चूत की आग को शांत किया

Chut ki aag ko shaant kiya:

antarvasna, kamukta

दोस्तों, मेरा नाम शोभित है। मैं पुलिस में नौकरी करता हूं और मुझे पुलिस में नौकरी करते हुए 4 वर्ष हो चुके हैं। इन 4 वर्षों में मेरी जिंदगी में बहुत ही बदलाव आए हैं।  मैं पहले बहुत ज्यादा शरारती था लेकिन मैं अब एक जिम्मेदार इंसान बन चुका हूं। मेरे माता-पिता हमेशा कहते हैं कि तुम बिल्कुल ही बदल चुके हो और पहले जैसे बिल्कुल भी नहीं रहे। तुम बहुत ही जिम्मेदार इंसान बन चुके हो। मैं उन्हें हमेशा कहता हूं कि पापा उम्र के साथ तो सब कुछ बदल जाता है। पहले मैं बहुत ही शरारत किया करता था और हमेशा ही मेरे घर में मेरे पड़ोस के लोग मेरी शिकायत लेकर पहुंच जाते थे। उन्हें हमेशा मुझसे शिकायत रहती थी कि मैं हमेशा अपने मोहल्ले के लड़कों को पीटता और उनके साथ बत्तमीजी करता हूं। कभी-कबार तो में लड़कियों को भी छोड़ देता था। मेरी मां मुझे हमेशा समझाती। वह कहती कि बेटा ऐसा मत किया करो इससे तुम्हारी इज्जत खराब होगी और हमारा नाम भी बदनाम होगा। तुम्हारे पिताजी इतने शरीफ हैं। तुम इस प्रकार की हरकते कर के उनका नाम क्यों खराब कर रहे हो।

मेरी शरारतें ऐसी ही थी परंतु समय के साथ सब कुछ मेरे जीवन में बदल गया। जब से मेरी नौकरी लगी है उसके बाद से मेरा जीवन पूरी तरीके से बदल चुका है। मैं काफी समय से अपने दोस्तों के संपर्क में भी नहीं था क्योंकि उनसे भी मेरी मुलाकात नहीं हो पा रही थी। जब मेरा ट्रांसफर नागपुर में हुआ तो वहां पर मेरी मुलाकात मेरे पुराने दोस्त से हुई। उसका नाम अजय है। वह मुझे मिलकर बहुत खुश हुआ और मुझे कहने लगा कि शोभित तुम तो बिल्कुल बदल चुके हो और तुमने तो सब लोगों से संपर्क ही छोड़ दिया है। वह मुझे कहने लगा अब तो तुम पुलिस में हो और तुम बदल चुके हो या फिर पहले जैसे ही शरारती अभी भी करते हो। मैंने उसे कहा नहीं आम मैं पहले जैसी शरारती नहीं करता। अब मुझ पर जिम्मेदारियां आ चुकी है और अब मैं पहले जैसा बिल्कुल भी नहीं हूं। वह मुझे कहने लगा मैं नागपुर में ही रहता हूं और यहीं है कंपनी में जॉब करता हूं तुम कभी मेरे घर पर आओ। मैंने उसे कहा ठीक है मैं देखता हूं जब मुझे वक्त मिलेगा तो मैं तुम्हारे घर पर आ जाऊंगा।

उसने मुझे अपना एड्रेस दे दिया और कहा कि तुम जरूर मेरे घर पर मुझसे मिलने आना और यह कहते हुए वह चला गया। मैं एक दिन उसके घर की तरफ गया तो सोचा कि क्यों ना अजय से मिल लिया जाए। मैं जब अजय से मिला तो अजय मुझे अपने घर पर ले गया। उसने मुझे अपनी पत्नी गरिमा से भी मिलवाया। मैं गरिमा से मिलकर बिल्कुल भी खुश नहीं था क्योंकि उसके चेहरे के भाव कुछ अलग ही थे और वह मुझे देख कर खुश नहीं थी इसलिए मैं भी ज्यादा देर तक वहां पर नहीं रुका और वहां से मैं अपने रूम में आ गया। मैं जब अपने रूम में आया तो मुझे लगा कि उसकी पत्नी मुझे देख कर बिल्कुल भी खुश नहीं थी लेकिन मैंने भी सोचा कि छोड़ो यह हम दोनों की आपसी बात है लेकिन मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि क्या वह दोनों खुश होंगे क्योंकि अजय ने मुझे बताया था कि उन दोनों ने लव मैरिज की है परन्तु मुझे तो बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगा कि वह दोनों एक दूसरे के साथ खुश होंगे। उसके बाद मैं भी कई दिनों तक अपने काम पर ही लगा रहा। एक दिन मेरी मुलाकात अजय की पत्नी से हुई। वह जब मुझे मिली वह उस दिन तो मुझसे बड़े ही अच्छे से बात कर रही थी। मुझे समझ नहीं आया कि यह मुझसे इतने  अच्छे से बात क्यो कर रही है। मैं उसके नेचर को बिल्कुल भी समझ नहीं पा रहा था और मुझे उस पर थोड़ा शक होने लगा।  मैं सोचने लगा कि यह किस प्रकार की महिला है। जब मैं उसके घर पर गया तो उस दिन यह बिल्कुल भी बात नहीं कर रही थी और बाहर मुझसे इतने देर तक बात करती रही। मैंने भी सोच लिया कि मैं अब गरिमा के बारे में पता कर के ही रहूंगा। मैंने भी उसके बारे में जब पता करवाया तो मुझे मालूम पड़ा कि उसके अफेयर तो कई पुरुषों के साथ है और वह बिल्कुल भी अच्छी महिला नहीं है। वह बहुत ही चरित्रहीन है।

एक दिन मैं जब अजय से मिला तो मैंने सोचा कि अजय को मैं सब बात बता दूं लेकिन मेरे गले से बाहर उसकी पत्नी के बारे में कुछ भी नहीं निकला और मैंने सोचा कि कहीं उसके रिश्ते पर कुछ गलत फर्क ना पड़े इसलिए मैंने उससे कुछ भी नहीं कहा और मैंने उस बात को अपने दिल में ही रखा लेकिन मैं अपने दोस्त का घर बर्बाद होते हुए नहीं देख सकता था इसलिए मैंने भी ठान ली कि मैं गरिमा को सुधार कर ही रहूंगा नहीं तो वह अजय की जिंदगी वह बर्बाद कर देगी और इस प्रकार से तो अजय भी अपने आप को ठगा सा महसूस करने लगेगा। मैं उसके साथ गलत होता हुआ नहीं देख सकता था। मैंने अपने दिल में यह बात सोची ली थी कि मैं उसे बिल्कुल सुधार कर रहूंगा। मेरी बचपन से आदत है कि जो काम मैं अपने हाथ में लेता हूं उसे अंजाम तक पहुंचा कर ही सांस लेता हूं और मैंने भी पूरी तरीके से सोच लिया था। एक दिन में गरिमा से मिलने उसके घर पर चला गया। उस दिन अजय घर पर नहीं था। गरिमा से मैंने उस दिन कहा तुम अभी भी सुधर जाओ यह तुम्हारे लिए अच्छा नहीं है यदि मैंने अजय को बता दिया तो उसकी नजरों में तुम्हारी क्या  रिस्पेक्ट रहेगी।

वह मुझे कहने लगी मेरी इच्छा पूरी ही नहीं होती तो मैं क्या करूं। अजय मुझे संतुष्ट नहीं कर पाता इसीलिए तो मैं बाहर जा कर मुंह मारती हूं। मैंने उससे कहा आज मैं तुम्हारी इच्छा पूरी कर देता हूं और आज के बाद तुम कभी भी किसी के पास नहीं जाओगी। वह कहने लगी ठीक है। वह मेरी बाहों में आ गई और मैंने उसके होठों को बहुत देर तक चूसा। उसके होंठ बड़े ही नरम और मुलायम थे मेरा लंड भी खड़ा हो गया। जब मेरा लंड खड़ा हुआ तो मैं उसे चोदने के लिए उतारू हो गया। मैंने जब उसकी योनि को अपने हाथ से दबाया तो उसकी योनि पानी छोड रही थी। मैंने उसके पूरे कपड़े खोल दिए थे और उसके अंतर्वस्त्र भी मैंने उतार दिए थे। जब मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में लिया तो वह मुझे कहने लगी आज तुम मेरी इच्छा पूरी कर दो सालों से मेरी इच्छा पूरी नहीं हुई है। वह पसीना पसीना हो रही थी लेकिन अपने बदन की खुशबू मुझे अपनी और आकर्षित कर रही थी।

मैंने उसके स्तनों को बहुत देर तक चूसा मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाला तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा है। मुझे अपनी चूत में लेकर मजा आ गया। मैंने भी तेजी से चोदना शुरू कर दिया। मैं उसे बहुत तेज झटके मार रहा था वह अपने पैर चौडे कर रही थी और मुझे कह रही थी तुम ऐसे ही मुझे चोदते रहो ताकि मेरे अंदर की आग बुझ सके। तुम ही मेरी आग को बुझा सकते हो। मैंने उस दिन उसे 10 मिनट तक चोदा जब मै झड गया तो वह मुझे कहने लगी आज तुमने मेरी इच्छा पूरी कर दी। 5 मिनट तक मैंने रेस्ट किया और रेस्ट करने के बाद जब मैंने उसकी गांड के अंदर मोटे लंड को डाला तो वह दर्द से करहाने लगी और कहने लगी मैंने तुम्हें चूत मे डालने के लिए कहा था। तुमने तो मेरी गांड में लंड डाल दिया। मेरे गांड के घोडे खोल कर रख दिए। मैंने उसे बड़ी देर तक झटके देना जारी रखा। मै इतनी तेज गति से उसकी गांड मार रहा था। उसकी गांड से खून बाहर की तरफ निकलने लगा। गरिमा मुझे कहने लगी तुम मुझे छोड़ दो अब मुझसे नहीं हो पा रहा है। मैंने अपनी गांड किसे से भी नहीं मरवाई है। मैंने उसे कहा आज के बाद तुम कभी भी घर से बाहर नहीं जाओगे। मैंने उसे यह कहते हुए और तेजी से झटके देना शुरू कर दिया। मैंने उसे कहा मैं नहीं चाहता कि मेरे दोस्त की अमानत किसी बाहर वाले से चुदे। तुम्हें अपनी चूत की खुजली मिटाने है तो तुम मुझे कहना मैं तुम्हारी सारी खुजली मिटा दूंगा। मैंने उसे इतनी तेज गति से झटके दिए। वह कहने लगी मैं अब बेहोश होने वाली हूं। उसकी गांड से खून निकल रहा था। उसने अपने हाथ पैर छोड़ दिए। मैंने उसे बड़ी तेजी से झटके दिए जब मेरा वीर्य उसकी गांड की अंदर गिरा तो वह ऐसे ही लेटी हुई थी। मैंने उसे खड़ा उठाया और उसे एक गिलास पानी का दिया। उसके बाद से उसने कभी भी किसी के साथ सेक्स नहीं किया है वह मुझे ही अपने पास बुलाती है।


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