चुदाई में बराबर की भागीदारी

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Chudai me barabar ki bhagidar मैंने घर में काम करने वाली बबीता को कहा कि मेरे लिए तुम जल्दी से नाश्ता तैयार कर दो मुझे स्कूल के लिए देर हो रही है बबीता कहने लगी बस दीदी अभी आपके लिए नाश्ता तैयार करती हूँ। मुझे अपने स्कूल जल्दी पहुंचना था बबीता ने भी जल्दी से मेरे लिए नाश्ता बना दिया और मैं नाश्ता करते ही अपने स्कूल के लिए निकल पड़ी। मैं जब अपने स्कूल के लिए जा रही थी तो उस वक्त मेरी कार का टायर पंचर हो गया मेरे पास इतना समय नहीं था कि मैं उस टायर पंचर को ठीक करवा पाती। मैंने अपनी कार को एक किनारे खड़ा किया और वहां से मैं ऑटो ले कर अपने स्कूल पहुंच गई मैं जब स्कूल पहुंच गई तो मुझे रमेश का फोन आया और रमेश कहने लगे कि सरिता तुम कहां हो। मैंने रमेश को कहा मैं तो अपने स्कूल में हूं रमेश मुझे कहने लगे कि सरिता क्या तुमने मेरी ब्लू वाली टाई देखी है तो मैंने रमेश को कहा वह तो मैंने अलमारी में ही रखी थी। रमेश कहने लगे कि लेकिन मुझे वह टाई मिल नहीं रही है मैंने रमेश को कहा आप कोई और टाई देख लीजिए ना रमेश मुझे कहने लगे कि दूसरी टाई इस शर्ट के साथ मैच नहीं होगी मुझे वही टाई चाहिए।

मैंने रमेश को कहा ठीक है तुम फोन रखो मैं अभी बबीता को कह देती हूँ वह तुम्हारी टाई ढूंढ देगी। मैंने फोन रखा और फिर मैंने बबीता को फोन किया बबीता कहने लगी कि जी मेम साहब अभी मैं साहब की टाई ढूंढ देती हूं। बबीता ने शायद रमेश की टाई ढूंढ ली थी इसीलिए रमेश का फोन मुझे दोबारा नहीं आया मैं अपनी क्लास में बच्चों को पढ़ा रही थी तभी हमारे स्कूल का प्यून मेरे पास आया और कहने लगा कि मैडम आपको प्रिंसिपल मैडम ने बुलाया है। मैंने उसे कहा ठीक है मैं थोड़ी देर में क्लास खत्म कर के आती हूं थोड़ी देर बाद मैंने अपनी क्लास खत्म कर ली और मैं प्रिंसिपल मैडम के ऑफिस में चली गई उन्होंने मुझे बैठने के लिए कहा। मैंने मैडम से कहा हां मैडम कहिये आपने मुझे बुलाया था क्या कोई जरूरी काम था। प्रिंसिपल मैडम मुझे कहने लगे कि हां सरिता मुझे आपसे जरूरी काम था उन्होंने मुझे कहा कि हमारे स्कूल में डांस प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है तो क्या आप उस प्रतियोगिता के लिए हमारी डांस टीचर की मदद कर देंगे। मैंने प्रिंसिपल मैडम को कहा क्यों नहीं मैडम जरूर मैं उनकी मदद कर दूंगी, अगर यह बात मुझे गुंजन मैडम कह देती तो मैं उनकी मदद वैसे भी कर देती।

प्रिंसिपल मैडम मुझे कहने लगी कि ठीक है मैं गुंजन मैडम को अभी बुलाती हूं और आप लोग आपस में बात कर लीजिए। गुंजन मैडम को प्रिंसिपल मैडम ने अपने ऑफिस में बुलाया और हम दोनों आपस में बात करने लगे थोड़ी देर बाद प्रिंसिपल मैडम भी अपने ऑफिस से चली गई उन्हें कोई जरूरी काम था और हम लोग डांस प्रतियोगिता को लेकर अपनी प्लानिंग करने लगे। सबसे पहले तो हमने कुछ बच्चों को चुना जो की हर वर्ष स्कूल में अच्छा डांस करते आए हैं। मेरी मम्मी कत्थक सिखाती थी और उन्हीं से मैंने कत्थक सीखा था इसलिए हमारी डांस टीचर मुझसे मदद लेना चाहती थी। हम लोगों की सलाह मशवरा के बाद कुछ बच्चों को हम लोगों ने डांस के लिए चुन लिया अब उनके ऊपर हम लोग काम करने लगे वह काफी अच्छे से डांस की प्रैक्टिस कर रहे थे। गुंजन मैडम चाहती थी कि हमारा स्कूल ही यह डांस कंपटीशन जीते उसके लिए गुंजन मैडम ने बहुत ज्यादा मेहनत की। मैंने भी उनकी मदद की और जब हमारे स्कूल में डांस प्रतियोगिता का आयोजन हुआ तो अन्य स्कूलों के प्रतिभागी भी वहां पर आए हुए थे और सब लोग बड़ा ही अच्छा डांस कर रहे थे लेकिन जब हमारे स्कूल का नंबर आया तो हम लोगों को पूरी उम्मीद थी कि हमारा स्कूल ही डांस कंपटीशन जीतेगा। जब रिजल्ट सुनाया गया तो उसमें हमारा स्कूल ही डांस कंपटीशन जीता मैं इस बात से बहुत खुश थी और गुंजन मैडम भी बहुत खुश थी गुंजन मैडम को मैंने बधाई दी और कहा मैडम आपकी मेहनत रंग लाई। गुंजन मैडम मुझे कहने लगे कि सरिता मैडम यह आपकी वजह से ही हुआ है, गुंजन मैडम को स्कूल जॉइन करे हुए अभी सिर्फ दो महीना ही हुआ है इसलिए उनके साथ मेरी इतनी ज्यादा बातचीत नहीं थी परंतु अब उनके साथ मेरी अच्छी दोस्ती हो गई थी। वह डांस प्रतियोगिता भी बच्चों को जितवा चुकी थी और अब मैं उनसे बहुत घुल मिलकर रहने लगी गुंजन मैडम का स्वभाव बहुत ही अच्छा और बहुत ही शांत स्वभाव है वह व्यवहार की भी बहुत अच्छी हैं इसलिए मेरी उनके साथ बहुत अच्छी जमने लगी।

गुंजन मैडम मुझे कहने लगी कि मैडम कभी आप अपने हस्बैंड को लेकर हमारे घर पर आइएगा तो मैंने उन्हें कहा मैडम जरूर मैं आपके घर पर जरूर आऊंगी जब समय मिला तो मैं जरूर अपने पति को अपने साथ लेकर आऊंगी। रमेश के पास तो बिल्कुल भी समय नहीं रहता था रमेश बैंक में मैनेजर हैं और वह अपने काम में ही इतने उलझे रहते थे कि उनके पास बिल्कुल भी समय नहीं होता था परंतु उस दिन मैंने समय निकालते हुए गुंजन मैडम के घर जाने के बारे में सोचा तो गुंजन मैडम के साथ मैं उनके घर चली गई। मैंने रमेश को बता दिया था कि मैं गुंजन मैडम के घर पर जा रही हूं उन्होंने कहा कि ठीक है तुम जब घर लौटने वाली होगी तो मुझे बता देना। मैंने रमेश को कहा ठीक है मैं जब घर लौट आऊंगी तो मैं तुम्हें बता दूंगी मैं जब पहली बार गुंजन मैडम के घर पर गई तो उनके घर पर उन्होंने मुझे अपने सास और ससुर से मिलवाया उनसे मिलकर मुझे अच्छा लगा। उनके पति उस वक्त घर पर नहीं थे गुंजन मैडम कहने लगी कि मेरे पति थोड़ी देर बाद आते ही होंगे मैंने मैडम को कहा मैडम मैं अभी चलती हूं फिर कभी अपने पति को लेकर आपके घर पर आऊंगी।

वह कहने लगे कि ठीक है जब आप आएंगे तो मुझे बता दीजिएगा मैंने गुंजन मैडम को कहा ठीक है मैडम अभी तो मैं चलती हूं। मैं अपने घर लौट आई रमेश पहले ही घर पहुंच चुके थे जब मैं घर पहुंची तो मैंने रमेश को कहा आप जल्दी ही घर आ गए थे वह कहने लगे कि हां आज मैं घर जल्दी आ गया था। रमेश मुझे कहने लगे कि तुम अपनी सहेली गुंजन मैडम के घर पर गई हुई थी मैंने उन्हें कहा हां मैं गुंजन मैडम के घर पर चली गई थी काफी समय से वह मुझे घर पर बुला रही थी लेकिन मैं उनके घर पर नहीं गई थी तो आज मुझे लगा कि मुझे उनके घर पर जाना चाहिए इसलिए मैं उनके घर पर चली गई। रमेश कहने लगे कि मैं तुमसे यह कहना चाहता था कि कल गुड्डू यहां आ रहा है, गुड्डू रमेश का छोटा भाई है मैंने रमेश को कहा गुड्डू यहां कितने दिनों तक रहने वाले हैं। रमेश कहने लगे कि अब मुझे तो पता नहीं है कि वह कितने दिनों तक यहां रहेगा लेकिन उसका मुझे फोन आया था और वह कह रहा था कि वह कुछ दिनों के लिए जयपुर आ रहा है। मैंने रमेश को कहा ठीक है और अगले ही दिन गुड्डू जयपुर पहुंच गए थे। जब मैं गुड्डू से मिली तो वह मुझे कहने लगा भाभी आप कैसी हैं? मैंने गुड्डू को कहा मैं तो ठीक हूं तुम बताओ तुम कैसे हो? गुड्डू से मैं ज्यादा बात तो नहीं किया करती थी लेकिन उस दिन मुझे उससे बात करना अच्छा लगा जब मैंने उसे नहाते हुए देख लिया था वह बाथरूम में कुंडी लगाना भूल गया था। मैं जब बाथरूम में गई तो मैंने गुड्डू को देखा उसकी चौड़ी छाती और उसका गठीला बदन देखकर में अपने अंदर की सेक्स भावना को रोक ना सकी। मैं उसकी तरफ हवस भरी नजरों से देखती मुझे गुड्डू के साथ शारीरिक संबंध बनाना था। गुड्डू को मैंने अपने इशारे देने शुरू कर दिए थे गुड्डू अपने आपको आखिर कब तक रोक पाता। उसने जब मेरे बदन को अपनी बाहों में लिया तो उस दिन मुझे पता चला कि मैंने अपने स्त्री होने का एक फायदा तो उठा ही लिया।

जब गुड्डू ने मेरे बदन से कपड़े उतारकर मेरे स्तनों को चूसना शुरू किया तो मुझे अच्छा लगने लगा काफ़ी देर तक वह मेरे स्तनों का रसपान करता रहा जब उसने मेरे स्तनों से मेरा दूध को बाहर निकाल दिया तो मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी। वह अपने हाथों में स्तनो को दबाता गुड्डू अपने आपको रोक नहीं पा रहा था। मैंने गुड्डू के लंड को अपने हाथों में लिया और उसे हिलाना शुरू किया गुड्डू का लंड भी पूरी तरीके से तन कर खड़ा हो चुका था मैं उसे बड़े अच्छे तरीके से चूसने लगी मेरे गले के अंदर तक उसका मोटा लंड जाने लगा था। वह भी अपने आप को बिल्कुल ना रोक सका जब उसने मेरे दोनों पैरों को खोला तो उसने मेरी योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे अच्छा लगा। मेरी चूत को वह बहुत देर तक चाटता रहा जिस प्रकार से वह मेरी चूत को चाट रहा था उससे मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई थी मेरी चूत से पानी बाहर निकलने लगा था।

जैसे ही गुड्डू ने अपने लंड को मेरी चूत के अंदर घुसाया तो मैं चिल्ला उठी मेरे मुंह से बड़ी तेज चीख निकली मैं लगातार तेजी से चिल्ला रही थी और गुड्डू अपने लंड को अंदर बाहर करता जा रहा था। उसे बड़ा ही मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत आनंद आता काफी देर तक गुड्डू ने मुझे अपने नीचे लेटा कर चोदा जब उसने मुझे घोड़ी बनाया तो उसने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया उसका लंड मेरी चूत के अंदर जाते ही मैंने गुड्डू से कहा देवर जी थोड़ा आराम से कीजिएगा लेकिन वह मुझे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था। उसने मुझे बहुत देर तक ऐसे ही धक्के मारे जिस प्रकार से उसने मुझे धक्के मारे उससे में बहुत ज्यादा जोश में आ गई थी मेरी योनि पूरी तरीके से गीली हो चुकी थी। कुछ क्षणों बाद उसने अपने वीर्य को मेरी चूत के अंदर गिरा दिया और उसने अपने लंड को मेरी चूत से बाहर निकाला तो मैंने गुड्डू को कहा मुझे बहुत ही अच्छा लगा जिस प्रकार से आज तुमने मेरे साथ संबंध बनाए। गुड्डू कहने लगा भाभी यह बात यदि भैया को पता चली तो मैंने गुड्डू को कहा मैं तुम्हारे भैया को इस बारे में कुछ नहीं बताऊंगी क्योंकि इसमें हम दोनों ही बराबर के भागीदार हैं।


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