चुदाई का इक्का मेरा लंड और मैं चूत का गुलाम

Chudai ka ikka mera lund aur mai chut ka gulam:

दोस्तों आप लोग को क्या एक बात पता है ??? नहीं पता देखो मैं आपको बताता हूँ की चूत और गांड में छेद होता है | देखा कितनी नयी बात बताई न मैंने आप लोगों को | जानता हूँ बहुत ही बुरा चुटकुला था क्या करू मैं आदत से मजबूर हूँ न | चलिए इसी बकवास के साथ मैं अन्नू मिस्त्री आपको एक मजेदार कहानी सुनाता हूँ | इस कहानी मैं वो सब कुछ है जैसा की आप लोग चाहते है इस कहानी में है “चुदाई….चुदाई….और सिर्फ चुदाई” | यही तो चीज़ है जिसे सब पसंद करते हैं | मैंने ऐसा कहीं सुना है जब शराफत को नंगा किया जाता होई तो सबसे ज्यादा लुफ्त शरीफ लोग ही उठाते हैं | तो शरीफ भोसड़ी वालों सुनलो ये कहानी | मैंने तो सोचके रखा है की आज मैं न इन नकाबपोशों को उधेड़ के रख दूंगा क्यूंकि ये साले नंगा नाच करते हैं और दिखाते हैं की हम शरीफ हैं | हाँ तो दोस्तों मेरे नाम से तो आपको पता चल ही गया होगा कि मैं एक छोटा सा आदमी हूँ और लोगो के घरों की मरम्मत करता हूँ | मैंने सोहा की जो मेरे साथ हुआ वो अपनी ज़ुबानी आपको बता ही दूँ | तो दोस्तों मैं कई जगहों पर काम करता हूँ और मुझे कई रहीस घरों में भी काम करने का मौका मिल चुका है और मैंने कई गलत चीज़े वहां पर होते हुए भी देखी हैं | अक्सर जो दीखता है वैसा होता नहीं है और जैसा होता वो आसानी से दिखाई भी नाह देता पर मुझे तो लोगों के घरों के अन्दर की असलियत अच्छे से पता है | मैंने एक घर में काम किया था जो की उस शहर का बहुत नामचीन इंसान था पर जैसे ही एक दिन मैंने काम करते हुए देखा की दो लोग उनके पैर पड़ रहे हैं और अपनी जान की भीख मांग रहे है | में समझ गया डाल में कुछ काला फिर पता चला साला उसी के कर्मचारी थे और घोटाला किया था | फिर सेठ ने बोला मैं इतने लोगो को धोखा देके यहाँ तक पहुंचा हूँ और तुमलोगों ने मुझसे ही गद्दारी की | फिर समझ आया साला बड़े लोग गलत काम करके ही बनते है पर मेरा क्या मैंने अपना काम किया और निकल गया पर आखिरकार सच तो पता चला |

ऐसे ही मुझे एक और घर का काम करने मिला वह पर एक मस्त भाभी रहती थी और उसका पति | पति काम पे जाता और पत्नी मुझे उसकी चूत का काम करवाती | हाए क्या चूत थी उसकी मस्त टाइट और मैंने उसको इस हद तक छोड़ा था कि बेचारी चल तक नहीं पति थी जब तक मैंने वह काम किया था | उसकी गांड कि सील भी नहीं खुली थी तब टक पर मैंने उसे ऐसा चोदा था कि उसकी गांड का छेद बड़ा हो गया था | मैंने जब आखिरी दिन उनसे पैसे लिए तो वो बोली अब तो मेरे पति का लंड मेरी चूत में आसानी से चला जाता है और निकल आता है | तब मैंने उनसे कहा कि मैडम आप आज एक आखरी बार मेरे साथ करलो न मुझे बहुत मन हो रहा है | तो उसने भी कहा जल्दी आजा अन्दर नहीं तो बिट्टू स्कूल से आ जाएगा | मैंने कहा कौन बिट्टू तो वो बोली मेरा बेटा | मैंने अच्छा फिर जल्दी चलो | मैंने एक घंटे टक उसको चोदा था पर ऐसा पेला था कि उसकी चूत से दस बार पानी निकला था और आखरी वाला सफ़ेद माल मैं पी गया था | मैंने फिर से उसको गरम किया और फिर एक घंटे उसको चोदा और उसके बेटे के सामने पेला था | उसका बेटा भी अपनी माँ कि मस्त चुदाई देख रहा था और उसकी छोटी सी नुन्नु भी मैंने उसकी माँ कि चूत में डलवाई थी | उसने भी छोटा सा लंड डाल के मैडम की चूत में मूत दिया था | मैडम उसके बाद मुझे कभी नहीं मिली और मैं भी नही गया क्यूंकि उनकी चूत तो मैं फाड़ ही चुका था पर चाटना छठा था पर मने सोचा चलो जाने दो | उसके बाद मैं आगे बढ़ गया और कभी पीछे मुडके नहीं देखा |

उसके बाद मैं भी मिस्त्री से ठेकेदार बन गया और बड़े बड़े काम लेने लगा | मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था कि मैं इतना ऊँचा जाऊँगा पर मेहनत करने से तो कुछ भी होता है | फिर मुझे लगने लगा कि अब बड़े खेल खेलूँगा पर फिर याद आया कि बड़े लोग तो गलत काम करके ही बनते है और मुझे वो करना नहीं था | फिर मेरा काम फसा एक छोटे शहर में जहा एक बहुत ही धनि आदमी रहता था पर उसके बच्चे नहीं थे | हुआ वही कि वह कि भाभी उतनी मस्त नहीं थी पर उसके दूध और गांड देख के मेरा लंड खड़ा हो जाता था | एक बार वो मुझे देख रही थी और मेरा लंड खड़ा ही था पर उसने कुछ नहीं कहा बस ए मुस्कराहट थी चेहरे पर | सेठ को जाना पड़ा बाहर और मेरा कम चालू हो गया अन्दर | पांच दिन के काम में मुझे इतना आनंद आया कि क्या बताऊ | भाभी ने मुझे लेटाया और अपनी गांड को मेरे मुह पे रगड़ने लगी तो मैंने कहा नंगी हो जाओ | वो भी झट से नंगी हो गयी और अपनी गांड मेरे मुह पे रगड़ने लगी | मैंने भी उसकी गांड को चाटा और उसके बाद उसकी चूत के दाने को ऊँगली से सहलाने लगा | उसने मेरे हांथों पर अपना गरमा गरम माल गिरा दिया और मैं उसे भी पी गया | मुझे बहुत सेक्स चढ़ा हुआ था और मुझे मौका छोडने कि आदत नहीं है | फिर मैंने कहा लो ममेरा लंड पियो | उसने पहले मेरे सुपाडे को चूसा और फिर धीरे धीरे पूरे लंड को मुह में भर लिया | उसके बाद तो उसने रुकने का नाम नहीं लिया जब टक मैंने अपना माल उसे पिला नहीं दिया | वो भी मेरा माल लपक के पी गयी |

उसके बाद उसने मुझे कहा सुनो बस अब नाह रहा जाता अब फाड़ दो मेरी चूत | उसकी चूत के रंग को देख के मेरा लंड और टाइट गया | मैंने भी पेल दिया अपना बड़ा लंड उसकी चूत में | आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊईईईईइमा ऊऊऊऊऊ ऊफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊईईईईइमा ऊऊऊऊऊ ऊफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ क्या मस्त चुदाई करते हो तुम | आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊईईईईइमा ऊऊऊऊऊ ऊफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ चोदो और चोदो मुझे | मेरी वीरान चूत में अपना बीज डालके उपजाऊ बना दो | एसा बोलते बोलते वो तीन बार झड़ी थी पर इसकी चूत इतनी टाइट थी कि मेरा लंड छिल गया था | फिर मैंने अपनी मर्दानगी दिखाई और जब तक वहां मेरा काम चला मैंने उसे कपडे नहीं पहनने दिए | वो नंगी होकर खाना बनती थी और में उसके पीछे से जकड के उसकी गांड मारता रहता था | यहाँ टक कि जब वो टट्टी करती थी तब मैं उसकी चूत मारता रहता था | उसके बाद जब कम ख़तम होने को आया तो उसने मुझसे कहा सुनो मुझे एक बार वैसे ही चोद लो न तो मैं अब मन केसे कर सकता था | उसका नंबर मैंने ले लिया था क्यूंकि इसकी चूत का स्वाद बड़ा मस्त था | फिर उसके बाद तीन महीने बाद मुझे इसका फोन आया कि माँ बनने वाली हूँ | मैंने कहा चलो अनजाने में ही सही एक भला काम कर दिया किसी कि सूनी गोद भर दी |

फिर उसके बाद मेरा मौका पड़ा एक बहुत ही कातिल हसीना से वो मुसलमान थी बुर्के में रहती थी और उसका पति भी बाहर रहता था | वो हमेशा बुरका पहने रहती थी पर उसका बदन ऊपर से ही दिखता था | उसका पता और सुडोल बदन और गोर गोर हाथ ये देख कर मैं समझ गया था कि ये बिलकुल हूर है | उसे चोदना बड़ा मुश्किल था क्यूंकि एक तो वो सिर्फ मतलब कि बात करती थी पर हर औरत कि एक कमज़ोर नस होती है जिसे दबाना पड़ता है | मैंने भी उसकी वो नस दबा दी | उसके बच्चे उसकी जान थे मैंने कहा आपका बच्चा आपको दुखी देखता हूँ तो बुरा लगता है | उसने कहा क्या करू इसके अब्बू आते नहीं और मुझे सुख मिलता नहीं तो मैं क्या खुश रहूँ | तो मैंने कहा आज के बाद आप दुखी नहीं रहोगी | उसने कहा कैसे मैंने कहा आपको सुख भी मिलेगा और आपके बच्चे भी खुश रहेंगे |

मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसका बुरका हटाया तो देखा क्या माल था अन्दर | मैंने उसे गले लगाया और चूम लिया फिर उसके बाद मैंने उसके पेट पर हाथ फेरना शुरू किया | उसने मन किया पर थोडा सा जोर देने के बाद वो भी अब खुल गयी थी | मैं उसे नंगा करते उसे हत्र तरह से चाट रहा था और पागल हुए जा रही थी | फिर उसकी चूत कि ज्वाला को मैंने अपने लंड का ठंडा एहसास दिलाया और वो गांड उठा उठा के के मुझसे चुदवा रही थी | थोड़ी देर बाद मै झड गया और वो भी साथ में ही झड गयी | उस दिन के बाद हमने बहुत बार चुदाई की | तो दोस्तों देखा आपने बड़े और नामचीन लोगों के दिखावे एक औरत को खुश नहीं रख पाते साले |  आप लोगों को मेरी ये कहानी कैसी लगी कमेंट में जरुर बताइयेगा |

 


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