चूत का स्वाद गजब

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Chut ka swad gazab मुकेश मुझे कहता है सोहन तुम घर पर क्या कर रहे हो मैंने मुकेश को कहा यार इतने समय बाद तो विदेश से घर लौटा हूं थोड़ा समय तो अपने परिवार को देने दो। मुकेश मुझे कहने लगा कि ठीक है तुम अपने पापा मम्मी के साथ रहो जब तुम्हें समय मिलेगा तो तुम मुझे फोन करना मैंने मुकेश को कहा ठीक है मैं जैसे ही फ्री हो जाऊंगा तो मैं तुम्हें फोन करता हूं। एक साल बाद घर लौटने की खुशी ही कुछ और थी विदेश में अपनापन कहा था जो कि अपने मां बाप के बीच में आकर मुझे महसूस हो रहा था। मैं और मेरे पापा साथ में बैठ कर बात कर रहे थे तो मेरे पापा मुझे कहने लगे कि सोहन बेटा अब तुम शादी कर लो मैंने उन्हें कहा पापा लेकिन इतनी जल्दी, अभी तो मेरी उम्र सिर्फ 27 वर्ष है। पापा कहने लगे कि बेटा तुम अभी शादी कर लोगे तो हमें भी अच्छा लगेगा कि तुम्हारी शादी हम लोगों ने करवा दी। मैं घर में इकलौता हूं इसलिए मेरे पापा मम्मी चाहते थे कि मैं शादी कर लूं परंतु मैं अभी शादी करना नहीं चाहता था मुझे थोड़ा वक्त चाहिए था।

मैंने पापा को कह दिया कि मुझे थोड़ा वक्त चाहिए लेकिन उन्होंने कहा कि बेटा तुम जल्दी से शादी कर लो। उनकी जिद के आगे मुझे शादी करनी ही पड़ी और मैंने जब शादी कर ली तो उसके बाद मेरी पूरी जिंदगी बदल चुकी थी मेरी पत्नी मेरे पापा मम्मी के साथ रहती थी और मैं विदेश में था हम दोनों एक दूसरे को कभी समझ ही नहीं पाए। मेरी पत्नी को हमेशा मुझसे यह शिकायत थी कि मैं उससे ज्यादा बात नहीं करता हूं लेकिन मेरे पास इतना वक्त ही नहीं होता था कि मैं उससे बात कर सकूँ। मेरी पत्नी और मेरे बीच में एक दरार पैदा होने लगी थी और यह दरार उस वक्त ज्यादा ही बढ़ गई जब मैं अपने घर लौटा। जब मैं अपने घर लौटा तो मेरी पत्नी और मेरे बीच बिल्कुल भी प्यार नहीं था और हम दोनों एक दूसरे से अलग ही थे वह मुझे कहने लगी कि सोहन मैं ऐसे तुम्हारे साथ जिंदगी नहीं बिता सकती। उसने मुझसे अलग होने का फैसला कर लिया और मम्मी पापा भी इस बात से बड़े दुखी हुए उन्होंने मेरी पत्नी को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह उनकी एक बात ना मानी।

अब मैं और रचना एक दूसरे से अलग हो चुके थे पापा मम्मी इस बात से बहुत दुखी थे लेकिन उसमें शायद उनकी भी कोई गलती नहीं थी पापा और मम्मी ने उसके बाद मुझे कभी शादी के लिए नहीं कहा। मेरी शादी एक वर्ष भी नहीं चल पाई और एक वर्ष में ही मेरी शादी टूट चुकी थी मैं जिस कंपनी में जॉब करता हूं उसी कंपनी में मेरे साथ सुहानी काम करती। सुहानी बहुत अच्छी लड़की है सुहानी और मेरे बीच कभी कुछ ऐसा नहीं था हम दोनों अच्छे दोस्त थे लेकिन जब सुहानी को मेरे शादी के बारे में पता चला तो वह बड़ी दुखी हुई और कहने लगी कि सोहन तुम्हारी पत्नी को तुम्हारे साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था। मैंने सुहानी को सारी बात बताई और कहा सुहानी तुम तो जानती हो कि मेरी पत्नी की भी मुझसे कुछ उम्मीदें थी और अब मैं उसकी उम्मीदों पर बिल्कुल भी खरा नहीं उतरा इस वजह से तो उसने मुझे डिवोर्स दे दिया। हालांकि मुझे उससे कोई भी शिकायत नहीं है सुहानी मुझसे कहने लगी कि लेकिन सोहन तुम्हारी पत्नी को यह समझना चाहिए था कि तुम अपने काम में बिजी रहते हो और तुम उससे बात किया तो करते थे। मैंने उसे कहा अब रचना क्या सोचती थी यह तो मुझे भी नहीं पता लेकिन अब हम दोनों एक दूसरे से अलग हो चुके हैं और मैं अपनी जिंदगी के बारे में दोबारा से नहीं सोचना चाहता जो मेरा बीता हुआ कल था मैं उसे भूल जाना ही बेहतर समझता हूं और अब आगे बढ़कर अपनी नई जिंदगी शुरू करना चाहता हूं। सुहानी ने इसमें मेरा बहुत साथ दिया सुहानी और मैं एक दूसरे को बड़े अच्छे तरीके से समझते थे। जब मैं अपने मम्मी पापा के पास दिल्ली आया तो मेरे साथ सुहानी भी आई क्योंकि सुहानी महाराष्ट्र के कोल्हापुर की रहने वाली है और जब वह पापा मम्मी से मिली तो पापा मम्मी को लगा कि हम दोनों के बीच कुछ चल रहा है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था। मम्मी ने सुहानी से कहा कि तुम्हें सोहन तो पसंद है ना तो उस वक्त सुहानी ने मुझे इस बारे में कुछ नहीं बताया लेकिन जब सुहानी और मैं साथ में बैठे हुए थे तो सुहानी ने मुझे कहा कि तुम्हारी मम्मी मुझे कह रही थी कि तुम्हें सोहन पसंद है मैंने तो तुम्हारी मम्मी को कुछ जवाब नहीं दिया। मैं इस बात पर हंसने लगा और मैंने सुहानी को कहा सुहानी मैं तुमसे इस बात के लिए माफी मांगता हूं सुहानी कहने लगी कोई बात नहीं उनकी भी कुछ उम्मीदें हैं और मुझे भी मालूम है कि तुम्हारी मम्मी चाहती है कि तुम्हारी शादी हो जाए।

सुहानी मेरे घर पर तीन-चार दिन रूकी और मम्मी और पापा सुहानी से मिलकर बड़े खुश थे और उसके बाद भी वह लोग सुहानी से अक्सर फोन पर बात किया करते थे। सुहानी अपने घर कोल्हापुर चली गई थी और हम दोनों की फ्लाइट एक ही दिन थी तो हम दोनों एक ही दिन वापस अमेरिका जाने वाले थे। सुहानी मेरे घर पर वापस आई और हम दोनों की फ्लाइट दिल्ली से ही थी जब हम दोनों उस दिन फ्लाइट से अमेरिका पहुंचे तो सुहानी और मेरे बीच कई मुद्दों को लेकर बात हुई मैंने सुहानी के बारे में कभी भी अपने मन में यह नहीं सोचा था कि सुहानी मुझसे शादी करने के लिए तैयार हो जाएगी लेकिन जब सुहानी ने मुझसे यह बात कही तो मुझे थोड़ा अजीब सा लगा। मैंने सुहानी को कहा सुहानी तुम ठीक तो हो ना तुम्हें क्या हो गया है तो सुहानी इस बात पर मुस्कुराने लगी और कहने लगी कि सोहन मुझे लगता है कि तुम से अच्छा पार्टनर मुझे मिल पाना मुश्किल है जिस प्रकार से तुम मुझे समझते हो और हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझते हैं तो मुझे लगता है कि हम दोनों को शादी कर लेनी चाहिए।

इस बात से मैंने सुहानी को कहा लेकिन सुहानी मैंने तुम्हारे बारे में कभी ऐसा नहीं सोचा मैं तुम्हें हमेशा अपना अच्छा दोस्त मानता हूं और हमेशा तुम्हें अपना अच्छा दोस्त ही मानता रहूंगा। सुहानी कहने लगी मैं तुम्हारे साथ अपना जीवन बिताने के लिए तैयार हूं। हम दोनों एक ही ऑफिस में काम करते थे और अपने घर से दूर सुहानी मुझे अच्छे से समझती थी। सुहानी और में एक दिन ऑफिस में थे सुहानी मुझे कहने लगी सोहन आज मैं तुम्हारे लिए बटर चिकन बनाती हूं। मैंने उसे कहा हां सुहानी काफी दिन हो गए मैंने बटर चिकन नहीं खाया। सुहानी को यह बात मालूम थी मुझे बटर चिकन पसंद है सुहानी ने मेरे लिए बटर चिकन बनाया। हम दोनों साथ में बैठकर बात कर रहे थे सुहानी कहने लगी चलो खाना खा लेते हैं। मैंने उसे कहा थोड़ी देर रुक जाओ थोड़ी देर बाद खाना खा लेंगे। सुहानी मुझसे बिल्कुल सटकर बैठी हुई थी मेरा हाथ गलती से सुहानी की कमर की तरफ चला गया सुहाने भी अपने आपको रोक ना सकी हम दोनों के होंठ एक दूसरे के होंठो से टकराने लगे। मैंने कभी भी सोचा नहीं था सुहाने के साथ मैं अंतरंग संबंध बनाऊंगा जब सुहानी के होंठ मेरे होंठों से टकरा रहे थे तो हम दोनों एक दूसरे के लिए तड़पने लगे थे। मेरी तडप इतनी ज्यादा बढ़ने लगी मैंने सुहानी के स्तनों को दबाना शुरू किया सुहानी अपने आपको बिल्कुल भी रोक ना सकी उसने मेरे लंड को दबाना शुरू किया जब वह मेरे लंड को दबाती तो मैं भी उत्तेजित हो जाता। मैंने सुहानी के कपड़े उतारे सुहानी की ब्रा को मैंने उतार फेंका उसके स्तनों पर अपनी जीभ के स्पर्श से मैंने सुहानी को अपना बना लिया। सुहानी के निप्पल को मैं अपने मुंह में ले रहा था उसके निप्पल को मैं जिस प्रकार से चूसता वह उत्तेजित हो जाती सुहानी की चूत से पानी बाहर निकलने लगा था। मैंने जब उसकी पैंटी को उतारकर उसकी चूत को सहलाया तो उसकी चूत से पानी बाहर की तरफ को निकाल रहा था वह बिल्कुल भी अपने आपको रोक ना सकी।

मैंने सुहानी को कहा मैं रह नहीं पा रहा हूं सुहानी ने मेरे लंड पर अपने होठों को लगाया तो मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया सुहानी ने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरू किया मुझे अच्छा लग रहा था। वह काफी देर तक मेरे लंड को ऐसे चूसती रही मै पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुका था मैंने सुहानी की चूत पर अपने लंड को लगाया तो सुहानी मचलने लगी। मैंने सुहानी को अपनी बाहों में ले लिया धीरे धीरे मेरा लंड सुहानी की चूत के अंदर प्रवेश होने लगा सुहानी की चूत के अंदर मेरा लंड घुसते ही वह चिल्ला उठी। उसकी चूत के अंदर लंड जा चुका था वह चिल्लाने लगी थी उसकी सिसकिया मेरे अंदर की उत्तेजना को बढाती मैंने सुहानी को कहा सुहानी मेरा वीर्य गिरने वाला है। मेरा वीर्य सुहानी की चूत के अंदर गिर चुका था उसके बाद जब सुहानी ने दोबारा से मेरे लंड को मुंह के अंदर लिया तो मैं बिल्कुल भी रह ना सका।

सुहानी भी पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई सुहानी को घोड़ी बनाते ही उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया। सुहानी की चूत के अंदर मेरा लंड घुस चुका था मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था मैं जब सुहानी को धक्के मारता वह चिल्लाती उसकी चूत के अंदर बाहर मेरा लंड होता। सुहानी की चूतडो से जब मेरा लंड टकराता तो मेरे अंदर की गर्मी और भी ज्यादा बढ़ जाती। अब हम दोनों ही अपने आपको ना रोक सके मेरा लंड वीर्य छोड़ने लगा था सुहानी की चूत से भी आग बाहर निकलने लगी थी। जैसे ही सुहानी के चूत के अंदर मेरा वीर्य गिरा तो मैंने उसकी चूत को साफ किया। उसके बाद मैंने अपना पसंदीदा बटर चिकन का स्वाद चखा सुहानी की चूत का स्वाद भी गजब था।


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