चुदने के बारे में सोचा ना था

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Chudne ke bare me socha na tha मैंने जीजा जी से कहा निधि दीदी से बात हो सकती है जीजा जी कहने लगे कि क्या तुमने निधि के फोन पर फोन नहीं किया मैंने जीजा जी को कहा नहीं जीजाजी दीदी का फोन नहीं लग रहा है वह कहने लगे कि चलो मैं तुम्हारी बात निधि से अभी करवाता हूं। जीजा जी ने मेरी बात निधी दीदी से करवाई मैंने दीदी को कहा दीदी आपका फोन नहीं लग रहा था तो वह कहने लगी कि मेरे फोन में चार्जिंग शायद खत्म हो गई इस वजह से मेरा फोन लग नहीं रहा होगा क्या तुम्हें कोई जरूरी काम था। मैंने दीदी को कहा दीदी मम्मी तुमसे बात करना चाह रही थी मम्मी की तबीयत ठीक नहीं है इसलिए मम्मी चाह रही थी कि आप कुछ दिनों के लिए घर आ जाती तो मम्मी को भी अच्छा लगता। दीदी कहने लगी कि ठीक है कोमल मैं कुछ दिनों के लिए घर आ जाती हूं। दीदी कुछ दिनों के लिए घर आ गई जब दीदी घर आई तो मैंने दीदी को कहा दीदी आपसे इतने समय बाद मिलकर अच्छा लग रहा है। दीदी की शादी को हुए दो वर्ष हो चुके हैं और इन दो वर्षों में दीदी बहुत कम बार ही घर आई हैं दीदी ने मम्मी का हालचाल पूछा और दीदी कहने लगी कि मम्मी कैसी है।

मम्मी उस वक्त आराम कर रही थी इसलिए दीदी ने मम्मी को डिस्टर्ब नहीं किया मम्मी लेटी हुई थी थोड़ी देर बाद जब मम्मी उठी तो दीदी मम्मी से मिली और मम्मी का हाल-चाल पूछने लगी। मम्मी कहने लगी बेटा अब तो बुढ़ापा उम्र पर हावी होने लगा है तो दीदी कहने लगी कि मम्मी आप भी अपने आप को बहुत जल्दी बूढा समझने लगी हो अभी आपकी उम्र ही कितनी है। मम्मी कहने लगी कि बेटा लेकिन अब तबीयत साथ नहीं देती और मुझे तो लगता है कि कहीं मेरी तबियत कुछ ज्यादा ही खराब ना हो जाए। दीदी ने मम्मी को समझाया दीदी और मम्मी साथ में बैठे हुए थे तो मैंने दीदी से कहा दीदी मैं आपके लिए खाना बना देती हूं दीदी कहने लगी रुको कोमल मैं भी तुम्हारी मदद करती हूं। दीदी और मैं रसोई में खाना बना रहे थे दीदी ने मुझसे पूछा कोमल तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है तो मैंने दीदी को कहा दीदी मेरी पढ़ाई तो अच्छी चल रही है बस अब यह आखरी वर्ष है इसके बाद मैं भी जॉब की तैयारी करूंगी। दीदी कहने लगी कि हां कोमल तुम जल्दी से अपनी पढ़ाई पूरी कर लो ताकि तुम्हारी जॉब किसी अच्छी कंपनी में लग सके।

मैंने दीदी को कहा हां दीदी मैं कोशिश तो पूरी कर रही हूं और देखती हूं कि अब मेरा रिजल्ट कैसा रहता है। दीदी और मैंने साथ में खाना खाया मम्मी की तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए मम्मी ने कहा कि मेरा खाना खाने का मन नहीं है। दीदी घर पर दो-तीन दिन रुकी और उसके बाद दीदी चली गई दीदी अपने ससुराल जा चुकी थी और थोड़े समय बाद मेरे कॉलेज का रिजल्ट आया जिसमें कि मेरे अच्छे नंबर आये। हमारे कॉलेज में ही प्लेसमेंट के लिए कुछ कंपनियां आई हुई थी और मुझे तो बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि मेरा उसके दौरान सिलेक्शन हो जाएगा। जब मेरा सलेक्शन हुआ तो मैं खुश हो गई अब महीने की बीस हजार तनख्वाह पाकर मैं खुश थी। जब पहले महीने की तनखा मेरे हाथ में आई तो मम्मी के लिए सबसे पहले मैंने साड़ी ली और कुछ पैसे मम्मी को दिए यह सब दीदी की ही वजह से हुआ था दीदी हमेशा ही मुझ पर भरोसा जताती और कहती कि कोमल तुम्हें पढ़ाई करनी चाहिए। दीदी के कहने पर ही मैं अच्छे से अपनी पढ़ाई में ध्यान देती और अब मेरा सिलेक्शन भी एक अच्छी कंपनी में हो चुका था और मम्मी भी इस बात से खुश थी। ऑफिस में मेरे दोस्त एक दिन मुझे कहने लगे कि कोमल तुम अपनी मम्मी की इतनी तारीफ करती हो तो हमें भी कभी अपनी मम्मी से मिलवाओ मैंने उन्हें कहा कि हां जरूर मैं तुम लोगों को अपनी मम्मी से जरूर मिलाऊंगी। मैंने एक दिन अपने ऑफिस के दोस्तों को घर पर बुलाया जब वह लोग घर पर आए तो मैंने उन्हें मम्मी से मिलाया मेरे दोस्त मम्मी के साथ बैठे हुए थे और वह मम्मी को कह रहे थे कि कोमल आपकी बहुत तारीफ करती है और ऑफिस में सिर्फ आपके बारे में ही बात करती है। मम्मी कहने लगी कि यह सब तो मेरी परवरिश का ही नतीजा है मम्मी उन लोगों के साथ बड़े हंस खेलकर बात कर रही थी और मेरे दोस्त भी मम्मी के साथ बैठे हुए थे। जब वह लोग अपने घर निकले तो मम्मी उन्हें बाहर तक छोड़ने के लिए गई मम्मी मुझे कहने लगी कि कोमल बेटा तुम्हारे दोस्त बहुत अच्छे हैं।

मैंने मम्मी को कहा मम्मी मैं आपसे कहती ना थी कि मेरे सारे दोस्त ही बहुत अच्छे हैं लेकिन मम्मी को मैंने एक बात अभी तक नहीं बताई थी। मम्मी जब विशाल से मिली थी तो मैंने मम्मी को यह बात नहीं बताई कि विशाल और मैं एक दूसरे को पसंद करते हैं। विशाल और मेरी दोस्ती ऑफिस के दौरान ही हुई और ऑफिस के दौरान ही हम दोनों की बातें बढ़ती चली गई मुझे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि सब कुछ इतनी जल्दी हो जाएगा। विशाल ने अपने दिल की बात मुझे कहीं और मैंने भी विशाल के रिश्ते को स्वीकार कर लिया मुझे भी विशाल से कोई आपत्ति नहीं थी क्योंकि विशाल एक अच्छे परिवार से हैं और वह बहुत ही अच्छा लड़का है। मुझे इस बात की खुशी थी कि कम से कम विशाल मेरी जिंदगी में है और विशाल मुझे समझ सकता है। जब मैंने यह बात निधि दीदी को बताई तो दीदी मुझे कहने लगी कि कोमल तुमने अपना फैसला खुद ही ले लिया मुझसे एक बार भी नहीं पूछा। मैंने दीदी को कहा दीदी मैं आप लोगों को बताना तो चाहती थी लेकिन मैं डरी हुई थी और मुझे तो इस बात का डर भी है कि क्या मम्मी विशाल को स्वीकार कर पाएंगी। दीदी कहने लगी कि क्यों नहीं मम्मी को तुम एक बार इस बारे में बताओ मम्मी को विशाल जरूर पसन्द आएगा।

दीदी के कहने पर ही मैंने मम्मी से बात की जब मैंने मम्मी से बात की तो मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि मम्मी इस बात को मान लेंगे। विशाल को उन्होंने जब मिलने के लिए घर पर बुलाया तो मम्मी कहने लगी कि विशाल बहुत ही अच्छा और नेक लड़का है। मम्मी विशाल से बात कर के खुश थी और विशाल इस बात से खुश था कि वह मेरी मम्मी से मिल पाया। विशाल और मेरे संबंध दिन-ब-दिन और भी ज्यादा मीठे होते जा रहे थे हम दोनों एक दूसरे को जब भी मिलते तो मुझे अच्छा लगता। मैं विशाल के साथ अपना समय बिता कर बहुत खुश होती विशाल पर मैं पूरा भरोसा करती। विशाल भी मुझसे बहुत प्यार करता एक दिन विशाल ने मुझे कहा हम लोगों को साथ में कहीं घूमने के लिए जाना चाहिए? उस दिन हम दोनों साथ में घूमने के लिए चले गए जब हम दोनों साथ में गए तो मुझे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि विशाल के साथ में सेक्स कर पाऊंगी क्योंकि विशाल और मैंने कभी इस बारे में सोचा भी नहीं था। जब विशाल के साथ मैंने सेक्स करने का मन बनाया तो हम दोनों ने एक दूसरे के बदन की गर्मी को महसूस करना शुरू किया और जिस प्रकार से मैं और विशाल एक दूसरे की गर्मी को महसूस कर रहे थे विशाल पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुका था। विशाल ने मेरे स्तनों को दबाना शुरू किया विशाल मेरे स्तनों को दबाता मेरे अंदर की आग और भी ज्यादा पड़ जाती है मेरा बदन गर्मी बाहर की तरफ छोड़ने लगा। विशाल ने मेरे सूट के अंदर हाथ डालते हुए मेरे स्तनों पर अपने हाथ का स्पर्श किया मैं और भी ज्यादा मचलने लगी विशाल ने मेरे सूट को उतारते हुए मेरी ब्रा को खोला मैं विशाल की तरफ देख रही थी और विशाल ने मेरे होठों को चूम लिया।

विशाल ने जैसे ही अपने लंड को मेरे मुंह के अंदर डाला तो मुझे विशाल के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने में आनंद आता और विशाल के लंड को मै बड़े ही अच्छे से अपने मुंह के अंदर लेकर चूस रही थी। विशाल के लंड को चूसने मे मुझे अच्छा लगता जब विशाल के लंड से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा तो मैंने विशाल को कहा मैं अब तुम्हारे लंड को अपनी चूत में लेना चाहती हूं? विशाल ने भी मेरे दोनों स्तनों के बीच में अपने लंड को बहुत देर तक रगडा और विशाल का लंड मेरी चूत में जाने के लिए तैयार था विशाल ने मेरे सलवार के नाडे को खोलते हुए मेरी पैंटी को उतारा। जब मेरी पैंटी को विशाल ने उतारा मेरी चूत से गीलापन बाहर की तरफ को निकल रहा था। विशाल ने जैसे ही अपने लंड को मेरी चूत के अंदर घुसाया तो मुझे बड़ा अच्छा लगा विशाल मुझे लगातार तेज गति से धक्के मार रहा था मेरी चूत के अंदर विशाल का लंड प्रवेश हो चुका था लेकिन मुझे नहीं पता था कि विशाल का लंड मेरी चूत में जाते हैं मेरी सील टूट जाएगी।

जिस प्रकार से विशाल ने मेरे साथ सेक्स का मजा लिया उससे मुझे बहुत अच्छा लगा विशाल ने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया वह मुझे तेज गति से धक्के मारने लगा। विशाल ने बहुत तेजी से मुझे धक्के दिए मैं पूरी तरीके उत्तेजित हो चुकी थी जैसे ही विशाल ने अपने वीर्य को मेरे स्तनों पर गिराया तो मैंने विशाल को कहा आज तुमने अपने वीर्य को मेरे स्तनों पर गिरा दिया है मुझे बहुत अच्छा लगा। विशाल के साथ में बहुत ही ज्यादा खुश थी हम दोनों साथ में बैठे हुए थे मैंने विशाल के लंड की तरफ देखा मैंने उसके लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने शुरू किया मुझे बहुत मजा आया। जिस प्रकार से विशाल के लंड को मैंने अपने मुंह में लेकर चूसा और विशाल ने मेरी सील का उद्घाटन कर दिया था मेरी चूत और दिल पर विशाल ने अपना राज कर लिया था वैसे तो हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते है लेकिन अब विशाल के बारे में मैं कुछ ज्यादा ही सोचने लगी थी। विशाल हमेशा ही मेरे साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने के बारे में सोचता हम दोनों एक दूसरे के साथ हमेशा अच्छा समय बिताया करते।


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