चुदाई के वह 5 मिनट

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chudai ke wah 5 minutes  मैं और नैना साथ में बैठ कर बात कर रहे थे नैना मुझे कहने लगी कि सुमित मैं सोच रही हूं कि कुछ दिनों के लिए अपने मायके हो आती हूं मैंने नैना को कहा नैना तुम कुछ दिनों बाद चले जाना क्योंकि अभी मां की तबीयत भी कुछ ठीक नहीं है इसलिए तुम थोड़े दिनों बाद चले जाना। नैना अपने मायके काफी दिनों से नहीं गई थी इसलिए उसने मुझसे पूछा तो मैंने उसे कहा तुम कुछ दिनों बाद चले जाना उसने भी कहा कि ठीक है मैं कुछ दिनों बाद चली जाऊंगी। थोड़े ही दिनों बाद मेरी मां की तबीयत अब ठीक होने लगी थी और नैना ने मुझसे जब इस बारे में पूछा तो मैंने उससे कहा ठीक है मैं तुम्हें कल तुम्हारे घर पर छोड़ दूंगा और मैं वहीं से अपने ऑफिस के लिए चला जाऊंगा नैना ने मुझसे कहा ठीक है मैं अपना सामान रख लेती हूं।

नैना ने रात को अपना सामान पैक कर लिया और उसके बाद अगले ही दिन सुबह मैंने नैना को उसके घर तक छोड़ दिया नैना और हमारे घर की बीच की दूरी करीब दस 12 किलोमीटर की है। जब मैंने नैना को उसके घर पर छोड़ तो नैना मुझे कहने लगी कि तुम मम्मी पापा से नहीं मिलोगे मैंने उससे कहा अभी मैं चलता हूं क्योंकि मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है इसलिए मैं वहां से सीधे ही अपने ऑफिस के लिए निकल चुका था। नैना और मेरी शादी को हुए 3 वर्ष हो चुके हैं 3 वर्षों में हम दोनों के बीच कभी भी किसी बात को लेकर कोई मतभेद नहीं हुआ। एक दिन नैना का मुझे फोन आया उस दिन मैं अपने ऑफिस में ही था जब नैना का मुझे फोन आया तो उसने मुझे कहा सुमित तुम अभी कहां पर हो मैंने उससे कहा मैं तो अभी ऑफिस में हूं। नैना मुझे कहने लगी कि क्या तुम आज शाम को घर पर आ सकते हो मैंने नैना को कहा ठीक है मैं शाम को ऑफिस से लौटते वक्त घर पर आ जाऊंगा। जब मैं शाम के वक्त अपने ऑफिस से घर लौट रहा था तो मैं नैना से मिलने के लिए चला गया।

जब मैं नैना के पास गया तो मेरे सास और ससुर दोनों ही मुझे मिले उन दोनों से मिलकर मुझे अच्छा लगा उनके साथ काफी देर तक मैं बैठा रहा। मैंने जब नैना से कहा कि तुमने मुझे यहां क्यों बुलाया तो नैना मुझे कहने लगी कि मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी मैंने नैना को कहा यदि तुम्हें इतनी ही याद आ रही थी तो तुम घर क्यों नहीं आ जाती। नैना कहने लगी कि कुछ दिन मैं मम्मी-पापा के साथ ही बिताना चाहती हूं क्योंकि मम्मी पापा भी तो अकेले ही हैं। नैना के माता-पिता अकेले ही रहते हैं उनके दोनों लड़के अब नौकरी के सिलसिले में विदेश में रहते हैं और वह दोनों घर पर अकेले हैं इस वजह से कुछ दिन नैना उनके साथ रहना चाहती थी। नैना ने मुझे कहा तुम खाना खा कर यहीं से जाना मैंने नैना को कहा ठीक है तुम खाना बना दो नैना ने जल्दी से मेरे लिए खाना बनाया और हम लोगों ने साथ में रात का डिनर किया। मैंने नैना को कहा अब मैं घर जा रहा हूं नैना कहने लगी ठीक है और मैं उस दिन घर लौट आया मैं जब घर लौटा तो मेरे पापा ने मुझसे पूछा बेटा आज तुम ऑफिस से बहुत देर से आ रहे हो। मैंने अपने पापा को कहा पापा मैं ऑफिस से तो जल्दी आ गया था लेकिन मैं नैना से मिलने के लिए चला गया था क्योंकि नैनो को कोई जरूरी काम था पापा ने कहा ठीक है बेटा कोई बात नहीं। रात के करीब 10:00 बज रहे थे और मैंने सोचा कि छत पर मैं टहल लेता हूं मैं अपनी छत पर टहलने के लिए चला गया। मैं जब छत पर टहल रहा था तो मैंने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और मैं सिगरेट पीने लगा तभी मेरी मां छत पर आ गई और जब वह छत पर आई तो मैंने सिगरेट छत से नीचे फेंक दी। मेरी मां कहने लगी कि बेटा तुम इतनी रात को छत पर टहल रहे हो सब कुछ ठीक तो है ना मैंने अपनी मां को कहा हां मां सब कुछ ठीक है। वह कहने लगी कि मुझे तो लगा कि शायद तुम बहुत परेशान हो इस वजह से तुम छत में टहल रहे हो क्योंकि तुम कभी भी छत में रात के वक्त नहीं आते मैंने मां से कहा नहीं मां ऐसी कोई भी बात नहीं है। मेरे साथ मेरी मां भी कुछ देर तक बैठ गई और वह कुछ पुरानी यादों को ताजा करने लगी मैंने मां से कहा मां मुझे वह दिन भी याद है जब मैं काफी बीमार हो गया था और उस दौरान आप कितनी चिंतित हो गई थी।

मां मुझे कहने लगी बेटा उस वक्त तुम्हारी बीमारी बिल्कुल भी ठीक नहीं हो रही थी। मैं और मां काफी देर तक साथ में बैठे रहे फिर मैं और मां नीचे चले आए हम लोग सोने की तैयारी कर रहे थे और मैं काफी थका हुआ भी था तो मैंने सोचा कि अब मैं सो ही जाता हूं और फिर मैं सो गया। सुबह जब मैं उठा तो उस वक्त सुबह के 6:30 बज रहे थे और मैं अपने ऑफिस जाने की तैयारी करने लगा। सुबह के वक्त मैं हर रोज अखबार जरूर पढ़ता हूं मैं अपने बैठक में बैठकर अखबार पढ़ रहा था तो पापा मेरे पास आये और कहने लगे बेटा क्या तुमने अखबार पढ़ लिया है। मैंने पापा से कहा हां पापा बस मैंने अखबार पढ़ ही लिया है मैंने थोड़ी देर बाद उन्हें अखबार दे दिया और मैं अपने ऑफिस जाने की तैयारी करने लगा। मैं जल्दी से तैयार हो गया और मां ने मेरे लिए नाश्ता बना दिया था मैंने नाश्ता किया और उसके तुरंत बाद मैं अपने ऑफिस के लिए निकल चुका था। मैं जब अपने ऑफिस पहुंचा तो उस दिन हमारे ऑफिस में सब लोग इस बारे में बात कर रहे थे कि उन्हें कहीं घूमने के लिए जाना चाहिए क्योंकि काफी समय से हमारे ऑफिस के दोस्त कहीं भी घूमने के लिए नहीं गए थे पिछली बार वह घूमने के लिए दुबई गए थे और सब लोग उसी के बारे में बात कर रहे थे। मैंने भी अपने दोस्तों से कहा कि क्यों ना इस वर्ष भी हम लोग दुबई घूमने के लिए चलें तो वह कहने लगे कि दुबई जाना तो मुश्किल हो जाएगा लेकिन हम लोग यहीं आसपास कहीं जा सकते हैं।

अहमदाबाद से दमन की दूरी ज्यादा नहीं है तो हम लोगों ने सोचा कि क्यों ना दमन घूमने के लिए चला जाए और सब लोगों ने दमन घूमने के बारे में सोच लिया था। आखिर सब लोगों की सहमति से हम लोग दमन घूमने के लिए जाने वाले थे मैंने इस बारे में नैना को भी बता दिया था। दमन घूमने के लिए हम लोग निकल चुके थे हम लोगों जब दमन पहुंचे तो दमन पहुंचकर बहुत अच्छा लगा और उस वक्त जब हम लोग बीच के किनारे बैठे हुए थे तो सामने से एक महिला आ रही थी उन्हें देखकर मैं बहुत खुश हुआ। मेरा दोस्त कहने लगा भाभी कितनी सुंदर हैं उनके साथ उस वक्त कोई भी नहीं था। मैंने भी सोचा कि क्यों ना उनसे बात कर ली जाए। मैंने उनसे बात कर ही ली उनका नाम भी मुझे पता चल चुका था उनका नाम सरिता है। सरिता भाभी भी अहमदाबाद ही रहती हैं मैंने उनका नंबर भी ले लिया मुझे नहीं पता था कि उस रात हम दोनों के बीच अश्लील बातें होंगी और अगले दिन मैं उनसे मिलूंगा। जब अगले दिन में उनसे मिला तो उन्होंने मुझे अपने होटल में ही बुला लिया। वह जहां रुकी हुई थी उसी होटल में मैं उनसे मिलने के लिए चला गया। जब मैं उनसे मिलने के लिए गया तो उन्होंने मुझे बैठने के लिए कहा मैं बैठ चुका था। मैंने उनसे पूछा आपके पति कहां है? वह मुझे कहने लगी मेरी पति अपने दोस्तों के साथ बाहर गए हैं। हम दोनों के पास बड़ा ही अच्छा मौका था सरिता भाभी ने भी अब मेरे कपड़े उतारने शुरू किए जब उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाना शुरू किया तो मेरा लंड खडा होने लगा था। मेरा लंड सरिता भाभी की चूत में जाने के लिए तैयार था उन्होंने जब मेरे लंड को मुंह मे लिया तो वह मुझे कहने लगी मुझे अपने मुंह में तुम्हारे लंड को लेकर बहुत ही अच्छा लग रहा है।

उन्होंने अपने गले के अंदर तक मेरे लंड को उतार लिया था और जिस प्रकार से वह मुंह मे लंड लंड को अंदर बाहर कर रही थी उससे मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। उन्होने बहुत देर तक मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर किया जिस से वह अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी और उन्होंने भी अपने कपड़े उतारते हुए अपनी चूत को मेरे लंड पर सटा दिया धीरे-धीरे उनकी चूत के अंदर मेरा लंड घुसने लगा। मैं सोफे पर बैठा हुआ था वह अपनी चूतडो को ऊपर नीचे कर रही थी उन्हें मज़ा आ रहा था वह बड़े अच्छे से अपनी चूतड़ों को ऊपर नीचे करती और जिस प्रकार से उन्होंने अपनी चूतडो को ऊपर नीचे किया उससे मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था मेरे लंड से निकलता हुआ पानी अब कुछ ज्यादा ही अधिक होने लगा था। मैंने उन्हें कहा मुझे लगता है मेरा वीर्य पतन जल्दी ही होने वाला है। वह मुझे कहने लगी तुम मुझे अब घोड़ी बनाकर चोदो मैंने उन्हें दीवार के सहारे खड़ा किया और उनकी चूतडो पर मैंने बड़ी तेजी से प्रहार करना शुरू किया।

उनकी चूतड़ों पर जब मेरा लंड टकरा रहा था तो वह अपने आपको बिल्कुल नहीं रोक पा रही थी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है तुम ऐसे ही मुझे धक्का मारते रहो। मैंने भी उन्हें ऐसे ही धक्के मारने जारी रखे और काफी देर तक मैंने उन्हें चोदो करीब 5 मिनट तक मैंने सरिता भाभी के साथ चूत चुदाई के मजे लिए मैंने अपने वीर्य को उनकी चूत में गिरा दिया उनकी चूत के अंदर मेरा वीर्य गिर चुका था। उसके बाद उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसा मैंने इस बात का अंदाजा लगा लिया था कि सरिता भाभी की इच्छा अभी पूरी नहीं हुई है इसलिए मैने दोबारा से उनको चोदना शुरू किया। अभी तक मेरा वीर्य उनकी चूत से बाहर निकल रहा था मैंने उन्हें बहुत देर तक चोदा। उसके बाद वह मुझे कहने लगी अब जाकर मेरी इच्छा पूरी हुई है मुझे बहुत ही अच्छा लगा जिस प्रकार से तुमने मेरे साथ सेक्स किया। मैं बहुत ही ज्यादा खुश था जब मैं अहमदाबाद लौटा तो उसके बाद भी मैं सरिता भाभी से कई बार मिला।


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