चूत की प्यास लंड ने बुझाई

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Chut ki pyas lund ne bujhayi मां मेरे कमरे में आई और कहने लगी कि गीतांजलि बेटा तुम क्या कर रही हो मैंने मां को कहा मां कुछ भी तो नहीं बस अपना सामान पैक कर रही थी। मां मुझे कहने लगी कि बेटा तुमने मुझे कुछ बताया भी नहीं मैंने मां को कहा मां मैं अपने ऑफिस के काम से बेंगलुरु जा रही हूं मेरी मां कहने लगी कि बेटा तुम वहां से कब लौटोगी। मैंने मां को कहा मां मुझे वहां से आने में तो समय लग जाएगा लेकिन आप बताइए आपको क्या कोई जरूरी काम था तो मां मुझे कहने लगी कि लाओ मैं तुम्हारी मदद कर देती हूं। मैंने मां को कहा नहीं मां रहने दीजिए लेकिन मां मेरी मदद करने लगी और उन्होंने मेरा सामान रखने में मेरी मदद की मां मेरे साथ बैठी और कहने लगी गीतांजलि मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी मैंने मां को कहा हां मां कहिए ना आपको क्या कहना था। काफी समय बाद मां और मैं साथ में बैठ कर बात कर रहे थे क्योंकि मुझे अपने काम से बिल्कुल भी फुर्सत नहीं मिल पाती है इसलिए मां से मेरी बात ज्यादा हो नहीं पाती लेकिन जब मां मेरे साथ में बैठी हुई थी तो वह मुझे कहने लगी कि गीतांजलि बेटा अब तुम शादी क्यों नहीं कर लेती। जब मां ने मुझसे यह बात कही तो मैंने मां को कहा देखो मां अब आप मेरे पुराने जख्मों को दोबारा से मत दोहराओ बड़ी मुश्किलों से मैंने अपने पुरानी यादों को अपने दिल से मिटाया है।

मेरी मां कहने लगी कि बेटा कब तक अकेले तुम लड़ती रहोगी और कब तक इतनी मेहनत करती रहोगी कभी ना कभी तो तुम्हें किसी की जरूरत तो पड़ेगी ही ना अब मुझे ही देख लो तुम्हारे पिताजी के चले जाने के बाद मैं कितनी अकेली हो गई हूं। मैंने मां को कहा मां आप हमेशा ही मुझसे ऐसी बात करती रहती हैं आप भी तो सोचिए मेरी भी अपनी कोई जिंदगी है और पहले ही मैंने इतना दुख और इतनी तकलीफे अपने जीवन में देखी है कि अब मेरा शादी करने का बिल्कुल भी मन नहीं है मुझे किसी पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। मां कहने लगी कि बेटा तुम्हें दोबारा अपने जीवन को शुरू करना चाहिए हो सकता है कि तुम्हारा शादी का तजुर्बा गलत हो लेकिन तुम्हें किसी ना किसी की तो जरूरत पड़ेगी ही। मैंने मां को कहा हां मां आप बिल्कुल ठीक कह रही हैं लेकिन फिलहाल तो मुझे लगता है कि मुझे शादी नहीं करनी चाहिए और फिलहाल मैंने इस बारे में अपने दिमाग से भी ख्याल निकाल दिया है। मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि इस वक्त मुझे क्या करना चाहिए मैं अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में बेंगलुरु के लिए निकल चुकी थी। मैंने मां को कहा था कि आप अपना ध्यान रखिएगा मां ने मुझे कहा कि बेटा तुम चिंता मत करो मैं अपना ध्यान रख लूंगी।

मां ने जब मुझे यह कहा तो मैंने मां को कहा ठीक है मां यदि कोई परेशानी हो तो मुझे आप फोन कर दीजिएगा। मैं जब बेंगलुरु के लिए निकल रही थी तो ट्रेन में मेरी मुलाकात अविनाश से हुई अविनाश मेरे सामने वाली सीट में बैठा हुआ था जब अविनाश से मेरी बात हुई तो उससे बात कर के मुझे अच्छा लगा। ना जाने क्यों मेरे दिल से आवाज आ रही थी कि अविनाश से मुझे बात करनी चाहिए मुझे उस वक्त तो कुछ समझ नहीं आया लेकिन मैं विनाश के साथ बात करती रही और अविनाश ने मेरा नंबर भी ले लिया था मैंने भी अविनाश को अपना नंबर दे दिया। जब मैंने अविनाश को अपना नंबर दिया तो अविनाश ने मुझे फोन किया मैं बेंगलुरु पहुंच चुकी थी और अविनाश भी अपने किसी काम के सिलसिले में बेंगलुरु ही जाने वाला था इसलिए जब वह मुझे बेंगलुरु में मिला तो अविनाश और मैंने साथ में अच्छा समय बिताया। अविनाश को मैंने अपनी पुरानी जिंदगी के बारे में सब बता दिया था उसे मैंने बता दिया था कि कैसे मैंने अपनी जिंदगी के कितने कठिन समय को हंसते हुए गुजार दिया। अविनाश ने मुझसे मेरे और मेरे पति के रिश्ते के बारे में पूछा तो मैंने अविनाश को सब कुछ बता दिया अविनाश यह सुनकर थोड़ा हैरान तो जरूर था लेकिन अविनाश ने मुझे कहा कि गीतांजलि मुझे आपसे बात करना अच्छा लगा और आपका स्वभाव और आपका व्यक्तित्व मुझे बहुत पसंद आया। अविनाश को भी मुझमे ना जाने क्या अच्छा लगा, अविनाश ने भी मुझे अपने बारे में सब कुछ बता दिया था और मुझे इस बात की खुशी भी थी कि अविनाश ने मुझे अपने बारे में सब कुछ बता दिया है। मैं और अविनाश जब एक दूसरे के साथ समय बिता रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन मुझे अब वापस चंडीगढ़ लौटना था और मैं वापस चंडीगढ़ लौट आई।

अविनाश से मेरी बात फोन पर होती रहती थी अविनाश और मेरी बात फोन पर घंटो तक होती थी मैंने अविनाश को चंडीगढ़ मिलने के लिए बुलाया था और अविनाश मुझसे मिलने के लिए चंडीगढ़ आ गया। जब अविनाश मुझसे मिलने के लिए चंडीगढ़ आया तो मैंने अविनाश को अपनी मम्मी से मिलवाया मेरी मम्मी इस बात से खुश थी कि मैंने अपने जीवन में आगे बढ़ने का फैसला कर लिया है। मां ने मुझे कहा कि बेटा मुझे बहुत खुशी है कि तुमने कम से कम अपने जीवन में आगे बढ़ने के बारे में तो सोचा। मैंने मम्मी को कहा मम्मी मुझे पता है कि आप कितनी ज्यादा परेशान थी लेकिन अब मैं नहीं चाहती की आपकी परेशानी मैं और बढाऊँ इसी वजह से मैंने भी अब आगे बढ़ने के बारे में सोच लिया है। मम्मी को अविनाश बहुत पसंद आया और मम्मी चाहती थी की अविनाश के साथ मैं शादी कर लूँ इसलिए मम्मी ने मेरी बात मान ली और उन्होंने कहा कि तुम अविनाश के साथ शादी कर लो। हम दोनों ने भी अब एक साथ अपने जीवन को व्यतीत करने के बारे में सोच लिया था और मैं चाहती थी कि अविनाश के परिवार से मैं मिलूं।

अविनाश ने मुझे अपने परिवार से मिलाया तो मुझे उसके परिवार से मिलकर अच्छा लगा। मैं अपनी नई जिंदगी शुरू कर रही थी अविनाश के साथ मुझे मिलना और उससे बात करना मुझे अच्छा लगता। एक दिन हम दोनों फोन पर बात कर रहे थे फोन पर बात करने के दौरान हम दोनों के बीच सेक्सी बातें होने लगी मैं अपने आपको रोक ही नहीं पा रही थी और ना ही अविनाश अपने आपको रोक पा रहा था। अविनाश ने उस दिन मुठ मार कर काम चला लिया जब अविनाश ने मुझसे कहा मुझे तुमसे मिलना है तो वह मुझसे मिलने के लिए चंडीगढ़ आया। जब वह चंडीगढ़ मुझसे मिलने के लिए आया तो मैं अविनाश को मिलकर खुश थी अविनाश से मिलकर मुझे बहुत खुशी हो रही थी। मुझे इस बात की बहुत ज्यादा खुशी थी अविनाश के साथ में सेक्स करने वाली हूं जब अविनाश ने मेरे कपड़े उतारकर मुझे नंगा किया तो मैं अपने आपको रोक नहीं पाई। मैंने अविनाश से कहा तुम मेरी चूत को चाटो अविनाश ने मेरी चूत को बहुत देर तक चाटा जब मैं पूरी तरीके से गर्म हो गई तो अविनाश अपने आपको रोक नहीं पाया और ना ही मैं अपने आप को रोक पाई। मैंने अविनाश के लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरू किया तो अविनाश पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगा मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था मैं भी उत्तेजित हो चुकी थी मेरी चूत से लगातार पानी बाहर की तरफ निकल रहा था मै अपने आपको रोक नहीं पा रही थी और ना ही अविनाश अपने आपको रोक पा रहा था। उसने मुझे कहा मुझे तुम्हारी चूत में लंड डालना है जैसे ही अविनाश ने अपने लंड को मेरी चूत के अंदर प्रवेश करवाया तो उसका लंड मेरी चूत के अंदर आसानी से जा चुका था मैं बहुत तेज से चिल्लाने लगी मेरे मुंह से मादक आवाज निकलने लगी। अविनाश ने मेरे दोनों पैरों को खोला और कहने लगा तुम इतनी तेजी से सिसकिया ले रही हो मैं रह नहीं पा रहा हूं लेकिन मैं भी कहां रह पा रही थी। मैंने अविनाश को कहा मेरी चूत में दर्द हो रहा है तो अविनाश कहने लगा कोई बात नहीं थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा।

काफी समय बाद में सेक्स कर रही थी तो मुझे अच्छा लग रहा था जब अविनाश ने मेरी चूतड़ों को पकड़कर मुझे घोड़ी बनाया तो मैं अविनाश को कहने लगी जल्दी से मेरी चूत के अंदर लंड डाल दो मैं बहुत ज्यादा मचलने लगी थी मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी इसलिए अविनाश ने जैसे ही मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो मैं चिल्लाने लगी मैं बहुत तेजी से चिल्ला रही थी। अविनाश के साथ शारीरिक संबंध बनाना मेरे लिए बहुत अच्छा रहा अविनाश बहुत देर तक मेरी चूत के मजे लेता रहा जब मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी निकलने लगा तो अविनाश कहने लगा लगता है तुम झडने वाली हो? मैंने उसे कहा नहीं अभी मैं नहीं झडने वाली हू उसने मुझे अपने ऊपर आने के लिए कहा मैंने उसके लंड को अपनी चूत में ले लिया और अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे करने लगी तो मुझे अच्छा लग रहा था। अविनाश के साथ शारीरिक संबंध बनाना मुझे बहुत अच्छा लगा मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी काफी देर तक ऐसा करना के बाद जब मेरी चूत से पानी निकलने लगा तो मैने अविनाश से कहा मैं झडने वाली हूं।

अविनाश ने जल्दी से अपने लंड को चूत के अंदर बाहर किया मुझे कहा मेरा वीर्य भी तुम्हारी चूत के अंदर ही गिर चुका है। अविनाश का वीर्य मेरी चूत के अंदर जा चुका था मैं बिल्कुल भी रह नहीं पाई मुझे बहुत अच्छा लगा मैने अविनाश को गले लगा लिया। अविनाश ने कहा तुम्हारे साथ संभोग कर के मजा आ गया थोड़ी देर बाद हम दोनो सेक्स करने के लिए तैयार हो गए अविनाश के लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरू किया उसने भी मेरी चूत को बहुत देर तक चाटा अब मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और ना ही अविनाश अपने आपको रोक पाया। मैंने अविनाश को कहा तुम मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दो तो उसने अपने लंड को मेरी चूत मे घुसाया और बहुत तेजी से मेरी चूत मारी। मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई थी और अविनाश के साथ करीब 15 मिनट के संभोग के बाद मैं झड़ चुकी थी अविनाश और मैं एक दूसरे के साथ सेक्स कर के बहुत खुश थे।


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