चूत आई है ज़मीन पर- 2

chut aayi hai jameen par 2:

मेरा नाम राहुल है और मैंने इसी वर्ष कॉलेज में एडमिशन लिया है और मेरे पिताजी को 2 वर्ष गाजियाबाद में हो चुके हैं। क्योंकि वह एक सरकारी कर्मचारी हैं। इस वजह से उनका ट्रांसफर अन्य शहरों में होता रहता है। इसलिए हमें गाजियाबाद में आए हुए 2 वर्ष हो चुके हैं और हम लोग सरकारी क्वार्टर में ही रहते हैं। मेरे गाजियाबाद में बहुत सारे दोस्त बन चुके हैं। इसलिए मैं उन्हीं के साथ जाकर रहता हूं और हमारे कॉलोनी में जितने भी बच्चे हैं उन सबको मैं जानता हूं। जो भी मेरे हमउम्र हैं। हम सब लोग जिस दिन भी सबकी छुट्टी होती है उस दिन हम लोग क्रिकेट मैच खेला करते हैं और उस दिन सब लोग बहुत ही मजे करते हैं लेकिन उसकी वजह से हमारे कॉलोनी के सब लोग परेशान हो जाते हैं और मेरे पिताजी मुझे कई बार डांटते हैं कि अब तुम यह सब मत किया करो लेकिन मुझे तो उनके साथ खेलने में मजा आता है। इसलिए मैं उनके साथ खेलने चला जाता हूं। एक बार मेरे कॉलेज के दोस्तों ने घूमने का प्लान बना लिया तो मैंने अपने पिताजी से इस बारे में बात की और वह कहने लगे ठीक है। तुम्हें अगर कहीं जाना है तो तुम जा सकते हो। उन्होंने मुझे कुछ पैसे भी दे दिये और कहने लगे की अपना ध्यान रखना और मुझे फोन कर देना।

हम लोग घूमने चल पड़े। हम लोगों का कोई भी ऐसा प्लान नहीं था कि हम लोगों को किसी एक ही जगह पर जाना है लेकिन फिर भी हम लोग चले गए। जब हम लोग मिले तो हम लोग गोवा चले गए। अब जब हम गोवा पहुंचे तो सब दोस्त बहुत ही खुश थे और हम लोगों ने जमकर मस्ती की और बहुत ही जमकर शराब पी। मेरे पिताजी मुझे हर दिन फोन किया करते थे जितने दिन तक मैं गोवा में था। जिस दिन मैं वापस लौट रहा था तो मैंने अपने पिताजी को कहा कि हम लोग वापस आ रहे हैं तो वह बहुत खुश हो गए और जब मैं घर पहुंचा तो वह बहुत ही गुस्से से कहने लगें की चलो तुम सही सलामत घर आ गए। मुझे तुम्हारी बहुत ही चिंता हो रही थी। मैंने उन्हें कहा कि पिताजी अब मैं बड़ा हो चुका हूं। आप मेरी चिंता मत कीजिए। कुछ सालों बाद मैं अपनी जिम्मेदारियां खुद ही उठा लूंगा। वह मुझे कहने लगे कि फिर भी तुम मेरे लिए कभी बड़े नहीं होगे। तुम मेरे बच्चे हो और मैं तुम्हारा बाप हूं। यह कहते हुए वह अपने कमरे में चले गए और मैं भी कॉलेज जाने लगा।

कुछ दिनों बाद हमारे घर पर रंजीत अंकल आये। मैं उन्हें पहले से ही जानता था क्योंकि वह बठिंडा में हमारे साथ ही थे। उस वक्त मैं दसवीं में पढ़ता था। जब वह हमारे घर पर आए तो मैंने पूछा आज आप हमारे घर कैसे आ गए। आप तो बठिंडा में थे। वह कहने लगे कि मेरा ट्रांसफर बठिंडा से हो चुका है। अब हम लोग भी गाजियाबाद में ही आ चुके हैं। यह बात सुनकर मुझे भी अच्छा लगा और मेरे पिताजी जब उनसे मिले तो वह दोनों बहुत ही खुश हो गए और अब वह हमारे बगल में ही रहने लगे है। क्योंकि उन्हें हमारे बगल में ही क्वार्टर मिल गया था। कुछ दिनों बाद रंजीत अंकल की पत्नी भी हमारे घर पर आई। उनका नाम शालू है। वह मेरी मम्मी से मिलकर बहुत खुश हुई और कहने लगी कि हम लोग पटना में साथ में ही रहा करते थे। अब वह लोग कुछ पुरानी यादें अपनी ताजा करने लगे और जब शालू आंटी मुझे मिली तो कहने लगे कि तुम वहां पर कितने छोटे थे और अब तुम कितने बड़े हो चुके हो। मैंने उन्हें कहा अब काफी वर्ष भी तो हो चुके हैं। उस वक्त मैं स्कूल में था और अब मैं कॉलेज जाने लगा हूं। अब रंजीत अंकल का हमारे घर पर आना जाना लगा हुआ था और शालू आंटी भी हमारे घर पर आते रहते हैं और हम लोग भी उनके घर पर जाते रहते थे।

मैं भी अपने कॉलेज की पढ़ाई में व्यस्त था। एक दिन  मैं कॉलेज से वापस आ रहा था। मुझे रंजीत अंकल मिल गए उन्होंने मुझे पूछा कि तुम कहां जा रहे हो। मैंने उन्हें कहा कि मैं घर की तरफ जा रहा हूं। वह कहने लगे तुम एक काम करना मैं तुम्हें कुछ पैसे देता हूं तुम आंटी को सामान दे देना। मैंने कहा ठीक है आप मुझे पैसे दे दीजिए मैं उन्हें घर में जाकर  सामान दे आऊंगा। जब मैं उनके घर में गया तो आंटी बाथरूम में नहा रही थी और मैं बाहर ही बैठा हुआ था। वह काफी देर से नहा रही थी तो मैंने सोचा कि मैं बाथरुम में देखता हूं। मैं जैसे ही बाथरूम में गया तो उनके बाथरूम के दरवाजे में छोटा सा छेद था जिससे कि अंदर साफ दिखाई दे रहा था। मै अंदर नाहते हुए शालू आंटी को देख रहा था। मुझे जब उनकी बड़ी गांड दखाई दी तो मेरा लंड खड़ा हो गया मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया।  यह सब देख कर मुझसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हुआ। मैंने तुरंत अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया और जैसे ही मेरा माल गिरने वाला था तब तक अंटी ने दरवाजा खोल दिया और मेरा माल उनके पैरों पर गिर गया। वह कहने लगी तुमने यह क्या कर दिया। मैंने उन्हें कहा कि मैं आपको नंगा देख लिया था।

मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और उनकी गांड को दबाने लगा। उन्होंने अपने मुंह मे मेरे लंड को ले लिया और उन्होंने मेरे लंड को अच्छे से चूसना शुरु कर दिया। वह बहुत अच्छे से मेरा लंड को चूस रही थी मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मेरा लंड दोबारा से खड़ा हो गया और इस बार मेरा लंड इतना मोटा हो गया मैंने तुरंत ही उनकी सलवार को उतार दिया और उनकी चूत के अंदर अपना लंड डाल दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को डाला तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी मुझे बड़ा मजा आ रहा है। मैं ऐसे ही बहुत तेजी से उन्हें धक्के देने लगा मैं इतनी तेज तेज उन्हें चोद रहा था कि उनके मुंह से आवाज निकल जाती। मैं ऐसे ही उन्हें धक्के मारने पर लगा हुआ था थोड़े समय बाद वह भी अपने चूतडो को मुझसे मिलने लगी मुझे और भी ज्यादा मज़ा आने लगा। मै बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था उनकी चूतडो को देखकर और मेरा माल जैसे ही गिरने वाला था तो मैंने उनके मुंह के अंदर सारा वीर्य गिरा दिया। उन्होंने वह सब निगल लिया और मैंने दोबारा से उन्हें घोड़ी बनाते हुए। उनकी बड़ी बड़ी चूतडो को पकड़ लिया और उनकी गांड के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मैंने अपने लंड को उनकी गांड में डाला तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी तुम्हारा तो बड़ा ही मोटा लंड है।

वह कह रही थी तुम मेरी गांड भी मार रहे हो मुझे बहुत अच्छा लगा है। मैंने उनकी गांड के छेद को और चौड़ा कर दिया। अब उनका छेद इतना चौडा हो चुका था कि मेरा लंडत्रआराम से अंदर बाहर होने लगा। लेकिन  उनकी गांड छिल चुकी थी और मेरा लंड भी पूरी तरीके से छिल चुका था उसके बावजूद भी मैं ऐसे ही धक्के मारे जा रहा था। मैं इतनी तीव्रता से  उन्हें धक्के दिए जा रहा था कि उनका शरीर  दर्द होने लगा और वह कहने लगी कि मेरी गांड बहुत ज्यादा दर्द हो रही है। मैंने उन्हें कहा आंटी मुझे मजा आ रहा है मुझे अपनी गांड मारने दो। अब वह भी अपनी गांड को मेरे लंड से टकराने लगी। मैं  उन्हें बड़ी तेजी से झटके दिए जा रहा था और उन्हें भी बहुत मज़ा आने लगा। वह बहुत तेज तेज आवाज में चिल्लाए जा रही थी। मेरे अंदर की गर्मी बाहर आने वाली थी और मुझे लग रहा था कहीं मेरा वीर्य ना गिर जाए लेकिन फिर भी मैं उन्हे झटके दिए जा रहा था। वह भी ऐसे ही अपने चूतड़ों को मुझसे मिलाया जा रही थी लेकिन अब मेरा शरीर पूरा गरम हो गया। मेरे शरीर से गर्मी बाहर निकालने लगी उसी गर्मी में ना जाने कब मेरा वीर्य पतन हो गया मुझे पता भी नहीं चला। मेरा वीर्य तेजी से उनकी गांड के अंदर घुसा। वह कहने लगी मुझे बड़ा मजा आ गया आज तुमने मेरी गांड के छेद को खोल दिया। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला। उन्होंने भी अपने सलवार को ऊपर करते हुई   मुझसे पूछने लगी तुम कुछ काम से आए थे। मैंने उन्हें कहा कि अंकल ने कुछ सामान भिजवाया है वह देने आया था। वह मुझे कहने लगी तुम अब हमेशा सामान ले आया करो। मैं अंटी का मतलब समझ चुका था उसके बाद मैं अपने घर चला गया।

 


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