चलो डाकिया बाबू बिस्तर मे गुल खिलाएं

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Chalo dakiya babu bistar me gul khilaayein मेरे पति सुरजीत घर लौटे तो कहने लगे देविका तुम गुड्डू को ऐसे क्या निहार रही हो मैंने अपने पति से कहा क्यों गुड्डू मेरा बेटा है तो क्या मैं उसे देख नहीं सकती। सुरजीत कहने लगे मैंने यह तो नहीं कहा कि तुम उसे देख नहीं सकती लेकिन तुम उसे इतना निहार रही हो जैसे तुम्हारा बेटा दुनिया में सबसे बढ़कर हो। मैंने सुरजीत से कहा तुम गुड्डू से प्यार नहीं करते तो क्या मैं भी उससे प्यार नहीं करूंगी। मेरी बात से सुरजीत ने मुझे जवाब देते हुए कहा अच्छा तो मैं गुड्डू से प्यार नहीं करता मैं गुड्डू को बहुत ज्यादा प्यार करता हूं यदि तुम्हें लगता ना हो तो यह अलग बात है।

गुड्डू जैसे हम दोनों की बात सुन रहा था नन्ना गुड्डू सिर्फ दो वर्ष का ही तो है हम दोनों को झगड़ते हुए देख गुड्डू रोने लगा। गुड्डू को हम बहुत लॉर्ड प्यारों से पाल रहे थे क्योंकि गुड्डू हमारी शादी के 6 वर्ष बाद हुआ था और जब से गुड्डू हुआ है तब से मेरे जीवन में खुशियां लौट आई हैं। मैं और सुरजीत अब भी आपस में झगड़ते रहते हैं और हम दोनों जब भी झगड़ते हैं तब मेरी सासू मां हमेशा कहती है कि तुम दोनों इतना क्यों झगड़ते रहते हो। सुरजीत को मैं पहली बार उस वक्त मिली थी जब मैं अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी सुरजीत का रंग सांवला सा था और बाल घुंघराले लेकिन सुरजीत मुझे बहुत अच्छा लगे। सुजीत काफी शर्माते थे लेकिन फिर भी उन्होंने मेरे साथ बात कर ही ली ना जाने उस वक्त उनके पास इतनी हिम्मत कहां से आ गई जो वह मेरे साथ बात कर पाए। उन्होंने जब मुझसे पहली बार बात की तो मैंने उन्हें कहा आप काफी शर्माते है लेकिन मैं बिल्कुल उनके अलग थी मेरा मेरा नेचर बिल्कुल ही उनके उल्टा था मैं बहुत ही चुलबुल किस्म की लड़की थी। सुरजीत मुझसे बात करते वक्त शर्माते थे लेकिन धीरे-धीरे वह भी अब मुझसे खुलकर बातें करने लगे थे। उस वक्त हम दोनों चिट्ठी देकर एक दूसरे से अपने प्यार का इजहार किया करते थे। मेरे पास फोन भी नहीं था और ना ही सुरजीत के पास उस वक्त फोन था आज तो मोबाइल ने सब को अपनी जद में जकड़ कर रख लिया है लेकिन उस वक्त सिर्फ चिट्ठियों का दौर था। हम दोनों एक दूसरे से चिट्ठियों के माध्यम से ही बात किया करते थे मैं और सुजीत एक दूसरे के इतने नजदीक आ गए कि हम दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया।

शादी के फैसले से सब लोग बहुत खुश थे मेरे परिवार वाले सुरजीत से जब पहली बार मिले तो उन्हें बहुत ही अच्छा लगा और उन्होंने रिश्ते के लिए हामी भर दी। सुरजीत और मेरे माता-पिता ने हमारे रिश्ते के लिए हामी भर चुके थे और वह बहुत ही खुश थे मैं भी बहुत खुश थी। हम दोनों की शादी हो चुकी थी और अब हम दोनों एक दूसरे से शादी के बंधन में बन चुके थे हम दोनों एक दूसरे को पहले से ही जानते थे इसलिए हम दोनों को एक साथ रहने में कोई भी परेशानी नहीं आई। हम दोनों को एक दूसरे की बुरी आदतों का अच्छे से मालूम था इसलिए हम दोनों एक दूसरे के साथ बड़े ही अच्छे से रहते और बड़े ही खुशनुमा माहौल में हम दोनों एक दूसरे के साथ जिंदगी व्यतीत कर रहे थे मैं भी बहुत ज्यादा खुश थी। हमारी शादी के बाद समय बीता चला गया और सुजीत का प्रमोशन भी हो चुका था सुरजीत का प्रमोशन होने के बाद अब महंगाई भी धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी। एक दिन हमारे घर पर हमारे दूर के रिश्तेदार आए हुए थे अभी कुछ दिनों पहले की ही बात है वह जब घर पर आए तो मै उनके लिए चाय लेकर गई। मैंने जैसे ही उन्हें चाय दी तो वह कहने लगे कि तुम्हे मालूम है हमारे पड़ोस में रहने वाली सुनीता एक लड़के के साथ भाग गई। मेरे पति और मेरी सासू मां पास में ही बैठे हुए थे मैं भी सोफे में बैठ गई और वह कहने लगी कि सुनीता तो बहुत ही अच्छी थी सब लोग उसकी बड़ी तारीफ किया करते थे। मैंने उनसे कहा मैंने भी तो सुनीता को दिखा था वह आप के बिल्कुल सामने वाले घर पर रहती थी वह कहने लगी हां बेटा वह हमारे घर के बिल्कुल सामने ही रहती थी। जब से वह घर से भागी है तब से उसके माता-पिता बहुत ज्यादा परेशान हो चुके हैं उनकी परेशानी की वजह सिर्फ उनकी बेटी है।

वह उनकी एकलौती लड़की थी लेकिन जिस प्रकार से वह घर से भागी है उससे वह बहुत ही ज्यादा परेशान हो गए है जब मैं उनसे मिली थी तो वह कह रहे थे कि हमारी परेशानी की वजह सिर्फ हमारी बेटी है। मेरी सासू मां कहने लगी आजकल का दौर तो बिल्कुल ही बदल चुका है पहले जैसा बिल्कुल भी नहीं है पहले सब लोग अपनी मर्यादाओं में रहते थे और घर से भागने के बारे में तो कोई सोच ही नहीं पता था लेकिन आजकल के बच्चों को ना जाने क्या हो गया है। सुरजीत बोल उठे मां जमाना बदल रहा है और अब बच्चों को घर पर रख पाना बड़ा मुश्किल है समय के साथ साथ उनकी भी सोच बदलने लगी है और आजकल के माहौल का असर बच्चों पर ज्यादा होने लगा है। मेरे पति की बात से सब लोग सहमत हैं और वह कहने लगे कि हां बिल्कुल ठीक कह रहे हैं। हम लोग आपस में बैठकर बात कर ही रहे थे कि तभी गुड्डू सो कर उठ चुका था मैंने अपनी सासू मां से कहा माजी मैं देख आती हूं। मैं कमरे में चली गई और मैंने देखा तो वह जोर जोर से रो रहा था मैंने गुड्डू को गोद में उठाया  तो वह शांत हो गया वह जैसे मेरा ही इंतजार कर रहा था और मैं उसे अपने साथ बाहर ले आई। सब लोग आपस में बैठकर बात कर रहे थे कुछ देर बाद मेरे पति कहने लगे कि चलो देविका बाहर से ठहल आते हैं। हम लोग गुड्डू को अपने साथ बाहर ले गए मैंने गुड्डू को अपनी गोद में ही पकड़ा हुआ था और उसे हम लोग घर से बाहर ले गए तभी सुरजीत ने मुझे बताया कि वह कुछ दिनों के लिए अपने काम के लिए मुरादाबाद जा रहे हैं। मैंने सुरजीत से कहा आप वहां से कब लौटेंगे वह कहने लगे मुझे वहां से आने में थोड़ा समय लग जाएगा मैंने सुरजीत से कहा चलिए कोई बात नहीं।

कुछ देर बाद हम लोग वापस घर लौट आए जब हम लोग घर लौटे तो मैंने सुरजीत को गुड्डू की जिम्मेदारी दी और उसके बाद मैं रसोई में खाना बनाने के लिए चली गई। कुछ देर बाद मैं खाना बना कर लौटी और हम सब लोगों ने रात का भोजन साथ में किया सुरजीत जल्दी ही सो चुके थे क्योंकि उन्हें ऑफिस जल्दी जाना था। मैं भी सोने की कोशिश कर रही थी लेकिन गुड्डू को नींद ही नहीं आ रही थी इसलिए मैं उसे सुलाने की कोशिश करती लेकिन वह जैसे सोना ही नहीं चाहता था। कुछ ही देर बाद मैंने गुड्डू को सुला दिया और उसके बाद मैं भी गहरी नींद में सो गई। मै सुबह जल्दी उठ गई और हर रोज की तरह वही दिनचर्या चल रही थी मैं जब उठी तो मैंने सुरजीत का नाश्ता बनाया। सरजीत अपने काम पर चले गए वह अपने काम पर जा चुके थे मैं उस दिन घर पर अकेली थी क्योंकि मेरी सांसू मां कहीं बाहर गई हुई थी तभी हमारे घर की डोर बेल बजी। मैंने देखा तो घर के बाहर एक डाकिया खड़ा था डाकिये को देखकर ना जाने मेरे दिल में ऐसा क्या हुआ कि मैं उसे अंदर अपने बेडरूम मे ले जाने के लिए तैयार हो गई। वह भी मेरे पीछे पीछे चला आया जब वह आया तो मैंने उसे कहा तुम कुछ देर के लिए ही सही लेकिन मेरी इच्छा तो पूरी कर दो। डाकिया भी मेरे गदराए और भारे हुए शरीर को देखकर मना ना कर सका। वह मुझे कहने लगा ठीक है मैं आपकी इच्छा पूरी कर देता हूं डाकिया ने अपने बैग को मेज पर रख दिया और उसके बाद वह मेरे ऊपर लेट गया।

उसने मुझे अपनी बाहों में पूरी तरीके से जकड़ लिया था और जिस प्रकार से उसने मेरी स्तनो का रसपान करना शुरू किया तो मुझे बड़ा मजा आने लगा। वह मेरे स्तनों का रसपान काफी देर तक करता रहा हम दोनों के अंदर कुछ ज्यादा ही उत्तेजना जागने लगी थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। जिस प्रकार से डाकिया मेरे स्तनों को दबा रहा था उससे मैं बड़ी बेचैन होने लगी थी। जैसे ही उसने मेरे कपडो को उतारकर मेरे अंतर्वस्त्रों को उतार दिया उससे मैं और भी ज्यादा उत्तेजित हो गई। उसने मेरी योनि को चाटना शुरू किया तो मेरे अंदर से गर्मी बाहर की तरफ को निकालने लगी वह जिस प्रकार से मेरी योनि को चाट रहा था उसे मैंने कहा तुम अपने मोटे लिंग को मेरी योनि में प्रवेश करवा दो। यह कहते ही उसने अपने मोटे लंड को मेरी योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया जैसे ही उसका मोटा और लंबा लंड मेरी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो मैं चिल्लाने लगी।

मेरे मुंह से चीख निकल पडी लेकिन उसका लंड मेरी योनि के अंदर प्रवेश हो चुका था मुझे उसके लंड को अपनी योनि में लेने में बड़ा मजा आता और जिस गति से वह मुझे चोद रहा था उससे मेरे माथे पर पसीना भी आने लगा था और मुझे सुख की अनुभूति भी हो रही थी। मैं जिस प्रकार से उसका साथ दे रही थी उससे वह भी बहुत खुश था वह मुझे कहने लगा मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। मैंने उसे कहा तुम्हें तो आज मेरे रूप में एक माल मिल गई होगा? वह कहने लगा यह तो आपका बड़प्पन है आप जैसी माल ने मुझे अपने बदन की गर्मी को महसूस करने का मौका दिया। मैंने उसे कहा मेरा आज मन बहुत ज्यादा हो रहा था मेरे पति भी आज घर पर नहीं थे तुम्हें देख कर ना जाने मुझे ऐसा क्या हुआ तुम्हारे साथ सेक्स करने की इच्छा मेरे मन में जाग उठी। मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करने में बड़ा मजा आ रहा है यह कहते ही उसने अपने तरल वीर्य को मेरी योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया। जैसे ही उसका वीर्य मेरी चूत मे गिरा तो मुझे बड़ा आनंद आया उसके बाद वह भी चला गया। उसकी डाक का इंतजार आज तक कर रही हूं उसकी याद आज तक मेरे मन में है।


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