चूत की उम्मीद

Chut ki ummeed:

Kamukta, antarvasna मैं लखनऊ का रहने वाला हूं हम लोग जिस जगह रहते हैं वहां पर मेरे परिवार को रहते हुए 15 वर्ष हो चुके हैं। मेरे पिताजी बैंक में जॉब करते हैं और मेरी मम्मी भी बैंक में ही जॉब करती हैं दोनों अपनी लाइफ में बहुत बिजी है और इसी वजह से वह मुझे अपना समय नहीं दे पाए लेकिन उसके बावजूद भी मैंने अपनी जिंदगी को जिया। मेरी छोटी बहन भी है उसका नाम वर्षा है वर्षा और मेरे बीच में बहुत झगड़े होते हैं लेकिन उसकी अहमियत मुझे उस वक्त पता चली जब उसकी शादी हो गई। जब उसकी शादी हुई तो मुझे मालूम पड़ा कि वर्षा मेंरी जिंदगी में कितनी महत्वपूर्ण थी वर्षा अपने ससुराल में रहती है उसके पति रेलवे में क्लर्क हैं वह उसे बहुत खुश रखते हैं और मुझे इस बात की खुशी है कि वर्षा के चेहरे पर अब भी वही मुस्कान है जो पहले थी। वह जब भी घर आती है तो मुझे बहुत अच्छा लगता है और मैं जितना हो सकता है उसके साथ समय बिताने की कोशिश करता हूं वर्षा को भी अब मेरी अहमियत पता चल चुकी है।

पहले हम दोनों साथ में थे और उसकी शादी नहीं हुई थी तो उस वक्त हम लोग बहुत ज्यादा झगड़ा करते थे जब मम्मी पापा घर पर होते थे तो वह हम दोनों को बहुत डांटा करते थे। वह हमेशा कहते कि तुम इतना ज्यादा झगड़ा मत किया करो उसके बाद मम्मी पापा के कहने पर हम लोग शांत हो जाते थे। एक दिन मेरे फोन पर मेरे मामा जी का फोन आया और वह मुझसे कहने लगे बेटा आजकल तुम क्या कर रहे हो मैंने अपने मामा से कहा मामा आजकल तो मैं घर पर ही हूं आप बताइए क्या कोई जरूरी काम था। मामा कहने लगे नहीं बेटा ऐसा जरूरी काम तो नहीं था लेकिन सोचा काफी दिनों से तुमसे फोन पर बात नहीं हुई है तो तुमसे फोन पर बात कर ली जाए, मेरे मामा की फर्नीचर की शॉप है। वह मुझे कहने लगे कि तुम्हारी मम्मी और तुम काफी दिनों से घर पर नहीं आए हो मैंने मामा से कहा हां मामा दरअसल मम्मी तो ऑफिस में ही बिजी रहती हैं लेकिन मैं देखता हूं एक-दो दिन में आपके पास आता हूं।

मैंने यह कहते हुए फोन रखा ही था कि मेरे सामने से नंदिनी गुजरी मैं फोन पर बात करते करते बाहर चला आया नंदिनी हमारे पड़ोस में ही रहती है और बचपन से ही मैं उसे देखता रहता था। नंदिनी की नाना नानी ने ही उसकी परवरिश की है उसके माता-पिता की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक नहीं थी इस वजह से उसके नाना ने ही उसकी सारी जरूरतों को पूरा किया उसके नानाजी बहुत बड़े अधिकारी थे। मैं नंदनी को हमेशा से देखा करता था बचपन में जब भी मैं नंदनी को देखता तो उसे देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता था मैं नंदनी से बहुत कम ही बात किया करता था और अब भी मैं उससे कम ही बात करता हूं। मैंने सुना था कि नंदनी की शादी भी हो चुकी है लेकिन मुझे उसके बारे में ज्यादा पता नहीं था परंतु जब भी मैं नंदनी को देखा करता तो मुझे अच्छा लगता। मुझे नंदिनी करीब एक साल बाद दिखी थी मैंने उससे बात तो नहीं की लेकिन जब मैंने उसे देखा तो मुझे बहुत खुशी हुई और फिर मैं अपने घर के अंदर आ गया। मैंने अपने घर का गेट बंद किया और अंदर मैं टीवी देखने लगा मैं टीवी देख रहा था तो तभी शायद कोई घर की डोर बैल बजा रहा था मैं जैसे ही घर से बाहर आया तो मैंने देखा सामने नंदनी खड़ी थी नंदनी को देख कर मुझे अच्छा लगा मैं मन ही मन खुश हो गया। मैंने नंदिनी से पूछा हां कहिए क्या कोई काम था तो वह कहने लगी क्या आंटी घर पर हैं मैंने उससे कहा नहीं मम्मी तो घर पर नहीं है क्या कुछ जरूरी काम था वह कहने लगी नहीं दरअसल मेरी नानी ने कहा था कि उन्हें घर पर बुला लेना काफी दिन हो गए उनसे मिले भी नहीं है। मैंने नंदिनी से कहा नहीं मम्मी तो घर पर नहीं है यदि कोई काम हो तो तुम मुझे बता दो वह कहने लगी नहीं बस यही काम था मैंने नंदिनी से कहा आइए आप अंदर आइये वह कहने लगी नहीं मैं अभी चलती हूं। मैंने नंदनी से पूछा और आप ठीक हैं तो वह कहने लगी हां सब कुछ ठीक है और यह कहते हुए वह चली गई मैं उसकी तरफ एक टक नजरों से देखता रहा जब तक कि वह अपनी नानी के घर के अंदर नहीं चली गई।

जब शाम को मम्मी आई तो मैंने मम्मी से कहा पड़ोस में रहने वाली आंटी आपको बुला रही थी तो मम्मी कहने लगी हां उन्हें शायद कुछ काम होगा मैंने मम्मी से कहा उन्हें ऐसा क्या काम था। मम्मी ने मुझे बताया कि दरअसल एक दिन वह मुझे मिली थी और मैंने एक बहुत ही बढ़िया सी स्वेटर खरीदी थी उन्हें वह स्वेटर काफी पसंद आई तो वह मुझे कहने लगी कि क्या आप मेरे लिए भी ऐसी स्वेटर मंगवा देंगे। मैंने उन्हें कहा हां मैं आपके लिए वैसे ही स्वेटर मंगवा दूंगी इसीलिए शायद वह मेरे बारे में पूछ रही थी मैंने मम्मी से कहा घर पर नंदिनी आई थी। मम्मी ने मुझे बताया कि नंदिनी और उसके पति के बीच रिलेशन ठीक नहीं चल रहे हैं जिस वजह से वह अब अपनी नानी के पास रहने आ गई हैं। मैं यह बात सुनकर काफी दुखी हुआ मैंने मम्मी से कहा आप क्या बात कर रही हैं तो मम्मी कहने लगी हां मैं सही कह रही हूं। मैंने भी उसकी नानी से यह बात सुनी थी उसकी नानी ने मुझे कहा था कि उसके और उसके पति के बीच बिल्कुल भी संबंध ठीक नहीं है जिससे कि उन दोनों के बीच में झगड़े होते रहते हैं। मम्मी उसी वक्त नंदिनी की नानी के घर चली गई और 20 मिनट बाद वह वापस लौट आई। मेरी नंदिनी से इतनी ज्यादा बातचीत नहीं होती थी लेकिन हमें समझ आ गया था की नंदनी अपनी नानी के पास ही रहने लगी थी वह मुझे अक्सर दिखाई देती थी।

मैं और मम्मी मामा के घर चले गए मम्मी भी काफी समय से मामा से नहीं मिली तो हम लोग उनकी छुट्टी के दिन उनसे मिलने के लिए चले गए। जब हम लोग वापस लौटे तो नंदनी हमें मिली मम्मी ने नंदिनी से बात की नंदिनी की भी कोई आस पड़ोस में सहेली नहीं थी इस वजह से नंदिनी और मेरी बातचीत होने लगी थी मैं नंदिनी से बात करता तो मुझे भी अच्छा लगता। एक दिन मैं नंदिनी की नानी से मिलने के लिए चला गया उस दिन मैं और नंदनी की नानी साथ में ही बैठे हुए थे जब नंदनी आई तो उसने मुझे अपने और अपने पति के रिलेशन के बारे में बताया मैं यह सुनकर बहुत चौक गया। नंदिनी मुझे कहने लगी मैंने जो प्यार की उम्मीद अपने पति से की थी वह प्यार मुझे मिला ही नहीं बल्कि उल्टा मुझे उनके घर पर प्रताड़ना मिली जिससे कि मैं बहुत ज्यादा दुखी हो गई थी और मैंने वापस अपनी नानी के घर आने की सोच ली क्योंकि मैं अपने घर भी नहीं जा सकती थी। मेरे अपने माता पिता के बीच रिलेशन कुछ ठीक नहीं है इसीलिए बचपन से ही मुझे मेरी नानी ने ही अपने पास रखा है मैंने नंदिनी से कहा तुम चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा। नंदिनी मुझे कहने लगी बस इसी उम्मीद में तो मैं जी रही हूं कि सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन मुझे लगता है कि कुछ भी ठीक नही होगा ना जाने मेरी किस्मत में क्या लिखा है। मैंने नंदिनी से कहा तुम्हें किस्मत को दोष देने की जरूरत नहीं है सब कुछ ठीक हो जाएगा और कुछ देर बाद मैं अपने घर चला आया। जब मैं अपने घर आया तो उसके कुछ दिनों बाद नंदिनी मुझसे मिलने के लिए मेरे घर पर आई। हम दोनों की दोस्ती अच्छी हो चुकी थी इसलिए हम दोनों मिला करते थे मुझे बहुत अच्छा लगता था जब मैंने नंदिनी के साथ समय बिताया करता। उस दिन हम दोनों साथ में ही बैठे हुए थे और एक दूसरे से बात कर रहे थे मेरी नजर नंदिनी के होठों पर थी उसने अपने होठों पर पिंक कलर के लिपिस्टिक लगाई हुई थी जोकि बड़ी सेक्सी लग रही थी नंदिनी का फिगर तो लाजवाब है वह बहुत ज्यादा सुंदर है।

मैंने नंदिनी से कहा तुम आज बहुत सुंदर लग रही हो नंदिनी मुझे कहने लगी तुम यह कैसे कह सकते हो कि मैं सुंदर लग रही हूं। मैंने उससे कहा तुम्हारे होंठ कितने सुंदर है और तुम ऊपर से लेकर नीचे तक बहुत ज्यादा सुंदर हो नंदिनी मेरी तरफ देखने लगी शायद उसके अंदर भी सेक्स की भावना जाग गई थी वह मेरी तरफ देखती जा रही थी। हम दोनों एक दूसरे की आंखों में आंखें डाल कर देख रहे थे हम दोनों एक दूसरे की बातों में खो गए मुझे पता ही नहीं चला कि कब मैंने नंदिनी के रसीले होठों को किस करना शुरू कर दिया। हम दोनों एक दूसरे को बड़े अच्छे से किस करते हम दोनों ही अपने आपको रोक नहीं पाए मैंने जैसे ही नंदिनी के कपड़े उतारने शुरू किए तो उसे बहुत अच्छा लगने लगा। मैंने उसके गोरे और सुडौल स्तनों को बहुत देर तक अपने मुह मे लेकर चूसा और उसके स्तनों से मैंने खून निकाल दिया। मैंने जैसे ही नंदिनी की चिकनी योनि को देखा तो मैं अपने आप पर काबू नहीं रख सका और मैंने उसकी गोरी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया।

मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा किया और अपने 9 इंच मोटे लंड को उसकी योनि में घुसा दिया। मुझे अपने आप पर भरोसा ही नहीं हो रहा था कि मैं नंदिनी के साथ सेक्स कर रहा हूं मैं उसकी योनि के मजे बड़े ही अच्छे तरीके से लेता जाता। मैंने उसे बड़ी तेज गति से धक्के दिए मुझे उसे धक्के देने में बहुत मजा आ रहा था। जब मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता तो उसके मुंह से सिसकियां निकल जाती और वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो जाती। उसने मेरा साथ बड़े अच्छे तरीके से दिया जब वह झडने वाली थी तो उसने अपनी योनि को टाइट कर लिया और मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ लिया लेकिन मैं उसे धक्के देता जा रहा था परंतु कुछ देर बाद मेरा वीर्य गिरा तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। मुझे ऐसा लगा जैसे कि मेरे अंदर से सारी ताकत बाहर निकल आई हो लेकिन नंदिनी के साथ पहला सेक्स मेरे लिए यादगार बनकर रह गया।


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