चूत चुदाई का खेल खेलना अच्छा था

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Chut chudai ka khel khelna achchha tha मैं अपने मामा जी के घर से वापस लौट रहा था तो रास्ते में मुझे महेश मिला मैंने अपनी मोटरसाइकिल को एक साइड खड़े करते हुए महेश से कहा कि महेश तुम कितने दिनों बाद मुझे मिल रहे हो। वह मुझे कहने लगा कि हां रोहित तुमसे बहुत दिनों बाद मुलाकात हो रही है मैंने महेश से उसके हालचाल पूछे और कहा कि घर में तो सब कुछ ठीक है ना। वह मुझे कहने लगा कि हां रोहित घर में सब कुछ ठीक है तुम बताओ तुम कैसे हो तो मैंने महेश को कहा कि मैं तो ठीक हूं और बस अब पापा का बिजनेस संभालने लगा हूं। महेश मुझे कहने लगा चलो यह तो बड़ी अच्छी बात है कि तुम अब अंकल का बिजनेस संभालने लगे हो वैसे भी यह जिम्मेदारी तो तुम्हारे ऊपर एक न एक दिन तो आनी ही थी। मैंने महेश को मुस्कुराते हुए जवाब दिया और कहा कि हां महेश तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो यह जिम्मेदारी तो मेरे ऊपर एक न एक दिन आनी हीं थी और मैं अभी से जिम्मेदारी के लिए तैयार हूं। मुझे इस बात से बड़ी खुशी है कि मैं पापा का बिजनेस संभाल रहा हूं पापा ने काफी समय पहले एक फैक्ट्री खोली थी और अपनी मेहनत के बलबूते उन्होंने उस फैक्ट्री को एक अच्छा मुकाम पर पहुंचा दिया।

पापा ने शुरुआत में खुद ही मेहनत कर के कंपनी को काफी ऊपर पहुंचा दिया और अब मेरे ऊपर ही यह जिम्मेदारी आ चुकी है और मैं इसे बखूबी निभा रहा हूं। मैंने महेश को कहा महेश अभी तो मुझे घर जाना है मैं तुमसे कभी और मिलता हूं तो महेश मुझे कहने लगा कि रोहित मैं तुम्हें यह बताना चाहता हूं कि कुछ महीनों बाद मेरी शादी है और तुम्हें शादी में जरूर आना है। मैंने महेश को कहा यह सब तो ठीक है लेकिन तुमने सगाई कर ली, मुझे इस बारे में कुछ पता नहीं है तो महेश मुझे कहने लगा कि तुम तो जानते ही थे कि मैं कॉलेज के समय से ही सुनीता को प्यार करता था और हम दोनों के बीच काफी प्यार था इसी वजह से तो मैंने और सुनीता ने शादी करने का फैसला किया, हमारे परिवार वाले भी शादी के लिए तैयार हो चुके हैं और उन्हें शादी से कोई एतराज नहीं है।

मैंने महेश को उसकी सगाई की बधाइयां दी और कहा कि मैं तुम्हारी शादी में जरूर आऊंगा और उसके बाद मैं अपने घर लौट आया। मैं जब घर लौटा तो पापा घर पर ही थे पापा मुझे कहने लगे कि रोहित बेटा तुम अपने मामा जी से मिलने के लिए गए थे वह लोग कैसे हैं तो मैंने उन्हें बताया कि वह लोग तो ठीक हैं और वह कह रहे थे कि आप और मम्मी घर पर नहीं आते हैं। पापा ने मुझे कहा कि तुम तो जानते ही हो कि तुम्हारी मां की तबीयत कितनी खराब रहती है और इस वजह से हम लोग कहीं जा भी नहीं पाते हैं। मैंने पापा से कहा यह तो आप ठीक कह रहे हैं। मेरी मम्मी की तबीयत बहुत ज्यादा खराब रहने लगी थी कुछ सालों से उन्हे कुछ ज्यादा ही परेशानी होने लगी थी जिस वजह से डॉक्टर ने उन्हें घर पर ही आराम करने के लिए कहा था। मैं अपने काम में पूरा ध्यान दे रहा था और एक दिन मुझे महेश का फोन आया महेश मुझे कहने लगा कि रोहित तुम अभी कहां हो तो मैंने उसे कहा कि मैं तो अभी अपने काम से कहीं बाहर आया हूं। महेश मुझे कहने लगा कि मुझे तुमसे मिलना था मैंने महेश को कहा ठीक है मैं तुमसे शाम के वक्त घर पर ही मिलता हूं महेश कहने लगा कि ठीक है मैं भी तुमसे शाम को तुम्हारे घर पर ही आकर मिलता हूं। शाम के वक्त जब मैं घर लौटा तो महेश घर पर आ गया था वह मेरे पापा मम्मी को पहचानता है इसलिए वह कुछ देर तक पापा और मम्मी से बात करता रहा फिर उसने मुझे शादी का कार्ड पकड़ाते हुए कहा कि रोहित मेरी शादी एक महीने बाद है। मैंने महेश को उसकी शादी की बधाई दी और कहा कि चलो अब तुम भी शादी के बंधन में बंधने वाले हो महेश मुझे कहने लगा कि रोहित तुम भी अपने लिए कोई अच्छी सी लड़की देख कर शादी कर लो मैंने महेश को कहा कि हां जरूर क्यों नहीं मैं भी कोई अच्छी सी लड़की देख कर उससे शादी कर लूंगा। महेश हमारे घर पर काफी देर तक बैठा रहा और फिर वह चला गया जब वह घर गया तो मैं भी इस बारे में सोचने लगा कि क्या मुझे शादी कर लेनी चाहिए। मेरे मन में ना जाने कितने सवाल थे लेकिन फिलहाल माओ शादी के लिए तैयार नहीं था। एक महीने बाद जब मैं महेश की शादी में गया तो उस दिन मेरी मुलाकात महेश के छोटे भाई ने कोमल से करवाई। जब मैं कोमल से मिला तो मुझे कोमल को मिलकर काफी अच्छा लगा कोमल और मैंने उस दिन काफी बातें की और कोमल की बातों से मैं बड़ा प्रभावित हो गया था।

मैं कोमल की बातों से प्रभावित हो गया था उस दिन मैंने और कोमल ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया कोमल के साथ मैं अपने आपको काफी खुश महसूस कर रहा था और मुझे अच्छा भी लग रहा था। काफी दिनों तक तो मेरी और कोमल की कोई बात हो नहीं पाई क्योंकि मैंने कोमल का नंबर नहीं लिया था जिस वजह से मेरा कोमल से कोई भी संपर्क हो नहीं पाया था। मैंने एक दिन महेश को फोन कर के कहा कि क्या तुम मुझे कोमल का नंबर दिलवा सकते हो तो महेश कहने लगा क्यों नहीं। महेश ने उस दिन मुझे कोमल का नंबर दिलवा दिया लेकिन वह मुझे कहने लगा कि लगता है तुम भी अब प्यार में डूबने लगे हो। मैंने महेश को कहा ऐसा कुछ भी नहीं है बस कोमल मुझे अच्छी लगती है और इससे ज्यादा ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो। महेश मुझे कहने लगा कि रोहित यह तो अब समय ही बताएगा कि तुम कोमल के बारे में क्या सोचते हो और क्या नहीं मैंने महेश को कहा कि तुम मुझे कोमल का नंबर दिलवा दो।

उसने मुझे कोमल का नंबर दिलवा दिया था और उसके बाद मैंने कोमल से फोन पर बातें की कोमल और मेरी फोन पर बातें होने लगी थी हम दोनों एक दूसरे से फोन पर ही काफी बातें किया करते हैं। मुझे कोमल के साथ फोन पर बातें करना अच्छा लगता है और कोमल को भी मुझसे फोन पर बातें करना बहुत ही अच्छा लगता। हम दोनों एक दूसरे से फोन पर अब इतनी बातें करने लगे थे कि हम दोनों एक दूसरे के बिना बिल्कुल भी नहीं रह पाते थे। मैं तो इस बात से बड़ा ही खुश था कि कोमल और मेरे बीच प्यार की शुरुआत हो चुकी थी जिसके मैं कभी सपने देखा करता था। कोमल ने हीं मुझे पहली बार प्रपोज किया था और अपने दिल की बात जब उसने मुझसे कहीं तो मैं बड़ा ही खुश था और कोमल भी बहुत ही खुश थी। कोमल और मैं दूसरे के नजदीक तो आ ही चुके थे और हम दोनों एक दूसरे को बहुत ही प्यार करने लगे थे। एक दिन जब कोमल और मैं मेरे घर पर थे तो उस दिन मैंने कोमल को किस कर लिया हालांकि उससे आगे हम दोनों के बीच कुछ हो नहीं पाया। उसके बाद जैसे हम दोनों एक दूसरे के लिए बहुत ही ज्यादा पागल हो चुके थे। मैं चाहता था कोमल और मै एक दूसरे के साथ सेक्स करें कोमल को भी इस बात से कोई एतराज नहीं था। कोमल बड़ी बोल्ड और बिंदास है इसलिए वह भी मुझसे खुलकर बातें करने लगी थी। एक दिन हम दोनों मेरे घर पर ही थे और उस दिन जब मैंने कोमल को किस करने के बाद उसको महसूस किया तो वह गर्म होने लगी थी। कोमल मेरे साथ सेक्स करने के लिए पूरी तरीके से तैयार थी कोमल ने मेरे सामने अपने कपड़ों को उतारा तो मैंने उसे कहा कोमल अब मैं तुम्हारी चूत को चाटना चाहता हूं। कोमल ने मुझे कहा तुम मेरी पैंटी को उतार दो मैंने कोमल की पैंटी को उतार दिया। मैंने जब उसकी  योनि का रसपान करना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा और कोमल को भी मजा आने लगा था। वह उत्तेजित हो चुकी थी उसकी उत्तेजना अब इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ती चली गई मैंने कोमल को कहा चलो यह तो बड़ा ही अच्छा है कि तुमने मेरे साथ सेक्स करने के बारे में सोचा।

कोमल भी अब इस बात पर मुस्कुराने लगी उसने मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर चूसना शुरू कर दिया। जब वह अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को लेकर चूस रही थी तो मुझे अच्छा लग रहा था और कोमल को भी बड़ा ही मजा आने लगा था। वह पूरी तरीके से गरम होती चली गई और मुझे कहने लगी मुझे बड़ा ही मजा आ रहा है। मैंने कोमल के स्तनों को कुछ देर तक चूसने के बाद उसकी योनि पर अपने लंड को लगाकर अंदर की तरफ धकेला जैसे ही मेरा मोटा लंड कोमल की योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी मुझे अब और भी तेजी से चोदो। मैंने भी कोमल को कहा मैं तुम्हें और भी तेजी से चोदना चाहता हूं और यह कहकर मैंने कोमल के दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखते हुए कोमल की योनि के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू कर दिया।

कोमल की चूत से खून निकलने लगा था मुझे तो कोमल को धक्के मारने में मजा आ रहा था। कोमल को बड़ा मजा आ रहा था मै जिस प्रकार से उसे धक्के मार रहा था कोमल को बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। वह मुझे कहने लगी तुम मुझे बस ऐसे ही चोदते जाओ। मेरा माल कोमल की योनि में जा चुका था उसके बाद हम लोग बहुत ज्यादा गरम हो चुके थे। अब थोड़ी देर तक हम दोनों एक दूसरे के साथ लेटे रहे फिर मैंने कोमल को घोड़ी बनाकर चोदना शुरू किया। उसको घोड़ी बनाकर चोदने में मुझे बहुत ही मजा आ रहा था और उसे भी बड़ा अच्छा लग रहा था। हम दोनों ही खुश हो चुके थे हमे एक दूसरे के साथ सेक्स करने मे मजा आना लेगा था। जब मैंने अपने वीर्य को कोमल कि चूत मे गिराया तो कोमल खुश हो गई। मै उसे गले लगाकर कहा मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करने मे बड़ा ही मजा आ गया।


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