चाचा की कमसिन लड़की को बड़े अच्छे से रगड़ा

Chacha ki kamsin ladki ko bade achchhe se ragda:

antarvasna , kamukta

मेरा नाम संजय है मैं कोलकाता का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 27 वर्ष है और मैं पहले कोलकाता में ही जॉब करता था। मेरे माता-पिता भी मेरे साथ ही रहते थे। मैंने एक बार एक कंपनी में अप्लाई किया था, उस कंपनी में मेरा सलेक्शन हो गया लेकिन वह लोग मुझे दिल्ली भेजना चाहते थे। मैंने इस बारे में अपने माता-पिता से बात की तो वह कहने लगे यदि तुम्हें अच्छा मौका मिल रहा है तो तुम दिल्ली चले जाओ। मैंने उन्हें कहा कि दिल्ली में वह लोग मुझे एक अच्छी तनख्वाह पर रख रहे हैं। मेरे पिताजी कहने लगे फिर तो तुम्हें जरूर दिल्ली चले जाना चाहिए। मेरे पिताजी अब रिटायर हो चुके हैं और वह घर पर ही रहते हैं, वह कहने लगे तुम्हें हमारी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि अब मैं घर पर ही रहता हूं इसलिए तुम अपना काम अच्छे से करो। अब मैं दिल्ली आ गया।

जब मैं दिल्ली गया तो मैं कुछ दिनों के लिए होटल में ही रुका हुआ था लेकिन जब मेरे चाचा को इसके बारे में पता चला तो वह बहुत गुस्सा हो गये और मुझे उन्होंने फोन कर दिया। मुझे उन्होंने उसमें बहुत डांटा और कहा कि लगता है तुम हम लोगों को अपना नहीं मानते इसीलिए तुम हमारे घर पर नहीं आए। मैंने मामा से कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है मैं वाकई में बहुत बिजी हो गया था इसलिए मुझे समय नहीं मिल पाया। मैंने उनसे कहा कि मैं आज ऑफिस से अपना काम करके आपके पास ही आ जाऊंगा। मैं उस दिन ऑफिस चला गया और जब मैं ऑफिस से लौटा तो उसके बाद मैं अपने चाचा के पास चला गया। जब मैं अपने चाचा के पास गया तो वह मुझ पर बहुत गुस्सा हो गए और कहने लगे कि तुम लोग हमें अपना बिल्कुल भी नहीं मानते इसी वजह से तुम हमारे घर एक बार भी नहीं आए। मैंने चाचा को समझाया और कहा कि मैं आपके पास आने वाला था लेकिन ऑफिस में कुछ जरूरी काम था इस वजह से मुझे होटल में रुकना पड़ा। मेरे चाचा ने कहा कि तुम होटल से अपना सारा सामान घर पर ले आओ और घर पर ही तुम रहोगे। जब चाचा ने यह बात कही तो मैंने कहा ठीक है मैं कल अपना सामान ले आऊंगा और आपके साथ ही रहूंगा। मेरे चाचा ने मेरे पिताजी को भी फोन किया और उन्हें भी कहा कि आपने हमें एक बार भी नहीं बताया कि संजय दिल्ली आ रहा है।

पिताजी ने कहा कि यह सब जल्दी बाजी में हो गया इसलिए मैं तुम्हें बता नहीं  पाया। उस दिन मेरी चाची और उनकी लड़की कहीं गई हुई थी। उनकी लड़की का नाम रुचि है और वह कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। जब मेरी चाची आई तो वह कहने लगी कि तुम कब आए, मेरे चाचा ने मेरी चाची को सारी बात बताई और कहा कि संजय अब दिल्ली में ही नौकरी करता है लेकिन यह किसी होटल में रुका हुआ था और हमारे पास नहीं आया। मेरी चाची भी यह बात सुनकर बहुत गुस्सा हुई और कहने लगी कि तुम हमें एक बार भी बता नहीं सकते थे। मैंने चाची से कुछ नहीं कहा। रुचि भी मुझसे पूछने लगी कि क्या आप की नौकरी अब दिल्ली में ही लग चुकी है, मैंने रुचि को बताया हां मैं दिल्ली में हूं और यहीं काम कर रहा हूं। मेरा एक अच्छी कंपनी में सिलेक्शन हो गया है इसलिए मैंने यहां पर आने की सोची, यह सब बहुत ही जल्दी में हुआ। अगले दिन जब मैं होटल में गया तो वहां से मैंने अपना सामान ले लिया और अपने चाचा के घर पर रख दिया। अब मैं अपने चाचा के घर से ही अपने ऑफिस जाया करता था। मुझे काफी दिन हो चुके थे अपने चाचा के घर से ऑफिस जाते हुए, तो मैंने अपने चाचा से कहा कि आप मेरे लिए कहीं पर कोई घर देख लीजिए ताकि मैं वही पर रह सकूं। मेरे चाचा कहने लगे कि तुम्हे हमारे साथ रहने में कोई आपत्ति है तो तुम अपने लिए घर देख लो। मैंने अपने चाचा से कहा कि मुझे आपके साथ रहने में भला क्या आपत्ति होगी, मुझे तो अच्छा लगता है कि मैं आप लोगों के साथ रहता हूं। मेरे चाचा बिल्कुल भी नहीं चाहते थे कि मैं कहीं पर घर लेकर रहूं इसलिए मुझे उनके साथ रहना पड़ रहा था लेकिन मैं कंफर्टेबल नहीं था क्योंकि वह लोग अपने तरीके से रहते हैं। मैं नहीं चाहता था कि मेरी वजह से उन्हें तकलीफ हो इसी वजह से मैंने अपने चाचा से यह बात कही थी लेकिन वह बिल्कुल भी तैयार नहीं थे। जिस दिन मेरी छुट्टी होती है उस दिन हम लोग सब साथ में ही बैठे रहते और बैठ कर बात करते।

मेरे चाचा पुराने दिन याद करते हुए कहते कि पहले हम लोग साथ में ही रहते थे और कितना अच्छा लगता था जब हम लोग सब साथ में ही थे। मैंने चाचा से कहा वह समय तो बहुत अच्छा था परंतु अब आप दिल्ली में ही बस चुके हैं इसलिए आपका कोलकाता भी कम ही आना होता है। मेरे चाचा कोलकाता बहुत कम आते है क्योंकि उन्होंने जब से दिल्ली में काम शुरू किया है, उसके बाद से उनका कोलकाता आना बहुत कम हो गया। मेरे चाचा हमेशा ही मुझसे पूछा करते की तुम्हारा ऑफिस कैसा चल रहा है, मैं उन्हें कहता कि मेरा ऑफिस तो बहुत ही अच्छा चल रहा है। एक दिन रुचि अपने कुछ दोस्तों को घर पर लाई हुई थी और उसके दोस्तों से मिलकर मैं भी बहुत खुश हुआ। वह उसके कॉलेज के दोस्त हैं और सब लोग कुछ देर घर पर रुके, उसके बाद वह अपने घर वापस चले गए। मेरा हमेशा की तरह ही वही रूटीन चल रहा था। सुबह मैं घर से ऑफिस निकलता और शाम को मैं ऑफिस से घर लौटता था। मुझे अपने चाचा के पास रहते हुए काफी वक्त हो चुका था। एक दिन मैं जब अपने ऑफिस से लौटा तो उस दिन मेरे चाचा चाची घर पर नहीं थे। मैंने जब रुचि से पूछा कि वह लोग कहां है तो वह कहने लगी कि पापा मम्मी पास के ही किसी अंकल के घर गए हुए हैं उनकी तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए वह थोड़ा देर से लौटेंगे। मैंने रुचि से कहा कि क्या तुम उनके साथ नहीं गई वह कहने लगी नहीं मैं उनके साथ नहीं गई। जब मैं कपड़े चेंज कर रहा था तो मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि शायद वह मुझे देख रही है।

मैं जब बाहर गया तो मैं अपने अंडरवीयर मे था मैंने बाहर देखा तो रुचि खड़ी थी मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और अंदर बिस्तर मे ले आया मैंने उसे अपने नीचे लेटा दिया और उसे किस करने लगा। वह भी पूरे मूड में आ चुकी थी मुझे भी अच्छा लग रहा था मैंने अपने लंड को निकाला और रुचि के मुंह में डाल दिया। वह बड़े अच्छे से सकिंग कर रही थी मैंने उसे कहा कि यह तुम कहां से सीखी वह कहने लगी कि मैंने ब्लू फिल्म मे देखा है वही से मैं सीखी हूं। वह मेरे लंड को अपने गले तक ले रही थी और मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। उसके बाद मैंने उसे नंगा कर दिया और उसके बदन को मैंने देखा तो मुझे बड़ा मजा आया। मैंने उसकी योनि को काफी देर तक चाटा उसके बाद मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपना लंड डाला तो वह चिल्लाने लगी और उसकी चूत से खून बाहर की तरफ निकलने लगा और मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा था। मैं भी उसे बड़ी तेजी से झटके दिए जा रहा था और उसे बहुत दर्द महसूस होने लगा। वह मुझे कहने लगी कि मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है उसकी योनि बहुत टाइट थी। मुझसे उसकी योनि की गर्मी ज्यादा समय तक बर्दाश्त नहीं हुई और मेरा वीर्य उसकी योनि मे गिर गया मैं फिर भी उसके ऊपर ही लेटा रहा। मैंने उसकी योनि से लंड को बाहर निकाला और उसके बाद उसने अपनी योनि को साफ किया। उसकी योनि से खून निकल रहा था और मैंने भी उसे घोड़ी बना दिया और घोडी बनाते ही जब मैंने उसे धक्के मारने शुरू किए तो मेरा लंड छिल चुका था। मुझे बड़ा मजा आ रहा था जब मैं उसे झटके देने पर लगा हुआ था वह भी मुझसे अपनी चूतडो को मिला रही थी। वह बहुत अच्छे से अपनी चूतडो को मुझसे मिला रही थी मेरा लंड उसकी योनि के अंदर तक जा रहा था लेकिन मैं ज्यादा समय तक उसकी चूत की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और जैसे ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और हम दोनों ही बैठे हुए थे। मैं उसके बदन को निहार रहा था और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था उसके बाद तो मैंने उसे कई बार चोदा।


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