चाची के गांड के घोड़े खोल कर रख दिया

Chachi ke gaand ke ghode khol kar rakh diya:

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मेरा नाम सूरज है और मैं बिजनौर का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 23 वर्ष है। मैं बिजनौर में ही मिस्त्री का काम करता हूं और उससे जो मुझे पैसे मिलते हैं उससे ही मैं अपने घर का खर्चा चला रहा हूं क्योंकि मेरे पिताजी की तबीयत बिल्कुल भी ठीक नहीं रहती और मुझे ही घर का सारा खर्चा देखना पड़ता है। मेरी मां भी बीमार रहती है और उन दोनों की दवाइयों में ही मेरा सारा खर्चा निकल जाता है लेकिन मैं बहुत ही ज्यादा परेशान हो गया हूं और मेरे साथ किसी का भी सपोर्ट नहीं है और कहीं ना कहीं मुझे ऐसा लगता है कि यदि कोई और मेरे साथ होता तो मेरा कितना सपोर्ट होता। मुझे पैसे से भी कहीं से कोई मदद नहीं मिल पा रही थी और मेरे मां-बाप की दवाईयो में ही सारे पैसे लग जाते। मैं जितना भी काम करता हूं सब उनके ही दवाई के खर्चे में निकल जाया करता था। मैं कई बार सोचता था कि मुझे शादी कर लेनी चाहिए लेकिन मुझे डर भी लगता था यदि मैं शादी कर लूंगा तो उसके बाद मैं खर्चा कैसे चला पाउंगा क्योंकि मेरे मां बाप के ऊपर ही सारा खर्चा हो जाया करता था और यदि मैं किसी और से शादी करता तो मुझे उसका भी खर्चा उठाना पड़ता, इसलिए मैंने शादी का विचार भी अपने दिमाग से निकाल दिया और मैं अब अपने काम में ही लगा हुआ था, उसी दौरान मैं किसी के घर में काम कर रहा था तो मेरा पैर फिसल गया और मेरा पैर फैक्चर हो गया।

जब मेरा पैर फैक्चर हुआ तो मैं घर पर ही था। मुझे बहुत ही ज्यादा टेंशन होने लगी कि मुझे क्या करना चाहिए क्योंकि मेरे पास जितने भी जमा पैसे थे वह सब खर्च हो गए और मेरे चाचा कुछ दिनों के लिए हमारे घर पर आ गए। वह दिल्ली में रहते हैं और वहीं पर वह काम करते हैं। जब चाचा घर पर आए तो वह कहने लगे कि तुम्हारी स्थिति तो बहुत ही बुरी हो चुकी है। वहीं मुझे हॉस्पिटल लेकर जा रहे थे क्योंकि और कोई भी नहीं था जो मुझे हॉस्पिटल लेकर जाए। मेरे पिताजी भी बहुत ज्यादा बीमार है तो इसलिए मेरे चाचा ही मेरी मरहम पट्टी करवा रहे थे। चाचा ने मेरी बहुत मदद की और मुझे कहा कि यदि तुम्हे किसी भी प्रकार से कोई परेशानी हो तो तुम मुझे बता देना। मुझे अपने चाचा से बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी क्योंकि उन्होंने हमारी कभी भी मदत नहीं की और हमेशा ही वह हमसे बचने की कोशिश किया करते थे लेकिन इस बार उन्होंने मेरी बहुत मदद की, जिससे कि मुझे लगा कि वह वाकई में हमारा साथ दे रहे हैं क्योंकि उन्होंने उससे पहले कभी भी मेरा साथ नहीं दिया।

उन्हें यह पता था कि मेरे पिताजी की तबीयत खराब रहती है लेकिन उन्होंने फिर भी कभी मुझे आर्थिक रूप से मदद नहीं किया। धीरे धीरे मेरी तबीयत ठीक होने लगी थी लेकिन मेरे पास कुछ भी काम नहीं था और मुझे अपने चाचा के पैसे भी लौटाने थे। एक दिन उन्होंने मुझे कहा कि तुम मेरे साथ दिल्ली चलो और वहीं पर कोई काम देख लो, यदि तुम वहीं पर कोई नौकरी कर लोगे तो तुम्हें हर महीने के कुछ पैसे मिल जाए करेंगे। मैंने भी सोचा कि मुझे अब कहीं पर नौकरी कर ही लेनी चाहिए, ऐसे में कब तक अपनी जिंदगी बर्बाद करता रहूंगा और मैंने अब अपना पूरा मन बना लिया कि मैं अब नौकरी ही करूंगा। मैं अपने चाचा के साथ दिल्ली चला गया और मैंने अपने पिता को कुछ पैसे दे दिए, ताकि उन लोगों की दवाई का खर्चा चलता रहे और मैं बीच-बीच में घर भी आ जाता था। मेरे चाचा ने ही मुझे नौकरी लगवा दी और अब मैं नौकरी करने लगा। मेरे चाचा के साथ मेरी चाची भी रहती हैं जो कि मुझसे बहुत ही ज्यादा गुस्सा रहती हैं क्योंकि मेरे चाचा मुझे अपने साथ दिल्ली ले आए। अब मैं ठीक-ठाक पैसे कमाने लगा और मैं अपने पैसे घर भेज दिया करता था लेकिन मेरी चाची का व्यवहार मेरे साथ बिल्कुल भी अच्छा नहीं था और मुझे लगता था कि कहीं ना कहीं वह मुझसे बहुत ही नाराज रहती है इसलिए मैंने अपने लिए अलग से रहने का बंदोबस्त कर लिया लेकिन वह मुझे कहने लगी कि तुम अलग क्यों रह रहे हो। हम लोग भी तो यहां पर रहते हैं, तुम हमारे साथ ही रह सकते हो।

मैं समझ गया था कि यह सिर्फ दिखावे के लिए ही बोल रही हैं और इससे ज्यादा यह बिल्कुल भी नहीं चाहती कि मैं उनके साथ ज्यादा दिन तक रहूं। अब मैं अलग रहने लगा और मैं कभी कबार अपने चाचा से मिलने आ जाया करता था। मुझे जब भी छुट्टी मिलती तो मैं उनके पास जरूर आ जाता क्योंकि उन्होंने मुझे नौकरी लगाई थी और उन्ही की बदौलत मैं दिल्ली में काम कर पा रहा था और अपने पिताजी को भी मैं घर पैसे भेज देता। मुझे काफी दिन दिल्ली में रहते हुए हो गए थे और मैंने सोचा कि मैं इस बार घर चला जाता हूं, जब मैं घर गया तो मेरे पिताजी मुझे कहने लगे कि तुम बहुत ही ज्यादा मेहनत कर रहे हो। मैंने उन्हें कहा कि यदि मैं काम नहीं करूंगा तो आप की दवाइयों का खर्चा कैसे चल पाएगा। मैंने उन्हें कहा कि अब आप मेरे साथ ही दिल्ली चलिए। मैं उन दोनों को अपने साथ ही दिल्ली ले आया और वह दोनों मेरे साथ ही रहने लगे। अब मैं उनका ध्यान भी रख पा रहा था और मुझे अब बिल्कुल भी चिंता नहीं थी कि मुझे घर पर पैसे भेजने पढ़ रहे थे। वह लोग भी मेरे साथ रहकर बहुत ही खुश थे। मैं भी बीच-बीच में अपने चाचा से मिलने चले जाया करता था और जब मैं उनसे मिलता तो वह भी मुझसे मिलकर बहुत खुश होते थे और वह भी कभी मेरे पिताजी से मिलने के लिए मेरे पास आ जाते थे।

एक बार मैं अपने चाचा से मिलने उनके घर पर चला गया जब मैं उनके घर गया तो वह घर पर नहीं थे। मैंने चाची से पूछा कि चाचा कहां गए हुए हैं वह कहने लगी कि वह कहीं काम से गए हुए हैं कुछ ही देर में वह घर आ जाएंगे तुम बैठ कर इंतजार कर लो। मैं बैठ कर इंतजार करने लगा और उसी दौरान वह जैसे ही काम कर रही थी तो उनके बड़े बड़े स्तन मेरी आंखों के सामने आ गए। मेरा पूरा लंड खड़ा हो गया मुझसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हुआ मैं भी जैसे ही खड़ा उठा तो उनकी गांड पर अपने हाथ को सहलाने लगा। वह भी पूरे मूड में आ गई उन्होंने जैसे ही मेरे लंड को अपने हाथ में लिया तो मेरा पूरा खड़ा हो चुका था और वह मेरे लंड को हिलाए जा रही थी। उन्होंने हिलाते हिलाते उसे अपने मुंह के अंदर ले लिया और मेरे लंड को इतने अच्छे से उन्होंने चूसा की मेरा पानी भी निकलने लगा मैं पूरे मूड में आ गया। मैंने भी उनके सारे कपड़े उतार दिए जब मैंने उनकी बडी बडी चूतड़ों को देखा तो मुझे बिल्कुल भी रहा नहीं गया और मैंने उनकी चूतड़ों को चाटना शुरू कर दिया। मै बहुत ही अच्छे से उनकी चूतड़ों को चाट रहा था कुछ देर मैंने उनके स्तनों का भी रसपान किया और उनके स्तनों पर भी मैंने अपने दांत के निशान मार दिए। अब वह पूरे मूड में थी मैंने जैसे ही उनकी गांड के अंदर अपने लंड को डाला तो वह चिल्ला उठी और कहने लगी तुम्हारा लंड तो बहुत ही ज्यादा मोटा है। वह भी अपनी गांड को आगे पिछे करने लगी और मैंने उन्हें बड़ी तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिया। मैं उन्हें इतनी तेज झटके मार रहा था कि उनका पूरा शरीर हिलने लगता और वह पूरे मजे में आ जाती। वह भी अपनी गांड को मुझसे टकराने लगी और वह मेरा पूरा साथ देने लगी। अब उनकी चूतडे पूरी लाल होने लगी और मैं भी उन्हें बड़ी तेजी से चोद रहा था। उन्हें बहुत ही अच्छा लग रहा था जब मैं इस प्रकार से उन्हें चोद रहा था अब वह पूरे मूड में आ गई और बड़ी तेजी से वह अपने चूतडो को मुझसे मिलाए जा रही थी। लेकिन मुझसे उनकी बड़ी-बड़ी गांड की गर्मी नहीं झेली जा रही थी और मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था जिससे कि मेरे लंड से खून आने लगा। मुझसे बिल्कुल रहा नहीं गया और कुछ ही देर बाद मेरा वीर्य जैसे ही उनकी गांड के अंदर गिरा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। वह भी बहुत खुश थी उन्होंने अपने कपड़े पहने और मैंने भी अपने कपड़े पहन लिए कुछ ही देर बाद मेरे चाचा भी आ गए और उसके बाद से तो मैंने चाची की गांड के घोड़े कई बार खोल दिए हैं।


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