चूत फाड़ चुदाई का मजा

Antarvasna, kamukta:

Chut faad chudai ka majaa रविवार का दिन था उस वक्त सुबह के 9:00 बज रहे थे तभी मेरे दोस्त दीपक का मुझे फोन आया और वह मुझे कहने लगा कि रोहित क्या तुम घर पर ही हो तो मैंने उसे कहा हां मैं घर पर ही हूं। दीपक को मुझसे कुछ जरूरी काम था वह मुझसे मिलना चाहता था तो मैंने उसे घर पर ही बुला लिया, थोड़ी ही देर बाद दीपक भी घर पर आया। जब दीपक घर पर आया तो वह मुझे कहने लगा रोहित मैं चाहता हूं कि तुम मेरी पत्नी दिव्या की बात अपने कॉलेज में करो। मैं कॉलेज के एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक में जॉब करता हूं मैंने दीपक से कहा ठीक है मैं तुम्हारी पत्नी दिव्या के बारे में अपने कॉलेज में बात करता हूं। दीपक कुछ ज्यादा ही परेशान नजर आ रहा था मैंने उसकी परेशानी का जब कारण पूछा तो उसने मुझे बताया कि पिछले कुछ दिनों से वह घर पर ही है। मैंने उससे कहा कि लेकिन तुम तो जॉब कर रहे थे तो वह मुझे कहने लगा कि कुछ दिनों पहले उसने अपनी जॉब से रिजाइन दे दिया है जिस वजह से वह काफी ज्यादा परेशान है। मैं दीपक की परेशानी को समझ सकता था इसलिए मैंने उसे कहा कि मैं दिव्या की बात कॉलेज में कर लूंगा।

मेरी पत्नी कावेरी दीपक के लिए चाय बना कर ले आई, हम दोनों चाय पीते पीते एक दूसरे से बातें कर रहे थे। दीपक और मैं एक दूसरे को काफी वर्षों से जानते हैं दीपक से मेरी मुलाकात मेरे स्कूल के दिनों में हुई थी। हालांकि वह हमारे स्कूल में नहीं पड़ता था परंतु मेरा दोस्त संकेत जो कि दीपक का काफी करीबी था उसने ही मुझे दीपक से मिलवाया था उसके बाद दीपक और मेरी भी अच्छी दोस्ती होने लगी। दीपक ने मुझे कहा कि रोहित अब मैं चलता हूं मैंने दीपक को कहा ठीक है और उसके बाद दीपक चला गया। कावेरी ने मुझे कहा कि रोहित आप नाश्ता कर लीजिए मैंने कावेरी को कहा कि अभी मेरा मन नहीं है थोड़ी देर बाद मैं नाश्ता कर लूंगा और उसके बाद मैं नहाने के लिए बाथरूम में चला गया। जब मैं नहा कर बाहर आया तो मैंने नाश्ता किया, मैंने अपना नाश्ता कर लिया था मैं घर पर बोर हो रहा था तो मैंने कावेरी से कहा चलो आज हम लोग कहीं घूम आते हैं। कावेरी मुझे कहने लगी कि ठीक है मैं अभी तैयार हो जाती हूं। कावेरी आधे घंटे में तैयार हो चुकी थी और उसके बाद हम दोनों घूमने के लिए निकल पड़े। काफी दिनों बाद हम दोनों को साथ में घूमने का मौका मिल पाया था कावेरी को कुछ शॉपिंग भी करनी थी तो उसने थोड़ी शॉपिंग भी की और उसके बाद हम दोनों घर वापस लौट आए। जब हम घर वापस लौटे तो उस वक्त शाम के 7:00 बज रहे थे कावेरी मुझे कहने लगी कि रोहित मैं खाना बना लेती हूं मैंने कावेरी को कहा ठीक है। मैं अपने रूम में चला गया और अपने रूम में मैं मूवी देख रहा था तभी मुझे पापा का फोन आया पापा और मम्मी कुछ समय के लिए गांव गए हुए थे।

मैंने उनसे पूछा आपकी तबीयत कैसी है तो वह कहने लगे मेरी तबीयत तो ठीक है पापा ने भी मुझसे पूछा कि रोहित घर में सब कुछ ठीक तो है, मैंने उन्हें बताया हां घर में सब कुछ ठीक है। मैंने उन्हें कहा आप लोग वापस कब लौट रहे हैं तो वह कहने लगे कि अभी हम लोग कुछ दिन और गांव में ही रहेंगे। मैं पापा से बात कर रहा था कि कावेरी कमरे में आई और कहने लगी कि रोहित खाना बन चुका है आप खाना खाने आ जाइए। मैंने कावेरी को कहा बस थोड़ी देर में आता हूं। पापा से मेरी काफी देर तक बात हुई और उसके बाद मैं खाना खाने के लिए चला गया, कावेरी और मैंने साथ में डिनर किया। कावेरी मुझसे कहने लगी कि रोहित मैं आपसे कुछ कहना चाहती थी तो मैंने कावेरी को कहा हां कहो ना तुम्हे क्या कहना था तो कावेरी ने मुझे बताया कि उसकी बहन कुछ दिनों के लिए घर पर आ रही है। मैंने कावेरी को कहा इसमें पूछने की क्या बात है अगर तुम्हारी बहन घर पर आना चाहती है तो भला इसमें पूछने वाली कौन सी बात है। हम दोनों अब डिनर कर चुके थे मैंने और कावेरी ने डिनर कर लिया था उसके बाद हम दोनों साथ में बैठ कर बातें कर रहे थे। कुछ देर तक हम लोगों ने बातें की उसके बाद कावेरी मुझे कहने लगी कि मुझे अब नींद आ रही है और फिर कावेरी सो चुकी थी। मुझे भी अपने कॉलेज जल्दी जाना था इसलिए मैं भी सो गया अगले दिन जब सुबह मैं उठा तो उस वक्त सुबह के 6:00 बज रहे थे मैं पार्क में टहलने के लिए चला गया आधे घंटे बाद मैं वापस लौटा तो कावेरी ने मुझे चाय दी और मैंने चाय पी। मैं अखबार पढ़ रहा था और थोड़ी देर बाद मैं अपने कॉलेज के लिए तैयार होने लगा मैं घर से 9:00 बजे निकला और अपने कॉलेज मैं 9:30 बजे पहुंचा।

उस दिन ज्यादा काम तो नहीं था लेकिन मुझे उस दिन घर लौटने में देर हो गई थी। जब मैं घर लौटा तो कावेरी की बहन शीतल भी आ चुकी थी शीतल की जॉब किसी मल्टीनेशनल कंपनी में लगी थी और वह कुछ दिनों की ट्रेनिंग के लिए हमारे घर पर रुकना चाहती थी। मैंने शीतल से पूछा कि घर में सब लोग कैसे हैं तो वह कहने लगी जीजा जी घर में सब लोग ठीक हैं। मैं और शीतल एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो शीतल ने मुझे अपने ऑफिस की जानकारी दी और कहने लगी कि कुछ दिनों की ट्रेनिंग के बाद वह घर लौट जाएगी और फिर अपने लिए वहां पर वह रहने की व्यवस्था कर लेगी। मैंने शीतल से कहा की तुम्हे जब तक हमारे साथ रहना है तब तक तुम रह सकती हो मुझे उसमें कोई परेशानी नहीं है। अगले दिन से शीतल अपने ऑफिस जाने लगी थी। एक रात हम लोगों ने डिनर कर के लेटे हुए थे। कावेरी और मै बातें कर रहे थे लेकिन उस दिन कावेरी के साथ मेरा सेक्स करने का मन था और मैंने कावेरी को चोदना शुरू कर दिया। कावेरी सिसकारियां ले रही थी। शीतल ने हम दोनों को देख लिया था क्योंकि दरवाजा खुला था शीतल दरवाजे से सब कुछ देख रही थी। मैं कावेरी को अच्छे से चोद रहा था मुझे बहुत ही मजा रहा था। जब हम दोनो ने एक दूसरे को संतुष्ट कर लिया था तो वह मुझे कहने लगी मुझे नींद आ रही है। कावेरी सो चुकी थी लेकिन मैं अभी तक सोया नहीं था। जब मै शीतल के रूम मे गया तो मैने देखा वह अपनी चूत मे उंगली डाले हुई है। यह देख मै हैरान रह गया शीतल ने मुझे अभी तक देखा नहीं था। शीतल बहुत ज्यादा घबरा चुकी थी वह अपनी नजर झुका कर नंगी लेटी हुई थी।

मैं शीतल के बगल में बैठा था मैंने उसकी जांघ पर हाथ रखा और उसकी गोरी जांघ पर मैंने हाथ रखा तो उसकी जवानी अब बाहर की तरफ को निकलने लगी थी और उसकी चूत का पानी भी बढ़ने लगा था। धीरे-धीरे मैंने अपनी उंगली को उसकी चूत पर लगाना शुरू किया और जब मैंने ऐसा करना शुरू किया तो वह उत्तेजित होने लगी और मैंने उसकी चूत के अंदर अपनी उंगली को घुसा दिया। शीतल बहुत ज्यादा तड़पने लगी थी वह अपने पैरों को आपस में मिलाने की कोशिश करने लगी मैंने भी शीतल की चूत को चाटना शुरू किया। जब मैंने ऐसा करना शुरू किया तो उसे मजा आने लगा। वह बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी इसलिए उसने मेरे पजामे को नीचे करते हुए मेरे लंड को बाहर निकाल दिया। जब उसने ऐसा किया तो मुझे अच्छा लगने लगा और मेरे लंड को वह अपने मुंह में समाने के लिए बहुत ज्यादा बेताब थी। मैंने जब उसके सामने अपने लंड को किया तो वह अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को लेने लगी। पहले तो वह अपनी जीभ से मेरे लंड को चाट रही थी लेकिन मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी। मैंने उसे कहा तुम ऐसे ही मेरे लंड को चूसती रहो। उसने भी अपने मुंह को खोल दिया और मेरे लंड को अपने पूरे गले के अंदर तक डाल दिया मुझे मजा आने लगा था। उसकी चूत से पानी बाहर निकलने लगा था काफी देर तक तो उसने ऐसा ही किया उसके बाद उसकी गर्मी बढ़ने लगी थी उसने मुझे कहा जीजा जी अब मैं रह नहीं पाऊंगी।

मैंने भी शीतल की चूत पर अपने लंड को सटाते हुए धीरे-धीरे अंदर की तरफ को घुसाना शुरू किया। मेरा लंड शीतल की योनि में जा चुका था। शीतल मुझे अपने पैरों के बीच में जकड़ने की कोशिश करने लगी और उसे मजा आने लगा था। मुझे भी बड़ा आनंद आने लगा था। मैंने शीतल को कहा मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा है वह मुझे कहने लगी आपका लंड तो वाकई में बड़ा मोटा है और मुझे उसे लेने में बड़ा मजा आ रहा है। मैं उसके स्तनों के साथ खेलने लगा था मैं उसके स्तनों को दबाने लगा। जब मैंने शीतल के स्तनों को अपने मुंह में लेकर उनका रसपान करना शुरू किया तो उसे मजा आने लगा और वह कहने लगी आप ऐसे ही मेरे स्तनों को चूसते रहिए। मैंने उससे कहा मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा है। वह कहने लगी जीजा जी मुझे भी मज़ा आने लगा है। शीतल की गर्मी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि वह एक पल के लिए भी रह नहीं पा रही थी और अपने पैरों के बीच में मुझे जकड़ने की कोशिश कर रही थी।

मैंने शीतल की योनि में अपने माल को गिराने के बाद शीतल के सामने अपने लंड को किया तो उसने मेरे लंड को पूरी तरीके से चूस लिया और मेरे लंड पर लगे वीर्य को भी उसने अपने अंदर समा लिया था। उसके बाद मैंने उसे दोबारा से चोदना शुरू किया उसकी चूत के अंदर से मेरा माल अभी भी बाहर की तरफ को निकल रहा था लेकिन उसकी चूत मुझे अभी भी उतनी ही टाइट महसूस हो रही थी जितना कि पहले महसूस हो रही थी। मैं उसे चोद रहा था और मुझे उसे चोदने मे मजा आ रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं बस उसे चोदता ही जाऊं। मैंने उसे काफी देर तक ऐसे ही धक्के मारे लेकिन जैसे ही मैंने उसकी योनि में मेरा माल गिरा तो हम दोनो एक दूसरे की बाहों में लेटे हुए थे। उसके बाद मैंने शीतल को कहा तुम हमारे साथ ही रहना शीतल हम लोगों के साथ ही रहती है। मेरा जब भी मन होता तो मैं उसे चोद लिया करता।


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