और मैंने उसे मिलने के लिए एक दिन अपने पास बुला लिया। कोमल मुझसे मिलने के लिए आ गई वह मुझसे मिलने के लिए मुंबई से आई मैं बहुत ज्यादा खुश था। कोमल मेरे घर पर ही थी मेरे परिवार वाले कुछ दिनों के लिए कहीं बाहर गए हुए थे तो हम दोनो को समय बिताने का मौका मिल चुका था। यह सब इतनी जल्दी भी नहीं हुआ था इसके लिए समय लगा था हम दोनों एक दूसरे के साथ थे। मैं कोमल के नरम होंठों को चूम रहा था। हम दोनों एक दूसरे को होठों को चूमने लगे थे मुझे बहुत मज़ा आने लगा था मेरे अंदर की गर्मी अब बढ़ने लगी थी। मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया था कोमल ने उसे लपकते हुए अपने मुंह के अंदर समा लिया। वह मेरे लंड को बडे से चूसने लगी वह मेरे लंड को जिस प्रकार से चूस रही थी उससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मेरे अंदर की आग अब बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। मैने कोमल की चूत को चाटकर पूरी तरीके से चिकना बना दिया था। मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर सटाया तो कोमल की चूत से पानी बाहर निकलने लगा मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। उसकी चूत से इतना अधिक गरम पानी निकलने लगा था कि मेरे अंदर की आग पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी। मैंने जोरदार झटके के साथ कोमल की चूत के अंदर लंड को डाला तो उसकी चूत से खून निकल आया। उसकी चूत से बहुत अधिक खून निकल रहा था। मेरा लंड कोमल की चूत में घुसा तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था। मैं उसको बड़ी तेज गति से धक्के मारने लगा था। मुझे कोमल को चोदने मे बहुत मजा आ रहा था मै जिस तरह से उसे चोद रहा था उससे मेरे अंदर की आग बढ़ती जा रही थी।

मेरे गर्मी अब बहुत बढ चुकी थी मैंने कोमल को कहा मुझे बहुत मजा आ रहा है। कोमल की चूत मुझे टाइट महसूस हो रही थी। मैंने कोमल को बहुत देर तक चोदा मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था मुझे एहसास होने लगा कि मैं ज्यादा देर तक कोमल की चूत की गर्मी को झेल नहीं पाऊंगा। कोमल ने मुझे अपने पैरों के बीच में कसकर जकडना शुरू कर दिया। उसकी चूत से निकलता हुआ लावा बढ़ चुका था उसकी चूत मेरे लंड को भी गर्म रही थी। मैंने अपने वीर्य को कोमल की चूत मे गिरा दिया, फिर मेरा लंड फन मारने लगा था और मै कोमल को चोदना चाहता था। मैं दोबारा उसे महसूस करने लगा था। मैं उसके होंठों को बड़े अच्छे से चूमने लगा था।

वह बहुत ज्यादा उत्तेजित होती जा रही थी उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी थी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। हम दोनों एक दूसरे के लिए बहुत ज्यादा तड़पने लगे थे मैने कोमल के स्तनों को अपने हाथों से दबाया तो वह तड़पने लगी थी। उसकी उत्तेजना बहुत ज्यादा बढने लगी थी मैंने कोमल के स्तनों को अपने मुंह में ले लिया था मैं उसके स्तनो को बड़े अच्छे से चूसने लगा। मैने कोमल के स्तनों को बहुत देर तक चूसा वह बहुत ही ज्यादा गरम हो चुकी थी। मैंने कोमल की चूत पर लंड को रगडा तो उसे मज़ा आने लगा मेरा लंड गरम हो चुका था। कोमल की चूत से पानी बाहर निकलने लगा था मैं बिल्कुल भी अपने आपको रोक नहीं पाया। मैंने अपने लंड को कोमल की चूत के अंदर धीरे-धीरे डालना शुरू किया मेरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया वह बहुत जोर से चिल्लाई। वह बहुत ज्यादा तड़पने लगी थी वह मुझे अपने पैरों के बीच में कस कर जकड़ने लगी। मैंने उसके स्तनों को बहुत देर तक चूसा अब मेरी गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी। मुझे उसको धक्के मारने में बड़ा आनंद आता मेरा लंड बहुत ज्यादा छिल चुका था मेरा वीर्य बाहर की तरफ गिर गया। जब मेरा माल बाहर गिरा तो मुझे मजा आ गया। कोमल मेरे साथ दो दिन रूकी फिर वह मुंबई चली गई। वह मुझसे चूत मरवाकर खुश थी।

 


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