चाची की चूत सागर

Chachi ki chut sagar:

antarvasna, sex stories in hindi मैं एक गरीब परिवार का से हूं मेरे घर की स्थिति पहले से ही ठीक नहीं थी इसलिए मेरे माता पिता ने मुझे मेरे चाचा के साथ भेज दिया था। मेरे चाचा मुंबई में गाड़ी चलाते हैं और मेरी चाची लोगों के घर में काम करती है मैं उनके साथ बचपन से ही रह रहा हूं, मैं टायर पंचर का काम करता हूं। जब मुझे मेरी चाची के बारे में पता चला तो मै गुस्से में उन्हें चोदने के लिए आतुर होने लगा। उनकी चूत मे बहुत ज्यादा खुजली रहती है वह जिनके घर मे काम करने जाते हैं वह उन्हें बड़े अच्छे से चोदते हैं। एक दिन मुझे मेरी चाची के बारे पता चला, उन्होंने मुझे कहा तुम्हें मेरी जिंदगी से क्या लेना देना है तुम अपने काम से मतलब रखो। मैंने उन्हें कहा मुझे तो आपसे बहुत कुछ लेना देना है लेकिन आप इस तरीके से मेरे चाचा के साथ नहीं कर सकती। वह कहने लगी तुम्हारे चाचा सिर्फ मुझे दो वक्त की रोटी दे सकते हैं मेरी और भी इच्छाए है उन्हें तो मेरी आशिकी पूरा करते हैं यदि उनसे मैं अपनी चूत नहीं मारवाऊगी तो वह लोग क्या मुझ पर पैसे उडाएगे। उस दिन से मैंने भी उनके साथ संभोग करना शुरू कर दिया, मैं उन्हें उसके बदले पैसे दिया करता हूं। वह मुझसे भी पैसे लेती हैं लेकिन उन्हे चोदने मे मुझे बड़ा मजा आता है मेरे दिमाग में हमेशा ही चाची का यौवन रहता है, मैं काम करता हूं तो भी मेरे दिमाग में चाची का ख्याल आ जाता है। एक दिन मैं अपने दोस्त के साथ बैठा हुआ था उसे मैं अपनी सारी बचपन से लेकर अभी तक की बात बता रहा था, मैं किस प्रकार से अपने गांव से मुंबई आया, उससे मेरी दोस्ती कुछ दिनों पहले ही हुई है उसका नाम रोहन है।

मैं और रोहन साथ में बैठे हुए थे और रोहन मुझसे पूछने लगा तुम मुझे कुछ तो अपने बारे में बताओ? अब तो तुम मेरे बहुत अच्छे दोस्त बन चुके हो, मैंने उसे कहा मैं तुम्हें अपने बारे में क्या बताऊं बचपन से ही मैंने बहुत पीड़ा और कष्ट झेला है, मैं एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं जो कि बिहार और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर पड़ता है वहां पर मेरा जीवन बड़ा ही कठिनाइयों में बिता, मैंने सातवीं के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी और मुझे मेरे चाचा अपने साथ मुंबई ले आए। मेरे चाचा के बारे में तो तुम्हें पता ही है कि वह ड्राइवरी का काम करते हैं और मेरी चाची घरों में साफ सफाई का काम करती हैं, वह मुझे कहने लगा लेकिन तुमने अपने जीवन में बड़ा संघर्ष किया है, मुझे यह बात उस दिन पता चली जब मैंने तुम्हारे साथ काम करने वाले लड़के से तुम्हारे बारे में पूछा, तुम बड़े ही मेहनती हो, मैंने उसे कहा मेहनती तो मैं बहुत हूं लेकिन मुझे उसका उतना फल नहीं मिल पाया जितना मुझे मिलना चाहिए था, वह मुझे कहने लगा देखो लल्लन तुम्हारी मेहनत का फल तुम्हें अवश्य मिलेगा, तुम लगातार ऐसी ही जी जान से काम करते रहो। रोहन बड़ा ही अच्छा लड़का है वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से है लेकिन वह अक्सर मेरी दुकान पर बैठने आ जाता है, उसकी और मेरी मुलाकात उस वक्त हुई जब वह हमारी दुकान पर पंचर लगवाने आया हुआ था उसकी बाइक का टायर पंचर हो गया था और वह कहने लगा कि भैया मेरे बाइक में जल्दी से पंचर लगा दो क्योंकि मुझे कहीं जाना है, मैंने उसे कहा देखो भाई अभी तो बहुत भीड़ हैं, मुझे और लोगों की गाड़ी के भी पंचर लगाने हैं सब लोग मुझसे यही कह रहे हैं कि उन्हें भी कहीं जल्दी जाना है, वह मुझे कहने लगा नहीं मुझे वाकई में कहीं जाना है और तुम मेरी मदद कर दो उसके बदले चाहे तुम जितने भी पैसे ले लो, मैंने उसे कहा कि पैसे तो मैं उतने ही लूंगा जितने मेरे जायज होते हैं। उस दिन उसका चेहरा देखते हुए मुझे लगा कि मुझे उसकी मदद करनी चाहिए इसलिए मैंने उसकी गाड़ी का पंचर जल्दी से लगा दिया और वह वहां से बड़ी जल्दी में निकला लेकिन जब वह शाम को लौटा तो वह मुझे कहने लगा मैं तुम्हारा शुक्रिया कहना चाहता हूं क्योंकि तुम्हारी वजह से ही आज मैं जल्दी पहुंच पाया, मेरी बाइक का टायर पंचर हो गया था और मुझे नहीं लग रहा था कि मैं जल्दी पहुंच पाऊंगा, रोहन एक कंपनी में नौकरी करता है और उसने उस दिन अपने ऑफिस की तरफ से ही कहीं मीटिंग में जाना था, उसके बाद से तो उससे मेरी दोस्ती बढ़ने लगी और अब हम अच्छे दोस्त बन चुके है, कभी कभार वह मेरे लिए अपने ऑफिस जाते वक्त कुछ खाने के लिए ले आता है।

रोहन ने मुझसे यह भी कहा था कि यदि तुम कहीं नौकरी करना चाहते हो तो मैं तुम्हारे लिए बात कर देता हूं, पर मैंने उसे कहा अब मुझसे नौकरी कहां हो पाएगी और वैसे भी मैं पढ़ा लिखा हूं नहीं इसलिए मुझे नहीं लगता कि मुझे कोई ज्यादा तनख्वाह दे पाएगा इसलिए मैं अपने ही काम से खुश हूं इसी से मैं अपनी रोजी-रोटी चलाता हूं और मैं बहुत ही खुश हूं। एक दिन मेरी दुकान में एक सज्जन आये उनकी बाइक का टायर पंचर था मैंने उन्हें कहा साहब आप मेरी दुकान के अंदर बैठ जाइए बाहर काफी धूप है, वह दुकान में लगी कुर्सी पर बैठ गया और मैं जब उनका बाइक का टायर खोल रहा था तो उस वक्त वह मुझसे बात करने लगे, उनकी और मेरी बात इतनी ज्यादा अच्छे से होने लगी कि मुझे ऐसा लगने लगा कि जैसे ना जाने वह मुझे कितने वर्षों से जानते हैं, मैंने जब उनकी बाइक के टायर को पूरी तरीके से खोल लिया तो मैंने देखा उसमें तो दो-तीन पंचर थे, मैंने उन्हें कहा साहब यदि आपकी गाड़ी में दो-तीन पंचर मैं लगाता हूं तो वह आपको महंगा पड़ जाएगा, उससे अच्छा है कि आप नई ट्यूब ही डलवा लीजिए, वह मुझे कहने लगे कि मैंने कुछ दिनों पहले ही तो अपनी बाइक में नई ट्यूब लगाई थी, मैंने उन्हें कहा कि कभी कबार ऐसा हो जाता है यदि आप कहें तो मैं इसमें ही पंचर लगा देता हूं, वह कहने लगे नहीं तुम नई ट्यूब डाल दो।  मैंने उनसे पूछा कौन सी वाली डालनी है? कंपनी वाली या फिर लोकल वाली ट्यूब डालनी है? वह कहने लगे कंपनी की ही डाल दो। मैंने उन्हें कहा साहब आप यह ट्यूब डलवा लीजिए आप बिल्कुल निश्चिंत रहेंगे और यदि कोई शिकायत भी आती है तो आप मेरे पास आ जाएगा, वह कहने लगे ठीक है मैं तुम्हारे कहने पर यूट्यूब डलवा रहा हूं परंतु यदि कोई तकलीफ होगी तो मैं तुम्हें इस बारे में कहूंगा।

उनकी और मेरी बीच मे बात अब इतनी ज्यादा होने लगी कि हम दोनों जुगाडो के बारे में बात करने लगे। उन्होंने मुझे कहा मेरे घर पर एक काम वाली आती है वह एक टाइट जुगाड़ है मैं तुम्हें उसकी तस्वीर दिखाता हूं यदि तुम्हें भी उसे चोदना हो तो तुम मुझे बता देना। जब उन्होंने मुझे वह तस्वीर दिखाई तो वह मेरी चाची की थी। मेरा तो दिमाग एकदम से सन्ना हो गया, मैं जब शाम को घर गया तो मैंने अपनी चाची से कहा आप बाहर अपनी चूत की प्रदर्शनी लगाकर बैठी है लोग आपकी फोटो को इधर उधर दिखा रहे हैं। वह कहने लगी तुम किस प्रकार की बात कर रहे हो। मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और कहा आप अपन चाहने वालो को अपनी चूत का पानी पिला रही हैं हम मुठ मार कर काम चला रहे हैं। वह कहने लगी मैं तुमसे पैसे लूंगी मैंने उनके मुंह पर पैसे मारे और उनकी साड़ी को पूरा खोल दिया। जब मैंने उनके पेटीकोट को खोला तो मैंने देखा उनकी चूत बड़ी ही टाइट है उनकी चूत पर हलके बाल है। मुझसे भी ज्यादा देर तक रहा नहीं गया मैंने अपने लंड को सीधा ही उनकी चूत पर फिट कर दिया और जैसे ही मेरा लंड अंदर बाहर होने लगा तो उनकी चीख निकल जाती। मुझे उनको चोदने में बड़ा मजा आ रहा था वह अपने दोनों पैरों को ऊपर कर लेती। मैं उनकी चूत के अंदर तक लंड को डालता मेरे अंडकोष में दर्द होने लगे था। मैंने जब उनके ब्लाउज को खोलते हुए उनके स्तनों को चूसना शुरू किया तो उनकी उत्तेजना में 2 गुना की बढ़ोतरी हो गई। जब मैं उन्हें धक्के मारता तो वह मुझे कहती तुम थोड़ा धीरे मुझे चोदो तुम्हारा लंड मेरे पेट के अंदर तक जा रहा है। मैंने उन्हें कहा आपने तो ना जाने कितने लोगों के लंड अपनी चूत में लिया है मेरा एक छोटा सा लंड नहीं ले सकती। वह कहने लगी लेकिन तुम्हारे जितना 10 इंच का मोटा लंड किसी का भी नहीं था। मैंने चाची से कहा आज के बाद मैं आपकी चूत मारकर अपनी इच्छा पूरी करूंगा। वह मुझे कहने लगी तुम मुझे पैसे दे देना और उसके बाद तुम चाहे मेरी चूत और गांड मार लेना। जब हम दोनों इस प्रकार की बात कर रहे थे तो मेरी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ने लगी थी, कुछ क्षणो बाद मेरा वीर्य उनकी योनि में गिर गया।


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