चुदाई के लिए तडपता लंड

Desi kahani, antarvasna: हमारे ऑफिस की कैंटीन में मैं और सुधीर साथ में बैठे हुए थे हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे। जब हम दोनों एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो सुधीर ने मुझे बताया की कुछ दिनों बाद मैं ऑफिस से रिजाइन दे दूंगा। मैंने सुधीर से जब इसकी वजह पूछी तो सुधीर ने मुझे बताया कि वह चाहता है कि कुछ समय के बाद वह किसी दूसरी कंपनी में जॉब के लिए अप्लाई करें। मैंने सुधीर को कहा कि लेकिन यहां तो सब ठीक चल रहा है सुधीर ने मुझे कहा कि लेकिन मुझे लग रहा है कि काफी समय हो गया है और हमारी सैलरी भी नहीं बढ़ी है मैंने सुधीर से कहा कि फिर भी तुम सोच लो। सुधीर ने कहा ठीक है अमन मैं इस बारे में जरूर सोचूंगा लेकिन थोड़े समय बाद ही सुधीर ने जॉब से रिजाइन कर दिया और वह कुछ समय तक घर पर ही रहा उसके बाद सुधीर की एक अच्छी कंपनी में जॉब लग गई जहां उसे अच्छी तनख्वाह मिलने लगी।

सुधीर मुझे काफी समय बाद मिला तो मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने सुधीर को कहा कि चलो यह तो बहुत ही अच्छा हुआ कि हम दोनों एक दूसरे से काफी समय बाद ही सही लेकिन मिले तो। मुझे सुधीर से मिलकर काफी अच्छा लग रहा था और सुधीर काफी ज्यादा खुश नजर आ रहा था  सुधीर की जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा था और उसने मुझे बताया कि मैं सगाई करने वाला हूँ, मैंने सुधीर को कहा कि चलो यह तो बड़ी खुशी की बात है। सुधीर के परिवार वालों ने उसके लिए लड़की देख ली थी और वह जल्दी सगाई करने वाला था मैंने सुधीर को कहा चलो यह तो बहुत ही अच्छा है कि तुम अब सगाई करने वाले हो। जब सुधीर ने सगाई की तो उसने मुझे भी बुलाया था और मैं सुधीर की सगाई में गया हुआ था। मुझे काफी अच्छा लगा जब सुधीर की सगाई के दौरान उसने मुझे अपने माता-पिता से मिलवाया था।

जब मैं सुधीर के पापा मम्मी से मिला तो मुझे बहुत अच्छा लगा और उसके बाद सुधीर के घर पर मेरा अक्सर आना-जाना लगा रहता था। कुछ ही समय बाद सुधीर की शादी भी हो गई और सुधीर अपनी शादी के बाद बहुत ही ज्यादा खुश था। मैंने एक दिन सुधीर को फोन किया और उससे कहा कि सुधीर मैं भी सोच रहा हूं कि मैं अब ऑफ़िस से रिजाइन दे दूं क्योंकि मेरी तनख्वाह भी नहीं बढ़ी है और मैं काफी ज्यादा परेशान हो गया हूं मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। सुधीर ने मुझे कहा कि तुम मेरे ऑफिस में ज्वाइन क्यो नहीं कर लेते मैंने सुधीर को कहा अगर ऐसा हो जाएगा तो यह मेरे लिए अच्छा होगा। मैंने सुधीर के ऑफिस में ही ज्वाइन कर लिया था मेरी सैलरी भी अब ज्यादा थी और मैं काफी ज्यादा खुश भी था। मैं ज्यादातर अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में बाहर ही रहता था और जब मैं एक बार जयपुर गया हुआ था तो जयपुर में मैं जिस होटल में रुका था उसी होटल के बिल्कुल सामने एक घर था वहां पर मुझे एक लड़की दिखी। जब मैंने उसे देखा तो मैं उसे देखता ही रहा उसने भी मेरी तरफ देखा और उसके अगले दिन वह लड़की मुझे मिली और मैंने उससे बात की। जब मैने उससे बात की तो मुझे उसका नाम पता चला उसका नाम गरिमा है, गरिमा से बात करके मुझे अच्छा लगा और मैंने तो कभी कल्पना भी नहीं की थी कि गरिमा से मेरी बात हो जाएगी लेकिन अब गरिमा से मेरी बात होने लगी थी।

हम दोनों एक दूसरे से बात कर रहे थे तो हम दोनों को ही अच्छा लग रहा था। कुछ दिन बाद मैं जयपुर से वापस दिल्ली लौट आया था लेकिन मेरे दिल में गरिमा की यादें बसी हुई थी और मैं सोच रहा था कि गरिमा से अगर मैं मिलता तो कितना अच्छा होता लेकिन मैं उससे मिल नहीं पा रहा था। मेरी गरिमा से मुलाकात नहीं हो पाई थी। मैंने सोचा मैं गरिमा से बात करू। मैने उसे फोन किया और गरिमा से फोन पर बात की। वह अब मेरे बिना रह नहीं पा रही थी। मैंने गरिमा से कहा कि क्यों ना हम लोग अब शादी कर ले तो गरिमा ने मुझे कहा कि हां अमन मैं तुम्हारे साथ शादी करने के लिए तैयार हूं। गरिमा मेरे साथ शादी करने के लिए तैयार थी मैंने गरिमा को समझाया और उसे कहा कि लेकिन तुम्हें थोड़ा रुकना पड़ेगा गरिमा ने कहा कि हां मैं रुकने के लिए तैयार हूं। उसके बाद मैंने भी पूरा फैसला कर लिया था कि मैं गरिमा से शादी करूंगा मैंने गरिमा के परिवार वालों से बात की तो उन्होंने गरिमा से मुझे मिलने ही नहीं दिया और वह लोग मुझसे गरिमा की शादी करवाने के लिए भी तैयार नहीं थे लेकिन मैं चाहता था कि मैं गरिमा से शादी करूं। मैं किसी भी सूरत में गरिमा से शादी करना चाहता था परंतु यह सब संभव होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा था इसलिए हम दोनों ने कोर्ट मैरिज करने के बारे में सोचा। गरिमा भी घर से बहाना बनाकर कोर्ट में आ गई और हम दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली उसके बाद मैं और गरिमा जब उसके घर गए तो गरिमा के परिवार वाले इस रिश्ते को स्वीकार नहीं कर रहे थे।

उन्होंने गरिमा को कहा कि हमारा तुमसे कोई भी संबंध नहीं है इस बात से गरिमा बहुत ज्यादा दुखी थी और फिर मैं गरिमा को अपने घर ले आया। गरिमा को मैं अपने घर ले आया था और पापा मम्मी का प्यार गरिमा को मिल रहा था जिससे की गरिमा भी खुश थी और समय के साथ-साथ गरिमा और मेरे बीच का प्यार भी बढ़ता चला गया। कुछ समय बाद गरिमा के परिवार वालों ने भी हम दोनों के रिलेशन को स्वीकार कर लिया था और अब हमारी जिंदगी में सब कुछ ठीक हो गया था मैं बहुत ज्यादा खुश था की गरिमा और मेरे जीवन में अब खुशियां लौट आई। हम दोनों एक दूसरे के साथ हमेशा खुश रहते और एक दूसरे को हम अच्छे से समझते थे। गरिमा मेरा हमेशा ही ध्यान रखती वह कभी भी मुझे किसी चीज को लेकर कोई कमी महसूस नहीं होने देती थी। गरिमा ने मेरे परिवार का भी बहुत अच्छे से ध्यान रखा। जब मुझे गरिमा की जरूरत होती तो गरिमा हमेशा मेरे लिए तैयार होती। एक दिन मौसम कुछ ज्यादा ही सुहाना था। मैं उस दिन कुछ ज्यादा ही मूड में था मुझे लग रहा था मुझे गरिमा के साथ सेक्स करना चाहिए और मैंने उस दिन गरिमा के साथ सेक्स करने का मन बना लिया। गरिमा भी काफी ज्यादा खुश थी उस दिन हम दोनों ने जब एक दूसरे के साथ सेक्स करने के बारे में सोचा तो मैंने गरिमा को अपनी बाहों में ले लिया। वह मेरी बाहों में आ चुकी थी अब मैं उसके बदन को सहला रहा था। वह बहुत ज्यादा खुश थी मैंने जब गरिमा के स्तनों को दबाना शुरू किया तो गरिमा को मजा आने लगा और वह पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी। वह मुझे कहने लगी मेरी गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ रही है। मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लगता मैंने गरिमा के  सारे कपड़े उतार दिए थे। गरिमा का नंगा बदन मेरी आंखों के सामने था। गरिमा ने मेरे लंड को हिलाना शुरू किया। जब गरिमा मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर उसे चूस रही थी तो मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था। गरिमा को भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत ज्यादा आ रहा था।

मेरी गर्मी लगातार बढ़ती जा रही थी। मैं अब अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पाया मैंने गरिमा से कहा मैं तुम्हारी चूत के अंदर वह अपने लंड को डालना चाहता हूं। मैंने गरिमा की चूत को अपनी उंगली से सहलाना शुरु किया। उसकी चूत को मैं तब तक सहलाता रहा जब तक वह पूरी तरीके से गर्म नहीं हो गई। अब गरिमा को बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था और मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था ना तो गरिमा रह पा रही थी। मैंने गरिमा की चूत में अपने लंड को अंदर डालना शुरू किया। जब मेरा लंड गरिमा की चूत के अंदर गया तो वह बहुत जोर से चिल्ला कर बोली मेरी चूत मे दर्द हो रहा है। मैंने गरिमा को कहा मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा है अब मैं गरिमा को लगातार तेज गति से धक्के मार रहा था और गरिमा की गर्मी को मिटाए जा रहा था। मेरे अंदर की गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी और गरिमा के अंदर की भी गर्मी अब बहुत ज्यादा हो चुकी थी। मैंने गरिमा की चूत के अंदर अपने माल को गिराकर गरिमा की इच्छा को पूरा कर दिया।

गरिमा बहुत ही ज्यादा खुश थी जब मैंने उसकी योनि के अंदर अपने माल को गिराया और गरिमा की चूत की खुजली को मैंने मिटा दिया था। अब गरिमा की चूत से निकलता हुआ पानी भी बहुत ज्यादा हो चुका था। मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आया जब मैंने गरिमा के साथ सेक्स किया लेकिन गरिमा चाहती थी कि हम दोनों दोबारा से एक दूसरे के साथ सेक्स का मजा ले। मैंने दोबारा से गरिमा की चूत के अंदर अपने लंड को डालकर गरिमा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू कर दिया। गरिमा जोर से सिसकारियां ले रही थी वह मुझे अपनी मादक आवाज से बहुत ही ज्यादा प्रभावित कर रही थी जिससे कि मुझे उसे चोदने में मजा आ रहा था। वह मेरा साथ बड़े अच्छे से दे रही थी लेकिन अब मुझे लगने लगा था मैं ज्यादा देर तक गरिमा को चोद नहीं पाऊंगा। 5 मिनट की चुदाई के बाद मेरा लंड छिलकर पूरी तरीके से बेहाल हो चुका था। मैंने गरिमा से कहा मैं तुम्हारी चूत के अंदर ही अपने माल को गिराना चाहता हूं। मैंने अपने माल को गरिमा की चूत के अंदर ही गिरा दिया। मेरा माल गरिमा की चूत के अंदर गिर चुका था मैं बहुत ही ज्यादा खुश था जिस प्रकार से मैने गरिमा के साथ सेक्स किया। गरिमा मेरा बहुत ध्यान रखती जब भी मुझे गरिमा की जरूरत होती तो वह हमेशा मेरा साथ देने के लिए तैयार रहती और मेरे साथ सेक्स का खूब मजा लिया करती।

 


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